Class 12 History Notes Chapter 4 (Chapter 4) – Bharatiya Itihas ke Kuch Vishay-II Book

Bharatiya Itihas ke Kuch Vishay-II
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम आपकी कक्षा 12 इतिहास की पुस्तक 'भारतीय इतिहास के कुछ विषय - भाग II' के अध्याय 4, 'विचारक, विश्वास और इमारतें: सांस्कृतिक विकास (लगभग 600 ई. पू. से 600 ई. तक)' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय प्राचीन भारत में धार्मिक और सांस्कृतिक परिवर्तनों को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, विशेषकर उन परीक्षाओं के लिए जहाँ गहन जानकारी की आवश्यकता होती है। आइए, इस अध्याय के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा करें।


अध्याय 4: विचारक, विश्वास और इमारतें: सांस्कृतिक विकास (लगभग 600 ई. पू. से 600 ई. तक)

यह अध्याय लगभग 600 ई. पू. से 600 ई. तक की अवधि में भारतीय उपमहाद्वीप में हुए धार्मिक और सांस्कृतिक विकास पर केंद्रित है। यह वह काल था जब वैदिक परंपराओं में परिवर्तन आए, नए दार्शनिक विचार उभरे और जैन धर्म तथा बौद्ध धर्म जैसी नई परंपराओं का उदय हुआ।

1. साँची का स्तूप: एक संक्षिप्त परिचय

  • अवस्थिति: भोपाल (मध्य प्रदेश) के पास।
  • खोज: 19वीं सदी में यूरोपीय लोगों द्वारा।
  • संरक्षण: भोपाल की बेगमों (शाहजहाँ बेगम और सुल्तान जहाँ बेगम) ने इसके संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने इसके रखरखाव के लिए अनुदान दिए और जॉन मार्शल जैसे पुरातत्वविदों को इसके अध्ययन के लिए प्रोत्साहित किया।
  • महत्व: यह बौद्ध धर्म के सबसे महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों में से एक है, जो बौद्ध कला और स्थापत्य का उत्कृष्ट उदाहरण है।

2. यज्ञों की परंपराएँ और नए प्रश्न

  • वैदिक परंपराएँ (लगभग 1500-1000 ई. पू.):
    • ऋग्वेद में अग्नि, इंद्र, सोम जैसे देवताओं की स्तुतियाँ।
    • यज्ञों का निष्पादन सामूहिक और व्यक्तिगत स्तर पर होता था।
    • राजसूय और अश्वमेध यज्ञ राजाओं द्वारा अपनी शक्ति और प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए किए जाते थे।
  • उत्तर वैदिक काल (लगभग 1000-600 ई. पू.):
    • यज्ञों की जटिलता बढ़ी, पुरोहितों का महत्व बढ़ा।
    • उपनिषदों का उदय (लगभग 6वीं शताब्दी ई. पू. से)।
    • नए प्रश्न: जीवन का अर्थ, मृत्यु के बाद जीवन, पुनर्जन्म, कर्म का सिद्धांत, आत्मा और ब्रह्म की अवधारणाएँ। इन प्रश्नों पर विभिन्न दार्शनिकों और संप्रदायों के बीच बहसें होती थीं।
    • चर्चाएँ और वाद-विवाद: कुटागारशालाओं (नुकीली छत वाली झोपड़ियाँ) और उपवनों में विद्वानों के बीच गहन चर्चाएँ होती थीं। महावीर और बुद्ध भी इनमें भाग लेते थे।

