Class 12 Physics Notes Chapter 15 (Chapter 15) – Examplar Problems (Hindi) Book

माननीय विद्यार्थियों,
आज हम कक्षा 12 भौतिकी के अध्याय 15 "संचार व्यवस्थाएँ" का विस्तृत अध्ययन करेंगे, जो आपकी आगामी सरकारी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह अध्याय आधुनिक तकनीक और हमारे दैनिक जीवन में उसके अनुप्रयोगों को समझने में मदद करता है। आइए, इस विषय की गहराई में उतरें और सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझें।
अध्याय 15: संचार व्यवस्थाएँ (Communication Systems)
संचार का अर्थ है सूचनाओं का एक स्थान से दूसरे स्थान तक आदान-प्रदान। एक संचार व्यवस्था वह प्रणाली है जो इस प्रक्रिया को संभव बनाती है।
1. संचार व्यवस्था के मूल अवयव (Basic Elements of Communication System)
प्रत्येक संचार व्यवस्था में तीन मूल अवयव होते हैं:
- प्रेषक (Transmitter): यह सूचना स्रोत से प्राप्त संदेश संकेत को संचार माध्यम के लिए उपयुक्त रूप में परिवर्तित करता है। इसमें ट्रांसड्यूसर, मॉडुलक, प्रवर्धक और एंटीना शामिल होते हैं।
- संचार माध्यम (Communication Channel/Medium): यह वह भौतिक पथ है जिसके माध्यम से प्रेषक से अभिग्राही तक संकेत संचरित होते हैं। यह तार, मुक्त आकाश (रेडियो तरंगें), ऑप्टिकल फाइबर आदि हो सकता है।
- अभिग्राही (Receiver): यह संचार माध्यम से प्राप्त संकेत को पुनः मूल संदेश संकेत में परिवर्तित करता है। इसमें एंटीना, प्रवर्धक, विमॉडुलक और ट्रांसड्यूसर शामिल होते हैं।
2. संचार के प्रकार (Types of Communication)
- बिंदु से बिंदु संचार (Point-to-point Communication): इसमें संचार एक प्रेषक और एक अभिग्राही के बीच होता है (जैसे टेलीफोन)।
- प्रसारण संचार (Broadcast Communication): इसमें एक प्रेषक होता है और बड़ी संख्या में अभिग्राही होते हैं (जैसे रेडियो, टेलीविजन)।
3. संचार व्यवस्था में प्रयुक्त पद (Terminology used in Communication System)
- ट्रांसड्यूसर (Transducer): यह ऊर्जा के एक रूप को दूसरे रूप में परिवर्तित करता है (जैसे माइक्रोफोन ध्वनि ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में, लाउडस्पीकर विद्युत ऊर्जा को ध्वनि ऊर्जा में)।
- संकेत (Signal): यह सूचना का विद्युत रूप है।
- एनालॉग संकेत (Analog Signal): वे संकेत जो समय के साथ लगातार बदलते रहते हैं और मानों की एक सतत सीमा रखते हैं (जैसे ध्वनि, वीडियो)।
- डिजिटल संकेत (Digital Signal): वे संकेत जो असतत मानों (आमतौर पर 0 और 1) को लेते हैं और केवल दो स्तरों (उच्च/निम्न) पर होते हैं।
- रव (Noise): यह अवांछित संकेत है जो संदेश संकेत के साथ मिलकर उसकी गुणवत्ता को प्रभावित करता है।
- क्षीणन (Attenuation): संचार माध्यम से गुजरते समय संकेत की शक्ति में कमी। यह दूरी के साथ बढ़ता है।
- प्रवर्धन (Amplification): एक इलेक्ट्रॉनिक परिपथ द्वारा संकेत की शक्ति को बढ़ाना ताकि क्षीणन के प्रभाव को दूर किया जा सके।
- परास (Range): वह अधिकतम दूरी जिस तक संकेत को पर्याप्त शक्ति के साथ प्राप्त किया जा सकता है।
- बैंड-चौड़ाई (Bandwidth): यह आवृत्तियों की वह सीमा है जिस पर एक संकेत कब्जा करता है या एक माध्यम संचरित कर सकता है।
- संदेश संकेत की बैंड-चौड़ाई:
- वाक् (Speech): 300 Hz से 3100 Hz (लगभग 2800 Hz)
- संगीत (Music): 20 Hz से 20 kHz
- वीडियो (Video): 4.2 MHz
