Class 12 Physics Notes Chapter 4 (गतिमान आवेश और चुंबकत्व) – Bhautiki-I Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम कक्षा 12 भौतिकी के अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय 'गतिमान आवेश और चुंबकत्व' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय न केवल आपकी बोर्ड परीक्षाओं के लिए, बल्कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे NEET, JEE, UPSC, SSC आदि) के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अध्याय से संबंधित अवधारणाएं और सूत्र अक्सर परीक्षाओं में पूछे जाते हैं। आइए, हम इसके प्रमुख बिंदुओं को विस्तार से समझते हैं।
अध्याय 4: गतिमान आवेश और चुंबकत्व (Moving Charges and Magnetism)
यह अध्याय आवेशों की गति के कारण उत्पन्न होने वाले चुंबकीय प्रभावों और चुंबकीय क्षेत्रों में आवेशों तथा धारावाही चालकों पर लगने वाले बलों का अध्ययन करता है।
1. चुंबकीय बल (Magnetic Force)
जब कोई आवेशित कण चुंबकीय क्षेत्र में गति करता है, तो उस पर एक बल लगता है जिसे चुंबकीय बल कहते हैं।
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लॉरेंज बल (Lorentz Force):
एक आवेशित कण (आवेश $q$, वेग $\vec{v}$) जो चुंबकीय क्षेत्र $\vec{B}$ में गति कर रहा है, उस पर लगने वाला चुंबकीय बल निम्नलिखित सूत्र द्वारा दिया जाता है:
$\vec{F} = q (\vec{v} \times \vec{B})$
या, परिमाण में: $F = q v B \sin\theta$
जहाँ, $\theta$ वेग $\vec{v}$ और चुंबकीय क्षेत्र $\vec{B}$ के बीच का कोण है।महत्वपूर्ण बिंदु:
- बल $\vec{F}$ हमेशा वेग $\vec{v}$ और चुंबकीय क्षेत्र $\vec{B}$ दोनों के लंबवत होता है।
- यदि आवेश विराम अवस्था में है ($v=0$), तो उस पर कोई चुंबकीय बल नहीं लगता।
- यदि आवेश चुंबकीय क्षेत्र के समानांतर या प्रति-समानांतर गति कर रहा है ($\theta = 0^\circ$ या $180^\circ$), तो उस पर कोई चुंबकीय बल नहीं लगता ($F=0$)।
- बल अधिकतम होता है जब आवेश चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत गति करता है ($\theta = 90^\circ$), $F_{max} = qvB$.
- लॉरेंज बल कण की गतिज ऊर्जा को नहीं बदलता, क्योंकि बल हमेशा वेग के लंबवत होता है, अतः किया गया कार्य शून्य होता है। यह केवल कण की गति की दिशा बदलता है।
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फ्लेमिंग का वाम-हस्त नियम (Fleming's Left-Hand Rule):
यह नियम चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही चालक पर लगने वाले बल की दिशा बताता है।- अपने बाएं हाथ के अंगूठे, तर्जनी और मध्यमा को एक-दूसरे के लंबवत फैलाएं।
- यदि तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा में हो।
- मध्यमा धारा की दिशा (धनावेश की गति की दिशा) में हो।
- तो अंगूठा चालक पर लगने वाले बल की दिशा को इंगित करेगा।
-
धारावाही चालक पर चुंबकीय बल:
एक धारावाही चालक (लंबाई $L$, धारा $I$) जो चुंबकीय क्षेत्र $\vec{B}$ में रखा है, उस पर लगने वाला बल निम्नलिखित सूत्र द्वारा दिया जाता है:
$\vec{F} = I (\vec{L} \times \vec{B})$
या, परिमाण में: $F = I L B \sin\theta$
जहाँ, $\theta$ चालक की लंबाई की दिशा (धारा की दिशा) और चुंबकीय क्षेत्र $\vec{B}$ के बीच का कोण है।
