Class 12 Physics Notes Chapter 5 (चुंबकत्व एव द्रव्य) – Bhautiki-I Book

Bhautiki-I
प्रिय विद्यार्थियों, आज हम कक्षा 12 भौतिकी के अध्याय 5 'चुंबकत्व एव द्रव्य' का विस्तृत अध्ययन करेंगे, जो आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अध्याय में हम चुंबकत्व के मूलभूत सिद्धांतों, विभिन्न प्रकार के चुंबकीय पदार्थों और पृथ्वी के चुंबकत्व को गहराई से समझेंगे।


अध्याय 5: चुंबकत्व एव द्रव्य (Magnetism and Matter)

1. परिचय (Introduction)
चुंबकत्व एक मौलिक बल है जो विद्युत धाराओं और चुंबकीय द्विध्रुवों के बीच कार्य करता है। प्राचीन यूनानियों को मैग्नेटाइट (Fe₃O₄) नामक प्राकृतिक चुंबक का ज्ञान था। 19वीं शताब्दी में, ओर्स्टेड ने दिखाया कि विद्युत धाराएँ चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती हैं, और फैराडे ने दर्शाया कि बदलते चुंबकीय क्षेत्र विद्युत धाराओं को प्रेरित कर सकते हैं। मैक्सवेल ने विद्युत और चुंबकत्व को एकीकृत करके विद्युत चुम्बकीय सिद्धांत की नींव रखी।

2. छड़ चुंबक और चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ (Bar Magnet and Magnetic Field Lines)

  • छड़ चुंबक (Bar Magnet): एक आयताकार चुंबक जिसके दो ध्रुव होते हैं - उत्तरी ध्रुव (N) और दक्षिणी ध्रुव (S)।

    • चुंबकीय ध्रुव (Magnetic Poles): वे बिंदु जहाँ चुंबक का चुंबकीय प्रभाव सबसे अधिक होता है।
    • ध्रुवों का अस्तित्व (Existence of Poles): चुंबकीय ध्रुव हमेशा युग्मों में होते हैं। एक एकल चुंबकीय ध्रुव (monopole) का अस्तित्व नहीं होता। यदि एक चुंबक को तोड़ा जाता है, तो प्रत्येक टुकड़ा अपने आप में एक पूर्ण चुंबक बन जाता है जिसमें उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव होते हैं।
    • ध्रुव सामर्थ्य (Pole Strength, m): यह एक ध्रुव की सामर्थ्य का माप है। इसका SI मात्रक एम्पीयर-मीटर (Am) है।
    • चुंबकीय लंबाई (Magnetic Length, 2l): चुंबक के दो ध्रुवों के बीच की दूरी। यह ज्यामितीय लंबाई (कुल लंबाई) से थोड़ी कम होती है (लगभग 5/6 गुना)।
    • चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण (Magnetic Dipole Moment, M): यह एक सदिश राशि है जिसकी दिशा दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की ओर होती है।
      • M = m × 2l
      • SI मात्रक: एम्पीयर-मीटर² (Am²) या जूल/टेस्ला (J/T)।
  • चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ (Magnetic Field Lines): ये काल्पनिक रेखाएँ हैं जो चुंबकीय क्षेत्र की दिशा और प्रबलता को दर्शाती हैं।

    • गुणधर्म (Properties):
      1. ये उत्तरी ध्रुव से निकलती हैं और दक्षिणी ध्रुव में प्रवेश करती हैं (चुंबक के बाहर), और दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की ओर (चुंबक के अंदर) जाती हैं, इस प्रकार बंद लूप बनाती हैं।
      2. ये कभी भी एक-दूसरे को नहीं काटतीं। यदि वे काटतीं, तो कटान बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दो दिशाएँ होतीं, जो असंभव है।
      3. जहाँ क्षेत्र रेखाएँ सघन होती हैं, वहाँ चुंबकीय क्षेत्र प्रबल होता है (जैसे ध्रुवों पर)। जहाँ वे विरल होती हैं, वहाँ क्षेत्र दुर्बल होता है।
      4. किसी भी बिंदु पर खींची गई स्पर्श रेखा उस बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा को दर्शाती है।

3. पृथ्वी का चुंबकत्व (Earth's Magnetism)
पृथ्वी एक विशाल चुंबक की तरह व्यवहार करती है। इसके चुंबकीय क्षेत्र के कारण ही चुंबकीय सुई हमेशा उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरती है। पृथ्वी के चुंबकत्व का कारण पृथ्वी के पिघले हुए धात्विक क्रोड में संवहन धाराएँ (डायनेमो प्रभाव) मानी जाती हैं।

  • पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के घटक (Components of Earth's Magnetic Field):
    1. दिक्पात कोण (Angle of Declination, α या θ): भौगोलिक याम्योत्तर (Geographic Meridian) और चुंबकीय याम्योत्तर (Magnetic Meridian) के बीच का कोण। यह किसी स्थान पर चुंबकीय सुई की भौगोलिक उत्तर दिशा से विचलन को दर्शाता है।
    2. नति कोण या नमन कोण (Angle of Dip or Inclination, δ या I): चुंबकीय याम्योत्तर में स्वतंत्र रूप से निलंबित एक चुंबकीय सुई का क्षैतिज से बनाया गया कोण।
      • चुंबकीय ध्रुवों पर (उत्तरी और दक्षिणी) नति कोण 90° होता है।
      • चुंबकीय भूमध्य रेखा पर नति कोण 0° होता है।
    3. पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का क्षैतिज घटक (Horizontal Component of Earth's Magnetic Field, BH): यह पृथ्वी के कुल चुंबकीय क्षेत्र (B) का क्षैतिज दिशा में घटक है।
      • यदि पृथ्वी का कुल चुंबकीय क्षेत्र B है, तो:
        • B_H = B cos δ
        • B_V = B sin δ (ऊर्ध्वाधर घटक)
        • B = √(B_H² + B_V²)
        • tan δ = B_V / B_H

4. चुंबकत्व के लिए गाउस का नियम (Gauss's Law for Magnetism)
यह नियम बताता है कि किसी भी बंद पृष्ठ से गुजरने वाला कुल चुंबकीय फ्लक्स (Net Magnetic Flux) हमेशा शून्य होता है।
∮ B ⋅ dA = 0
इसका अर्थ है कि एकल चुंबकीय ध्रुव (monopole) का अस्तित्व नहीं होता, क्योंकि यदि ऐसा होता, तो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ उस ध्रुव से निकलकर अनंत तक जातीं और बंद लूप नहीं बनातीं, जिससे कुल फ्लक्स शून्य नहीं होता।

5. एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में चुंबकीय द्विध्रुव (Magnetic Dipole in Uniform Magnetic Field)

  • बल आघूर्ण (Torque, τ): जब एक चुंबकीय द्विध्रुव (चुंबक) को एकसमान चुंबकीय क्षेत्र B में रखा जाता है, तो उस पर एक बल आघूर्ण कार्य करता है जो उसे क्षेत्र की दिशा में संरेखित करने का प्रयास करता है।

    • τ = M × B (सदिश रूप)
    • τ = MB sinθ (अदिश रूप), जहाँ θ चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण M और चुंबकीय क्षेत्र B के बीच का कोण है।
    • SI मात्रक: न्यूटन-मीटर (Nm)।
  • स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy, U): एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में रखे चुंबकीय द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा।

    • U = -M ⋅ B (सदिश रूप)
    • U = -MB cosθ (अदिश रूप)
    • स्थायी संतुलन (Stable Equilibrium): जब θ = 0° (M, B के समानांतर हो), U = -MB (न्यूनतम ऊर्जा)।
    • अस्थायी संतुलन (Unstable Equilibrium): जब θ = 180° (M, B के प्रति-समानांतर हो), U = +MB (अधिकतम ऊर्जा)।
    • SI मात्रक: जूल (J)।

6. परिक्रमण करते इलेक्ट्रॉन का चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण (Magnetic Dipole Moment of Revolving Electron)
परमाणु में नाभिक के चारों ओर परिक्रमण करने वाला इलेक्ट्रॉन एक धारा लूप बनाता है, जिसके कारण उसमें एक कक्षीय चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण होता है।

  • μ_l = (e/2m_e) L
    जहाँ, e इलेक्ट्रॉन का आवेश, m_e इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान, और L कक्षीय कोणीय संवेग है।
  • बोह्र मैग्नेटॉन (Bohr Magneton, μ_B): यह परमाणु चुंबकत्व की मूल इकाई है।
    • μ_B = eħ / 2m_e = 9.27 × 10⁻²⁴ A m²
    • (जहाँ ħ = h/2π, प्लांक स्थिरांक)।

7. चुंबकीय पदार्थ (Magnetic Materials)
पदार्थों को उनके चुंबकीय गुणों के आधार पर तीन मुख्य श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है:

  • चुंबकन (Magnetization, M): प्रति इकाई आयतन चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण। SI मात्रक: A/m।
  • चुंबकीय तीव्रता (Magnetic Intensity, H): यह बाह्य चुंबकीय क्षेत्र की प्रबलता को दर्शाता है जो किसी पदार्थ को चुंबकित करता है। SI मात्रक: A/m।
    • B = μ₀(H + M)
  • चुंबकीय प्रवृत्ति (Magnetic Susceptibility, χm): यह दर्शाता है कि कोई पदार्थ बाह्य चुंबकीय क्षेत्र के प्रति कितनी आसानी से चुंबकित होता है।
    • M = χm H
    • यह एक विमाहीन राशि है।
  • आपक्षिक पारगम्यता (Relative Permeability, μr): यह दर्शाता है कि कोई पदार्थ चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं को अपने अंदर से कितनी आसानी से गुजरने देता है।
    • μr = 1 + χm
    • μ = μ₀μr (जहाँ μ पदार्थ की पारगम्यता और μ₀ निर्वात की पारगम्यता है)।

