Class 12 Physics Notes Chapter 4 (परमाणु) – Bhautiki-II Book

Bhautiki-II
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम भौतिकी के अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय 'परमाणु' का विस्तृत अध्ययन करेंगे, जो आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अत्यंत सहायक सिद्ध होगा। इस अध्याय में हम परमाणुओं की संरचना, विभिन्न परमाणु मॉडल और उनसे संबंधित महत्वपूर्ण अवधारणाओं पर गहनता से चर्चा करेंगे।


अध्याय 4: परमाणु (Atoms)

यह अध्याय परमाणुओं की आंतरिक संरचना को समझने के लिए किए गए विभिन्न प्रयासों और मॉडलों का वर्णन करता है, जो आधुनिक भौतिकी की नींव हैं।


1. थॉमसन का परमाणु मॉडल (Thomson's Atomic Model - 1898)

  • अवधारणा: जे.जे. थॉमसन ने परमाणु को एक धनावेशित गोले के रूप में माना, जिसमें इलेक्ट्रॉन (ऋणावेशित कण) तरबूज के बीज की तरह धँसे होते हैं। इसे "प्लम पुडिंग मॉडल" भी कहा जाता है।
  • विशेषताएँ:
    • परमाणु का कुल धनावेश और ऋणावेश बराबर होता है, इसलिए परमाणु वैद्युत रूप से उदासीन होता है।
    • परमाणु का द्रव्यमान पूरे गोले में समान रूप से वितरित होता है।
  • सीमाएँ: यह मॉडल रदरफोर्ड के अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग के परिणामों की व्याख्या नहीं कर सका।

2. रदरफोर्ड का अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग (Rutherford's Alpha-particle Scattering Experiment - 1911)

  • प्रयोग: रदरफोर्ड और उनके शिष्यों (गाइगर और मार्स्डन) ने एक पतली सोने की पन्नी पर उच्च ऊर्जा वाले अल्फा-कणों (धनावेशित हीलियम नाभिक) की बमबारी की। प्रकीर्णित कणों को एक जिंक सल्फाइड (ZnS) स्क्रीन पर देखा गया।
  • प्रेक्षण (Observations):
    • अधिकांश अल्फा-कण सोने की पन्नी से बिना विचलित हुए सीधे निकल गए।
    • कुछ अल्फा-कण छोटे कोणों पर विचलित हुए।
    • बहुत कम (लगभग 8000 में से 1) अल्फा-कण 90° से अधिक कोणों पर विचलित हुए, और कुछ तो लगभग 180° पर वापस लौट आए।
  • निष्कर्ष (Conclusions):
    • परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त है: क्योंकि अधिकांश अल्फा-कण सीधे निकल गए।
    • परमाणु का समस्त धनावेश और लगभग समस्त द्रव्यमान उसके केंद्र में एक बहुत छोटे आयतन में केंद्रित होता है, जिसे नाभिक कहते हैं।
    • नाभिक धनावेशित होता है: क्योंकि धनावेशित अल्फा-कण नाभिक द्वारा प्रतिकर्षित होकर विचलित हुए।
    • इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर वृत्ताकार कक्षाओं में चक्कर लगाते हैं।
  • रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल (नाभिकीय मॉडल):
    • परमाणु का समस्त धनावेश और द्रव्यमान उसके केंद्र में एक छोटे से नाभिक में केंद्रित होता है।
    • इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर वृत्ताकार कक्षाओं में घूमते हैं, जैसे ग्रह सूर्य के चारों ओर घूमते हैं (ग्रह-मॉडल)।
    • इलेक्ट्रॉन और नाभिक के बीच स्थिरवैद्युत आकर्षण बल आवश्यक अभिकेन्द्रीय बल प्रदान करता है।
    • परमाणु वैद्युत रूप से उदासीन होता है।
  • सीमाएँ (Limitations):
    • परमाणु के स्थायित्व की व्याख्या नहीं कर सका: मैक्सवेल के वैद्युतचुम्बकीय सिद्धांत के अनुसार, त्वरित आवेशित कण (इलेक्ट्रॉन) ऊर्जा का विकिरण करते हैं। यदि इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर घूमते हुए ऊर्जा का विकिरण करेंगे, तो उनकी ऊर्जा कम होती जाएगी और वे अंततः सर्पिलाकार मार्ग से नाभिक में गिर जाएँगे, जिससे परमाणु अस्थिर हो जाएगा। लेकिन परमाणु स्थिर होते हैं।
    • परमाणु के रेखीय स्पेक्ट्रम की व्याख्या नहीं कर सका: रदरफोर्ड मॉडल एक सतत स्पेक्ट्रम की भविष्यवाणी करता है, जबकि परमाणु रेखीय स्पेक्ट्रम उत्सर्जित करते हैं।

