Class 12 Physics Notes Chapter 12 (Chapter 12) – Examplar Problems (Hindi) Book

Examplar Problems (Hindi)
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम भौतिकी के अध्याय 12 'परमाणु' का विस्तृत अध्ययन करेंगे, जो आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अध्याय में हम परमाणु की संरचना, उसके विभिन्न मॉडलों और उनसे संबंधित महत्वपूर्ण अवधारणाओं पर गहनता से विचार करेंगे।


अध्याय 12: परमाणु

1. रदरफोर्ड का अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग (Rutherford's Alpha-particle Scattering Experiment)

अर्नेस्ट रदरफोर्ड और उनके शिष्यों (गाइगर और मार्सडेन) ने 1911 में अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग किया, जिसने परमाणु की संरचना के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।

  • प्रयोग की व्यवस्था:

    • एक रेडियोधर्मी स्रोत से उत्सर्जित अल्फा-कणों (हीलियम नाभिक, $4_2\text{He}{2+}$) की एक बारीक किरण पुंज को एक बहुत पतली सोने की पन्नी (लगभग $2.1 \times 10^{-7}$ m मोटी) पर आपतित किया गया।
    • प्रकीर्णित अल्फा-कणों का पता लगाने के लिए एक घूर्णनशील जिंक सल्फाइड (ZnS) स्क्रीन और एक सूक्ष्मदर्शी का उपयोग किया गया। जब अल्फा-कण ZnS स्क्रीन से टकराते थे, तो एक क्षणिक चमक (स्फुरदीप्ति) उत्पन्न होती थी।
  • प्रेक्षण (Observations):

    1. अधिकांश अल्फा-कण सोने की पन्नी से सीधे (बिना विचलित हुए) गुजर गए।
    2. कुछ अल्फा-कण छोटे कोणों से विचलित हुए।
    3. लगभग 8000 में से 1 अल्फा-कण $90^\circ$ से अधिक के कोण पर विचलित हुआ।
    4. लगभग 20,000 में से 1 अल्फा-कण $180^\circ$ के कोण पर वापस लौट आया (अर्थात जिस मार्ग से गया, उसी मार्ग से वापस आया)।
  • निष्कर्ष (Conclusions):

    1. परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त है: चूंकि अधिकांश अल्फा-कण सीधे निकल गए, इसका अर्थ है कि परमाणु के अंदर बहुत खाली जगह है।
    2. परमाणु का समस्त धनावेश तथा लगभग समस्त द्रव्यमान एक छोटे से भाग में केंद्रित है: बहुत कम अल्फा-कणों का बड़े कोणों पर प्रकीर्णन (और कुछ का वापस लौटना) यह दर्शाता है कि परमाणु का धनावेश और अधिकांश द्रव्यमान एक बहुत छोटे, सघन केंद्रीय भाग में केंद्रित है, जिसे नाभिक (Nucleus) कहा गया।
    3. नाभिक का आकार: नाभिक का आकार परमाणु के आकार की तुलना में बहुत छोटा होता है। परमाणु का आकार लगभग $10^{-10}$ m होता है, जबकि नाभिक का आकार लगभग $10^{-15}$ m से $10^{-14}$ m की कोटि का होता है।
    4. इलेक्ट्रॉन की स्थिति: इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर परिक्रमा करते हैं।
  • संघट्ट प्राचल (Impact Parameter, b): यह अल्फा-कण के प्रारंभिक वेग सदिश की नाभिक के केंद्र से लंबवत दूरी है।

    • छोटे संघट्ट प्राचल के लिए प्रकीर्णन कोण बड़ा होता है।
    • बड़े संघट्ट प्राचल के लिए प्रकीर्णन कोण छोटा होता है।
    • जब $b=0$ (सीधा नाभिक की ओर), तो प्रकीर्णन कोण $180^\circ$ होता है।
  • निकटतम पहुँच की दूरी (Distance of Closest Approach, $r_0$): जब एक अल्फा-कण सीधे नाभिक की ओर बढ़ता है, तो उसकी गतिज ऊर्जा पूरी तरह से विद्युत स्थितिज ऊर्जा में बदल जाती है और वह रुककर $180^\circ$ पर वापस लौट जाता है। यह न्यूनतम दूरी, जहाँ अल्फा-कण नाभिक के सबसे करीब आता है, निकटतम पहुँच की दूरी कहलाती है।