- टेलीविजन (TV): 6 MHz (ऑडियो और वीडियो दोनों के लिए)
- संचरण माध्यम की बैंड-चौड़ाई:
- तार (Wires): 100 kHz
- मुक्त आकाश (Free Space): GHz तक (रेडियो तरंगें)
- ऑप्टिकल फाइबर: THz तक (अत्यधिक उच्च)
- संदेश संकेत की बैंड-चौड़ाई:
- मॉडुलन (Modulation): मूल संदेश संकेत (निम्न आवृत्ति) को उच्च आवृत्ति वाली वाहक तरंग (carrier wave) पर अध्यारोपित करने की प्रक्रिया।
- विमॉडुलन (Demodulation): मॉडुलित तरंग से मूल संदेश संकेत को पुनः प्राप्त करने की प्रक्रिया।
- पुनरावर्तक (Repeater): यह अभिग्राही और प्रेषक का एक संयोजन है। यह क्षीण हुए संकेत को प्राप्त करता है, उसे प्रवर्धित करता है और फिर से संचरित करता है।
4. मॉडुलन की आवश्यकता (Need for Modulation)
निम्न आवृत्ति वाले संदेश संकेतों को सीधे लंबी दूरी तक संचरित नहीं किया जा सकता क्योंकि:
- एंटीना की व्यवहार्य लंबाई (Practical length of Antenna): प्रभावी विकिरण के लिए एंटीना की लंबाई संचरित की जाने वाली तरंगदैर्ध्य (λ) के तुलनीय (कम से कम λ/4) होनी चाहिए। निम्न आवृत्ति के लिए λ बहुत अधिक होगा, जिससे एंटीना की लंबाई अव्यावहारिक रूप से बड़ी हो जाएगी।
- उदाहरण: 15 kHz ध्वनि संकेत के लिए λ = c/f = (3x108)/(15x103) = 20 km। एंटीना की लंबाई 5 km होनी चाहिए, जो संभव नहीं है।
- संकेतों का मिश्रण (Mixing of Signals): यदि कई संदेश संकेत एक साथ सीधे संचरित किए जाएं, तो वे आपस में मिल जाएंगे और उन्हें अभिग्राही पर अलग करना असंभव होगा। मॉडुलन प्रत्येक संदेश को एक अलग उच्च आवृत्ति वाहक पर रखकर इस समस्या को हल करता है।
- विकिरण की शक्ति (Power Radiated): विकिरण की शक्ति (P) आवृत्ति (f) के वर्ग के समानुपाती होती है (P ∝ f²)। निम्न आवृत्तियों पर विकिरण की शक्ति बहुत कम होगी, जिससे लंबी दूरी का संचार संभव नहीं होगा।
5. मॉडुलन के प्रकार (Types of Modulation)
मॉडुलन में, वाहक तरंग के किसी एक प्राचल (आयाम, आवृत्ति या कला) को संदेश संकेत के तात्कालिक मान के अनुसार परिवर्तित किया जाता है।
- आयाम मॉडुलन (Amplitude Modulation - AM):
- इसमें वाहक तरंग का आयाम संदेश संकेत के आयाम के अनुसार परिवर्तित होता है, जबकि आवृत्ति और कला स्थिर रहते हैं।
- मॉडुलन सूचकांक (Modulation Index, μ): यह मॉडुलन की सीमा को दर्शाता है।
μ = (आयाम में अधिकतम परिवर्तन) / (वाहक तरंग का मूल आयाम) = (A_m / A_c)
या μ = (A_max - A_min) / (A_max + A_min)
जहां A_m संदेश संकेत का आयाम और A_c वाहक तरंग का आयाम है।
प्रभावी AM संचार के लिए μ ≤ 1 होना चाहिए। यदि μ > 1, तो विरूपण (distortion) होता है। - AM तरंग का समीकरण:
वाहक तरंग: c(t) = A_c sin(ω_c t)
संदेश संकेत: m(t) = A_m sin(ω_m t)
AM तरंग: E_AM(t) = (A_c + A_m sin(ω_m t)) sin(ω_c t)
E_AM(t) = A_c (1 + μ sin(ω_m t)) sin(ω_c t)
E_AM(t) = A_c sin(ω_c t) + (μA_c/2) cos((ω_c - ω_m)t) - (μA_c/2) cos((ω_c + ω_m)t) - पार्श्व बैंड (Sidebands): AM तरंग में तीन घटक होते हैं:
- वाहक आवृत्ति (f_c)
- निम्न पार्श्व बैंड (LSB): (f_c - f_m)
- उच्च पार्श्व बैंड (USB): (f_c + f_m)
- AM तरंग की बैंड-चौड़ाई: (f_c + f_m) - (f_c - f_m) = 2f_m
यह संदेश संकेत की आवृत्ति की दोगुनी होती है। - AM तरंग की शक्ति (Power of AM wave):
P_total = P_c (1 + μ²/2)
जहां P_c वाहक शक्ति है।
- आवृत्ति मॉडुलन (Frequency Modulation - FM):
