Class 12 Physics Notes Chapter 1 (किरण प्रकाशिकी एव प्रकाशिक यंत्रा) – Bhautiki-II Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम कक्षा 12 भौतिकी के अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय 'किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय विभिन्न सरकारी परीक्षाओं के लिए आधारभूत है और इसमें से कई प्रश्न पूछे जाते हैं। हम प्रत्येक अवधारणा को गहराई से समझेंगे ताकि आपकी तैयारी सुदृढ़ हो सके।
अध्याय 1: किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र (Ray Optics and Optical Instruments)
प्रकाशिकी भौतिकी की वह शाखा है जो प्रकाश के व्यवहार और गुणों का अध्ययन करती है। किरण प्रकाशिकी में, हम प्रकाश को सीधी रेखाओं में चलने वाली किरणों के रूप में मानते हैं।
I. प्रकाश का परावर्तन (Reflection of Light)
जब प्रकाश किसी सतह से टकराकर वापस उसी माध्यम में लौट आता है, तो इस घटना को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं।
-
परावर्तन के नियम (Laws of Reflection):
- आपतित किरण, परावर्तित किरण और आपतन बिंदु पर अभिलंब (normal) तीनों एक ही तल में होते हैं।
- आपतन कोण (angle of incidence, i) सदैव परावर्तन कोण (angle of reflection, r) के बराबर होता है (∠i = ∠r)।
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समतल दर्पण (Plane Mirror):
- यह एक सपाट, चिकनी और अत्यधिक पॉलिश की हुई परावर्तक सतह होती है।
- प्रतिबिम्ब की विशेषताएँ:
- आभासी (virtual) और सीधा (erect)।
- वस्तु के समान आकार का।
- दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है जितनी दूरी पर वस्तु दर्पण के सामने होती है।
- पार्श्व परिवर्तित (laterally inverted) होता है (दायाँ-बायाँ प्रतीत होता है)।
- यदि वस्तु दर्पण की ओर v वेग से गति करती है, तो प्रतिबिम्ब वस्तु की ओर 2v वेग से गति करता हुआ प्रतीत होता है।
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गोलीय दर्पण (Spherical Mirrors):
- ये किसी खोखले गोले के कटे हुए भाग होते हैं जिनकी एक सतह पॉलिश की हुई होती है।
- प्रकार:
- अवतल दर्पण (Concave Mirror): अंदर की ओर धँसी हुई परावर्तक सतह। यह प्रकाश किरणों को अभिसरित (converge) करता है।
- उत्तल दर्पण (Convex Mirror): बाहर की ओर उभरी हुई परावर्तक सतह। यह प्रकाश किरणों को अपसरित (diverge) करता है।
- महत्वपूर्ण पद:
- ध्रुव (Pole, P): दर्पण के परावर्तक पृष्ठ का केंद्र।
- वक्रता केंद्र (Centre of Curvature, C): जिस खोखले गोले का दर्पण एक भाग है, उसका केंद्र।
- वक्रता त्रिज्या (Radius of Curvature, R): ध्रुव और वक्रता केंद्र के बीच की दूरी।
- मुख्य अक्ष (Principal Axis): ध्रुव और वक्रता केंद्र से होकर गुजरने वाली सीधी रेखा।
- मुख्य फोकस (Principal Focus, F): मुख्य अक्ष के समानांतर आने वाली प्रकाश किरणें परावर्तन के बाद जिस बिंदु पर मिलती हैं (अवतल) या मिलती हुई प्रतीत होती हैं (उत्तल)।
- फोकस दूरी (Focal Length, f): ध्रुव और मुख्य फोकस के बीच की दूरी।