2. चुंबकीय क्षेत्र में गति (Motion in a Magnetic Field)
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वृत्ताकार गति (Circular Motion):
यदि एक आवेशित कण चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत प्रवेश करता है ($\theta = 90^\circ$), तो उस पर लगने वाला बल हमेशा उसकी गति की दिशा के लंबवत होता है। यह बल अभिकेन्द्रीय बल प्रदान करता है, जिससे कण एक वृत्ताकार पथ पर गति करता है।
$qvB = \frac{mv^2}{r}$
जहाँ, $m$ कण का द्रव्यमान और $r$ वृत्ताकार पथ की त्रिज्या है।
वृत्ताकार पथ की त्रिज्या: $r = \frac{mv}{qB}$- संवेग ($p = mv$) के पदों में: $r = \frac{p}{qB}$
- गतिज ऊर्जा ($K = \frac{1}{2}mv^2$) के पदों में: $r = \frac{\sqrt{2mK}}{qB}$
आवर्तकाल (Time Period): $T = \frac{2\pi r}{v} = \frac{2\pi}{v} \left(\frac{mv}{qB}\right) = \frac{2\pi m}{qB}$
- आवर्तकाल कण के वेग या त्रिज्या पर निर्भर नहीं करता।
आवृत्ति (Frequency): $f = \frac{1}{T} = \frac{qB}{2\pi m}$ (इसे साइक्लोट्रॉन आवृत्ति भी कहते हैं)
कोणीय आवृत्ति (Angular Frequency): $\omega = 2\pi f = \frac{qB}{m}$
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हेलिकल गति (Helical Motion):
यदि आवेशित कण चुंबकीय क्षेत्र से किसी कोण $\theta$ पर प्रवेश करता है (जहाँ $\theta \neq 0^\circ, 90^\circ, 180^\circ$), तो वेग के दो घटक होते हैं:- $v_\parallel = v \cos\theta$ (चुंबकीय क्षेत्र के समानांतर घटक) - यह कण को सीधी रेखा में आगे बढ़ाता है।
- $v_\perp = v \sin\theta$ (चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत घटक) - यह कण को वृत्ताकार पथ पर गति कराता है।
इन दोनों गतियों के संयोजन से कण एक हेलिकल (कुंडलाकार) पथ पर गति करता है।
- वृत्ताकार पथ की त्रिज्या: $r = \frac{m v_\perp}{qB} = \frac{m v \sin\theta}{qB}$
- आवर्तकाल: $T = \frac{2\pi m}{qB}$ (यह केवल लंबवत घटक पर निर्भर करता है, इसलिए समान रहता है)
- पिच (Pitch): एक पूर्ण चक्कर में कण द्वारा चुंबकीय क्षेत्र की दिशा में तय की गई दूरी।
Pitch $= v_\parallel \times T = (v \cos\theta) \times \left(\frac{2\pi m}{qB}\right)$
-
साइक्लोट्रॉन (Cyclotron):
यह एक ऐसी युक्ति है जिसका उपयोग प्रोटॉन, ड्यूट्रॉन, अल्फा कण जैसे आवेशित कणों को उच्च ऊर्जा तक त्वरित करने के लिए किया जाता है।- सिद्धांत: यह इस तथ्य पर आधारित है कि एक आवेशित कण की वृत्ताकार गति का आवर्तकाल उसके वेग या पथ की त्रिज्या पर निर्भर नहीं करता है। कण को एक प्रबल चुंबकीय क्षेत्र और एक उच्च आवृत्ति वाले विद्युत क्षेत्र के संयुक्त प्रभाव में बार-बार त्वरित किया जाता है।
- आवश्यक शर्तें:
- कण की गति का आवर्तकाल (साइक्लोट्रॉन आवृत्ति) विद्युत क्षेत्र की आवृत्ति के बराबर होना चाहिए (अनुनाद की स्थिति)। $f_c = f_{osc} = \frac{qB}{2\pi m}$
- कण को केवल विद्युत क्षेत्र द्वारा ही त्वरित किया जाता है, चुंबकीय क्षेत्र द्वारा नहीं। चुंबकीय क्षेत्र केवल कण को वृत्ताकार पथ पर रखता है।
- अधिकतम ऊर्जा: $K_{max} = \frac{1}{2} m v_{max}^2 = \frac{q^2 B^2 r_0^2}{2m}$