3. निकटतम पहुँच की दूरी (Distance of Closest Approach, $r_0$)

  • जब एक अल्फा-कण सीधे नाभिक की ओर बढ़ता है, तो वह नाभिक के वैद्युत प्रतिकर्षण के कारण रुक जाता है और अपनी दिशा उलट देता है। इस बिंदु पर अल्फा-कण की संपूर्ण गतिज ऊर्जा स्थितिज ऊर्जा में बदल जाती है।
  • सूत्र: $r_0 = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{(2e)(Ze)}{K}$, जहाँ $K$ अल्फा-कण की प्रारंभिक गतिज ऊर्जा है, $2e$ अल्फा-कण का आवेश है, और $Ze$ नाभिक का आवेश है।
  • यह नाभिक के आकार का अनुमान लगाने में मदद करता है।

4. संघात प्राचल (Impact Parameter, $b$)

  • नाभिक के केंद्र से अल्फा-कण के प्रारंभिक वेग सदिश की लंबवत दूरी को संघात प्राचल कहते हैं।
  • छोटे संघात प्राचल के लिए प्रकीर्णन कोण बड़ा होता है, और बड़े संघात प्राचल के लिए प्रकीर्णन कोण छोटा होता है।
  • सीधे नाभिक की ओर जाने वाले कण के लिए $b=0$, और प्रकीर्णन कोण $\theta = 180^\circ$ होता है।

5. बोर का परमाणु मॉडल (Bohr's Atomic Model - 1913)

नील्स बोर ने रदरफोर्ड मॉडल की सीमाओं को दूर करने के लिए प्लांक के क्वांटम सिद्धांत का उपयोग करते हुए कुछ परिकल्पनाएँ प्रस्तुत कीं।

  • बोर की परिकल्पनाएँ (Bohr's Postulates):

    1. स्थायी कक्षाएँ (Stationary Orbits): इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर कुछ निश्चित, स्थायी वृत्ताकार कक्षाओं में ही बिना ऊर्जा का विकिरण किए घूम सकते हैं। इन कक्षाओं में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा नियत रहती है।
    2. कोणीय संवेग का प्रमाणीकरण (Quantization of Angular Momentum): इन स्थायी कक्षाओं में इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग ($L$) प्लांक नियतांक ($h$) का पूर्णांक गुणज होता है।
      $L = mvr = n \frac{h}{2\pi} = n\hbar$, जहाँ $n$ एक पूर्णांक (1, 2, 3, ...) है जिसे मुख्य क्वांटम संख्या कहते हैं।
    3. ऊर्जा का उत्सर्जन/अवशोषण (Energy Emission/Absorption): इलेक्ट्रॉन केवल तभी ऊर्जा उत्सर्जित या अवशोषित करता है जब वह एक स्थायी कक्षा से दूसरी स्थायी कक्षा में संक्रमण करता है।
      • उच्च ऊर्जा स्तर ($E_2$) से निम्न ऊर्जा स्तर ($E_1$) में संक्रमण करने पर फोटॉन उत्सर्जित होता है। फोटॉन की ऊर्जा $h\nu = E_2 - E_1$ होती है।
      • निम्न ऊर्जा स्तर से उच्च ऊर्जा स्तर में जाने के लिए फोटॉन का अवशोषण होता है।
  • हाइड्रोजन परमाणु के लिए बोर मॉडल के परिणाम:

    • कक्षा की त्रिज्या ($r_n$):
      $r_n = \frac{n^2 h^2 \epsilon_0}{\pi m e^2 Z} = \frac{n^2 a_0}{Z}$
      जहाँ $a_0 = \frac{h^2 \epsilon_0}{\pi m e^2} = 0.529 \times 10^{-10}$ m (बोर त्रिज्या, $n=1, Z=1$ के लिए)।
      • $r_n \propto n^2$ (कक्षा संख्या के वर्ग के समानुपाती)।
    • इलेक्ट्रॉन की चाल ($v_n$):
      $v_n = \frac{Z e^2}{2 \epsilon_0 n h} = \frac{Z}{n} \left(\frac{e^2}{2 \epsilon_0 h}\right) = \frac{Z}{n} \left(\frac{c}{137}\right)$
      • $v_n \propto 1/n$ (कक्षा संख्या के व्युत्क्रमानुपाती)।
    • इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा ($E_n$):
      $E_n = -\frac{m Z^2 e^4}{8 \epsilon_0^2 n^2 h^2} = -\frac{13.6 Z2}{n2}$ eV
      • हाइड्रोजन परमाणु ($Z=1$) के लिए: $E_n = -\frac{13.6}{n^2}$ eV
      • $n=1$ (मूल अवस्था) के लिए $E_1 = -13.6$ eV (न्यूनतम ऊर्जा)।
      • $n=2$ के लिए $E_2 = -3.4$ eV।
      • $n=3$ के लिए $E_3 = -1.51$ eV।
      • $n=\infty$ के लिए $E_\infty = 0$ eV (आयनीकरण अवस्था)।
      • ऋणात्मक चिह्न इंगित करता है कि इलेक्ट्रॉन नाभिक से बंधा हुआ है।
    • आयनीकरण ऊर्जा (Ionization Energy): इलेक्ट्रॉन को परमाणु से बाहर निकालने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा। हाइड्रोजन के लिए $13.6$ eV।
    • उत्सर्जन स्पेक्ट्रम (Emission Spectrum): जब इलेक्ट्रॉन उच्च ऊर्जा स्तर से निम्न ऊर्जा स्तर में संक्रमण करता है, तो फोटॉन उत्सर्जित होते हैं, जिससे रेखीय स्पेक्ट्रम प्राप्त होता है।
      • फोटॉन की तरंगदैर्घ्य के लिए रिडबर्ग सूत्र:
        $\frac{1}{\lambda} = R Z^2 \left(\frac{1}{n_1^2} - \frac{1}{n_2^2}\right)$
        जहाँ $R$ रिडबर्ग नियतांक ($R = 1.097 \times 10^7$ m$^{-1}$), $n_1$ निम्न ऊर्जा स्तर और $n_2$ उच्च ऊर्जा स्तर है ($n_2 > n_1$)।
  • हाइड्रोजन स्पेक्ट्रमी श्रेणियाँ (Hydrogen Spectral Series):

    1. लाइमन श्रेणी (Lyman Series): इलेक्ट्रॉन $n_2 = 2, 3, 4, ...$ से $n_1 = 1$ में संक्रमण करता है।
      • क्षेत्र: पराबैंगनी (Ultraviolet)
    2. बामर श्रेणी (Balmer Series): इलेक्ट्रॉन $n_2 = 3, 4, 5, ...$ से $n_1 = 2$ में संक्रमण करता है।
      • क्षेत्र: दृश्य (Visible)
    3. पाश्चन श्रेणी (Paschen Series): इलेक्ट्रॉन $n_2 = 4, 5, 6, ...$ से $n_1 = 3$ में संक्रमण करता है।
      • क्षेत्र: अवरक्त (Infrared)
    4. ब्रैकेट श्रेणी (Brackett Series): इलेक्ट्रॉन $n_2 = 5, 6, 7, ...$ से $n_1 = 4$ में संक्रमण करता है।
      • क्षेत्र: अवरक्त (Infrared)
    5. फंड श्रेणी (Pfund Series): इलेक्ट्रॉन $n_2 = 6, 7, 8, ...$ से $n_1 = 5$ में संक्रमण करता है।
      • क्षेत्र: अवरक्त (Infrared)
  • बोर मॉडल की सीमाएँ (Limitations of Bohr's Model):

    • यह केवल एकल-इलेक्ट्रॉन परमाणुओं (जैसे H, He$^+$, Li$^{2+}$) के लिए ही लागू होता है। बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणुओं के स्पेक्ट्रम की व्याख्या नहीं कर सका।
    • यह स्पेक्ट्रमी रेखाओं की सापेक्षिक तीव्रता की व्याख्या नहीं कर सका।
    • यह स्पेक्ट्रमी रेखाओं की सूक्ष्म संरचना (fine structure) की व्याख्या नहीं कर सका (उच्च विभेदन पर एकल रेखाएँ कई बारीक रेखाओं में विभाजित दिखाई देती हैं)।
    • यह ज़ीमन प्रभाव (चुंबकीय क्षेत्र में स्पेक्ट्रमी रेखाओं का विपाटन) और स्टार्क प्रभाव (विद्युत क्षेत्र में स्पेक्ट्रमी रेखाओं का विपाटन) की व्याख्या नहीं कर सका।