- संबंध: f = R/2
- चिन्ह परिपाटी (Sign Convention):
- सभी दूरियाँ दर्पण के ध्रुव से मापी जाती हैं।
- आपतित प्रकाश की दिशा में मापी गई दूरियाँ धनात्मक (+) और विपरीत दिशा में मापी गई दूरियाँ ऋणात्मक (-) होती हैं।
- मुख्य अक्ष के ऊपर की ऊँचाइयाँ धनात्मक (+) और नीचे की ऊँचाइयाँ ऋणात्मक (-) होती हैं।
- दर्पण सूत्र (Mirror Formula):
1/f = 1/v + 1/u
जहाँ, f = फोकस दूरी, v = प्रतिबिम्ब दूरी, u = वस्तु दूरी। - आवर्धन (Magnification, m):
m = प्रतिबिम्ब की ऊँचाई (h') / वस्तु की ऊँचाई (h) = -v/u- m > 0: प्रतिबिम्ब सीधा और आभासी।
- m < 0: प्रतिबिम्ब उल्टा और वास्तविक।
- |m| > 1: प्रतिबिम्ब आवर्धित।
- |m| < 1: प्रतिबिम्ब छोटा।
- |m| = 1: प्रतिबिम्ब वस्तु के समान आकार का।
- अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब निर्माण (विभिन्न स्थितियों में): वास्तविक, उल्टा और आवर्धित/छोटा/समान आकार का (जब वस्तु F और P के बीच हो तो आभासी, सीधा और आवर्धित)।
- उत्तल दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब निर्माण: हमेशा आभासी, सीधा और वस्तु से छोटा।
- उपयोग:
- अवतल दर्पण: शेविंग दर्पण, टॉर्च, हेडलाइट, दंत चिकित्सक का दर्पण, सौर भट्टियाँ।
- उत्तल दर्पण: वाहनों में पश्च-दृश्य दर्पण (rear-view mirror), दुकानों में सुरक्षा दर्पण।
II. प्रकाश का अपवर्तन (Refraction of Light)
जब प्रकाश एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करता है, तो वह अपने पथ से विचलित हो जाता है। इस घटना को प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं।
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अपवर्तन के नियम (Laws of Refraction):
- आपतित किरण, अपवर्तित किरण और दोनों माध्यमों को पृथक करने वाली सतह के आपतन बिंदु पर अभिलंब तीनों एक ही तल में होते हैं।
- स्नेल का नियम (Snell's Law): किन्हीं दो माध्यमों के युग्म के लिए, आपतन कोण की ज्या (sine) और अपवर्तन कोण की ज्या का अनुपात एक स्थिरांक होता है।
n1 sinθ1 = n2 sinθ2
जहाँ, n1 और n2 माध्यम 1 और माध्यम 2 के अपवर्तनांक हैं, θ1 आपतन कोण और θ2 अपवर्तन कोण है। - अपवर्तनांक (Refractive Index, n):
- किसी माध्यम का निरपेक्ष अपवर्तनांक (absolute refractive index) निर्वात में प्रकाश की चाल (c) और उस माध्यम में प्रकाश की चाल (v) का अनुपात होता है: n = c/v।
- सापेक्ष अपवर्तनांक (relative refractive index) n21 = n2/n1 = v1/v2।
- यदि प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाता है, तो वह अभिलंब से दूर हटता है (θ2 > θ1)।
- यदि प्रकाश विरल माध्यम से सघन माध्यम में जाता है, तो वह अभिलंब की ओर झुकता है (θ2 < θ1)।
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क्रांतिक कोण (Critical Angle) और पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection, TIR):
- जब प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाता है, तो आपतन कोण के एक विशेष मान के लिए अपवर्तन कोण 90° हो जाता है। इस आपतन कोण को क्रांतिक कोण (θc) कहते हैं।