जहाँ $r_0$ 'डीज़' की अधिकतम त्रिज्या है। - सीमाएँ:
- इलेक्ट्रॉनों को त्वरित करने के लिए उपयुक्त नहीं, क्योंकि उनका द्रव्यमान बहुत कम होता है, जिससे वे बहुत तेजी से आपेक्षिकीय प्रभाव दिखाते हैं ($m = \frac{m_0}{\sqrt{1-v2/c2}}$)।
- अनावेशित कणों (जैसे न्यूट्रॉन) को त्वरित नहीं किया जा सकता।
3. बायो-सावर्ट नियम (Biot-Savart Law)
यह नियम एक धारावाही चालक के एक छोटे खंड ($d\vec{l}$) के कारण किसी बिंदु पर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र ($d\vec{B}$) को बताता है।
$d\vec{B} = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{I (d\vec{l} \times \vec{r})}{r^3}$
या, परिमाण में: $dB = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{I dl \sin\theta}{r^2}$
जहाँ,
- $\mu_0$ मुक्त आकाश की पारगम्यता है ($\mu_0 = 4\pi \times 10^{-7} \text{ T m A}^{-1}$)।
- $I$ चालक में प्रवाहित धारा है।
- $d\vec{l}$ चालक का सदिश लंबाई खंड है (धारा की दिशा में)।
- $\vec{r}$ लंबाई खंड से उस बिंदु तक का स्थिति सदिश है जहाँ चुंबकीय क्षेत्र ज्ञात करना है।
- $\theta$ $d\vec{l}$ और $\vec{r}$ के बीच का कोण है।
महत्वपूर्ण बिंदु:
- चुंबकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात करने के लिए दाहिने हाथ के अंगूठे का नियम (Right Hand Thumb Rule) या दाहिने हाथ की हथेली का नियम (Right Hand Palm Rule) उपयोग किया जाता है।
- यह नियम कूलॉम के नियम के समान है, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण अंतर हैं:
- चुंबकीय क्षेत्र सदिश स्रोत (धारा अवयव $I d\vec{l}$) पर निर्भर करता है, जबकि विद्युत क्षेत्र अदिश स्रोत (आवेश $q$) पर निर्भर करता है।
- चुंबकीय क्षेत्र $d\vec{B}$ हमेशा $d\vec{l}$ और $\vec{r}$ दोनों के लंबवत होता है, जबकि विद्युत क्षेत्र $\vec{E}$ स्थिति सदिश $\vec{r}$ के अनुदिश होता है।
- चुंबकीय क्षेत्र का कोण पर निर्भरता होती है ($\sin\theta$), जबकि विद्युत क्षेत्र में ऐसी कोई निर्भरता नहीं होती।
बायो-सावर्ट नियम के अनुप्रयोग:
-
एक वृत्ताकार धारावाही लूप के अक्ष पर चुंबकीय क्षेत्र:
एक वृत्ताकार लूप (त्रिज्या $R$, धारा $I$) के केंद्र से $x$ दूरी पर अक्ष पर स्थित बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण:
$B = \frac{\mu_0 I R^2}{2 (R^2 + x2){3/2}}$- लूप के केंद्र पर ($x=0$): $B_{center} = \frac{\mu_0 I}{2R}$
- यदि लूप में $N$ फेरे हों: $B = \frac{\mu_0 N I R^2}{2 (R^2 + x2){3/2}}$
-
एक सीधे धारावाही चालक के कारण चुंबकीय क्षेत्र:
- परिमित लंबाई के सीधे चालक के कारण:
एक सीधे चालक (लंबाई $L$, धारा $I$) से लंबवत दूरी $a$ पर स्थित बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र:
$B = \frac{\mu_0 I}{4\pi a} (\sin\phi_1 + \sin\phi_2)$
जहाँ $\phi_1$ और $\phi_2$ चालक के सिरों द्वारा बिंदु पर बनाए गए कोण हैं। - अनंत लंबाई के सीधे चालक के कारण:
यदि चालक अनंत लंबा है, तो $\phi_1 = \phi_2 = 90^\circ$
$B = \frac{\mu_0 I}{2\pi a}$- दिशा दाहिने हाथ के अंगूठे के नियम से दी जाती है।
- परिमित लंबाई के सीधे चालक के कारण:
4. एम्पीयर का परिपथीय नियम (Ampere's Circuital Law)
यह नियम चुंबकीय क्षेत्र और उस क्षेत्र को उत्पन्न करने वाली धाराओं के बीच संबंध स्थापित करता है।
यह बताता है कि किसी बंद लूप के अनुदिश चुंबकीय क्षेत्र $\vec{B}$ का रेखा समाकलन, उस लूप द्वारा घेरी गई कुल धारा $I_{enc}$ के $\mu_0$ गुना के बराबर होता है।
$\oint \vec{B} \cdot d\vec{l} = \mu_0 I_{enc}$
जहाँ,
- $\oint \vec{B} \cdot d\vec{l}$ एम्पीयरियन लूप के अनुदिश चुंबकीय क्षेत्र का रेखा समाकलन है।
- $I_{enc}$ लूप द्वारा घेरी गई शुद्ध धारा है (धारा की दिशा के लिए दाहिने हाथ के नियम का उपयोग करें)।
महत्वपूर्ण बिंदु:
- यह नियम गॉस के नियम के समान है, लेकिन चुंबकीय क्षेत्र के लिए।
- यह उन स्थितियों में उपयोगी है जहाँ उच्च समरूपता होती है।
एम्पीयर के नियम के अनुप्रयोग:
-
एक सीधे लंबे धारावाही तार के कारण चुंबकीय क्षेत्र:
अनंत लंबाई के सीधे तार से दूरी $r$ पर चुंबकीय क्षेत्र:
$B = \frac{\mu_0 I}{2\pi r}$ (बायो-सावर्ट नियम से प्राप्त परिणाम के समान) -
परिनालिका (Solenoid):
एक लंबी परिनालिका के अंदर चुंबकीय क्षेत्र लगभग एकसमान और अक्ष के समानांतर होता है।- परिनालिका के अंदर: $B = \mu_0 n I$
जहाँ $n$ प्रति इकाई लंबाई में फेरों की संख्या है ($n = N/L$)। - परिनालिका के बाहर: चुंबकीय क्षेत्र लगभग शून्य होता है।
- परिनालिका के अंदर: $B = \mu_0 n I$
-
टोरोइड (Toroid):
एक टोरोइड एक बंद वृत्ताकार परिनालिका होती है।- टोरोइड के अंदर (केंद्रीय अक्ष से $r$ दूरी पर): $B = \frac{\mu_0 N I}{2\pi r}$
जहाँ $N$ टोरोइड में कुल फेरों की संख्या है। - टोरोइड के बाहर और टोरोइड के अंदर खाली जगह में: चुंबकीय क्षेत्र शून्य होता है।
- टोरोइड के अंदर (केंद्रीय अक्ष से $r$ दूरी पर): $B = \frac{\mu_0 N I}{2\pi r}$
5. दो समांतर धारावाही चालकों के बीच बल (Force between two parallel current-carrying conductors)
जब दो समांतर धारावाही चालक एक-दूसरे के पास रखे होते हैं, तो वे एक-दूसरे पर चुंबकीय बल लगाते हैं।
- यदि धाराएं एक ही दिशा में बहती हैं, तो चालक एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं।
- यदि धाराएं विपरीत दिशाओं में बहती हैं, तो चालक एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं।
दो समांतर चालकों (लंबाई $L$, बीच की दूरी $d$, धाराएं $I_1$ और $I_2$) के बीच प्रति इकाई लंबाई पर लगने वाला बल:
$\frac{F}{L} = \frac{\mu_0 I_1 I_2}{2\pi d}$
एम्पीयर की परिभाषा:
एक एम्पीयर वह स्थिर धारा है जो निर्वात में एक-दूसरे के समानांतर रखे दो अनंत लंबाई के, नगण्य अनुप्रस्थ काट वाले चालकों में प्रवाहित होने पर, जो एक मीटर की दूरी पर हैं, उनके बीच प्रति मीटर लंबाई पर $2 \times 10^{-7}$ न्यूटन का बल उत्पन्न करती है।
6. धारा लूप पर बल आघूर्ण (Torque on a Current Loop)
जब एक धारावाही लूप (क्षेत्रफल $A$, धारा $I$, $N$ फेरे) एकसमान चुंबकीय क्षेत्र $\vec{B}$ में रखा जाता है, तो उस पर एक बल आघूर्ण ($\vec{\tau}$) लगता है।
$\vec{\tau} = \vec{m} \times \vec{B}$
जहाँ $\vec{m}$ चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण है।
-
चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण ($\vec{m}$):
एक धारा लूप का चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण धारा $I$, लूप के क्षेत्रफल $A$, और फेरों की संख्या $N$ के गुणनफल के बराबर होता है।
$m = N I A$
इसकी दिशा लूप के तल के लंबवत होती है, जिसे दाहिने हाथ के नियम से ज्ञात किया जाता है (धारा की दिशा में उंगलियों को मोड़ें, अंगूठा $\vec{m}$ की दिशा देगा)।
मात्रक: एम्पीयर-मीटर$^2$ (A m$^2$) -
बल आघूर्ण का परिमाण:
$\tau = N I A B \sin\alpha$
जहाँ $\alpha$ चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण $\vec{m}$ और चुंबकीय क्षेत्र $\vec{B}$ के बीच का कोण है।- बल आघूर्ण अधिकतम होता है जब लूप का तल चुंबकीय क्षेत्र के समानांतर होता है ($\alpha = 90^\circ$), $\tau_{max} = NIAB$.
- बल आघूर्ण शून्य होता है जब लूप का तल चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत होता है ($\alpha = 0^\circ$), $\tau = 0$.
-
चल कुंडली गैल्वेनोमीटर (Moving Coil Galvanometer):
यह एक ऐसी युक्ति है जिसका उपयोग विद्युत परिपथ में छोटी धाराओं का पता लगाने और मापने के लिए किया जाता है।- सिद्धांत: यह इस सिद्धांत पर आधारित है कि जब एक धारावाही कुंडली को चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो उस पर एक बल आघूर्ण लगता है, जो उसे घुमाता है।
- विक्षेपण बल आघूर्ण: $\tau_{def} = N I A B$ (त्रिज्या चुंबकीय क्षेत्र के कारण, $\sin\alpha = 1$ माना जाता है)।
- पुनर्स्थापन बल आघूर्ण: $\tau_{res} = k\phi$ (जहाँ $k$ मरोड़ स्थिरांक है और $\phi$ विक्षेपण कोण है)।
- संतुलन में: $NIAB = k\phi$
- धारा संवेदनशीलता (Current Sensitivity): प्रति इकाई धारा विक्षेपण। $I_s = \frac{\phi}{I} = \frac{NAB}{k}$
- वोल्टेज संवेदनशीलता (Voltage Sensitivity): प्रति इकाई वोल्टेज विक्षेपण। $V_s = \frac{\phi}{V} = \frac{\phi}{IR} = \frac{NAB}{kR}$
- गैल्वेनोमीटर का एमीटर में रूपांतरण: एक गैल्वेनोमीटर को एमीटर में बदलने के लिए, इसके समानांतर में एक बहुत कम प्रतिरोध (शंट प्रतिरोध $R_s$) जोड़ा जाता है।
$I_g R_g = (I - I_g) R_s \implies R_s = \frac{I_g R_g}{I - I_g}$ - गैल्वेनोमीटर का वोल्टमीटर में रूपांतरण: एक गैल्वेनोमीटर को वोल्टमीटर में बदलने के लिए, इसके श्रेणी क्रम में एक बहुत उच्च प्रतिरोध ($R_h$) जोड़ा जाता है।
$V = I_g (R_g + R_h) \implies R_h = \frac{V}{I_g} - R_g$
महत्वपूर्ण स्थिरांक और इकाइयाँ:
- मुक्त आकाश की पारगम्यता ($\mu_0$): $4\pi \times 10^{-7} \text{ T m A}^{-1}$ (टेस्ला मीटर प्रति एम्पीयर) या $\text{H/m}$ (हेनरी प्रति मीटर)
- चुंबकीय क्षेत्र (B) की इकाई: टेस्ला (Tesla, T) या वेबर प्रति वर्ग मीटर (Wb/m$^2$)
- 1 टेस्ला = 10$^4$ गॉस (Gauss, G)
यह अध्याय गतिमान आवेशों और चुंबकीय क्षेत्रों के बीच के जटिल संबंधों को समझने के लिए आधारशिला रखता है। इन सभी अवधारणाओं और सूत्रों को अच्छी तरह से समझें और अभ्यास करें।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs):
1. एक आवेशित कण चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत प्रवेश करता है। कण का पथ कैसा होगा?