    • $K = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{(2e)(Ze)}{r_0}$, जहाँ $K$ अल्फा-कण की प्रारंभिक गतिज ऊर्जा, $2e$ अल्फा-कण का आवेश, $Ze$ नाभिक का आवेश।

2. रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल (Rutherford's Model of Atom)

रदरफोर्ड के प्रयोग के आधार पर उन्होंने परमाणु का एक मॉडल प्रस्तुत किया:

  • परमाणु का अधिकांश द्रव्यमान और समस्त धनावेश उसके केंद्र में एक बहुत छोटे भाग में केंद्रित होता है, जिसे नाभिक कहते हैं।

  • इलेक्ट्रॉन इस नाभिक के चारों ओर वृत्ताकार कक्षाओं में चक्कर लगाते हैं, ठीक वैसे ही जैसे ग्रह सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते हैं।

  • नाभिक और इलेक्ट्रॉनों के बीच स्थिरवैद्युत आकर्षण बल आवश्यक अभिकेन्द्रीय बल प्रदान करता है।

  • परमाणु वैद्युत रूप से उदासीन होता है क्योंकि नाभिक पर धनावेश इलेक्ट्रॉनों के कुल ऋणावेश के बराबर होता है।

  • कमियाँ (Limitations of Rutherford's Model):

    1. परमाणु के स्थायित्व की व्याख्या नहीं कर सका: मैक्सवेल के विद्युतचुंबकीय सिद्धांत के अनुसार, त्वरित आवेशित कण (जैसे नाभिक के चारों ओर घूमता हुआ इलेक्ट्रॉन) ऊर्जा का विकिरण करता है। यदि इलेक्ट्रॉन लगातार ऊर्जा का विकिरण करेगा, तो उसकी ऊर्जा कम होती जाएगी, और वह सर्पिलाकार मार्ग में नाभिक में गिर जाएगा। इससे परमाणु अस्थिर हो जाएगा, जबकि परमाणु स्थिर होते हैं।
    2. रेखीय स्पेक्ट्रम की व्याख्या नहीं कर सका: यदि इलेक्ट्रॉन लगातार ऊर्जा का विकिरण करता है, तो उसे एक सतत स्पेक्ट्रम उत्सर्जित करना चाहिए, जबकि परमाणु रेखीय स्पेक्ट्रम (असतत ऊर्जा उत्सर्जन) उत्सर्जित करते हैं।

3. बोर का परमाणु मॉडल (Bohr's Model of Atom)

नील्स बोर ने 1913 में रदरफोर्ड मॉडल की कमियों को दूर करने के लिए और हाइड्रोजन परमाणु के स्पेक्ट्रम की व्याख्या करने के लिए क्वांटम यांत्रिकी की अवधारणाओं का उपयोग करते हुए अपना मॉडल प्रस्तुत किया।

  • बोर की परिकल्पनाएँ (Bohr's Postulates):

    1. स्थायी कक्षाएँ (Stationary Orbits): इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर केवल कुछ निश्चित वृत्ताकार कक्षाओं में ही बिना ऊर्जा का विकिरण किए घूम सकते हैं। इन कक्षाओं को स्थायी कक्षाएँ या अनुमत कक्षाएँ कहते हैं। प्रत्येक स्थायी कक्षा की एक निश्चित ऊर्जा होती है।
    2. कोणीय संवेग का प्रमाणीकरण (Quantization of Angular Momentum): इन स्थायी कक्षाओं में इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग ($L$) $h/2\pi$ का पूर्णांक गुणज होता है।
      $L = mvr = n \frac{h}{2\pi}$, जहाँ $n = 1, 2, 3, ...$ (मुख्य क्वांटम संख्या), $h$ प्लांक नियतांक।
    3. ऊर्जा संक्रमण (Energy Transitions): इलेक्ट्रॉन जब एक स्थायी कक्षा से दूसरी स्थायी कक्षा में कूदता है, तो ऊर्जा का उत्सर्जन या अवशोषण होता है।
      • जब इलेक्ट्रॉन उच्च ऊर्जा स्तर ($E_i$) से निम्न ऊर्जा स्तर ($E_f$) में कूदता है, तो ऊर्जा का उत्सर्जन एक फोटॉन के रूप में होता है, जिसकी ऊर्जा $h\nu = E_i - E_f$.
      • जब इलेक्ट्रॉन निम्न ऊर्जा स्तर से उच्च ऊर्जा स्तर में जाता है, तो वह ऊर्जा का अवशोषण करता है।
  • बोर मॉडल के परिणाम (Consequences of Bohr's Model) (हाइड्रोजन परमाणु के लिए):

