Class 12 History Notes Chapter 6 (Chapter 6) – Bharatiya Itihas ke Kuch Vishay-III Book

Bharatiya Itihas ke Kuch Vishay-III
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम आपकी कक्षा 12 की इतिहास की पुस्तक 'भारतीय इतिहास के कुछ विषय-III' के अध्याय 6 "औपनिवेशिक शहर: नगरीकरण, नगर-योजना और स्थापत्य" का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें औपनिवेशिक काल के शहरी विकास, नगर-योजना और स्थापत्य कला के बारे में गहन जानकारी दी गई है।


अध्याय 6: औपनिवेशिक शहर: नगरीकरण, नगर-योजना और स्थापत्य

1. परिचय: औपनिवेशिक शहरों का उदय

  • पुराने शहरों का पतन: 18वीं शताब्दी में मुगल सत्ता के कमजोर पड़ने के साथ ही कई पुराने व्यापारिक और प्रशासनिक केंद्र जैसे मुर्शिदाबाद, ढाका, श्रीरंगपट्टनम, सूरत, मछलीपट्टनम और आगरा का महत्व घटने लगा। इन शहरों का पतन व्यापार के विस्थापन और स्थानीय शासकों की शक्ति में कमी के कारण हुआ।
  • नए शहरों का विकास: इसी दौरान, ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में अपने व्यापारिक और प्रशासनिक केंद्रों के रूप में नए शहरों का विकास किया। ये शहर मुख्य रूप से समुद्र तट पर स्थित थे और बंदरगाहों के रूप में विकसित हुए। इनमें मद्रास (चेन्नई), कलकत्ता (कोलकाता) और बंबई (मुंबई) प्रमुख थे।
  • उद्देश्य: इन शहरों का विकास ब्रिटिश व्यापार, प्रशासन और सैन्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किया गया था। ये औपनिवेशिक सत्ता के प्रतीक बन गए।

2. औपनिवेशिक अभिलेखों में शहर

  • ब्रिटिश स्रोतों का महत्व: औपनिवेशिक शहरों के इतिहास को समझने के लिए ब्रिटिश अभिलेख, मानचित्र, जनगणना रिपोर्ट, नगर-योजना रिपोर्ट, नगरपालिका रिपोर्ट और यात्रा वृत्तांत महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
  • जनगणना:
    • ब्रिटिश सरकार ने शहरों के सामाजिक और आर्थिक जीवन को समझने के लिए जनगणना का उपयोग किया।
    • 1872: पहली अखिल भारतीय जनगणना का प्रयास किया गया, लेकिन यह पूरी तरह सफल नहीं रही।
    • 1881: से प्रत्येक दस वर्ष पर नियमित रूप से जनगणना की जाने लगी।
    • जनगणना से जनसंख्या, जाति, धर्म, व्यवसाय और भाषा के आधार पर जानकारी मिलती थी, जो ब्रिटिश प्रशासकों को शहरों का प्रबंधन करने में मदद करती थी।

3. औपनिवेशिक शहर: मद्रास, कलकत्ता और बंबई

ये तीनों शहर औपनिवेशिक भारत के सबसे महत्वपूर्ण केंद्र थे, जिन्हें 'प्रेसिडेंसी शहर' कहा जाता था।

  • मद्रास (चेन्नई):

    • स्थापना: 1639 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने मद्रास में अपना व्यापारिक केंद्र स्थापित किया।
    • फोर्ट सेंट जॉर्ज: कंपनी ने यहाँ 'फोर्ट सेंट जॉर्ज' नामक किले का निर्माण किया, जो श्वेत निवासियों का केंद्र बन गया।
    • श्वेत और अश्वेत शहर: फोर्ट सेंट जॉर्ज के भीतर और आसपास यूरोपीय लोगों के लिए 'श्वेत शहर' विकसित हुआ, जबकि भारतीय व्यापारियों, कारीगरों और मजदूरों के लिए 'अश्वेत शहर' विकसित हुआ। यह विभाजन नस्लीय भेदभाव पर आधारित था।
    • विशेषता: मद्रास एक महत्वपूर्ण बंदरगाह और प्रशासनिक केंद्र था।
  • कलकत्ता (कोलकाता):

