Class 12 Physics Notes Chapter 5 (नाभिक) – Bhautiki-II Book

Bhautiki-II
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम आपकी भौतिकी की पुस्तक 'भौतिकी-II' के अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय 'नाभिक' का विस्तृत अध्ययन करेंगे, जो आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। इस अध्याय में हम नाभिक की संरचना, उसके गुणों, रेडियोऐक्टिवता और नाभिकीय ऊर्जा से संबंधित महत्वपूर्ण अवधारणाओं को गहराई से समझेंगे।


अध्याय 5: नाभिक (Nuclei)

1. नाभिक का संघटन (Composition of Nucleus)

नाभिक परमाणु का केंद्रीय, सघन और धनावेशित भाग होता है। यह प्रोटॉन और न्यूट्रॉन से मिलकर बना होता है, जिन्हें सामूहिक रूप से न्यूक्लियॉन कहते हैं।

  • प्रोटॉन (Proton, p): धनावेशित कण। इसका आवेश +e (1.602 × 10⁻¹⁹ C) और द्रव्यमान लगभग 1.00727 u होता है।
  • न्यूट्रॉन (Neutron, n): अनावेशित (उदासीन) कण। इसका द्रव्यमान लगभग 1.00866 u होता है।
  • परमाणु क्रमांक (Atomic Number, Z): नाभिक में प्रोटॉनों की संख्या। यह तत्व की पहचान निर्धारित करता है।
  • न्यूट्रॉन संख्या (Neutron Number, N): नाभिक में न्यूट्रॉनों की संख्या।
  • द्रव्यमान संख्या (Mass Number, A): नाभिक में कुल न्यूक्लियॉनों (प्रोटॉन + न्यूट्रॉन) की संख्या। A = Z + N.

किसी तत्व X के नाभिक को ᴬ_Z X द्वारा निरूपित किया जाता है।
उदाहरण: ¹²₆C (कार्बन में 6 प्रोटॉन, 6 न्यूट्रॉन और द्रव्यमान संख्या 12 है)।

2. नाभिक का आकार (Size of Nucleus)

  • नाभिक का आकार गोलाकार माना जाता है।
  • नाभिक की त्रिज्या (R) उसकी द्रव्यमान संख्या (A) के घनमूल के समानुपाती होती है:
    R = R₀A¹ᐟ³
    जहाँ R₀ एक नियतांक है, जिसका मान लगभग 1.2 × 10⁻¹⁵ मीटर (या 1.2 फर्मी, fm) होता है।
  • नाभिक का आयतन द्रव्यमान संख्या (A) के समानुपाती होता है।
  • नाभिकीय घनत्व (Nuclear Density): नाभिक का घनत्व अत्यंत उच्च और लगभग सभी नाभिकों के लिए स्थिर होता है। इसका मान लगभग 2.3 × 10¹⁷ kg/m³ होता है। यह परमाणु के घनत्व से लगभग 10¹² गुना अधिक होता है।

3. समस्थानिक, समभारिक एवं समन्यूट्रॉनिक (Isotopes, Isobars & Isotones)

  • समस्थानिक (Isotopes): वे परमाणु जिनके नाभिक में प्रोटॉनों की संख्या समान (अर्थात Z समान) होती है, लेकिन न्यूट्रॉनों की संख्या भिन्न (अर्थात A भिन्न) होती है। रासायनिक गुण समान होते हैं।
    उदाहरण: हाइड्रोजन के समस्थानिक - प्रोटियम (¹H₁), ड्यूटेरियम (²H₁), ट्राइटियम (³H₁)।
  • समभारिक (Isobars): वे परमाणु जिनके नाभिकों की द्रव्यमान संख्या (A) समान होती है, लेकिन परमाणु क्रमांक (Z) भिन्न होते हैं। रासायनिक गुण भिन्न होते हैं।
    उदाहरण: ¹⁴₆C और ¹⁴₇N।
  • समन्यूट्रॉनिक (Isotones): वे परमाणु जिनके नाभिकों में न्यूट्रॉनों की संख्या (N) समान होती है, लेकिन परमाणु क्रमांक (Z) और द्रव्यमान संख्या (A) भिन्न होते हैं।
    उदाहरण: ³₁H (N=2) और ⁴₂He (N=2)।

4. नाभिकीय द्रव्यमान एवं बंधन ऊर्जा (Nuclear Mass and Binding Energy)

