Class 12 Physics Notes Chapter 10 (Chapter 10) – Examplar Problems (Hindi) Book

Examplar Problems (Hindi)
प्रिय विद्यार्थियों,

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए 'तरंग प्रकाशिकी' (Wave Optics) अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह अध्याय प्रकाश की तरंग प्रकृति से संबंधित अवधारणाओं और घटनाओं को विस्तार से समझाता है। यहाँ इस अध्याय के विस्तृत नोट्स और महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं, जो आपकी तैयारी में सहायक होंगे।


अध्याय 10: तरंग प्रकाशिकी (Wave Optics) - विस्तृत नोट्स

यह अध्याय प्रकाश की तरंग प्रकृति की व्याख्या करता है और उन घटनाओं का अध्ययन करता है जिन्हें प्रकाश के कण सिद्धांत से नहीं समझाया जा सकता।

1. हाइगेंस का तरंग सिद्धांत (Huygens' Wave Theory)

  • तरंगाग्र (Wavefront): किसी माध्यम में स्थित उन सभी बिंदुओं का बिंदुपथ (लोकस) जहाँ प्रकाश तरंगें एक ही कला (phase) में होती हैं, तरंगाग्र कहलाता है।
    • प्रकार:
      • गोलीय तरंगाग्र (Spherical Wavefront): बिंदु स्रोत से उत्पन्न होता है।
      • समतल तरंगाग्र (Plane Wavefront): अनंत पर स्थित स्रोत से उत्पन्न होता है या गोलीय/बेलनाकार तरंगाग्र का बहुत बड़ा भाग।
      • बेलनाकार तरंगाग्र (Cylindrical Wavefront): रेखीय स्रोत से उत्पन्न होता है।
    • तरंगाग्र के लंबवत खींची गई रेखाएँ प्रकाश किरणों को दर्शाती हैं।
  • हाइगेंस का द्वितीयक तरंगिकाओं का सिद्धांत (Huygens' Principle of Secondary Wavelets):
    1. माध्यम में प्रत्येक बिंदु, जहाँ तरंगाग्र पहुँचता है, एक नए विक्षोभ के स्रोत के रूप में कार्य करता है। इन नए स्रोतों से निकलने वाली तरंगों को द्वितीयक तरंगिकाएँ (secondary wavelets) कहते हैं।
    2. द्वितीयक तरंगिकाएँ उसी चाल से आगे बढ़ती हैं जिस चाल से मूल तरंग।
    3. किसी भी क्षण इन सभी द्वितीयक तरंगिकाओं को स्पर्श करता हुआ अग्रगामी आवरण (forward envelope) उस क्षण का नया तरंगाग्र देता है।
  • परावर्तन और अपवर्तन की व्याख्या (Explanation of Reflection and Refraction): हाइगेंस के सिद्धांत का उपयोग करके परावर्तन और अपवर्तन के नियमों (स्नेल का नियम) की सफलतापूर्वक व्याख्या की जा सकती है।

2. प्रकाश का व्यतिकरण (Interference of Light)

