Class 12 Physics Notes Chapter 2 (तरंग-प्रकाशिकी) – Bhautiki-II Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम भौतिकी के महत्वपूर्ण अध्याय 'तरंग-प्रकाशिकी' का विस्तृत अध्ययन करेंगे, जो आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अत्यंत उपयोगी है। यह अध्याय प्रकाश के तरंग स्वरूप और उससे संबंधित विभिन्न परिघटनाओं जैसे व्यतिकरण, विवर्तन और ध्रुवण को समझने में सहायक है।
अध्याय 2: तरंग-प्रकाशिकी (Wave Optics)
1. प्रकाश का तरंग सिद्धांत (Wave Theory of Light)
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हाइगेंस का सिद्धांत (Huygens' Principle):
- यह सिद्धांत प्रकाश के तरंग स्वरूप की व्याख्या करता है। इसके अनुसार, प्रकाश तरंगों के रूप में चलता है।
- प्राथमिक तरंगाग्र (Primary Wavefront): किसी क्षण पर माध्यम के वे सभी बिंदु जिन पर तरंग एक ही कला में होती है, तरंगाग्र (Wavefront) कहलाते हैं। तरंगाग्र प्रकाश स्रोत से समान दूरी पर स्थित बिंदुओं का बिन्दुपथ होता है।
- गोलीय तरंगाग्र (Spherical Wavefront): बिंदु स्रोत से उत्पन्न होता है।
- समतल तरंगाग्र (Plane Wavefront): अनंत पर स्थित स्रोत से या गोलीय/बेलनाकार तरंगाग्र के बड़े हिस्से से उत्पन्न होता है।
- बेलनाकार तरंगाग्र (Cylindrical Wavefront): रेखीय स्रोत से उत्पन्न होता है।
- द्वितीयक तरंगिकाएँ (Secondary Wavelets): तरंगाग्र पर स्थित प्रत्येक बिंदु एक नए प्रकाश स्रोत की तरह कार्य करता है, जिससे सभी दिशाओं में द्वितीयक तरंगिकाएँ निकलती हैं।
- नया तरंगाग्र (New Wavefront): किसी भी क्षण पर इन द्वितीयक तरंगिकाओं का अग्रगामी आवरण (envelope) उस क्षण पर नए तरंगाग्र की स्थिति को दर्शाता है।
- प्रकाश किरणों की दिशा: प्रकाश किरणें हमेशा तरंगाग्र के लंबवत होती हैं।
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हाइगेंस के सिद्धांत द्वारा परावर्तन की व्याख्या:
- आपतित तरंगाग्र, परावर्तक सतह पर टकराता है। हाइगेंस के सिद्धांत के अनुसार, परावर्तित तरंगाग्र बनता है।
- परावर्तन के नियम (आपतन कोण = परावर्तन कोण) की पुष्टि होती है।
- परावर्तन में प्रकाश की चाल, आवृत्ति और तरंगदैर्घ्य अपरिवर्तित रहते हैं।
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हाइगेंस के सिद्धांत द्वारा अपवर्तन की व्याख्या:
- जब प्रकाश एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करता है, तो उसकी चाल बदल जाती है।
- हाइगेंस के सिद्धांत का उपयोग करके स्नेल के नियम (sin i / sin r = n₂ / n₁) की व्युत्पत्ति की जा सकती है।
- अपवर्तन में प्रकाश की चाल और तरंगदैर्घ्य बदल जाते हैं, जबकि आवृत्ति अपरिवर्तित रहती है।
- प्रकाश के विरल माध्यम से सघन माध्यम में जाने पर चाल घटती है और तरंगदैर्घ्य घटता है (λ' = λ/n)।
2. प्रकाश का व्यतिकरण (Interference of Light)
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परिभाषा: जब लगभग समान आवृत्ति और लगभग समान आयाम की दो कला-संबद्ध प्रकाश तरंगें एक ही दिशा में संचरित होती हुई अध्यारोपित होती हैं, तो माध्यम के कुछ बिंदुओं पर प्रकाश की तीव्रता अधिकतम (संपोषी व्यतिकरण) और कुछ बिंदुओं पर न्यूनतम (विनाशी व्यतिकरण) हो जाती है। प्रकाश की तीव्रता के इस पुनर्वितरण की घटना को प्रकाश का व्यतिकरण कहते हैं।
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कला-संबद्ध स्रोत (Coherent Sources): ऐसे स्रोत जिनसे उत्पन्न तरंगों के बीच कलान्तर समय के साथ नियत रहता है। दो स्वतंत्र स्रोत कला-संबद्ध नहीं हो सकते।