    • स्थायी कक्षाओं की त्रिज्या ($r_n$):
      $r_n = \frac{n^2 h^2 \epsilon_0}{\pi m e^2} = n^2 a_0$
      जहाँ $a_0 = \frac{h^2 \epsilon_0}{\pi m e^2} \approx 0.529 \text{ Å}$ (बोर त्रिज्या)।
      अर्थात, कक्षा की त्रिज्या मुख्य क्वांटम संख्या के वर्ग के अनुक्रमानुपाती होती है ($r_n \propto n^2$)।
    • स्थायी कक्षाओं में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा ($E_n$):
      $E_n = -\frac{m e^4}{8 \epsilon_0^2 h^2 n^2} = -\frac{13.6}{n^2} \text{ eV}$
      ऋणात्मक चिन्ह दर्शाता है कि इलेक्ट्रॉन नाभिक से बंधा हुआ है। $n=1$ के लिए $E_1 = -13.6 \text{ eV}$ (मूल अवस्था ऊर्जा), $n=2$ के लिए $E_2 = -3.4 \text{ eV}$, $n=3$ के लिए $E_3 = -1.51 \text{ eV}$, इत्यादि।
      जैसे-जैसे $n$ बढ़ता है, ऊर्जा का मान शून्य के करीब आता जाता है। $n=\infty$ पर $E_\infty = 0 \text{ eV}$ (मुक्त इलेक्ट्रॉन)।
    • आयनीकरण ऊर्जा (Ionization Energy): वह न्यूनतम ऊर्जा जो एक इलेक्ट्रॉन को परमाणु से मुक्त करने के लिए आवश्यक होती है। हाइड्रोजन परमाणु के लिए यह $13.6 \text{ eV}$ है।
  • हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम (Hydrogen Spectrum):
    जब हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन उच्च ऊर्जा स्तर से निम्न ऊर्जा स्तर में कूदता है, तो विशिष्ट तरंगदैर्ध्य के फोटॉन उत्सर्जित होते हैं, जिससे एक रेखीय स्पेक्ट्रम प्राप्त होता है।
    उत्सर्जित फोटॉन की तरंगदैर्ध्य $(\lambda)$ के लिए रिडबर्ग सूत्र:
    $\frac{1}{\lambda} = R \left( \frac{1}{n_f^2} - \frac{1}{n_i^2} \right)$
    जहाँ $R$ रिडबर्ग नियतांक ($R = 1.097 \times 10^7 \text{ m}^{-1}$), $n_i$ प्रारंभिक ऊर्जा स्तर, $n_f$ अंतिम ऊर्जा स्तर।

    विभिन्न स्पेक्ट्रमी श्रेणियाँ:

    1. लाइमन श्रेणी (Lyman Series): जब इलेक्ट्रॉन किसी भी उच्च ऊर्जा स्तर ($n_i = 2, 3, 4, ...$) से $n_f = 1$ (मूल अवस्था) में कूदते हैं।
      • क्षेत्र: पराबैंगनी (Ultraviolet)
      • सबसे छोटी तरंगदैर्ध्य (श्रेणी सीमा): $n_i = \infty \to n_f = 1 \implies \lambda_{min} = 91.2 \text{ nm}$
      • सबसे बड़ी तरंगदैर्ध्य: $n_i = 2 \to n_f = 1 \implies \lambda_{max} = 121.6 \text{ nm}$
    2. बामर श्रेणी (Balmer Series): जब इलेक्ट्रॉन किसी भी उच्च ऊर्जा स्तर ($n_i = 3, 4, 5, ...$) से $n_f = 2$ में कूदते हैं।
      • क्षेत्र: दृश्य (Visible)
      • सबसे छोटी तरंगदैर्ध्य (श्रेणी सीमा): $n_i = \infty \to n_f = 2 \implies \lambda_{min} = 364.6 \text{ nm}$
      • सबसे बड़ी तरंगदैर्ध्य: $n_i = 3 \to n_f = 2 \implies \lambda_{max} = 656.3 \text{ nm}$ (H-अल्फा रेखा)
    3. पाश्चन श्रेणी (Paschen Series): जब इलेक्ट्रॉन किसी भी उच्च ऊर्जा स्तर ($n_i = 4, 5, 6, ...$) से $n_f = 3$ में कूदते हैं।
      • क्षेत्र: अवरक्त (Infrared)
    4. ब्रैकेट श्रेणी (Brackett Series): जब इलेक्ट्रॉन किसी भी उच्च ऊर्जा स्तर ($n_i = 5, 6, 7, ...$) से $n_f = 4$ में कूदते हैं।
      • क्षेत्र: अवरक्त (Infrared)
    5. फुंड श्रेणी (Pfund Series): जब इलेक्ट्रॉन किसी भी उच्च ऊर्जा स्तर ($n_i = 6, 7, 8, ...$) से $n_f = 5$ में कूदते हैं।
      • क्षेत्र: अवरक्त (Infrared)
  • बोर मॉडल की कमियाँ (Limitations of Bohr's Model):