पदार्थों का वर्गीकरण:

  1. प्रतिचुंबकीय पदार्थ (Diamagnetic Substances):

    • वे पदार्थ जो बाह्य चुंबकीय क्षेत्र में दुर्बल रूप से प्रतिकर्षित होते हैं।
    • इनमें सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित होते हैं, जिससे शुद्ध चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण शून्य होता है।
    • जब बाह्य क्षेत्र लगाया जाता है, तो प्रेरित द्विध्रुव आघूर्ण क्षेत्र के विपरीत दिशा में उत्पन्न होता है।
    • χm ऋणात्मक और बहुत कम होता है (जैसे -10⁻⁵ से -10⁻⁶)।
    • μr < 1 (μr का मान 1 से थोड़ा कम होता है)।
    • तापमान पर निर्भर नहीं करते।
    • उदाहरण: बिस्मथ (Bi), तांबा (Cu), जल (H₂O), NaCl, नाइट्रोजन (N₂), सोना (Au), चांदी (Ag)।
  2. अनुचुंबकीय पदार्थ (Paramagnetic Substances):

    • वे पदार्थ जो बाह्य चुंबकीय क्षेत्र में दुर्बल रूप से आकर्षित होते हैं।
    • इनमें अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं, जिससे प्रत्येक परमाणु का एक स्थायी चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण होता है।
    • बाह्य क्षेत्र में, ये द्विध्रुव क्षेत्र की दिशा में संरेखित होने का प्रयास करते हैं।
    • χm धनात्मक और बहुत कम होता है (जैसे 10⁻⁵ से 10⁻³)।
    • μr > 1 (μr का मान 1 से थोड़ा अधिक होता है)।
    • क्यूरी का नियम (Curie's Law): इनकी चुंबकीय प्रवृत्ति तापमान के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
      • χm ∝ 1/T या χm = C/T (जहाँ C क्यूरी स्थिरांक है)।
    • उदाहरण: एल्यूमीनियम (Al), सोडियम (Na), कैल्शियम (Ca), ऑक्सीजन (O₂), प्लैटिनम (Pt), कॉपर क्लोराइड (CuCl₂)।
  3. लौहचुंबकीय पदार्थ (Ferromagnetic Substances):

    • वे पदार्थ जो बाह्य चुंबकीय क्षेत्र में प्रबल रूप से आकर्षित होते हैं।
    • इनमें परमाणु एक साथ मिलकर "डोमेन" नामक छोटे क्षेत्रों का निर्माण करते हैं, जहाँ सभी परमाणुओं के चुंबकीय आघूर्ण एक ही दिशा में संरेखित होते हैं।
    • बाह्य क्षेत्र में, डोमेन क्षेत्र की दिशा में बड़े पैमाने पर संरेखित हो जाते हैं और क्षेत्र के साथ बड़े डोमेन का विकास होता है।
    • χm धनात्मक और बहुत अधिक होता है (जैसे 100 से 100000)।
    • μr >> 1 (μr का मान 1 से बहुत अधिक होता है)।
    • क्यूरी ताप (Curie Temperature, Tc): वह तापमान जिसके ऊपर एक लौहचुंबकीय पदार्थ अनुचुंबकीय पदार्थ में परिवर्तित हो जाता है।
      • लोहे के लिए Tc ≈ 770°C, निकल के लिए Tc ≈ 358°C, कोबाल्ट के लिए Tc ≈ 1121°C।
    • उदाहरण: लोहा (Fe), कोबाल्ट (Co), निकल (Ni), गैडोलीनियम (Gd), ऐलनिको (Alnico)।
  • शैथिल्य (Hysteresis): लौहचुंबकीय पदार्थों का एक महत्वपूर्ण गुण। जब एक लौहचुंबकीय पदार्थ को चुंबकित और विचुंबकित किया जाता है, तो चुंबकीय प्रेरण (B) चुंबकीय तीव्रता (H) से पिछड़ जाता है। B-H वक्र एक बंद लूप बनाता है जिसे शैथिल्य लूप कहते हैं।

    • धारणशीलता (Retentivity): जब चुंबकीय तीव्रता (H) शून्य हो जाती है, तब भी पदार्थ में शेष चुंबकीय प्रेरण (B) का मान।
    • निग्राहिता (Coercivity): चुंबकीय प्रेरण (B) को शून्य करने के लिए आवश्यक विपरीत दिशा में चुंबकीय तीव्रता (H) का मान।
  • स्थायी चुंबक (Permanent Magnets):