6. डी-ब्रोग्ली की परिकल्पना और बोर का प्रमाणीकरण नियम (De Broglie's Hypothesis and Bohr's Quantization Rule)

  • डी-ब्रोग्ली ने प्रस्तावित किया कि इलेक्ट्रॉन जैसे कण भी तरंग प्रकृति प्रदर्शित करते हैं, और उनकी तरंगदैर्घ्य $\lambda = h/p = h/mv$ होती है।
  • डी-ब्रोग्ली ने बोर की द्वितीय परिकल्पना (कोणीय संवेग का प्रमाणीकरण) को समझाया। उन्होंने तर्क दिया कि इलेक्ट्रॉन केवल उन्हीं कक्षाओं में बिना ऊर्जा खोए घूम सकते हैं जहाँ उनकी डी-ब्रोग्ली तरंगें स्थायी अप्रगामी तरंगें बनाती हैं।
  • स्थायी अप्रगामी तरंगों के लिए, कक्षा की परिधि तरंगदैर्घ्य का पूर्णांक गुणज होनी चाहिए:
    $2\pi r = n\lambda$
    $2\pi r = n \frac{h}{mv}$
    $mvr = n \frac{h}{2\pi}$
    यह बोर की द्वितीय परिकल्पना के समान है, जिससे बोर के मॉडल को सैद्धांतिक आधार मिला।

7. एक्स-किरणें (X-rays)

  • उत्पत्ति: जब उच्च ऊर्जा वाले इलेक्ट्रॉन किसी धातु लक्ष्य से टकराते हैं, तो एक्स-किरणें उत्पन्न होती हैं।
  • प्रकार:
    1. सतत एक्स-किरणें (Continuous X-rays / Bremsstrahlung): जब त्वरित इलेक्ट्रॉन नाभिक के वैद्युत क्षेत्र में धीमे होते हैं, तो वे ऊर्जा का विकिरण करते हैं, जिससे सतत स्पेक्ट्रम वाली एक्स-किरणें उत्पन्न होती हैं। इनकी न्यूनतम तरंगदैर्घ्य (कट-ऑफ तरंगदैर्घ्य) $h\nu_{max} = eV$ या $\lambda_{min} = hc/eV$ होती है, जहाँ $V$ त्वरित विभव है।
    2. अभिलाक्षणिक एक्स-किरणें (Characteristic X-rays): जब उच्च ऊर्जा वाले इलेक्ट्रॉन लक्ष्य परमाणु के आंतरिक कोश (जैसे K, L) से इलेक्ट्रॉन को बाहर निकाल देते हैं, तो उच्च ऊर्जा स्तरों से इलेक्ट्रॉन इन रिक्त स्थानों को भरने के लिए नीचे आते हैं। इस संक्रमण के दौरान उत्सर्जित फोटॉन की ऊर्जा परमाणु की विशिष्ट होती है, जिससे रेखीय स्पेक्ट्रम प्राप्त होता है।
      • K-श्रेणी: जब इलेक्ट्रॉन L, M, N... कोशों से K-कोश में आते हैं। (K$\alpha$, K$\beta$, K$_\gamma$)
      • L-श्रेणी: जब इलेक्ट्रॉन M, N, O... कोशों से L-कोश में आते हैं।
  • मोसले का नियम (Moseley's Law): अभिलाक्षणिक एक्स-किरणों की आवृत्ति का वर्गमूल परमाणु संख्या ($Z$) के लगभग समानुपाती होता है।
    $\sqrt{\nu} = a(Z-b)$
    जहाँ $a$ और $b$ नियतांक हैं। यह नियम आवर्त सारणी में तत्वों की व्यवस्था का आधार बना और परमाणु संख्या के महत्व को स्थापित किया।
  • उपयोग: चिकित्सा (एक्स-रे इमेजिंग), औद्योगिक निरीक्षण, क्रिस्टल संरचना विश्लेषण।