    1. केवल एकल-इलेक्ट्रॉन परमाणुओं के लिए मान्य: यह मॉडल केवल हाइड्रोजन, He$^+$, Li$^{2+}$ जैसे एकल-इलेक्ट्रॉन परमाणुओं या आयनों के लिए ही सफलतापूर्वक लागू होता है। बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणुओं के स्पेक्ट्रम की व्याख्या नहीं कर सका।
    2. स्पेक्ट्रमी रेखाओं की तीव्रता की व्याख्या नहीं कर सका: यह नहीं बता सका कि कुछ स्पेक्ट्रमी रेखाएँ दूसरों की तुलना में अधिक तीव्र क्यों होती हैं।
    3. फाइन स्पेक्ट्रम (सूक्ष्म संरचना) की व्याख्या नहीं कर सका: उच्च विभेदन क्षमता वाले स्पेक्ट्रोस्कोप से देखने पर पता चला कि कुछ स्पेक्ट्रमी रेखाएँ वास्तव में कई निकटवर्ती रेखाओं से बनी होती हैं। बोर मॉडल इसकी व्याख्या नहीं कर सका।
    4. ज़ीमान प्रभाव (Zeeman Effect) और स्टार्क प्रभाव (Stark Effect) की व्याख्या नहीं कर सका:
      • ज़ीमान प्रभाव: जब परमाणु को एक बाहरी चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो स्पेक्ट्रमी रेखाएँ कई घटकों में विभाजित हो जाती हैं।
      • स्टार्क प्रभाव: जब परमाणु को एक बाहरी विद्युत क्षेत्र में रखा जाता है, तो स्पेक्ट्रमी रेखाएँ कई घटकों में विभाजित हो जाती हैं।
    5. कक्षाओं की वृत्ताकार प्रकृति की धारणा: बोर ने वृत्ताकार कक्षाओं की धारणा की, जबकि सोमरफेल्ड ने दीर्घवृत्ताकार कक्षाओं का प्रस्ताव दिया।
    6. क्वांटमीकरण की अंतर्निहित व्याख्या नहीं: बोर ने कोणीय संवेग के प्रमाणीकरण को एक अभिगृहीत के रूप में प्रस्तुत किया, लेकिन इसकी कोई अंतर्निहित भौतिक व्याख्या नहीं दी।

4. डी-ब्रोग्ली की परिकल्पना (de Broglie's Hypothesis) और बोर का द्वितीय अभिगृहीत

लुई डी-ब्रोग्ली ने 1924 में प्रस्तावित किया कि इलेक्ट्रॉन जैसे कणों में तरंग-कण द्वैत प्रकृति होती है। उन्होंने बोर के द्वितीय अभिगृहीत (कोणीय संवेग का प्रमाणीकरण) की व्याख्या तरंग प्रकृति के आधार पर की।

  • डी-ब्रोग्ली के अनुसार, एक वृत्ताकार कक्षा में घूमने वाले इलेक्ट्रॉन की तरंगदैर्ध्य $\lambda = h/mv$ होनी चाहिए।
  • उन्होंने तर्क दिया कि इलेक्ट्रॉन केवल उन्हीं वृत्ताकार कक्षाओं में स्थायी रूप से रह सकते हैं जिनकी परिधि इलेक्ट्रॉन की डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य का एक पूर्णांक गुणज हो।
    $2\pi r = n\lambda$
    $2\pi r = n \frac{h}{mv}$
    $mvr = n \frac{h}{2\pi}$
    यह बोर के कोणीय संवेग के प्रमाणीकरण के नियम के समान है। इस प्रकार, डी-ब्रोग्ली ने बोर के प्रमाणीकरण की स्थिति को एक तार्किक आधार प्रदान किया।