  • परिभाषा: जब दो कला-संबद्ध (coherent) प्रकाश तरंगें एक ही दिशा में संचरित होती हुई अध्यारोपित होती हैं, तो माध्यम के कुछ बिंदुओं पर प्रकाश की तीव्रता अधिकतम (संपोषी व्यतिकरण) और कुछ बिंदुओं पर न्यूनतम या शून्य (विनाशी व्यतिकरण) हो जाती है। इस घटना को प्रकाश का व्यतिकरण कहते हैं।
  • कला-संबद्ध स्रोत (Coherent Sources): ऐसे स्रोत जिनसे निकलने वाली प्रकाश तरंगों के बीच कलांतर (phase difference) समय के साथ नियत रहता है। दो स्वतंत्र स्रोतों से कला-संबद्ध तरंगें प्राप्त करना संभव नहीं है। आमतौर पर, एक ही स्रोत को दो भागों में विभाजित करके कला-संबद्ध स्रोत प्राप्त किए जाते हैं।
  • संपोषी व्यतिकरण (Constructive Interference):
    • जब तरंगें समान कला में मिलती हैं।
    • पथांतर (path difference), Δx = nλ (जहाँ n = 0, 1, 2, ...)
    • कलांतर (phase difference), Δφ = 2nπ (जहाँ n = 0, 1, 2, ...)
    • परिणामी तीव्रता अधिकतम होती है।
  • विनाशी व्यतिकरण (Destructive Interference):
    • जब तरंगें विपरीत कला में मिलती हैं।
    • पथांतर, Δx = (2n + 1)λ/2 (जहाँ n = 0, 1, 2, ...)
    • कलांतर, Δφ = (2n + 1)π (जहाँ n = 0, 1, 2, ...)
    • परिणामी तीव्रता न्यूनतम या शून्य होती है।
  • यंग का द्वि-झिरी प्रयोग (Young's Double Slit Experiment - YDSE):
    • यह व्यतिकरण का सबसे प्रसिद्ध प्रयोग है।
    • सेटअप: एकवर्णी प्रकाश स्रोत से प्रकाश दो संकीर्ण झिर्रियों (S1 और S2) पर पड़ता है, जो एक-दूसरे के बहुत करीब होती हैं। ये झिर्रियां कला-संबद्ध स्रोतों की तरह कार्य करती हैं। झिर्रियों से कुछ दूरी पर रखे पर्दे पर व्यतिकरण पैटर्न (दीप्त और अदीप्त फ्रिंज) प्राप्त होता है।
    • फ्रिंज चौड़ाई (Fringe Width, β): दो क्रमागत दीप्त या दो क्रमागत अदीप्त फ्रिंजों के बीच की दूरी।
      • सूत्र: β = λD/d
        • λ: प्रकाश की तरंगदैर्ध्य
        • D: झिर्रियों और पर्दे के बीच की दूरी
        • d: दोनों झिर्रियों के बीच की दूरी
    • केंद्रीय दीप्त फ्रिंज: पर्दे के केंद्र पर हमेशा दीप्त फ्रिंज प्राप्त होती है (n=0 के लिए)।
    • दीप्त फ्रिंजों की स्थिति (Positions of Bright Fringes): yn = n(λD/d)
    • अदीप्त फ्रिंजों की स्थिति (Positions of Dark Fringes): yn = (2n + 1)λD/(2d)
    • तीव्रता वितरण: व्यतिकरण पैटर्न में तीव्रता का वितरण कोसाइन वर्ग फलन (cos²θ) के अनुसार होता है।

3. प्रकाश का विवर्तन (Diffraction of Light)

  • परिभाषा: प्रकाश तरंगों का तीखे किनारों या छोटे छिद्रों से मुड़कर ज्यामितीय छाया क्षेत्र में फैलने की घटना को विवर्तन कहते हैं।
  • विवर्तन के प्रकार:
    • फ्रेनल विवर्तन (Fresnel Diffraction): जब प्रकाश स्रोत या पर्दा विवर्तक वस्तु से परिमित दूरी पर होते हैं।
    • फ्रॉनहोफर विवर्तन (Fraunhofer Diffraction): जब प्रकाश स्रोत और पर्दा विवर्तक वस्तु से प्रभावी रूप से अनंत दूरी पर होते हैं (यानी, उन पर समतल तरंगाग्र आपतित होता है और विवर्तित प्रकाश को लेंस द्वारा पर्दे पर फोकस किया जाता है)।
  • एकल झिरी द्वारा विवर्तन (Diffraction by a Single Slit):
    • केंद्रीय उच्चिष्ठ (Central Maxima): पर्दे के केंद्र पर सबसे चौड़ा और सबसे तीव्र दीप्त बैंड प्राप्त होता है। इसकी चौड़ाई 2λD/a होती है।
    • निम्निष्ठ (Minima): केंद्रीय उच्चिष्ठ के दोनों ओर एकांतर क्रम में अदीप्त बैंड प्राप्त होते हैं।
      • शर्त: a sinθ = nλ (जहाँ n = ±1, ±2, ...)
    • गौण उच्चिष्ठ (Secondary Maxima): निम्निष्ठों के बीच कम तीव्रता वाले दीप्त बैंड प्राप्त होते हैं।
      • शर्त: a sinθ = (2n + 1)λ/2 (जहाँ n = ±1, ±2, ...)
    • तीव्रता वितरण: केंद्रीय उच्चिष्ठ की तीव्रता अधिकतम होती है, और जैसे-जैसे हम केंद्र से दूर जाते हैं, गौण उच्चिष्ठों की तीव्रता तेजी से घटती जाती है।
  • व्यतिकरण और विवर्तन में अंतर (Differences between Interference and Diffraction):
    • व्यतिकरण: दो या अधिक कला-संबद्ध स्रोतों से आने वाली तरंगों के अध्यारोपण से। सभी दीप्त फ्रिंजों की तीव्रता लगभग समान होती है।
    • विवर्तन: एक ही तरंगाग्र के विभिन्न बिंदुओं से निकलने वाली द्वितीयक तरंगिकाओं के अध्यारोपण से। केंद्रीय उच्चिष्ठ सबसे तीव्र होता है, और गौण उच्चिष्ठों की तीव्रता घटती जाती है।

4. प्रकाश का ध्रुवण (Polarisation of Light)

