Class 12 Physics Notes Chapter 11 (Chapter 11) – Examplar Problems (Hindi) Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम भौतिकी के अध्याय 11, 'विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति' का विस्तृत अध्ययन करेंगे, जो आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह अध्याय प्रकाश और द्रव्य के व्यवहार की गहरी समझ प्रदान करता है, जहाँ वे कभी कण तो कभी तरंग के रूप में व्यवहार करते हैं।
अध्याय 11: विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति (Dual Nature of Radiation and Matter)
यह अध्याय प्रकाश और द्रव्य दोनों की तरंग और कण प्रकृति को समझने पर केंद्रित है। पारंपरिक रूप से प्रकाश को तरंग माना जाता था, लेकिन कुछ परिघटनाएँ (जैसे प्रकाश-विद्युत प्रभाव) इसकी कण प्रकृति को दर्शाती हैं। इसी प्रकार, द्रव्य को कण माना जाता था, लेकिन डी-ब्रोग्ली ने द्रव्य की तरंग प्रकृति का प्रस्ताव दिया, जिसे बाद में डेविसन-जर्मर प्रयोग द्वारा सत्यापित किया गया।
1. इलेक्ट्रॉन उत्सर्जन (Electron Emission)
धातु की सतह से इलेक्ट्रॉनों के उत्सर्जन की प्रक्रिया को इलेक्ट्रॉन उत्सर्जन कहते हैं। इलेक्ट्रॉनों को धातु की सतह से बाहर निकालने के लिए एक निश्चित न्यूनतम ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
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कार्य फलन ($\phi_0$ या $W_0$): यह धातु की सतह से एक इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा है। इसका मान धातु की प्रकृति और उसकी सतह की स्थिति पर निर्भर करता है। इसे इलेक्ट्रॉन-वोल्ट (eV) में मापा जाता है।
- $1 \text{ eV} = 1.602 \times 10^{-19} \text{ जूल}$
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इलेक्ट्रॉन उत्सर्जन के प्रकार:
- तापायनिक उत्सर्जन (Thermionic Emission): धातु को गर्म करने पर पर्याप्त तापीय ऊर्जा प्राप्त करके इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होते हैं।
- क्षेत्र उत्सर्जन (Field Emission): धातु पर एक बहुत प्रबल विद्युत क्षेत्र (लगभग $10^8 \text{ V/m}$) लगाने पर इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होते हैं।
- प्रकाश-विद्युत उत्सर्जन (Photoelectric Emission): धातु की सतह पर उपयुक्त आवृत्ति का प्रकाश डालने पर इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होते हैं।
- द्वितीयक उत्सर्जन (Secondary Emission): जब उच्च वेग वाले इलेक्ट्रॉन धातु की सतह से टकराते हैं, तो वे सतह से अन्य इलेक्ट्रॉनों को उत्सर्जित करते हैं।
2. प्रकाश-विद्युत प्रभाव (Photoelectric Effect)
यह वह परिघटना है जिसमें उपयुक्त आवृत्ति के प्रकाश के धातु की सतह पर आपतित होने पर इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होते हैं। इन उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों को प्रकाश-इलेक्ट्रॉन (photoelectrons) और इस धारा को प्रकाश-विद्युत धारा (photoelectric current) कहते हैं।
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हर्ट्ज़ और लेनार्ड के प्रेक्षण:
- हर्ट्ज़ ने पराबैंगनी प्रकाश द्वारा चिंगारी विसर्जन नलिका में चिंगारी के प्रबलन का अवलोकन किया।
- लेनार्ड ने पाया कि जब पराबैंगनी विकिरण कैथोड पर पड़ता है, तो परिपथ में धारा प्रवाहित होती है।
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प्रकाश-विद्युत प्रभाव के प्रायोगिक अध्ययन के मुख्य परिणाम:
- प्रकाश-विद्युत धारा पर प्रकाश की तीव्रता का प्रभाव: प्रकाश-विद्युत धारा आपतित प्रकाश की तीव्रता के अनुक्रमानुपाती होती है (बशर्ते आवृत्ति देहली आवृत्ति से अधिक हो)।
- प्रकाश-विद्युत धारा पर विभव का प्रभाव:
- एनोड पर धनात्मक विभव बढ़ाने पर धारा बढ़ती है और एक निश्चित विभव पर संतृप्त हो जाती है (संतृप्ति धारा)।