    • स्थापना: 1690 के दशक में ईस्ट इंडिया कंपनी ने हुगली नदी के किनारे सुतानाती, कलिकाता और गोविंदपुर नामक तीन गाँवों को मिलाकर कलकत्ता की नींव रखी।
    • फोर्ट विलियम: 1698 में कंपनी को इन गाँवों की ज़मींदारी मिली और उसने यहाँ 'फोर्ट विलियम' का निर्माण किया।
    • विकास: प्लासी के युद्ध (1757) के बाद कलकत्ता का तेजी से विकास हुआ।
    • राजधानी: 1773 में वारेन हेस्टिंग्स ने कलकत्ता को ब्रिटिश भारत की राजधानी बनाया। यह शहर 1911 तक राजधानी बना रहा।
    • विशेषता: कलकत्ता एक प्रमुख व्यापारिक, प्रशासनिक और सांस्कृतिक केंद्र बन गया। यहाँ कई भव्य इमारतें जैसे विक्टोरिया मेमोरियल और मार्बल पैलेस का निर्माण हुआ।
  • बंबई (मुंबई):

    • प्राप्ति: 1661 में पुर्तगालियों ने बंबई के सात द्वीपों को इंग्लैंड के राजा चार्ल्स द्वितीय को दहेज में दिया।
    • कंपनी को हस्तांतरण: 1668 में चार्ल्स द्वितीय ने इसे ईस्ट इंडिया कंपनी को 10 पाउंड प्रति वर्ष के किराए पर दे दिया।
    • विकास: बंबई एक प्रमुख बंदरगाह और व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ, खासकर 19वीं सदी में सूती वस्त्र उद्योग के केंद्र के रूप में।
    • विशेषता: बंबई में भी श्वेत और अश्वेत शहरों का विभाजन देखा गया। यह शहर अपनी गॉथिक और इंडो-सारासेनिक स्थापत्य शैली के लिए प्रसिद्ध है।

4. नगर-योजना (Town Planning)

औपनिवेशिक शहरों की योजनाबद्ध तरीके से की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश हितों की पूर्ति करना था।

  • प्रारंभिक चरण (18वीं सदी):

    • शुरुआती नगर-योजना सैन्य और व्यापारिक आवश्यकताओं पर केंद्रित थी। किलेबंदी प्रमुख थी।
    • कंपनी के अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य व्यापारिक गतिविधियों को सुरक्षित रखना था।
  • लॉर्ड वेलेजली और कलकत्ता (1803):

    • गवर्नर-जनरल लॉर्ड वेलेजली (1798-1805) ने कलकत्ता को एक भव्य यूरोपीय शहर बनाने का प्रयास किया।
    • उन्होंने 1803 में 'टाउन इम्प्रूवमेंट कमेटी' का गठन किया।
    • उद्देश्य: सड़कों को चौड़ा करना, दलदली भूमि को सुखाना, सार्वजनिक भवनों का निर्माण करना और शहर को स्वच्छ बनाना।
    • उन्होंने 'गवर्नर जनरल का महल' (वर्तमान राजभवन) बनवाया।
  • महामारी और स्वच्छता (19वीं सदी के अंत):

    • 1890 के दशक में प्लेग जैसी महामारियों के फैलने से शहरों में स्वच्छता और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया गया।
    • बंबई इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट (1898): भीड़भाड़ कम करने, नई सड़कें बनाने और बेहतर आवास उपलब्ध कराने के लिए स्थापित किया गया।
  • श्वेत और अश्वेत शहर:

    • यह विभाजन ब्रिटिश नगर-योजना का एक अभिन्न अंग था। यूरोपीय लोग स्वच्छ, योजनाबद्ध और खुले 'श्वेत शहरों' में रहते थे, जबकि भारतीय भीड़भाड़ वाले, अव्यवस्थित 'अश्वेत शहरों' में रहते थे।
    • यह विभाजन नस्लीय भेदभाव और सामाजिक दूरी को दर्शाता था।
  • छावनियाँ (Cantonments):