sinθc = n2/n1 (जहाँ n1 सघन माध्यम और n2 विरल माध्यम का अपवर्तनांक है) - यदि आपतन कोण क्रांतिक कोण से अधिक हो जाता है, तो प्रकाश उसी सघन माध्यम में वापस परावर्तित हो जाता है। इस घटना को पूर्ण आंतरिक परावर्तन कहते हैं।
- शर्तें:
- प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाना चाहिए।
- आपतन कोण क्रांतिक कोण से अधिक होना चाहिए।
- अनुप्रयोग:
- हीरे की चमक।
- मृगतृष्णा (mirage)।
- प्रकाशिक तंतु (optical fibers) में संचार।
- प्रिज्म द्वारा प्रकाश का पूर्ण परावर्तन।
- जब प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाता है, तो आपतन कोण के एक विशेष मान के लिए अपवर्तन कोण 90° हो जाता है। इस आपतन कोण को क्रांतिक कोण (θc) कहते हैं।
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वास्तविक गहराई और आभासी गहराई (Real Depth and Apparent Depth):
- जब किसी वस्तु को सघन माध्यम (जैसे पानी) में रखा जाता है और उसे विरल माध्यम (जैसे हवा) से देखा जाता है, तो वह अपनी वास्तविक गहराई से कम गहरी दिखाई देती है।
n = वास्तविक गहराई / आभासी गहराई
- जब किसी वस्तु को सघन माध्यम (जैसे पानी) में रखा जाता है और उसे विरल माध्यम (जैसे हवा) से देखा जाता है, तो वह अपनी वास्तविक गहराई से कम गहरी दिखाई देती है।
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गोलीय पृष्ठों से अपवर्तन (Refraction at Spherical Surfaces):
- सूत्र: n2/v - n1/u = (n2 - n1)/R
जहाँ, n1 पहले माध्यम का अपवर्तनांक, n2 दूसरे माध्यम का अपवर्तनांक, u वस्तु दूरी, v प्रतिबिम्ब दूरी, R वक्रता त्रिज्या।
- सूत्र: n2/v - n1/u = (n2 - n1)/R
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लेंस (Lenses):
- दो गोलीय या एक गोलीय और एक समतल सतह से घिरा पारदर्शी माध्यम।
- प्रकार:
- उत्तल लेंस (Convex Lens): किनारों पर पतला और बीच में मोटा। यह प्रकाश किरणों को अभिसरित करता है। इसे अभिसारी लेंस भी कहते हैं।
- अवतल लेंस (Concave Lens): किनारों पर मोटा और बीच में पतला। यह प्रकाश किरणों को अपसरित करता है। इसे अपसारी लेंस भी कहते हैं।
- महत्वपूर्ण पद:
- प्रकाशिक केंद्र (Optical Centre, O): लेंस का केंद्रीय बिंदु।
- मुख्य फोकस (Principal Focus, F): उत्तल लेंस में, मुख्य अक्ष के समानांतर किरणें अपवर्तन के बाद जिस बिंदु पर मिलती हैं। अवतल लेंस में, मुख्य अक्ष के समानांतर किरणें अपवर्तन के बाद जिस बिंदु से अपसरित होती हुई प्रतीत होती हैं। प्रत्येक लेंस के दो मुख्य फोकस होते हैं (F1, F2)।
- फोकस दूरी (Focal Length, f): प्रकाशिक केंद्र और मुख्य फोकस के बीच की दूरी।
- चिन्ह परिपाटी: दर्पण के समान।
- लेंस सूत्र (Lens Formula):
1/f = 1/v - 1/u - आवर्धन (Magnification, m):
m = प्रतिबिम्ब की ऊँचाई (h') / वस्तु की ऊँचाई (h) = v/u - लेंस निर्माता सूत्र (Lens Maker's Formula):
1/f = (n2/n1 - 1) (1/R1 - 1/R2)