- एनोड पर ऋणात्मक विभव बढ़ाने पर धारा घटती है और एक निश्चित ऋणात्मक विभव पर शून्य हो जाती है। इस ऋणात्मक विभव को निरोधी विभव (Stopping Potential or Cut-off Potential, $V_0$) कहते हैं। यह वह न्यूनतम ऋणात्मक विभव है जो सबसे अधिक ऊर्जा वाले प्रकाश-इलेक्ट्रॉन को भी एनोड तक पहुँचने से रोक देता है।
- प्रकाश-इलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा ($K_{max}$) निरोधी विभव से संबंधित है: $K_{max} = eV_0$
- निरोधी विभव पर आपतित प्रकाश की आवृत्ति का प्रभाव: निरोधी विभव आपतित प्रकाश की आवृत्ति के साथ रैखिक रूप से बढ़ता है, लेकिन यह प्रकाश की तीव्रता पर निर्भर नहीं करता है।
- देहली आवृत्ति (Threshold Frequency, $\nu_0$): यह आपतित प्रकाश की वह न्यूनतम आवृत्ति है, जिससे कम आवृत्ति पर कोई प्रकाश-इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित नहीं होता, चाहे प्रकाश की तीव्रता कितनी भी अधिक क्यों न हो। यह प्रत्येक धातु के लिए एक विशिष्ट गुण है।
- देहली तरंगदैर्ध्य (Threshold Wavelength, $\lambda_0$): यह आपतित प्रकाश की वह अधिकतम तरंगदैर्ध्य है, जिससे अधिक तरंगदैर्ध्य पर कोई प्रकाश-इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित नहीं होता। $\lambda_0 = c/\nu_0$
- तात्कालिक प्रक्रिया (Instantaneous Process): प्रकाश-विद्युत उत्सर्जन एक तात्कालिक प्रक्रिया है। प्रकाश के धातु की सतह पर आपतित होने और इलेक्ट्रॉन के उत्सर्जन के बीच कोई उल्लेखनीय समय अंतराल नहीं होता है (लगभग $10^{-9}$ सेकंड से भी कम)।
3. आइंस्टीन का प्रकाश-विद्युत समीकरण (Einstein's Photoelectric Equation)
आइंस्टीन ने प्रकाश-विद्युत प्रभाव की व्याख्या प्रकाश की कण प्रकृति (फोटॉन सिद्धांत) के आधार पर की।
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फोटॉन की अवधारणा:
- प्रकाश ऊर्जा के छोटे-छोटे पैकेटों या क्वांटा के रूप में यात्रा करता है, जिन्हें फोटॉन कहते हैं।
- प्रत्येक फोटॉन की ऊर्जा $E = h\nu$ होती है, जहाँ $h$ प्लांक नियतांक ($6.626 \times 10^{-34} \text{ Js}$) है और $\nu$ प्रकाश की आवृत्ति है।
- एक फोटॉन एक इलेक्ट्रॉन को अपनी पूरी ऊर्जा दे देता है।
- यदि फोटॉन की ऊर्जा कार्य फलन से अधिक है, तो इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होता है।
-
आइंस्टीन का प्रकाश-विद्युत समीकरण:
- $h\nu = \phi_0 + K_{max}$
- जहाँ:
- $h\nu$: आपतित फोटॉन की ऊर्जा
- $\phi_0$: धातु का कार्य फलन ($h\nu_0$)
- $K_{max}$: उत्सर्जित प्रकाश-इलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा
- इस समीकरण को ऐसे भी लिखा जा सकता है: $h\nu = h\nu_0 + eV_0$
- अतः, $eV_0 = h\nu - h\nu_0$ या $V_0 = (h/e)\nu - (h/e)\nu_0$
- यह समीकरण दर्शाता है कि निरोधी विभव $V_0$ आवृत्ति $\nu$ के साथ रैखिक रूप से बढ़ता है।
4. विकिरण की कणीय प्रकृति: फोटॉन (Particle Nature of Radiation: Photon)
फोटॉन प्रकाश की कण प्रकृति को दर्शाता है।
- फोटॉन के गुण:
- फोटॉन विद्युत उदासीन होते हैं।
- वे प्रकाश की चाल ($c$) से चलते हैं।
- फोटॉन की ऊर्जा $E = h\nu = hc/\lambda$ होती है।
- फोटॉन का विराम द्रव्यमान शून्य होता है।
- फोटॉन का संवेग $p = E/c = h\nu/c = h/\lambda$ होता है।
- फोटॉन, इलेक्ट्रॉन जैसे आवेशित कणों द्वारा विक्षेपित नहीं होते हैं।
- पदार्थ के साथ अन्योन्य क्रिया में, फोटॉन की ऊर्जा और संवेग संरक्षित रहते हैं।
5. द्रव्य की तरंग प्रकृति (Wave Nature of Matter)
डी-ब्रोग्ली ने 1924 में प्रस्तावित किया कि जिस प्रकार प्रकाश में द्वैत प्रकृति होती है, उसी प्रकार द्रव्य कणों (जैसे इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन) में भी तरंग जैसी प्रकृति होती है।
- डी-ब्रोग्ली परिकल्पना (De Broglie Hypothesis): गतिमान कणों से संबद्ध तरंगों को द्रव्य तरंगें (matter waves) या डी-ब्रोग्ली तरंगें कहते हैं।
- डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य ($\lambda$): एक $m$ द्रव्यमान और $v$ वेग से गतिमान कण से संबद्ध तरंगदैर्ध्य निम्न द्वारा दी जाती है:
- $\lambda = h/p = h/mv$
- जहाँ $p = mv$ कण का संवेग है।
- ऊर्जा के पदों में डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य:
- यदि कण की गतिज ऊर्जा $K$ है, तो $K = p^2/2m \Rightarrow p = \sqrt{2mK}$
- तो, $\lambda = h/\sqrt{2mK}$
- आवेशित कणों के लिए डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य (जैसे इलेक्ट्रॉन):
- यदि एक आवेशित कण (आवेश $q$, द्रव्यमान $m$) को $V$ विभव से त्वरित किया जाता है, तो उसकी गतिज ऊर्जा $K = qV$ होती है।
- तो, $\lambda = h/\sqrt{2mqV}$
- इलेक्ट्रॉन के लिए: (जहाँ $m_e = 9.1 \times 10^{-31} \text{ kg}$, $e = 1.6 \times 10^{-19} \text{ C}$, $h = 6.626 \times 10^{-34} \text{ Js}$)
- $\lambda = \frac{12.27}{\sqrt{V}} \text{ Å}$ (एंगस्ट्रॉम)
- यह सूत्र दर्शाता है कि इलेक्ट्रॉन की डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य त्वरित विभव के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
6. डेविसन-जर्मर प्रयोग (Davisson-Germer Experiment)
यह प्रयोग डी-ब्रोग्ली की द्रव्य तरंगों की परिकल्पना का प्रायोगिक सत्यापन था।
- प्रयोग: डेविसन और जर्मर ने निकेल क्रिस्टल द्वारा इलेक्ट्रॉनों के विवर्तन का अध्ययन किया।
- निष्कर्ष: उन्होंने पाया कि इलेक्ट्रॉन पुंज निकेल क्रिस्टल से विवर्तित होता है, जिससे एक विवर्तन पैटर्न बनता है। यह पैटर्न एक्स-रे विवर्तन पैटर्न के समान था, जो यह दर्शाता है कि इलेक्ट्रॉन भी तरंगों की तरह व्यवहार करते हैं।
- महत्व: इस प्रयोग ने स्पष्ट रूप से द्रव्य की तरंग प्रकृति की पुष्टि की और क्वांटम यांत्रिकी के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ।
7. तरंग-कण द्वैतता (Wave-Particle Duality)
यह अवधारणा बताती है कि प्रकाश और द्रव्य दोनों ही कुछ परिघटनाओं में कणों की तरह और कुछ अन्य परिघटनाओं में तरंगों की तरह व्यवहार करते हैं। कोई भी एक मॉडल (कण या तरंग) सभी परिघटनाओं की व्याख्या नहीं कर सकता। यह प्रकृति की एक मूलभूत विशेषता है।
महत्वपूर्ण सूत्र (Important Formulas):
- कार्य फलन: $\phi_0 = h\nu_0 = hc/\lambda_0$
- फोटॉन की ऊर्जा: $E = h\nu = hc/\lambda$
- प्रकाश-इलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा: $K_{max} = eV_0$
- आइंस्टीन का प्रकाश-विद्युत समीकरण: $h\nu = \phi_0 + K_{max}$ या $h\nu = h\nu_0 + eV_0$
- फोटॉन का संवेग: $p = E/c = h\nu/c = h/\lambda$
- डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य: $\lambda = h/p = h/mv$
- गतिज ऊर्जा के पदों में डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य: $\lambda = h/\sqrt{2mK}$
- त्वरित इलेक्ट्रॉन के लिए डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य: $\lambda = h/\sqrt{2me V} = \frac{12.27}{\sqrt{V}} \text{ Å}$
सरकारी परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु:
- कार्य फलन, देहली आवृत्ति, निरोधी विभव की परिभाषाएँ।
- प्रकाश-विद्युत प्रभाव के नियम (विशेषकर तीव्रता, आवृत्ति और निरोधी विभव के संबंध)।
- आइंस्टीन के प्रकाश-विद्युत समीकरण का अनुप्रयोग।
- फोटॉन के गुण।
- डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य का सूत्र और इसके अनुप्रयोग (विशेषकर इलेक्ट्रॉन के लिए)।
- डेविसन-जर्मर प्रयोग का महत्व और इसका निष्कर्ष।
- प्लांक नियतांक ($h$), इलेक्ट्रॉन का आवेश ($e$), प्रकाश की चाल ($c$) के मान याद रखें।
बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs):
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धातु की सतह से एक इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा क्या कहलाती है?