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स्थायी व्यतिकरण के लिए आवश्यक शर्तें:
- दोनों स्रोत कला-संबद्ध होने चाहिए।
- दोनों स्रोतों से उत्सर्जित तरंगों की आवृत्ति और तरंगदैर्घ्य समान होने चाहिए।
- दोनों स्रोतों के आयाम लगभग समान होने चाहिए।
- दोनों स्रोत एक-दूसरे के बहुत निकट और संकीर्ण होने चाहिए।
- प्रकाश एकवर्णी होना चाहिए।
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संपोषी व्यतिकरण (Constructive Interference):
- जब तरंगें समान कला में मिलती हैं।
- तीव्रता अधिकतम होती है (I_max = (√I₁ + √I₂)²)। यदि I₁ = I₂ = I₀, तो I_max = 4I₀।
- पथान्तर (Path difference, Δx) = nλ (जहाँ n = 0, 1, 2, ...)।
- कलान्तर (Phase difference, Δφ) = 2nπ (जहाँ n = 0, 1, 2, ...)।
- दीप्त फ्रिंज (Bright Fringe) बनती है।
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विनाशी व्यतिकरण (Destructive Interference):
- जब तरंगें विपरीत कला में मिलती हैं।
- तीव्रता न्यूनतम होती है (I_min = (√I₁ - √I₂)²)। यदि I₁ = I₂ = I₀, तो I_min = 0।
- पथान्तर (Δx) = (2n - 1)λ/2 या (2n + 1)λ/2 (जहाँ n = 1, 2, 3, ... या n = 0, 1, 2, ...)।
- कलान्तर (Δφ) = (2n - 1)π या (2n + 1)π (जहाँ n = 1, 2, 3, ... या n = 0, 1, 2, ...)।
- अदीप्त फ्रिंज (Dark Fringe) बनती है।
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यंग का द्वि-झिरी प्रयोग (Young's Double Slit Experiment - YDSE):
- यह व्यतिकरण की घटना का सबसे प्रसिद्ध प्रदर्शन है।
- फ्रिंज चौड़ाई (Fringe Width, β): दो क्रमागत दीप्त या अदीप्त फ्रिंजों के बीच की दूरी।
- सूत्र: β = λD/d
- λ = प्रयुक्त प्रकाश का तरंगदैर्घ्य
- D = झिरियों और पर्दे के बीच की दूरी
- d = दोनों झिरियों के बीच की दूरी
- सूत्र: β = λD/d
- केंद्रीय दीप्त फ्रिंज: पर्दे के केंद्र पर हमेशा दीप्त फ्रिंज बनती है (n=0 के लिए, पथान्तर = 0)।
- दीप्त फ्रिंजों की स्थिति: y_n = nλD/d (n = 0, ±1, ±2, ...)
- अदीप्त फ्रिंजों की स्थिति: y_n = (2n - 1)λD/(2d) या (2n + 1)λD/(2d) (n = ±1, ±2, ... या n = 0, ±1, ±2, ...)
- श्वेत प्रकाश का उपयोग: यदि एकवर्णी प्रकाश के स्थान पर श्वेत प्रकाश का उपयोग किया जाता है, तो केंद्रीय फ्रिंज श्वेत होती है और उसके दोनों ओर रंगीन फ्रिंजें बनती हैं। बैंगनी रंग की फ्रिंज केंद्रीय फ्रिंज के सबसे पास और लाल रंग की फ्रिंज सबसे दूर होती है (क्योंकि λ_लाल > λ_बैंगनी)।
3. प्रकाश का विवर्तन (Diffraction of Light)
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परिभाषा: प्रकाश तरंगों का किसी अवरोधक या झिरी के किनारों पर मुड़ना और ज्यामितीय छाया क्षेत्र में फैल जाना प्रकाश का विवर्तन कहलाता है।
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विवर्तन के प्रकार:
- फ्रेनेल विवर्तन (Fresnel Diffraction): स्रोत या पर्दा झिरी से सीमित दूरी पर होते हैं।
- फ्रॉनहोफर विवर्तन (Fraunhofer Diffraction): स्रोत और पर्दा झिरी से प्रभावी रूप से अनंत दूरी पर होते हैं (लेंसों का उपयोग करके)।
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एकल झिरी द्वारा फ्रॉनहोफर विवर्तन (Fraunhofer Diffraction by a Single Slit):
- विवर्तन पैटर्न: पर्दे पर एक चौड़ी केंद्रीय दीप्त फ्रिंज (केंद्रीय उच्चिष्ठ) और उसके दोनों ओर एकांतर क्रम में संकरी और कम तीव्र अदीप्त और दीप्त फ्रिंजें (गौण उच्चिष्ठ) प्राप्त होती हैं।
- निम्निष्ठों की स्थिति (Positions of Minima): a sinθ = nλ (जहाँ n = ±1, ±2, ...)