जहाँ, n1 आसपास के माध्यम का अपवर्तनांक, n2 लेंस के पदार्थ का अपवर्तनांक, R1 और R2 लेंस के वक्रता पृष्ठों की त्रिज्याएँ। - लेंस की शक्ति (Power of a Lens, P):
यह लेंस द्वारा प्रकाश किरणों को अभिसरित या अपसरित करने की क्षमता का माप है।
P = 1/f (जब f मीटर में हो)। मात्रक: डायोप्टर (D)।- उत्तल लेंस की शक्ति धनात्मक होती है।
- अवतल लेंस की शक्ति ऋणात्मक होती है।
- लेंसों का संयोजन (Combination of Lenses):
यदि दो पतले लेंस एक-दूसरे के संपर्क में रखे हों, तो संयुक्त लेंस की फोकस दूरी (F) और शक्ति (P) निम्न प्रकार से दी जाती है:
1/F = 1/f1 + 1/f2
P = P1 + P2 - उत्तल लेंस द्वारा प्रतिबिम्ब निर्माण: वास्तविक, उल्टा और आवर्धित/छोटा/समान आकार का (जब वस्तु F1 और O के बीच हो तो आभासी, सीधा और आवर्धित)।
- अवतल लेंस द्वारा प्रतिबिम्ब निर्माण: हमेशा आभासी, सीधा और वस्तु से छोटा।
III. प्रिज्म द्वारा प्रकाश का अपवर्तन (Refraction of Light through a Prism)
प्रिज्म एक पारदर्शी माध्यम होता है जिसके दो अपवर्तक पृष्ठ एक कोण पर झुके होते हैं, जिसे प्रिज्म कोण (A) कहते हैं।
- विचलन कोण (Angle of Deviation, δ): आपतित किरण और निर्गत किरण के बीच का कोण।
- न्यूनतम विचलन कोण (Angle of Minimum Deviation, δm): जब विचलन कोण का मान न्यूनतम होता है, तो आपतन कोण (i) और निर्गत कोण (e) बराबर होते हैं, और प्रिज्म के अंदर अपवर्तित किरण आधार के समानांतर होती है।
- प्रिज्म सूत्र (Prism Formula):
n = sin((A + δm)/2) / sin(A/2)
जहाँ, n प्रिज्म के पदार्थ का अपवर्तनांक, A प्रिज्म कोण, δm न्यूनतम विचलन कोण। - पतले प्रिज्म के लिए (For Thin Prism):
δ = (n - 1)A - वर्ण विक्षेपण (Dispersion of Light):
श्वेत प्रकाश का अपने अवयवी रंगों (बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल - VIBGYOR) में विभाजित होने की घटना।- कारण: विभिन्न रंगों के प्रकाश के लिए माध्यम का अपवर्तनांक भिन्न-भिन्न होता है (बैंगनी के लिए अधिकतम, लाल के लिए न्यूनतम)।
- कोणीय विक्षेपण (Angular Dispersion, θ): किन्हीं दो रंगों की निर्गत किरणों के बीच का कोण। θ = δv - δr (बैंगनी और लाल के लिए)।
- विक्षेपण क्षमता (Dispersive Power, ω): यह प्रिज्म की वर्ण विक्षेपण करने की क्षमता का माप है।
ω = (δv - δr) / δy = (nv - nr) / (ny - 1)
जहाँ, δy पीले रंग के लिए विचलन कोण, nv, nr, ny क्रमशः बैंगनी, लाल और पीले रंग के लिए अपवर्तनांक हैं।
IV. प्रकाशिक यंत्र (Optical Instruments)
ये यंत्र प्रकाश के परावर्तन और अपवर्तन के सिद्धांतों का उपयोग करके वस्तुओं को अधिक स्पष्ट और विस्तृत रूप में देखने में सहायता करते हैं।
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मानव नेत्र (Human Eye):
- संरचना: कॉर्निया, परितारिका (iris), पुतली (pupil), लेंस, पक्ष्माभी पेशियाँ (ciliary muscles), रेटिना, दृष्टिपटल (optic nerve)।
- समंजन क्षमता (Power of Accommodation): नेत्र लेंस की अपनी फोकस दूरी को समायोजित करके विभिन्न दूरियों पर स्थित वस्तुओं को स्पष्ट देखने की क्षमता।
- दृष्टि दोष (Defects of Vision):