3. जैन धर्म

  • संस्थापक: ऋषभदेव (पहले तीर्थंकर)।
  • वर्धमान महावीर (24वें तीर्थंकर):
    • जीवन: लगभग 599 ई. पू. में वैशाली के निकट कुंडग्राम में जन्म। क्षत्रिय राजकुमार।
    • ज्ञान प्राप्ति: 30 वर्ष की आयु में गृह त्याग कर तपस्या की और 12 वर्षों की कठिन तपस्या के बाद 'केवलिन' (सर्वज्ञ) बने।
    • शिक्षाएँ:
      • संसार दुखमय है: कर्म के फल के कारण आत्मा जन्म-मरण के चक्र में फँसी है।
      • कर्म का सिद्धांत: अच्छे या बुरे कर्मों का फल अवश्य मिलता है।
      • मोक्ष: कर्म के बंधन से मुक्ति ही मोक्ष है।
      • त्रिरत्न: सम्यक दर्शन (सही विश्वास), सम्यक ज्ञान (सही ज्ञान), सम्यक आचरण (सही आचरण)।
      • पंच महाव्रत: अहिंसा (किसी जीव को न सताना), सत्य (झूठ न बोलना), अस्तेय (चोरी न करना), अपरिग्रह (धन संचय न करना), ब्रह्मचर्य (इंद्रियों पर नियंत्रण)।
      • अहिंसा पर बल: जैन धर्म का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत, जिसने कृषि और सैन्य कार्यों को हतोत्साहित किया।
      • अनेकांतवाद/स्याद्वाद: किसी वस्तु के अनेक पहलू होते हैं, और ज्ञान सापेक्ष होता है।
      • जाति व्यवस्था की निंदा: जैन धर्म ने जाति व्यवस्था को अस्वीकार किया।
      • भाषा: प्राकृत, संस्कृत और बाद में कन्नड़ भाषाओं में साहित्य।
  • जैन धर्म का विस्तार: मुख्य रूप से व्यापारियों द्वारा अपनाया गया।
  • विभाजन: दिगंबर (वस्त्रहीन रहने वाले) और श्वेतांबर (श्वेत वस्त्र धारण करने वाले)।

4. बौद्ध धर्म

  • संस्थापक: सिद्धार्थ गौतम (बुद्ध)।
  • जीवन:
    • जन्म: लगभग 563 ई. पू. में लुंबिनी (नेपाल) में शाक्य गण के प्रमुख के पुत्र के रूप में।
    • गृह त्याग: 29 वर्ष की आयु में सांसारिक दुखों (वृद्ध, बीमार, मृत व्यक्ति और संन्यासी को देखकर) से विचलित होकर गृह त्याग दिया।
    • ज्ञान प्राप्ति: बोधगया में एक पीपल वृक्ष के नीचे 6 वर्षों की तपस्या के बाद 'बुद्ध' (ज्ञान प्राप्त) कहलाए।
    • पहला उपदेश: सारनाथ में दिया, जिसे 'धर्मचक्रप्रवर्तन' कहा गया।
    • निर्वाण: कुशीनगर में 80 वर्ष की आयु में।
  • शिक्षाएँ (चार आर्य सत्य):
    1. संसार दुखमय है।
    2. दुख का कारण तृष्णा (इच्छा) है।
    3. दुख का निरोध संभव है (तृष्णा का त्याग)।
    4. दुख निरोध का मार्ग अष्टांगिक मार्ग है।
  • अष्टांगिक मार्ग: सम्यक दृष्टि, सम्यक संकल्प, सम्यक वाणी, सम्यक कर्म, सम्यक आजीविका, सम्यक व्यायाम, सम्यक स्मृति, सम्यक समाधि।
  • कर्म का सिद्धांत: व्यक्ति अपने कर्मों से अपना भविष्य निर्धारित करता है।
  • निर्वाण: इच्छाओं के समाप्त होने से पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति।
  • अनात्मवाद: आत्मा की शाश्वतता में विश्वास नहीं।
  • अनीश्वरवाद: ईश्वर के अस्तित्व पर मौन।
  • संघ: भिक्षु और भिक्षुणियों का संगठन, जहाँ सभी समान थे।
    • नियम: विनय पिटक में संकलित।
    • महिलाओं का प्रवेश: बुद्ध के प्रिय शिष्य आनंद के कहने पर महिलाओं को संघ में प्रवेश की अनुमति मिली।
  • बौद्ध साहित्य:
    • त्रिपिटक:
      • विनय पिटक: संघ के नियम।
      • सुत्त पिटक: बुद्ध के उपदेश।
      • अभिधम्म पिटक: दार्शनिक व्याख्याएँ।
    • जातक कथाएँ: बुद्ध के पूर्व जन्मों की कहानियाँ।
  • बौद्ध धर्म का विस्तार:
    • राजाओं (अशोक, कनिष्क, हर्ष) का संरक्षण मिला।
    • मिशनरियों द्वारा प्रचार।
    • जनसामान्य के लिए सरल शिक्षाएँ।
  • बौद्ध धर्म का विभाजन:
    • हीनयान (थेरवाद): बुद्ध को एक मानव और मार्गदर्शक मानते थे, मूर्ति पूजा नहीं करते थे।
    • महायान: बुद्ध को देवता मानते थे, बोधिसत्वों की पूजा करते थे, मूर्ति पूजा करते थे।
    • वज्रयान: तांत्रिक अनुष्ठानों पर बल।