    • ब्रिटिश सेना के लिए अलग से शहर या शहर के हिस्से विकसित किए गए, जिन्हें छावनी कहा जाता था। ये सुनियोजित, स्वच्छ और हरे-भरे होते थे।
  • पहाड़ी स्थल (Hill Stations):

    • ब्रिटिश सैनिकों को आराम देने और यूरोपीय अधिकारियों को भारत की गर्मी से राहत दिलाने के लिए पहाड़ी स्थलों का विकास किया गया।
    • शिमला: गोरखा युद्ध (1815-16) के बाद स्थापित किया गया और 1864 में भारत की ग्रीष्मकालीन राजधानी बना।
    • दार्जिलिंग: 1835 में सिक्किम के राजा से प्राप्त किया गया।
    • अन्य: मसूरी, नैनीताल, ऊटी।
    • रेलवे का प्रभाव: 19वीं सदी के अंत तक रेलवे के विकास ने पहाड़ी स्थलों तक पहुँच को आसान बना दिया।

5. सार्वजनिक भवन और स्थापत्य शैलियाँ

ब्रिटिश शासकों ने भव्य इमारतों का निर्माण कर अपनी सत्ता और प्रभुत्व का प्रदर्शन किया।

  • शास्त्रीय यूरोपीय शैली (Neo-Classical):

    • विशेषताएँ: ग्रीक-रोमन स्थापत्य से प्रेरित, बड़े स्तंभ, विशाल भवन, ज्यामितीय समरूपता।
    • उदाहरण: बंबई का टाउन हॉल, एलफिंस्टन सर्किल (हॉर्निमैन सर्कल)।
  • गॉथिक शैली (Gothic):

    • विशेषताएँ: मध्यकालीन यूरोपीय शैली, ऊँची मेहराबें, नुकीली खिड़कियाँ, बारीक नक्काशी, ढलवाँ छतें।
    • उदाहरण: बंबई का विक्टोरिया टर्मिनस (छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस), बंबई विश्वविद्यालय, उच्च न्यायालय।
  • इंडो-सारासेनिक शैली (Indo-Saracenic):

    • विशेषताएँ: भारतीय और यूरोपीय स्थापत्य शैलियों का मिश्रण। इसमें गुंबद, छतरियाँ, मेहराबें, जाली का काम और मीनारें शामिल थीं।
    • उदाहरण: बंबई का गेटवे ऑफ इंडिया, मद्रास उच्च न्यायालय, कलकत्ता का विक्टोरिया मेमोरियल।
  • दिल्ली का निर्माण (20वीं सदी):

    • 1911 में राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित की गई।
    • एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर: प्रमुख वास्तुकार थे जिन्होंने नई दिल्ली की योजना बनाई और राष्ट्रपति भवन, इंडिया गेट, संसद भवन जैसे महत्वपूर्ण भवनों का निर्माण किया।

6. नगरीय जीवन और संस्कृति

  • परिवहन: पालकी, घोड़ागाड़ी, ट्राम और 19वीं सदी के अंत में रेलवे ने शहरी परिवहन को बदल दिया।
  • मनोरंजन: यूरोपीय लोगों के लिए क्लब, थिएटर और रेस कोर्स विकसित हुए। भारतीयों के लिए भी अपने मनोरंजन के साधन थे।
  • सामाजिक विभाजन: शहरों में जाति, धर्म, वर्ग और नस्ल के आधार पर स्पष्ट सामाजिक विभाजन थे।
  • नए पेशे: वकील, डॉक्टर, शिक्षक, क्लर्क, इंजीनियर जैसे नए पेशेवर वर्ग उभरे।
  • महिलाओं की स्थिति: शहरों में महिलाओं की सार्वजनिक जीवन में भागीदारी बढ़ी, शिक्षा और रोजगार के नए अवसर खुले, हालांकि सामाजिक रूढ़ियाँ बनी रहीं।
  • जनगणना और आंकड़े: शहरों में लोगों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को समझने के लिए जनगणना के आंकड़े महत्वपूर्ण थे, जो ब्रिटिश प्रशासन को अपनी नीतियों को आकार देने में मदद करते थे।