- इसमें वाहक तरंग की आवृत्ति संदेश संकेत के आयाम के अनुसार परिवर्तित होती है, जबकि आयाम और कला स्थिर रहते हैं।
- FM की रव प्रतिरक्षा (noise immunity) AM से बेहतर होती है।
- बैंड-चौड़ाई AM की तुलना में अधिक होती है।
- कला मॉडुलन (Phase Modulation - PM):
- इसमें वाहक तरंग की कला संदेश संकेत के आयाम के अनुसार परिवर्तित होती है, जबकि आयाम और आवृत्ति स्थिर रहते हैं।
6. विद्युतचुंबकीय तरंगों का संचरण (Propagation of Electromagnetic Waves)
रेडियो तरंगें विभिन्न तरीकों से संचरित होती हैं, जो उनकी आवृत्ति पर निर्भर करता है:
- भूसंपर्कित तरंग संचरण (Ground Wave Propagation):
- ये तरंगें पृथ्वी की सतह के साथ-साथ चलती हैं।
- आवृत्ति सीमा: 500 kHz से 1500 kHz (मध्यम आवृत्ति - MF)।
- ये तरंगें पृथ्वी की वक्रता का अनुसरण कर सकती हैं, लेकिन दूरी बढ़ने पर पृथ्वी द्वारा अवशोषित होकर क्षीण हो जाती हैं।
- इनका उपयोग स्थानीय रेडियो प्रसारण के लिए किया जाता है।
- आकाशीय तरंग संचरण (Sky Wave Propagation):
- ये तरंगें आयनमंडल से परावर्तित होकर पृथ्वी पर वापस आती हैं।
- आवृत्ति सीमा: 3 MHz से 30 MHz (उच्च आवृत्ति - HF)।
- आयनमंडल (Ionosphere): पृथ्वी के वायुमंडल का वह क्षेत्र (लगभग 65 km से 400 km ऊपर) जहां सूर्य के पराबैंगनी और X-किरणों के कारण गैसें आयनित हो जाती हैं, जिससे मुक्त इलेक्ट्रॉन और आयन बनते हैं। यह रेडियो तरंगों को परावर्तित करता है।
- इसमें D, E, F1 और F2 परतें होती हैं। F2 परत सबसे अधिक आयनित होती है और रात में भी बनी रहती है।
- क्रांतिक आवृत्ति (Critical Frequency, f_c): वह अधिकतम आवृत्ति जिस पर आयनमंडल से एक रेडियो तरंग लंबवत रूप से परावर्तित हो सकती है। f_c = 9 * (N_max)^(1/2), जहाँ N_max इलेक्ट्रॉन घनत्व है।
- अधिकतम उपयोगी आवृत्ति (Maximum Usable Frequency, MUF): किसी दिए गए कोण पर आयनमंडल से परावर्तित होने वाली अधिकतम आवृत्ति। MUF = f_c / cosθ, जहाँ θ आयनमंडल पर तरंग का आपतन कोण है।
- उपयोग: लंबी दूरी के रेडियो प्रसारण (शॉर्टवेव बैंड)।
- अंतरिक्ष तरंग संचरण (Space Wave Propagation):
- ये तरंगें सीधी रेखा (Line of Sight - LOS) में संचरित होती हैं।
- आवृत्ति सीमा: 30 MHz से 300 GHz (VHF, UHF, माइक्रोवेव)।
- ये तरंगें आयनमंडल को भेदकर निकल जाती हैं और परावर्तित नहीं होतीं।
- LOS संचार की परास:
- प्रेषक एंटीना की ऊंचाई h_T और अभिग्राही एंटीना की ऊंचाई h_R होने पर अधिकतम LOS दूरी (d_M) = √(2Rh_T) + √(2Rh_R)
- यदि केवल एक एंटीना (h_T) है और दूसरा पृथ्वी पर (h_R=0) तो परास d = √(2Rh_T)
- जहाँ R पृथ्वी की त्रिज्या (लगभग 6.4 x 10^6 m) है।
- उपयोग: टेलीविजन प्रसारण, माइक्रोवेव लिंक, उपग्रह संचार, रडार।
7. अन्य महत्वपूर्ण संचार प्रणालियाँ (Other Important Communication Systems)
- प्रकाशिक तंतु संचार (Optical Fibre Communication):
- प्रकाशिक तंतु (Optical fibre) एक पतली, पारदर्शी तार होती है जो पूर्ण आंतरिक परावर्तन के सिद्धांत पर प्रकाश संकेतों को लंबी दूरी तक संचरित करती है।
- लाभ: अत्यंत उच्च बैंड-चौड़ाई (एकल तंतु पर सैकड़ों TV चैनल), कम क्षीणन, विद्युत चुम्बकीय हस्तक्षेप से मुक्ति, सुरक्षित संचार।
- उपग्रह संचार (Satellite Communication):
- इसमें पृथ्वी की कक्षा में स्थापित कृत्रिम उपग्रहों का उपयोग करके संचार किया जाता है।