- निकट दृष्टि दोष (Myopia): दूर की वस्तुएँ स्पष्ट नहीं दिखतीं। प्रतिबिम्ब रेटिना के सामने बनता है।
- निवारण: अवतल लेंस का उपयोग।
- दूर दृष्टि दोष (Hypermetropia): पास की वस्तुएँ स्पष्ट नहीं दिखतीं। प्रतिबिम्ब रेटिना के पीछे बनता है।
- निवारण: उत्तल लेंस का उपयोग।
- जरा दूरदर्शिता (Presbyopia): वृद्धावस्था में समंजन क्षमता कम होने से निकट और दूर दोनों की वस्तुएँ देखने में कठिनाई।
- निवारण: द्विफोकसी लेंस (bifocal lens) का उपयोग।
- दृष्टि वैषम्य (Astigmatism): क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर रेखाओं को एक साथ स्पष्ट न देख पाना।
- निवारण: बेलनाकार लेंस (cylindrical lens) का उपयोग।
- निकट दृष्टि दोष (Myopia): दूर की वस्तुएँ स्पष्ट नहीं दिखतीं। प्रतिबिम्ब रेटिना के सामने बनता है।
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सरल सूक्ष्मदर्शी (Simple Microscope / आवर्धक लेंस):
- एक उत्तल लेंस जिसका उपयोग छोटी वस्तुओं को आवर्धित करके देखने के लिए किया जाता है।
- आवर्धन क्षमता (Magnifying Power, M):
- जब अंतिम प्रतिबिम्ब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी (D = 25 cm) पर बने: M = 1 + D/f
- जब अंतिम प्रतिबिम्ब अनंत पर बने (आँखों पर तनाव कम): M = D/f
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संयुक्त सूक्ष्मदर्शी (Compound Microscope):
- दो उत्तल लेंसों का उपयोग करता है: अभिदृश्यक लेंस (objective lens) (छोटी फोकस दूरी) और नेत्रिका लेंस (eyepiece lens) (बड़ी फोकस दूरी)।
- आवर्धन क्षमता (M):
- जब अंतिम प्रतिबिम्ब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी (D) पर बने: M = -(v0/u0)(1 + D/fe)
- जब अंतिम प्रतिबिम्ब अनंत पर बने: M = -(v0/u0)(D/fe)
- लेंसों के बीच की लंबाई (L) = v0 + ue (जब प्रतिबिम्ब D पर) या v0 + fe (जब प्रतिबिम्ब अनंत पर)।
- आमतौर पर, v0 ≈ L और u0 ≈ f0, इसलिए M ≈ -(L/f0)(D/fe)
-
दूरदर्शी (Telescope):
- दूर की वस्तुओं को स्पष्ट देखने के लिए उपयोग किया जाता है।
- खगोलीय दूरदर्शी (Astronomical Telescope):
- दो उत्तल लेंस: अभिदृश्यक लेंस (बड़ी फोकस दूरी और बड़ा द्वारक) और नेत्रिका लेंस (छोटी फोकस दूरी)।
- आवर्धन क्षमता (M):
- जब अंतिम प्रतिबिम्ब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी (D) पर बने: M = -(f0/fe)(1 + fe/D)
- जब अंतिम प्रतिबिम्ब अनंत पर बने (सामान्य समायोजन): M = -f0/fe
- लेंसों के बीच की लंबाई (L) = f0 + fe (सामान्य समायोजन में)।
- परावर्ती दूरदर्शी (Reflecting Telescope):
- अभिदृश्यक के रूप में बड़े अवतल दर्पण का उपयोग करता है। उदाहरण: कैसग्रेन दूरदर्शी।
- लाभ:
- वर्ण विपथन (chromatic aberration) से मुक्त।
- गोलीय विपथन (spherical aberration) कम होता है।
- उच्च आवर्धन क्षमता प्राप्त करना आसान।
- यांत्रिक रूप से अधिक स्थिर।
बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)
-
एक समतल दर्पण द्वारा निर्मित प्रतिबिम्ब की प्रकृति क्या होती है?