  • परमाणु द्रव्यमान इकाई (Atomic Mass Unit, u): कार्बन-12 परमाणु के द्रव्यमान के 1/12वें भाग को 1 परमाणु द्रव्यमान इकाई कहते हैं।
    1 u = 1.6605 × 10⁻²⁷ kg
  • द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता (Mass-Energy Equivalence): आइंस्टीन के अनुसार, द्रव्यमान और ऊर्जा एक-दूसरे के समतुल्य हैं।
    E = mc²
    जहाँ E ऊर्जा, m द्रव्यमान और c प्रकाश का वेग है (c ≈ 3 × 10⁸ m/s)।
    1 u द्रव्यमान के तुल्य ऊर्जा: 1 u c² = 931.5 MeV
  • द्रव्यमान क्षति (Mass Defect, Δm): किसी नाभिक का वास्तविक द्रव्यमान उसके घटक न्यूक्लियॉनों (प्रोटॉन और न्यूट्रॉन) के कुल द्रव्यमान से कम होता है। द्रव्यमान में इस कमी को द्रव्यमान क्षति कहते हैं।
    Δm = [Z mₚ + (A-Z) mₙ] - M_नाभिक
    जहाँ mₚ प्रोटॉन का द्रव्यमान, mₙ न्यूट्रॉन का द्रव्यमान और M_नाभिक नाभिक का वास्तविक द्रव्यमान है।
  • बंधन ऊर्जा (Binding Energy, BE): द्रव्यमान क्षति के तुल्य ऊर्जा को बंधन ऊर्जा कहते हैं। यह वह न्यूनतम ऊर्जा है जो किसी नाभिक के न्यूक्लियॉनों को एक-दूसरे से अलग करने के लिए आवश्यक होती है, या वह ऊर्जा जो न्यूक्लियॉनों के जुड़कर नाभिक बनाने पर मुक्त होती है।
    BE = Δm c²
  • प्रति न्यूक्लियॉन बंधन ऊर्जा (Binding Energy per Nucleon, BE/A): नाभिक की बंधन ऊर्जा को उसकी द्रव्यमान संख्या (A) से भाग देने पर प्राप्त मान। यह नाभिक के स्थायित्व का माप है।
    BE/A = (Δm c²) / A
  • बंधन ऊर्जा वक्र (Binding Energy Curve):
    • कम द्रव्यमान संख्या (A < 20) वाले नाभिकों के लिए BE/A कम होता है (कम स्थिर)।
    • मध्यम द्रव्यमान संख्या (A ≈ 50 से 80) वाले नाभिकों के लिए BE/A अधिकतम होता है (सर्वाधिक स्थिर), जैसे आयरन-56 (⁵⁶Fe₂₆)
    • उच्च द्रव्यमान संख्या (A > 170) वाले नाभिकों के लिए BE/A धीरे-धीरे कम होता जाता है (कम स्थिर)।
    • यह वक्र दर्शाता है कि नाभिकीय विखंडन (भारी नाभिक का टूटना) और नाभिकीय संलयन (हल्के नाभिकों का जुड़ना) दोनों ही ऊर्जा मुक्त करते हैं, क्योंकि दोनों प्रक्रियाओं में उत्पाद नाभिकों की प्रति न्यूक्लियॉन बंधन ऊर्जा प्रारंभिक नाभिकों की तुलना में अधिक होती है।

5. नाभिकीय बल (Nuclear Forces)

ये वे प्रबल आकर्षण बल हैं जो नाभिक के भीतर न्यूक्लियॉनों (प्रोटॉन और न्यूट्रॉन) को एक साथ बांधे रखते हैं।

  • गुणधर्म:
    • प्रबलतम बल: प्रकृति में ज्ञात सभी बलों में सबसे प्रबल।
    • लघु परास बल (Short Range): ये केवल कुछ फर्मी (≈ 10⁻¹⁵ m) की दूरी तक ही प्रभावी होते हैं। इस दूरी से अधिक होने पर ये नगण्य हो जाते हैं।
    • आवेश स्वतंत्र (Charge Independent): प्रोटॉन-प्रोटॉन, न्यूट्रॉन-न्यूट्रॉन और प्रोटॉन-न्यूट्रॉन के बीच लगने वाले नाभिकीय बल लगभग समान होते हैं।
    • संतृप्त बल (Saturated Force): प्रत्येक न्यूक्लियॉन केवल अपने निकटतम न्यूक्लियॉनों के साथ ही नाभिकीय बल लगाता है।
    • गैर-केंद्रीय बल (Non-Central Force): ये बल केंद्रीय नहीं होते हैं, अर्थात ये न्यूक्लियॉनों के बीच की दूरी पर ही नहीं, बल्कि उनके चक्रण (spin) पर भी निर्भर करते हैं।
    • विनिमय बल (Exchange Force): ये बल मेसॉन कणों के विनिमय के कारण उत्पन्न होते हैं।