- यहाँ a झिरी की चौड़ाई है।
- गौण उच्चिष्ठों की स्थिति (Positions of Secondary Maxima): a sinθ = (2n + 1)λ/2 (जहाँ n = ±1, ±2, ...)
- केंद्रीय उच्चिष्ठ की कोणीय चौड़ाई: 2θ = 2λ/a
- केंद्रीय उच्चिष्ठ की रेखीय चौड़ाई: 2x = 2λD/a (जहाँ D झिरी से पर्दे की दूरी है)
- यह व्यतिकरण की दीप्त फ्रिंज की चौड़ाई (λD/d) का दोगुना होता है।
- तीव्रता वितरण: केंद्रीय उच्चिष्ठ की तीव्रता अधिकतम होती है, और जैसे-जैसे हम केंद्र से दूर जाते हैं, गौण उच्चिष्ठों की तीव्रता तेजी से घटती जाती है।
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व्यतिकरण और विवर्तन में अंतर:
विशेषता व्यतिकरण विवर्तन स्रोत दो कला-संबद्ध स्रोत की आवश्यकता एक ही तरंगाग्र के विभिन्न बिंदुओं से उत्पन्न फ्रिंज चौड़ाई लगभग समान केंद्रीय फ्रिंज चौड़ी, अन्य संकरी होती हैं फ्रिंज तीव्रता सभी दीप्त फ्रिंजों की तीव्रता लगभग समान केंद्रीय फ्रिंज की तीव्रता अधिकतम, अन्य घटती हैं न्यूनतम तीव्रता पूर्णतः शून्य हो सकती है पूर्णतः शून्य नहीं होती (कुछ प्रकाश होता है)
4. प्रकाश का ध्रुवण (Polarization of Light)
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परिभाषा: प्रकाश तरंगों के कंपन एक निश्चित तल तक सीमित करने की घटना को प्रकाश का ध्रुवण कहते हैं। यह घटना दर्शाती है कि प्रकाश तरंगें अनुप्रस्थ होती हैं।
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अध्रुवित प्रकाश (Unpolarized Light): वह प्रकाश जिसमें विद्युत सदिश के कंपन संचरण की दिशा के लंबवत तल में सभी संभव दिशाओं में सममित रूप से वितरित होते हैं।
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ध्रुवित प्रकाश (Polarized Light): वह प्रकाश जिसमें विद्युत सदिश के कंपन संचरण की दिशा के लंबवत तल में केवल एक ही निश्चित दिशा में होते हैं।
- समतल-ध्रुवित प्रकाश (Plane Polarized Light): कंपन एक ही तल में होते हैं।
- वृत्तीय-ध्रुवित प्रकाश (Circularly Polarized Light): कंपन एक वृत्त बनाते हैं।
- दीर्घवृत्तीय-ध्रुवित प्रकाश (Elliptically Polarized Light): कंपन एक दीर्घवृत्त बनाते हैं।
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ध्रुवण की विधियाँ:
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परावर्तन द्वारा ध्रुवण (Polarization by Reflection):
- जब अध्रुवित प्रकाश किसी पारदर्शी माध्यम की सतह पर एक विशेष कोण पर आपतित होता है, तो परावर्तित प्रकाश पूर्णतः समतल-ध्रुवित होता है। इस आपतन कोण को ध्रुवण कोण (Polarizing Angle, i_p) कहते हैं।
- ब्रूस्टर का नियम (Brewster's Law): जब प्रकाश ध्रुवण कोण पर आपतित होता है, तो परावर्तित किरण और अपवर्तित किरण एक-दूसरे के लंबवत होती हैं (i_p + r = 90°)।
- ब्रूस्टर का नियम: tan i_p = n (जहाँ n माध्यम का अपवर्तनांक है)।
- परावर्तित प्रकाश में कंपन आपतन तल के लंबवत होते हैं, जबकि अपवर्तित प्रकाश आंशिक रूप से ध्रुवित होता है।
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अपवर्तन द्वारा ध्रुवण (Polarization by Refraction):
- कई प्रिज्मों (जैसे पोलेरॉइड) से प्रकाश को गुजारकर ध्रुवित किया जा सकता है।