(A) सीधी रेखा
(B) परवलयिक
(C) वृत्ताकार
(D) हेलिकल
2. बायो-सावर्ट नियम के अनुसार, एक धारा अवयव $I d\vec{l}$ के कारण $r$ दूरी पर चुंबकीय क्षेत्र $d\vec{B}$ किस पर निर्भर करता है?
(A) $r$ के समानुपाती
(B) $r^2$ के व्युत्क्रमानुपाती
(C) $r^3$ के व्युत्क्रमानुपाती
(D) $r^{-1}$ के समानुपाती
3. एम्पीयर का परिपथीय नियम क्या बताता है?
(A) $\oint \vec{E} \cdot d\vec{l} = -\frac{d\Phi_B}{dt}$
(B) $\oint \vec{B} \cdot d\vec{l} = \mu_0 I_{enc}$
(C) $\oint \vec{E} \cdot d\vec{A} = \frac{q}{\epsilon_0}$
(D) $\oint \vec{B} \cdot d\vec{A} = 0$
4. एक लंबी परिनालिका के अंदर चुंबकीय क्षेत्र का सूत्र क्या है? (जहाँ $n$ प्रति इकाई लंबाई में फेरों की संख्या है और $I$ धारा है)
(A) $\frac{\mu_0 n I}{2}$
(B) $\mu_0 n I$
(C) $\frac{\mu_0 I}{2\pi r}$
(D) $\mu_0 N I$
5. दो समांतर धारावाही चालकों में यदि धाराएं एक ही दिशा में प्रवाहित होती हैं, तो उनके बीच लगने वाला बल कैसा होगा?
(A) आकर्षण बल
(B) प्रतिकर्षण बल
(C) कोई बल नहीं
(D) बल की दिशा धारा के परिमाण पर निर्भर करती है
6. साइक्लोट्रॉन का उपयोग किसे त्वरित करने के लिए नहीं किया जा सकता?
(A) प्रोटॉन
(B) ड्यूट्रॉन
(C) इलेक्ट्रॉन
(D) अल्फा कण
7. एक धारा लूप का चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण किस पर निर्भर करता है?
(A) केवल धारा पर
(B) केवल क्षेत्रफल पर
(C) धारा और क्षेत्रफल के गुणनफल पर
(D) चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता पर
8. चल कुंडली गैल्वेनोमीटर में धारा संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए क्या किया जा सकता है?
(A) कुंडली के फेरों की संख्या कम करें
(B) चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता कम करें
(C) कुंडली का क्षेत्रफल बढ़ाएं
(D) मरोड़ स्थिरांक बढ़ाएं
9. एक आवेशित कण चुंबकीय क्षेत्र में गति कर रहा है। यदि चुंबकीय बल कण के वेग के लंबवत है, तो कण की गतिज ऊर्जा पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
(A) बढ़ेगी
(B) घटेगी
(C) अपरिवर्तित रहेगी
(D) पहले बढ़ेगी फिर घटेगी
10. $1$ टेस्ला किसके बराबर है?
(A) $1 \text{ Wb/m}^2$
(B) $1 \text{ N/(A m)}$
(C) $1 \text{ kg/(s}^2 \text{ A)}$
(D) उपरोक्त सभी
उत्तर कुंजी:
- (C)
- (B)
- (B)
- (B)
- (A)
- (C)
- (C)
- (C)
- (C)
- (D)
मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होंगे। शुभकामनाएँ!