a) वास्तविक और उल्टा
b) आभासी और उल्टा
c) वास्तविक और सीधा
d) आभासी और सीधा -
एक अवतल दर्पण की फोकस दूरी 15 cm है। यदि एक वस्तु को ध्रुव से 10 cm की दूरी पर रखा जाए, तो प्रतिबिम्ब की प्रकृति क्या होगी?
a) वास्तविक, उल्टा और आवर्धित
b) आभासी, सीधा और आवर्धित
c) वास्तविक, उल्टा और छोटा
d) आभासी, सीधा और छोटा -
प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करता है। यदि आपतन कोण क्रांतिक कोण से अधिक हो, तो क्या घटना होगी?
a) अपवर्तन
b) पूर्ण आंतरिक परावर्तन
c) विवर्तन
d) व्यतिकरण -
एक 2.0 D शक्ति वाले उत्तल लेंस की फोकस दूरी क्या होगी?
a) 50 cm
b) -50 cm
c) 20 cm
d) -20 cm -
लेंस निर्माता सूत्र में, 1/f = (n2/n1 - 1) (1/R1 - 1/R2), यदि लेंस को पानी (n1 = 1.33) में रखा जाए और लेंस का पदार्थ कांच (n2 = 1.5) हो, तो लेंस की फोकस दूरी पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
a) फोकस दूरी कम हो जाएगी।
b) फोकस दूरी बढ़ जाएगी।
c) फोकस दूरी अपरिवर्तित रहेगी।
d) लेंस अपसारी बन जाएगा। -
एक प्रिज्म द्वारा न्यूनतम विचलन कोण (δm) के लिए कौन सी शर्त सही है?
a) आपतन कोण (i) = निर्गत कोण (e)
b) आपतन कोण (i) > निर्गत कोण (e)
c) आपतन कोण (i) < निर्गत कोण (e)
d) अपवर्तन कोण (r1) = प्रिज्म कोण (A) -
निकट दृष्टि दोष (Myopia) के निवारण के लिए किस लेंस का उपयोग किया जाता है?
a) उत्तल लेंस
b) अवतल लेंस
c) बेलनाकार लेंस
d) द्विफोकसी लेंस -
एक सरल सूक्ष्मदर्शी में, जब अंतिम प्रतिबिम्ब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी (D) पर बनता है, तो आवर्धन क्षमता का सूत्र क्या है?
a) M = D/f
b) M = 1 + D/f
c) M = f/D
d) M = 1 - D/f -
परावर्ती दूरदर्शी, अपवर्ती दूरदर्शी की तुलना में क्यों बेहतर माने जाते हैं?
a) वे अधिक सस्ते होते हैं।
b) उनमें वर्ण विपथन नहीं होता।
c) उनका आवर्धन कम होता है।
d) वे केवल दिन के समय उपयोग किए जा सकते हैं। -
जब प्रकाश विरल माध्यम से सघन माध्यम में प्रवेश करता है, तो क्या होता है?
a) यह अभिलंब से दूर हटता है।
b) यह अभिलंब की ओर झुकता है।
c) इसकी चाल बढ़ती है।
d) इसका तरंगदैर्ध्य बढ़ता है।
MCQs के उत्तर:
- d) आभासी और सीधा
- b) आभासी, सीधा और आवर्धित (क्योंकि वस्तु फोकस दूरी के अंदर है)
- b) पूर्ण आंतरिक परावर्तन
- a) 50 cm (P = 1/f => f = 1/P = 1/2.0 = 0.5 m = 50 cm)
- b) फोकस दूरी बढ़ जाएगी। (n2/n1 का मान कम हो जाएगा, जिससे (n2/n1 - 1) का मान कम होगा और f बढ़ जाएगा)
- a) आपतन कोण (i) = निर्गत कोण (e)
- b) अवतल लेंस
- b) M = 1 + D/f
- b) उनमें वर्ण विपथन नहीं होता।
- b) यह अभिलंब की ओर झुकता है।
मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होंगे। इन अवधारणाओं को अच्छी तरह से समझें और नियमित अभ्यास करें। शुभकामनाएँ!