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द्वि-अपवर्तन द्वारा ध्रुवण (Polarization by Double Refraction):
- कैल्साइट जैसे कुछ क्रिस्टल आपतित प्रकाश को दो अपवर्तित किरणों में विभाजित करते हैं: साधारण किरण (O-ray) और असाधारण किरण (E-ray)। ये दोनों किरणें समतल-ध्रुवित होती हैं, लेकिन इनके कंपन एक-दूसरे के लंबवत होते हैं।
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प्रकीर्णन द्वारा ध्रुवण (Polarization by Scattering):
- जब प्रकाश बहुत छोटे कणों द्वारा प्रकीर्णित होता है, तो प्रकीर्णित प्रकाश आंशिक रूप से ध्रुवित हो सकता है। उदाहरण: नीला आकाश।
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पोलेरॉइड (Polaroids):
- ये कृत्रिम ध्रुवक होते हैं जो अध्रुवित प्रकाश को समतल-ध्रुवित प्रकाश में परिवर्तित करते हैं।
- इनका उपयोग धूप के चश्मों, कार की हेडलाइट्स, 3D फिल्मों आदि में होता है।
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मालस का नियम (Malus' Law):
- जब समतल-ध्रुवित प्रकाश एक विश्लेषक (Analyser) से गुजरता है, तो निर्गत प्रकाश की तीव्रता विश्लेषक की पारगमन अक्ष और ध्रुवित प्रकाश के कंपन तल के बीच के कोण (θ) की कोज्या के वर्ग के अनुक्रमानुपाती होती है।
- I = I₀ cos²θ
- I₀ = ध्रुवक से निर्गत प्रकाश की तीव्रता
- I = विश्लेषक से निर्गत प्रकाश की तीव्रता
- θ = ध्रुवक और विश्लेषक की पारगमन अक्षों के बीच का कोण।
- यदि θ = 0° या 180°, तो I = I₀ (अधिकतम तीव्रता)।
- यदि θ = 90°, तो I = 0 (न्यूनतम तीव्रता)।
5. डॉप्लर प्रभाव (Doppler's Effect in Light)
- जब प्रकाश स्रोत और प्रेक्षक के बीच सापेक्ष गति होती है, तो प्रेक्षक को प्रकाश की आवृत्ति या तरंगदैर्घ्य में परिवर्तन प्रतीत होता है। इसे डॉप्लर प्रभाव कहते हैं।
- लाल विस्थापन (Redshift): यदि स्रोत प्रेक्षक से दूर जा रहा है, तो प्राप्त प्रकाश का तरंगदैर्घ्य बढ़ जाता है (आवृत्ति घट जाती है), और वह वर्णक्रम के लाल सिरे की ओर विस्थापित हो जाता है।
- नीला विस्थापन (Blueshift): यदि स्रोत प्रेक्षक की ओर आ रहा है, तो प्राप्त प्रकाश का तरंगदैर्घ्य घट जाता है (आवृत्ति बढ़ जाती है), और वह वर्णक्रम के नीले सिरे की ओर विस्थापित हो जाता है।
- डॉप्लर विस्थापन (Δλ): Δλ/λ = v/c (जहाँ v सापेक्ष वेग है और c प्रकाश की चाल है)।
6. सूक्ष्मदर्शी और दूरदर्शी की विभेदन क्षमता (Resolving Power of Microscope and Telescope)
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विभेदन क्षमता (Resolving Power): किसी प्रकाशीय उपकरण की दो बहुत निकट स्थित वस्तुओं या उनके प्रतिबिंबों को अलग-अलग स्पष्ट दिखाने की क्षमता को उसकी विभेदन क्षमता कहते हैं।
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रेले का मापदंड (Rayleigh's Criterion): दो वस्तुओं को तब विभेदित माना जाता है जब एक के विवर्तन पैटर्न का केंद्रीय उच्चिष्ठ दूसरे के पहले निम्निष्ठ पर पड़ता है।
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सूक्ष्मदर्शी की विभेदन क्षमता (Resolving Power of Microscope):