5. एक्स-किरणें (X-rays)

एक्स-किरणें उच्च ऊर्जा वाली विद्युतचुंबकीय तरंगें हैं, जिनकी तरंगदैर्ध्य $0.1 \text{ Å}$ से $100 \text{ Å}$ तक होती है।

  • उत्पत्ति: जब उच्च ऊर्जा वाले इलेक्ट्रॉन (जो एक उच्च विभवांतर द्वारा त्वरित होते हैं) किसी भारी धातु (जैसे टंगस्टन, मोलिब्डेनम) के लक्ष्य से टकराते हैं, तो एक्स-किरणें उत्पन्न होती हैं।

  • गुणधर्म:

    • विद्युतचुंबकीय तरंगें हैं।
    • प्रकाश की चाल से चलती हैं।
    • भेदन क्षमता बहुत अधिक होती है।
    • विद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों द्वारा विक्षेपित नहीं होती हैं।
    • प्रतिदीप्ति और स्फुरदीप्ति उत्पन्न करती हैं।
    • आयनीकरण प्रभाव रखती हैं।
  • एक्स-किरण स्पेक्ट्रम: इसमें दो भाग होते हैं:

    1. सतत एक्स-किरणें (Continuous X-rays) या ब्रेम्सस्ट्रालुंग (Bremsstrahlung): जब त्वरित इलेक्ट्रॉन लक्ष्य परमाणुओं के नाभिक के पास से गुजरते हैं, तो वे नाभिक के विद्युत क्षेत्र द्वारा धीमे हो जाते हैं और अपनी गतिज ऊर्जा का कुछ हिस्सा एक्स-किरण फोटॉन के रूप में उत्सर्जित करते हैं। उत्सर्जित फोटॉन की ऊर्जा निरंतर होती है, जिससे एक सतत स्पेक्ट्रम प्राप्त होता है।
      • न्यूनतम तरंगदैर्ध्य (Cut-off Wavelength, $\lambda_{min}$): यदि एक इलेक्ट्रॉन अपनी पूरी गतिज ऊर्जा को एक फोटॉन में परिवर्तित कर दे, तो उस फोटॉन की ऊर्जा अधिकतम होगी और तरंगदैर्ध्य न्यूनतम।
        $eV = h\nu_{max} = \frac{hc}{\lambda_{min}}$
        जहाँ $V$ त्वरित विभव। यह ड्यूएन-हंट नियम (Duane-Hunt Law) कहलाता है।
    2. अभिलाक्षणिक एक्स-किरणें (Characteristic X-rays): जब एक उच्च ऊर्जा वाला इलेक्ट्रॉन लक्ष्य परमाणु के आंतरिक कोश (जैसे K या L) से एक इलेक्ट्रॉन को बाहर निकाल देता है, तो परमाणु उत्तेजित हो जाता है। उच्च ऊर्जा स्तर से एक इलेक्ट्रॉन इस रिक्त स्थान को भरने के लिए कूदता है, जिससे एक विशिष्ट ऊर्जा का फोटॉन उत्सर्जित होता है। ये विशिष्ट ऊर्जाएँ लक्ष्य सामग्री के परमाणु क्रमांक पर निर्भर करती हैं, इसलिए इन्हें अभिलाक्षणिक एक्स-किरणें कहते हैं (जैसे $K_\alpha, K_\beta, L_\alpha$ आदि)।
      • मोसले का नियम (Moseley's Law): अभिलाक्षणिक एक्स-किरणों की आवृत्ति का वर्गमूल परमाणु क्रमांक ($Z$) के अनुक्रमानुपाती होता है।
        $\sqrt{\nu} = a(Z-b)$
        यह नियम परमाणु क्रमांक की अवधारणा को स्थापित करने में महत्वपूर्ण था और दिखाया कि परमाणु का मूल गुण परमाणु द्रव्यमान नहीं बल्कि परमाणु क्रमांक है।