  • परिभाषा: प्रकाश तरंगों में कंपन एक विशेष तल तक सीमित होने की घटना को प्रकाश का ध्रुवण कहते हैं। यह केवल अनुप्रस्थ तरंगों (transverse waves) में ही संभव है। प्रकाश एक अनुप्रस्थ तरंग है।
  • अध्रुवित प्रकाश (Unpolarised Light): ऐसा प्रकाश जिसमें विद्युत वेक्टर के कंपन संचरण की दिशा के लंबवत सभी संभव तलों में सममित रूप से वितरित होते हैं।
  • ध्रुवित प्रकाश (Polarised Light): ऐसा प्रकाश जिसमें विद्युत वेक्टर के कंपन संचरण की दिशा के लंबवत केवल एक ही तल में होते हैं।
    • रेखीय ध्रुवित प्रकाश (Linearly Polarised Light): कंपन एक ही तल में होते हैं।
    • वृत्तीय ध्रुवित प्रकाश (Circularly Polarised Light): विद्युत वेक्टर का सिरा एक वृत्त बनाता है।
    • दीर्घवृत्तीय ध्रुवित प्रकाश (Elliptically Polarised Light): विद्युत वेक्टर का सिरा एक दीर्घवृत्त बनाता है।
  • ध्रुवण के तरीके (Methods of Polarisation):
    • परावर्तन द्वारा ध्रुवण (Polarisation by Reflection): जब अध्रुवित प्रकाश किसी पारदर्शी माध्यम की सतह पर आपतित होता है, तो परावर्तित प्रकाश आंशिक रूप से ध्रुवित होता है। एक विशेष आपतन कोण पर, परावर्तित प्रकाश पूर्णतः रेखीय ध्रुवित होता है।
      • ब्रूस्टर का नियम (Brewster's Law): जब परावर्तित और अपवर्तित किरणें एक-दूसरे के लंबवत होती हैं, तो परावर्तित प्रकाश पूर्णतः ध्रुवित होता है। इस आपतन कोण को ध्रुवण कोण (polarising angle, ip) कहते हैं।
        • सूत्र: μ = tan ip (जहाँ μ माध्यम का अपवर्तनांक है)
    • अपवर्तन द्वारा ध्रुवण (Polarisation by Refraction): परावर्तन के साथ-साथ अपवर्तित प्रकाश भी आंशिक रूप से ध्रुवित होता है।
    • द्वि-अपवर्तन द्वारा ध्रुवण (Polarisation by Double Refraction): कैल्साइट या टूरमैलीन जैसे क्रिस्टल में प्रकाश दो अपवर्तित किरणों में विभाजित हो जाता है, जो परस्पर ध्रुवित होती हैं।
    • प्रकीर्णन द्वारा ध्रुवण (Polarisation by Scattering): जब प्रकाश वायुमंडल में धूल के कणों या अणुओं द्वारा प्रकीर्णित होता है, तो प्रकीर्णित प्रकाश आंशिक रूप से ध्रुवित हो जाता है (जैसे नीला आकाश)।
    • पोलरॉइड (Polaroids): ये कृत्रिम ध्रुवक होते हैं जो अध्रुवित प्रकाश को ध्रुवित प्रकाश में परिवर्तित करते हैं।
      • मैलस का नियम (Malus' Law): जब ध्रुवित प्रकाश एक विश्लेषक (polariser) से गुजरता है, तो निर्गत प्रकाश की तीव्रता विश्लेषक की पारगमन अक्ष और आपतित ध्रुवित प्रकाश के कंपन तल के बीच के कोण (θ) के कोसाइन के वर्ग के समानुपाती होती है।
        • सूत्र: I = I₀ cos²θ (जहाँ I₀ आपतित ध्रुवित प्रकाश की तीव्रता है)
  • ध्रुवण तल और कंपन तल (Plane of Polarisation and Plane of Vibration):
    • कंपन तल: वह तल जिसमें विद्युत वेक्टर के कंपन होते हैं।
    • ध्रुवण तल: वह तल जो कंपन तल के लंबवत होता है और जिसमें प्रकाश के संचरण की दिशा होती है।

5. महत्वपूर्ण सूत्र और अवधारणाएँ (Important Formulas and Concepts)