7. निष्कर्ष

  • औपनिवेशिक शहरों ने भारतीय समाज, अर्थव्यवस्था और संस्कृति पर गहरा प्रभाव डाला।
  • ये शहर ब्रिटिश सत्ता के प्रतीक थे, लेकिन साथ ही भारतीय राष्ट्रवाद और आधुनिकता के केंद्र भी बने।
  • इन शहरों का विकास और योजना ब्रिटिश शासकों की प्राथमिकताओं और नस्लीय भेदभाव को दर्शाती है।

अभ्यास प्रश्न: 10 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

यहाँ अध्याय 6 पर आधारित 10 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं, जो आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होंगे:

  1. प्रश्न: ब्रिटिश भारत की पहली अखिल भारतीय जनगणना किस वर्ष की गई थी?
    अ) 1861
    ब) 1872
    स) 1881
    द) 1891

  2. प्रश्न: ईस्ट इंडिया कंपनी ने किस वर्ष मद्रास (चेन्नई) में अपना व्यापारिक केंद्र स्थापित किया?
    अ) 1600
    ब) 1639
    स) 1661
    द) 1698

  3. प्रश्न: किस गवर्नर-जनरल ने कलकत्ता को एक भव्य यूरोपीय शहर बनाने के लिए 1803 में 'टाउन इम्प्रूवमेंट कमेटी' का गठन किया?
    अ) लॉर्ड डलहौजी
    ब) लॉर्ड कर्जन
    स) लॉर्ड वेलेजली
    द) वारेन हेस्टिंग्स

  4. प्रश्न: बंबई के सात द्वीपों को पुर्तगालियों ने इंग्लैंड के राजा चार्ल्स द्वितीय को दहेज में किस वर्ष दिया था?
    अ) 1600
    ब) 1639
    स) 1661
    द) 1668

  5. प्रश्न: ब्रिटिश भारत की ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में किस पहाड़ी स्थल को विकसित किया गया था?
    अ) मसूरी
    ब) नैनीताल
    स) शिमला
    द) ऊटी

  6. प्रश्न: विक्टोरिया टर्मिनस (छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस) का स्थापत्य किस शैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है?
    अ) शास्त्रीय यूरोपीय शैली
    ब) गॉथिक शैली
    स) इंडो-सारासेनिक शैली
    द) आधुनिक शैली

  7. प्रश्न: 1911 में ब्रिटिश भारत की राजधानी कलकत्ता से किस शहर में स्थानांतरित की गई?
    अ) बंबई
    ब) मद्रास
    स) दिल्ली
    द) इलाहाबाद

  8. प्रश्न: भारतीय और यूरोपीय स्थापत्य शैलियों के मिश्रण से बनी शैली को क्या कहा जाता है, जिसका उदाहरण गेटवे ऑफ इंडिया है?
    अ) शास्त्रीय शैली
    ब) गॉथिक शैली
    स) इंडो-सारासेनिक शैली
    द) बारोक शैली

  9. प्रश्न: कलकत्ता में फोर्ट विलियम का निर्माण किस नदी के किनारे हुआ था?
    अ) गंगा
    ब) यमुना
    स) हुगली
    द) ब्रह्मपुत्र

  10. प्रश्न: बंबई में 'इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट' की स्थापना किस वर्ष की गई थी, जिसका उद्देश्य भीड़भाड़ कम करना और आवास उपलब्ध कराना था?
    अ) 1872
    ब) 1881
    स) 1898
    द) 1905


उत्तरमाला:

  1. ब) 1872
  2. ब) 1639
  3. स) लॉर्ड वेलेजली
  4. स) 1661
  5. स) शिमला
  6. ब) गॉथिक शैली
  7. स) दिल्ली
  8. स) इंडो-सारासेनिक शैली
  9. स) हुगली
  10. स) 1898

मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको इस अध्याय को गहराई से समझने और आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में मदद करेंगे। शुभकामनाएँ!

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