a) गतिज ऊर्जा
b) स्थितिज ऊर्जा
c) कार्य फलन
d) देहली ऊर्जा -
प्रकाश-विद्युत प्रभाव में, उत्सर्जित प्रकाश-इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा किस पर निर्भर करती है?
a) प्रकाश की तीव्रता पर
b) प्रकाश की आवृत्ति पर
c) प्रकाश स्रोत की दूरी पर
d) धातु के क्षेत्रफल पर -
आइंस्टीन के प्रकाश-विद्युत समीकरण के अनुसार, यदि आपतित प्रकाश की आवृत्ति देहली आवृत्ति से कम है, तो:
a) प्रकाश-इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होंगे, लेकिन उनकी गतिज ऊर्जा कम होगी।
b) प्रकाश-इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होंगे, लेकिन केवल उच्च तीव्रता पर।
c) कोई प्रकाश-इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित नहीं होगा।
d) प्रकाश-इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होंगे, लेकिन तुरंत वापस अवशोषित हो जाएंगे। -
फोटॉन का विराम द्रव्यमान कितना होता है?
a) इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान के बराबर
b) प्रोटॉन के द्रव्यमान के बराबर
c) शून्य
d) अनंत -
डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य का सूत्र क्या है?
a) $\lambda = mv/h$
b) $\lambda = h/mv$
c) $\lambda = E/h$
d) $\lambda = h/c$ -
एक इलेक्ट्रॉन को $V$ विभव से त्वरित करने पर उसकी डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य किसके समानुपाती होती है?
a) $V$
b) $V^2$
c) $1/\sqrt{V}$
d) $1/V$ -
डेविसन-जर्मर प्रयोग ने किसकी पुष्टि की?
a) प्रकाश की कण प्रकृति की
b) प्रकाश की तरंग प्रकृति की
c) द्रव्य की तरंग प्रकृति की
d) द्रव्य की कण प्रकृति की -
यदि किसी धातु का कार्य फलन $2 \text{ eV}$ है, तो उसकी देहली तरंगदैर्ध्य लगभग कितनी होगी? ($h = 6.6 \times 10^{-34} \text{ Js}$, $c = 3 \times 10^8 \text{ m/s}$, $1 \text{ eV} = 1.6 \times 10^{-19} \text{ J}$)
a) $620 \text{ nm}$
b) $413 \text{ nm}$
c) $310 \text{ nm}$
d) $207 \text{ nm}$ -
प्रकाश-विद्युत प्रभाव में, निरोधी विभव किस पर निर्भर करता है?
a) आपतित प्रकाश की तीव्रता पर
b) आपतित प्रकाश की आवृत्ति पर
c) कैथोड और एनोड के बीच की दूरी पर
d) उत्सर्जक धातु के क्षेत्रफल पर -
फोटॉन का संवेग क्या होता है?
a) $h\nu$
b) $h/\lambda$
c) $hc/\lambda$
d) $h\lambda/c$
उत्तर कुंजी (Answer Key):
- c) कार्य फलन
- b) प्रकाश की आवृत्ति पर
- c) कोई प्रकाश-इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित नहीं होगा।
- c) शून्य
- b) $\lambda = h/mv$
- c) $1/\sqrt{V}$
- c) द्रव्य की तरंग प्रकृति की
- a) $620 \text{ nm}$ (गणना: $\lambda_0 = hc/\phi_0 = (6.6 \times 10^{-34} \times 3 \times 10^8) / (2 \times 1.6 \times 10^{-19}) = 6.1875 \times 10^{-7} \text{ m} \approx 620 \text{ nm}$)
- b) आपतित प्रकाश की आवृत्ति पर
- b) $h/\lambda$
मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक सिद्ध होंगे। इस अध्याय की अवधारणाओं को भली-भांति समझें और सूत्रों का अभ्यास करें। शुभकामनाएँ!