5. स्तूप, चैत्य और विहार

  • स्तूप:
    • अर्थ: संस्कृत में 'टीला'। बुद्ध या अन्य महत्वपूर्ण बौद्ध भिक्षुओं के अवशेषों (जैसे अस्थियाँ, राख) या उनके द्वारा उपयोग की गई वस्तुओं पर बनाए गए अर्धगोलाकार मिट्टी के टीले।
    • महत्व: बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद उनके अवशेषों को 8 भागों में बाँटकर उन पर स्तूप बनाए गए।
    • संरचना:
      • अंड: अर्धगोलाकार मिट्टी का टीला।
      • हर्मिका: अंड के ऊपर स्थित बालकनी जैसी संरचना, देवताओं का निवास।
      • यष्टि: हर्मिका से निकलने वाला डंडा।
      • छत्र: यष्टि पर लगा छाता, सम्मान का प्रतीक।
      • वेदिका: स्तूप के चारों ओर घेरा, पवित्र स्थल को बाहरी दुनिया से अलग करता है।
      • प्रदक्षिणा पथ: वेदिका के अंदर परिक्रमा का मार्ग।
      • तोरण द्वार: चारों दिशाओं में प्रवेश द्वार, जिन पर सुंदर नक्काशी होती थी।
    • उदाहरण: साँची, भरहुत, अमरावती।
    • अमरावती का स्तूप: 1796 में खोजा गया, बाद में इसकी अधिकांश मूर्तियाँ और संरचनाएँ हटा दी गईं या नष्ट हो गईं।
  • चैत्य: पूजा स्थल, जिसमें एक छोटा स्तूप भी हो सकता है।
  • विहार: भिक्षु और भिक्षुणियों के रहने के स्थान, मठ।

6. ब्राह्मणवादी परंपराएँ: वैष्णव और शैव धर्म का उदय

  • वैष्णव धर्म: विष्णु को प्रमुख देवता के रूप में पूजने वाले।
    • अवतारवाद: विष्णु के विभिन्न अवतारों (जैसे कृष्ण, राम) की अवधारणा, जो संसार को बुराई से बचाने के लिए अवतरित होते हैं।
    • लोकप्रियता: यह अवधारणा आम लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय हुई।
  • शैव धर्म: शिव को प्रमुख देवता के रूप में पूजने वाले।
    • शिव को लिंग के रूप में भी पूजा जाता था।
  • देवी पूजा: विभिन्न देवियों की पूजा, जो अक्सर मातृ देवी के रूप में पूजी जाती थीं।
  • मंदिरों का निर्माण:
    • प्रारंभिक मंदिर छोटे, चौकोर गर्भगृह वाले होते थे, जिसमें देवता की मूर्ति स्थापित होती थी।
    • बाद में शिखर (ऊँची संरचना) और मंडप (प्रवेश द्वार पर हॉल) जोड़े गए।
    • उदाहरण: देवगढ़ (उत्तर प्रदेश) का दशावतार मंदिर।