यह अध्याय परमाणु की संरचना और उसके व्यवहार को समझने के लिए आधारभूत है। अब, आइए इस अध्याय से संबंधित 10 बहुविकल्पीय प्रश्न देखें जो आपकी परीक्षा की तैयारी में सहायक होंगे।


बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)

  1. रदरफोर्ड के अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग में, अधिकांश अल्फा-कण सोने की पन्नी से सीधे गुजर जाते हैं। यह इंगित करता है कि:
    (a) परमाणु का अधिकांश द्रव्यमान नाभिक में केंद्रित है।
    (b) परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त है।
    (c) इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर घूमते हैं।
    (d) नाभिक धनावेशित होता है।

  2. हाइड्रोजन परमाणु के लिए बोर की पहली कक्षा की त्रिज्या $a_0$ है। तीसरी उत्तेजित अवस्था में त्रिज्या क्या होगी?
    (a) $3a_0$
    (b) $9a_0$
    (c) $16a_0$
    (d) $4a_0$

  3. हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा $E_n = -\frac{13.6}{n^2} \text{ eV}$ द्वारा दी जाती है। यदि इलेक्ट्रॉन $n=3$ से $n=1$ ऊर्जा स्तर में संक्रमण करता है, तो उत्सर्जित फोटॉन की ऊर्जा क्या होगी?
    (a) $13.6 \text{ eV}$
    (b) $12.09 \text{ eV}$
    (c) $10.2 \text{ eV}$
    (d) $1.51 \text{ eV}$

  4. हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की लाइमन श्रेणी किस क्षेत्र में आती है?
    (a) दृश्य
    (b) अवरक्त
    (c) पराबैंगनी
    (d) माइक्रोवेव

  5. बोर मॉडल की एक महत्वपूर्ण सीमा यह है कि यह:
    (a) परमाणु के स्थायित्व की व्याख्या नहीं कर सका।
    (b) हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की व्याख्या नहीं कर सका।
    (c) केवल एकल-इलेक्ट्रॉन परमाणुओं के लिए ही लागू होता है।
    (d) इलेक्ट्रॉन के तरंग-कण द्वैत की व्याख्या नहीं कर सका।

  6. डी-ब्रोग्ली की परिकल्पना के अनुसार, बोर की स्थायी कक्षाओं को इस प्रकार समझा जा सकता है कि कक्षा की परिधि इलेक्ट्रॉन की डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य का एक:
    (a) आधा पूर्णांक गुणज है।
    (b) पूर्णांक गुणज है।
    (c) अपूर्णांक गुणज है।
    (d) वर्ग गुणज है।

  7. यदि हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन की मूल अवस्था ऊर्जा $-13.6 \text{ eV}$ है, तो इसकी आयनीकरण ऊर्जा क्या होगी?
    (a) $-13.6 \text{ eV}$
    (b) $13.6 \text{ eV}$
    (c) $0 \text{ eV}$
    (d) $3.4 \text{ eV}$

  8. एक्स-किरणों की न्यूनतम तरंगदैर्ध्य ($\lambda_{min}$) किसके द्वारा दी जाती है? (जहाँ $V$ त्वरित विभव है)
    (a) $hc/eV$
    (b) $eV/hc$
    (c) $h/eV$
    (d) $e/hV$

  9. मोसले का नियम ($\sqrt{\nu} = a(Z-b)$) एक्स-किरणों के किस गुण से संबंधित है?
    (a) सतत एक्स-किरणों की न्यूनतम तरंगदैर्ध्य
    (b) अभिलाक्षणिक एक्स-किरणों की आवृत्ति
    (c) एक्स-किरणों की तीव्रता
    (d) एक्स-किरणों की भेदन क्षमता

  10. हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की बामर श्रेणी में सबसे लंबी तरंगदैर्ध्य वाली रेखा किस संक्रमण से उत्पन्न होती है?
    (a) $n=2$ से $n=1$
    (b) $n=3$ से $n=2$
    (c) $n=4$ से $n=2$
    (d) $n=\infty$ से $n=2$


उत्तर कुंजी (Answer Key):

  1. (b)
  2. (c)
  3. (b)
  4. (c)
  5. (c)
  6. (b)
  7. (b)
  8. (a)
  9. (b)
  10. (b)

मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी सरकारी परीक्षा की तैयारी में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे। अपनी पढ़ाई जारी रखें और सफलता प्राप्त करें!

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By NCERT Books