- RP = (2n sinθ) / λ
- n sinθ को संख्यात्मक द्वारक (Numerical Aperture, NA) कहते हैं।
- λ = प्रकाश का तरंगदैर्घ्य।
- n = वस्तु और अभिदृश्यक लेंस के बीच के माध्यम का अपवर्तनांक।
- θ = अभिदृश्यक लेंस द्वारा वस्तु पर बनाया गया अर्ध-शंकु कोण।
- उच्च विभेदन क्षमता के लिए, λ कम होना चाहिए (नीला प्रकाश बेहतर है) और NA अधिक होना चाहिए।
- RP = (2n sinθ) / λ
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दूरदर्शी की विभेदन क्षमता (Resolving Power of Telescope):
- RP = D / (1.22λ)
- D = अभिदृश्यक लेंस का द्वारक (व्यास)।
- λ = प्रकाश का तरंगदैर्घ्य।
- उच्च विभेदन क्षमता के लिए, D अधिक होना चाहिए और λ कम होना चाहिए।
- RP = D / (1.22λ)
बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)
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हाइगेंस के तरंग सिद्धांत के अनुसार, प्रकाश तरंगें होती हैं:
(a) अनुदैर्घ्य
(b) अनुप्रस्थ
(c) कभी अनुदैर्घ्य, कभी अनुप्रस्थ
(d) विद्युतचुंबकीय -
यंग के द्वि-झिरी प्रयोग में, यदि झिरियों के बीच की दूरी दोगुनी कर दी जाए, तो फ्रिंज चौड़ाई पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
(a) दोगुनी हो जाएगी
(b) आधी हो जाएगी
(c) चार गुनी हो जाएगी
(d) अपरिवर्तित रहेगी -
प्रकाश के व्यतिकरण के लिए आवश्यक शर्त है:
(a) दो स्वतंत्र स्रोत
(b) कला-संबद्ध स्रोत
(c) अलग-अलग तरंगदैर्घ्य
(d) उच्च तीव्रता वाले स्रोत -
एकल झिरी द्वारा विवर्तन पैटर्न में, केंद्रीय उच्चिष्ठ की चौड़ाई होती है:
(a) सभी अन्य उच्चिष्ठों की चौड़ाई के समान
(b) सभी अन्य उच्चिष्ठों की चौड़ाई से कम
(c) सभी अन्य उच्चिष्ठों की चौड़ाई से दोगुनी
(d) सभी अन्य उच्चिष्ठों की चौड़ाई से आधी -
ब्रूस्टर का नियम संबंधित है:
(a) प्रकाश के व्यतिकरण से
(b) प्रकाश के विवर्तन से
(c) प्रकाश के ध्रुवण से
(d) प्रकाश के प्रकीर्णन से -
मालस के नियम के अनुसार, विश्लेषक से निर्गत प्रकाश की तीव्रता I₀ cos²θ है, जहाँ θ क्या है?
(a) आपतन कोण
(b) परावर्तन कोण
(c) ध्रुवक और विश्लेषक की पारगमन अक्षों के बीच का कोण
(d) अपवर्तन कोण -
यदि प्रकाश एक विरल माध्यम से सघन माध्यम में प्रवेश करता है, तो निम्नलिखित में से कौन सी राशि अपरिवर्तित रहती है?
(a) तरंगदैर्घ्य
(b) चाल
(c) आवृत्ति
(d) आयाम -
एक दूरदर्शी की विभेदन क्षमता बढ़ाने के लिए, अभिदृश्यक लेंस का द्वारक (व्यास):
(a) बढ़ाना चाहिए
(b) घटाना चाहिए
(c) अपरिवर्तित रखना चाहिए
(d) तरंगदैर्घ्य पर निर्भर करता है -
प्रकाश के डॉप्लर प्रभाव में, यदि कोई गैलेक्सी पृथ्वी से दूर जा रही है, तो उसके प्रकाश में कौन सा विस्थापन देखा जाएगा?
(a) नीला विस्थापन
(b) लाल विस्थापन
(c) बैंगनी विस्थापन
(d) कोई विस्थापन नहीं -
यंग के द्वि-झिरी प्रयोग में, केंद्रीय दीप्त फ्रिंज पर पथान्तर कितना होता है?
(a) λ
(b) λ/2
(c) 0
(d) 2λ
उत्तरमाला (Answer Key):
- (d)
- (b)
- (b)
- (c)
- (c)
- (c)
- (c)
- (a)
- (b)
- (c)
मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी परीक्षा की तैयारी में सहायक होंगे। शुभकामनाएँ!