    • उच्च धारणशीलता और उच्च निग्राहिता वाले पदार्थ (जैसे स्टील, ऐलनिको, कोबाल्ट स्टील) का उपयोग स्थायी चुंबक बनाने के लिए किया जाता है।
    • ये एक बार चुंबकित होने के बाद अपना चुंबकत्व लंबे समय तक बनाए रखते हैं।
  • विद्युत चुंबक (Electromagnets):

    • निम्न धारणशीलता और निम्न निग्राहिता वाले पदार्थ (जैसे नरम लोहा) का उपयोग विद्युत चुंबक बनाने के लिए किया जाता है।
    • इन्हें आसानी से चुंबकित और विचुंबकित किया जा सकता है।

बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)

  1. चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन असत्य है?
    (A) वे उत्तरी ध्रुव से निकलकर दक्षिणी ध्रुव में प्रवेश करती हैं।
    (B) वे कभी भी एक-दूसरे को नहीं काटतीं।
    (C) वे बंद लूप नहीं बनातीं।
    (D) जहाँ वे सघन होती हैं, वहाँ चुंबकीय क्षेत्र प्रबल होता है।

  2. पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के क्षैतिज घटक (BH) और ऊर्ध्वाधर घटक (BV) के बीच संबंध क्या है, यदि नति कोण δ है?
    (A) BH = B sin δ, BV = B cos δ
    (B) BH = B cos δ, BV = B sin δ
    (C) BH = BV tan δ
    (D) BV = BH cot δ

  3. चुंबकत्व के लिए गाउस का नियम क्या बताता है?
    (A) किसी बंद पृष्ठ से गुजरने वाला कुल चुंबकीय फ्लक्स हमेशा शून्य होता है।
    (B) किसी बंद पृष्ठ से गुजरने वाला कुल चुंबकीय फ्लक्स हमेशा धनात्मक होता है।
    (C) किसी बंद पृष्ठ से गुजरने वाला कुल चुंबकीय फ्लक्स हमेशा ऋणात्मक होता है।
    (D) एकल चुंबकीय ध्रुव का अस्तित्व होता है।

  4. निम्नलिखित में से कौन सा पदार्थ प्रतिचुंबकीय है?
    (A) लोहा
    (B) एल्यूमीनियम
    (C) तांबा
    (D) निकल

  5. अनुचुंबकीय पदार्थों की चुंबकीय प्रवृत्ति (χm) तापमान (T) पर कैसे निर्भर करती है?
    (A) χm ∝ T
    (B) χm ∝ 1/T
    (C) χm ∝ T²
    (D) χm तापमान पर निर्भर नहीं करती।

  6. वह तापमान जिसके ऊपर एक लौहचुंबकीय पदार्थ अनुचुंबकीय पदार्थ में परिवर्तित हो जाता है, कहलाता है:
    (A) क्रांतिक ताप
    (B) गलनांक
    (C) क्यूरी ताप
    (D) बोह्र ताप

  7. एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में रखे चुंबकीय द्विध्रुव पर कार्य करने वाला बल आघूर्ण (τ) का सूत्र क्या है?
    (A) τ = M ⋅ B
    (B) τ = M × B
    (C) τ = M / B
    (D) τ = M + B

  8. स्थायी चुंबक बनाने के लिए किस प्रकार के पदार्थ का उपयोग किया जाता है?
    (A) निम्न धारणशीलता और निम्न निग्राहिता वाले पदार्थ
    (B) उच्च धारणशीलता और उच्च निग्राहिता वाले पदार्थ
    (C) निम्न धारणशीलता और उच्च निग्राहिता वाले पदार्थ
    (D) उच्च धारणशीलता और निम्न निग्राहिता वाले पदार्थ

  9. बोह्र मैग्नेटॉन किसका मात्रक है?
    (A) चुंबकीय क्षेत्र
    (B) चुंबकीय फ्लक्स
    (C) चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण
    (D) चुंबकीय तीव्रता

  10. यदि किसी स्थान पर नति कोण 90° है, तो वह स्थान क्या होगा?
    (A) चुंबकीय भूमध्य रेखा
    (B) भौगोलिक ध्रुव
    (C) चुंबकीय ध्रुव
    (D) भौगोलिक भूमध्य रेखा


उत्तरमाला (Answer Key):

  1. (C)
  2. (B)
  3. (A)
  4. (C)
  5. (B)
  6. (C)
  7. (B)
  8. (B)
  9. (C)
  10. (C)

मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक सिद्ध होंगे। अपनी पढ़ाई जारी रखें और कोई भी संदेह होने पर अवश्य पूछें।

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