7. मूर्तिकला और प्रतीकवाद

  • बौद्ध कला:
    • प्रारंभ में बुद्ध को प्रतीकों (जैसे खाली सिंहासन, धर्मचक्र, स्तूप, बोधि वृक्ष) के माध्यम से दर्शाया जाता था।
    • बाद में (कुषाण काल) बुद्ध की मानव रूप में मूर्तियाँ बनने लगीं (गांधार और मथुरा कला)।
    • बोधिसत्वों (ज्ञान प्राप्त करने की राह पर चलने वाले) की मूर्तियाँ भी लोकप्रिय हुईं।
  • जैन कला: तीर्थंकरों की मूर्तियाँ।
  • हिंदू कला: विष्णु, शिव, देवियों और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियाँ।
    • अक्सर मूर्तियों में विभिन्न मुद्राओं, प्रतीकों और आयुधों के माध्यम से देवताओं की शक्ति और गुणों को दर्शाया जाता था।

8. सामाजिक संदर्भ और भक्ति परंपराएँ

  • इस काल में भक्ति परंपराओं का उदय हुआ, जहाँ भक्त व्यक्तिगत रूप से अपने आराध्य देवता के प्रति प्रेम और समर्पण व्यक्त करते थे।
  • यह परंपरा जाति, लिंग और सामाजिक स्थिति के बंधनों से मुक्त थी, जिससे यह आम लोगों में लोकप्रिय हुई।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

  1. साँची का स्तूप किस राज्य में स्थित है?
    a) उत्तर प्रदेश
    b) बिहार
    c) मध्य प्रदेश
    d) महाराष्ट्र

  2. जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर कौन थे?
    a) ऋषभदेव
    b) पार्श्वनाथ
    c) वर्धमान महावीर
    d) अजितनाथ

  3. बौद्ध धर्म के त्रिपिटक में निम्नलिखित में से कौन सा ग्रंथ शामिल नहीं है?
    a) विनय पिटक
    b) सुत्त पिटक
    c) अभिधम्म पिटक
    d) जातक पिटक

  4. बुद्ध ने अपना पहला उपदेश कहाँ दिया था?
    a) बोधगया
    b) लुंबिनी
    c) सारनाथ
    d) कुशीनगर

  5. स्तूप के चारों ओर परिक्रमा के लिए बने मार्ग को क्या कहा जाता है?
    a) हर्मिका
    b) वेदिका
    c) प्रदक्षिणा पथ
    d) तोरण द्वार

  6. अमरावती का स्तूप किस राज्य में स्थित था?
    a) कर्नाटक
    b) तमिलनाडु
    c) आंध्र प्रदेश
    d) केरल

  7. महायान बौद्ध धर्म के अनुयायी किसे देवता मानते थे?
    a) केवल बुद्ध को
    b) बुद्ध और बोधिसत्वों को
    c) केवल बोधिसत्वों को
    d) जैन तीर्थंकरों को

  8. जैन धर्म के पंच महाव्रतों में से कौन सा एक नहीं है?
    a) अहिंसा
    b) सत्य
    c) अस्तेय
    d) अपरिग्रह
    e) ईश्वर पूजा

  9. देवगढ़ का दशावतार मंदिर किस राज्य में स्थित है?
    a) मध्य प्रदेश
    b) उत्तर प्रदेश
    c) राजस्थान
    d) गुजरात

  10. किस शासक ने साँची के स्तूप के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई?
    a) अशोक
    b) कनिष्क
    c) शाहजहाँ बेगम
    d) हर्षवर्धन


उत्तरमाला:

  1. c) मध्य प्रदेश
  2. c) वर्धमान महावीर
  3. d) जातक पिटक
  4. c) सारनाथ
  5. c) प्रदक्षिणा पथ
  6. c) आंध्र प्रदेश
  7. b) बुद्ध और बोधिसत्वों को
  8. e) ईश्वर पूजा
  9. b) उत्तर प्रदेश
  10. c) शाहजहाँ बेगम

मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको इस अध्याय को गहराई से समझने और आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होंगे। किसी भी अन्य जानकारी या स्पष्टीकरण के लिए आप पूछ सकते हैं। शुभकामनाएँ!

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