8. परमाणु द्रव्यमान और नाभिकीय आकार (Atomic Mass and Nuclear Size)

  • परमाणु द्रव्यमान इकाई (Atomic Mass Unit, amu): कार्बन-12 परमाणु के द्रव्यमान के 1/12वें भाग को 1 amu कहते हैं।
    1 amu = $1.6605 \times 10^{-27}$ kg।
  • नाभिक का आकार: नाभिक का आयतन उसकी द्रव्यमान संख्या ($A$) के समानुपाती होता है।
    $V \propto A \Rightarrow \frac{4}{3}\pi R^3 \propto A \Rightarrow R \propto A^{1/3}$
    $R = R_0 A^{1/3}$
    जहाँ $R_0$ एक नियतांक है जिसका मान लगभग $1.2 \times 10^{-15}$ m (या 1.2 fm) होता है।

यह अध्याय परमाणु संरचना के विकास और क्वांटम यांत्रिकी की नींव को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।


बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)

  1. रदरफोर्ड के अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग में, अधिकांश अल्फा-कण:
    a) सोने की पन्नी से सीधे निकल गए।
    b) 90° से अधिक कोण पर विचलित हुए।
    c) 180° पर वापस लौट आए।
    d) पन्नी में अवशोषित हो गए।

  2. थॉमसन के परमाणु मॉडल को किस नाम से जाना जाता है?
    a) नाभिकीय मॉडल
    b) प्लम पुडिंग मॉडल
    c) ग्रह मॉडल
    d) क्वांटम मॉडल

  3. बोर के परमाणु मॉडल की पहली परिकल्पना किससे संबंधित है?
    a) ऊर्जा का प्रमाणीकरण
    b) कोणीय संवेग का प्रमाणीकरण
    c) स्थायी कक्षाएँ
    d) इलेक्ट्रॉन का तरंग स्वभाव

  4. हाइड्रोजन परमाणु की मूल अवस्था में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा कितनी होती है?
    a) 0 eV
    b) -13.6 eV
    c) -3.4 eV
    d) 13.6 eV

  5. हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की लाइमन श्रेणी किस क्षेत्र में आती है?
    a) दृश्य क्षेत्र
    b) अवरक्त क्षेत्र
    c) पराबैंगनी क्षेत्र
    d) माइक्रोवेव क्षेत्र

  6. बोर मॉडल की कौन सी सीमा है?
    a) यह परमाणु के स्थायित्व की व्याख्या नहीं कर सका।
    b) यह केवल एकल-इलेक्ट्रॉन परमाणुओं के लिए लागू होता है।
    c) यह रेखीय स्पेक्ट्रम की व्याख्या नहीं कर सका।
    d) यह इलेक्ट्रॉन के तरंग स्वभाव की व्याख्या नहीं कर सका।

  7. डी-ब्रोग्ली की परिकल्पना के अनुसार, इलेक्ट्रॉन की तरंगदैर्घ्य का सूत्र क्या है?
    a) $\lambda = h/m$
    b) $\lambda = h/v$
    c) $\lambda = h/mv$
    d) $\lambda = mv/h$

  8. मोसले का नियम किससे संबंधित है?
    a) नाभिकीय विखंडन
    b) अभिलाक्षणिक एक्स-किरणों की आवृत्ति
    c) परमाणु का स्थायित्व
    d) अल्फा-कण प्रकीर्णन

  9. एक परमाणु द्रव्यमान इकाई (1 amu) का मान लगभग कितना होता है?
    a) $1.66 \times 10^{-27}$ kg
    b) $9.1 \times 10^{-31}$ kg
    c) $1.6 \times 10^{-19}$ kg
    d) $6.022 \times 10^{23}$ kg

  10. यदि हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन $n=3$ से $n=1$ में संक्रमण करता है, तो उत्सर्जित फोटॉन किस श्रेणी से संबंधित होगा?
    a) बामर श्रेणी
    b) लाइमन श्रेणी
    c) पाश्चन श्रेणी
    d) ब्रैकेट श्रेणी


उत्तरमाला (Answer Key):

  1. a
  2. b
  3. c
  4. b
  5. c
  6. b
  7. c
  8. b
  9. a
  10. b

आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी 'परमाणु' अध्याय की तैयारी में सहायक होंगे। शुभकामनाएँ!

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