  • प्रकाश की चाल: c = νλ (जहाँ ν आवृत्ति है)
  • कलांतर और पथांतर संबंध: Δφ = (2π/λ)Δx
  • व्यतिकरण में तीव्रता: I = I₁ + I₂ + 2√(I₁I₂)cos(Δφ)। यदि I₁ = I₂ = I₀, तो I = 4I₀ cos²(Δφ/2)।
  • फ्रिंज चौड़ाई (YDSE): β = λD/d
  • ब्रूस्टर का नियम: μ = tan ip
  • मैलस का नियम: I = I₀ cos²θ
  • एकल झिरी विवर्तन में निम्निष्ठ: a sinθ = nλ
  • एकल झिरी विवर्तन में केंद्रीय उच्चिष्ठ की चौड़ाई: 2λD/a
  • विभेदन क्षमता (Resolving Power):
    • दूरदर्शी की विभेदन क्षमता: R = D/(1.22λ) (जहाँ D अभिदृश्यक का व्यास है)
    • सूक्ष्मदर्शी की विभेदन क्षमता: R = (2μ sinθ)/(1.22λ) (जहाँ μ sinθ संख्यात्मक द्वारक है)

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

यहाँ 10 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं, जो आपकी सरकारी परीक्षा की तैयारी के लिए उपयोगी होंगे:

1. हाइगेंस के तरंग सिद्धांत के अनुसार, प्रकाश तरंगें किस रूप में संचरित होती हैं?
A) कणों के रूप में
B) अनुदैर्ध्य तरंगों के रूप में
C) अनुप्रस्थ तरंगों के रूप में
D) कण और तरंग दोनों के रूप में
सही उत्तर: C) अनुप्रस्थ तरंगों के रूप में (हालांकि हाइगेंस ने इसे अनुदैर्ध्य माना था, बाद में ध्रुवण की व्याख्या से यह अनुप्रस्थ सिद्ध हुआ)

2. यंग के द्वि-झिरी प्रयोग में, यदि झिर्रियों के बीच की दूरी दोगुनी कर दी जाए, तो फ्रिंज चौड़ाई पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
A) दोगुनी हो जाएगी
B) आधी हो जाएगी
C) अपरिवर्तित रहेगी
D) चार गुनी हो जाएगी
सही उत्तर: B) आधी हो जाएगी (क्योंकि β ∝ 1/d)

3. संपोषी व्यतिकरण के लिए पथांतर की शर्त क्या है?
A) (2n + 1)λ/2
B) nλ
C) nπ
D) (2n + 1)π
सही उत्तर: B) nλ

4. ब्रूस्टर का नियम किससे संबंधित है?
A) प्रकाश का व्यतिकरण
B) प्रकाश का विवर्तन
C) प्रकाश का ध्रुवण
D) प्रकाश का प्रकीर्णन
सही उत्तर: C) प्रकाश का ध्रुवण

5. मैलस के नियम के अनुसार, यदि एक ध्रुवक से गुजरने वाले ध्रुवित प्रकाश की तीव्रता I₀ है, और विश्लेषक को ध्रुवक की पारगमन अक्ष से 60° के कोण पर घुमाया जाता है, तो निर्गत प्रकाश की तीव्रता क्या होगी?
A) I₀/2
B) I₀/4
C) 3I₀/4
D) I₀
सही उत्तर: B) I₀/4 (क्योंकि I = I₀ cos²60° = I₀ (1/2)² = I₀/4)

6. एक एकल झिरी विवर्तन पैटर्न में, केंद्रीय उच्चिष्ठ की चौड़ाई होती है:
A) λD/a
B) 2λD/a
C) λ/a
D) 2λ/a
सही उत्तर: B) 2λD/a

7. प्रकाश का ध्रुवण यह दर्शाता है कि प्रकाश तरंगें हैं:
A) अनुदैर्ध्य
B) अनुप्रस्थ
C) यांत्रिक
D) स्थिर
सही उत्तर: B) अनुप्रस्थ

8. यदि यंग के द्वि-झिरी प्रयोग में, पूरे उपकरण को पानी (अपवर्तनांक μ) में डुबो दिया जाए, तो फ्रिंज चौड़ाई पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
A) बढ़ जाएगी
B) घट जाएगी
C) अपरिवर्तित रहेगी
D) शून्य हो जाएगी
सही उत्तर: B) घट जाएगी (क्योंकि पानी में λ' = λ/μ, और β ∝ λ)

9. विवर्तन की घटना में, केंद्रीय उच्चिष्ठ की तीव्रता गौण उच्चिष्ठों की तुलना में ______ होती है।
A) कम
B) समान
C) अधिक
D) कभी कम, कभी अधिक
सही उत्तर: C) अधिक

10. ब्रूस्टर कोण (ip) पर, परावर्तित प्रकाश और अपवर्तित प्रकाश के बीच का कोण कितना होता है?
A) 0°
B) 45°
C) 90°
D) 180°
सही उत्तर: C) 90°


यह नोट्स और प्रश्न आपको 'तरंग प्रकाशिकी' अध्याय की गहरी समझ प्रदान करेंगे और आपकी सरकारी परीक्षा की तैयारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। शुभकामनाएँ!

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