- भू-स्थिर उपग्रह (Geostationary Satellite): ये उपग्रह भूमध्य रेखा के ऊपर लगभग 36,000 km की ऊंचाई पर पृथ्वी के घूर्णन की दिशा में उसी कोणीय वेग से घूमते हैं, जिससे वे पृथ्वी पर एक निश्चित बिंदु के सापेक्ष स्थिर प्रतीत होते हैं। इनका आवर्तकाल 24 घंटे होता है।
- लाभ: बहुत बड़े भौगोलिक क्षेत्र को कवर कर सकते हैं, लंबी दूरी के संचार के लिए आदर्श।
- मोबाइल संचार (Mobile Communication):
- सेलुलर फोन प्रणाली पर आधारित। एक क्षेत्र को कई "सेल" में विभाजित किया जाता है, प्रत्येक में एक बेस स्टेशन होता है।
- लाभ: गतिशीलता, विस्तृत कवरेज।
- इंटरनेट (Internet): दुनिया भर के कंप्यूटर नेटवर्कों का एक विशाल नेटवर्क जो TCP/IP प्रोटोकॉल का उपयोग करके सूचनाओं का आदान-प्रदान करता है।
- फैक्स (FAX - Facsimile Telegraphy): दस्तावेजों की स्कैन की गई छवियों को टेलीफोन लाइनों पर संचरित करता है।
- ई-मेल (E-mail - Electronic Mail): इंटरनेट के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक संदेशों का आदान-प्रदान।
- वर्ल्ड वाइड वेब (WWW - World Wide Web): इंटरनेट पर हाइपरलिंक किए गए दस्तावेजों और अन्य वेब संसाधनों की एक प्रणाली।
बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)
यहाँ अध्याय 15 से संबंधित 10 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं:
1. संचार व्यवस्था में, रव (Noise) का मुख्य कार्य क्या है?
a) संदेश संकेत की शक्ति बढ़ाना
b) संदेश संकेत की गुणवत्ता को प्रभावित करना
c) संचार माध्यम की बैंड-चौड़ाई बढ़ाना
d) वाहक तरंग की आवृत्ति बदलना
2. आयाम मॉडुलन (AM) में, मॉडुलन सूचकांक का मान क्या होना चाहिए ताकि विरूपण (distortion) से बचा जा सके?
a) μ > 1
b) μ < 1
c) μ = 1
d) μ ≤ 1
3. आयनमंडल से रेडियो तरंगों का परावर्तन किस प्रकार के तरंग संचरण में होता है?
a) भूसंपर्कित तरंग संचरण
b) आकाशीय तरंग संचरण
c) अंतरिक्ष तरंग संचरण
d) प्रकाशिक तंतु संचार
4. एक टेलीविजन (TV) संकेत की बैंड-चौड़ाई लगभग कितनी होती है?
a) 2.8 kHz
b) 20 kHz
c) 4.2 MHz
d) 6 MHz
5. भू-स्थिर उपग्रह पृथ्वी की सतह से लगभग कितनी ऊंचाई पर स्थित होते हैं?
a) 360 km
b) 3600 km
c) 36000 km
d) 360000 km
6. मॉडुलन की आवश्यकता का मुख्य कारण क्या है?
a) एंटीना की लंबाई कम करना
b) विकिरण की शक्ति बढ़ाना
c) संकेतों के मिश्रण को रोकना
d) उपरोक्त सभी
7. यदि प्रेषक एंटीना की ऊंचाई h_T है, तो अंतरिक्ष तरंग संचरण (Space Wave Propagation) में अधिकतम परास (d) का सूत्र क्या है (पृथ्वी की त्रिज्या R है)?
a) d = √(Rh_T)
b) d = √(2Rh_T)
c) d = 2Rh_T
d) d = R/h_T
8. प्रकाशिक तंतु संचार किस सिद्धांत पर कार्य करता है?
a) परावर्तन
b) अपवर्तन
c) पूर्ण आंतरिक परावर्तन
d) विवर्तन
9. निम्न में से कौन सा डिजिटल संकेत का उदाहरण है?
a) ध्वनि तरंगें
b) वीडियो संकेत
c) बाइनरी कोड (0 और 1)
d) संगीत तरंगें
10. एक AM तरंग की बैंड-चौड़ाई किसके बराबर होती है, यदि संदेश संकेत की आवृत्ति f_m है?
a) f_m
b) 2f_m
c) f_c + f_m
d) f_c - f_m
उत्तरमाला (Answer Key):
- b)
- d)
- b)
- d)
- c)
- d)
- b)
- c)
- c)
- b)
मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको अध्याय 15 की गहन समझ प्रदान करेंगे और आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक सिद्ध होंगे। अपनी पढ़ाई जारी रखें और सफलता प्राप्त करें!