6. रेडियोऐक्टिवता (Radioactivity)

कुछ अस्थिर नाभिक स्वतः ही विघटित होकर अधिक स्थिर नाभिकों में परिवर्तित होते हैं और इस प्रक्रिया में अल्फा (α), बीटा (β) और गामा (γ) किरणें उत्सर्जित करते हैं। इस घटना को रेडियोऐक्टिवता कहते हैं।

  • अल्फा (α) क्षय:
    • नाभिक से एक अल्फा कण (हीलियम नाभिक, ⁴₂He) उत्सर्जित होता है।
    • परमाणु क्रमांक (Z) में 2 की कमी और द्रव्यमान संख्या (A) में 4 की कमी होती है।
    • उदाहरण: ᴬ_Z X → ᴬ⁻⁴_Z⁻² Y + ⁴₂He
  • बीटा (β) क्षय:
    • β⁻ क्षय (इलेक्ट्रॉन उत्सर्जन): नाभिक में एक न्यूट्रॉन एक प्रोटॉन में परिवर्तित होता है, और एक इलेक्ट्रॉन (e⁻) तथा एक एंटीन्यूट्रिनो (ν̄) उत्सर्जित होता है।
      • परमाणु क्रमांक (Z) में 1 की वृद्धि होती है, जबकि द्रव्यमान संख्या (A) अपरिवर्तित रहती है।
      • उदाहरण: ᴬ_Z X → ᴬ_Z⁺¹ Y + e⁻ + ν̄
    • β⁺ क्षय (पॉज़िट्रॉन उत्सर्जन): नाभिक में एक प्रोटॉन एक न्यूट्रॉन में परिवर्तित होता है, और एक पॉज़िट्रॉन (e⁺) तथा एक न्यूट्रिनो (ν) उत्सर्जित होता है।
      • परमाणु क्रमांक (Z) में 1 की कमी होती है, जबकि द्रव्यमान संख्या (A) अपरिवर्तित रहती है।
      • उदाहरण: ᴬ_Z X → ᴬ_Z⁻¹ Y + e⁺ + ν
  • गामा (γ) क्षय:
    • जब एक नाभिक अल्फा या बीटा क्षय के बाद उत्तेजित अवस्था में होता है, तो वह अतिरिक्त ऊर्जा को गामा फोटॉन (विद्युतचुंबकीय तरंग) के रूप में उत्सर्जित करके निम्न ऊर्जा अवस्था में आता है।
    • इस प्रक्रिया में परमाणु क्रमांक (Z) और द्रव्यमान संख्या (A) अपरिवर्तित रहते हैं।

रेडियोऐक्टिव क्षय का नियम (Law of Radioactive Decay):
किसी क्षण (t) पर अविघटित नाभिकों की संख्या (N) निम्न सूत्र द्वारा दी जाती है:
N = N₀e⁻ᵜᵗ
जहाँ N₀ प्रारंभिक नाभिकों की संख्या, λ क्षय नियतांक (decay constant) और e प्राकृतिक लघुगणक का आधार है।

  • क्षय नियतांक (λ): प्रति इकाई समय में विघटित होने वाले नाभिकों की प्रायिकता। इसका SI मात्रक s⁻¹ है।
  • अर्ध-आयु (Half-life, T₁/₂): वह समय जिसमें किसी रेडियोऐक्टिव पदार्थ के नाभिकों की संख्या घटकर आधी रह जाती है।
    T₁/₂ = 0.693 / λ
  • माध्य-आयु (Mean Life, τ): सभी नाभिकों की औसत जीवनकाल।
    τ = 1 / λ
    स्पष्ट है कि T₁/₂ < τ.

रेडियोऐक्टिवता की इकाइयाँ (Units of Radioactivity):

  • बेकरल (Becquerel, Bq): रेडियोऐक्टिवता की SI इकाई। 1 Bq = 1 क्षय प्रति सेकंड (1 disintegration per second)
  • क्यूरी (Curie, Ci): एक पुरानी इकाई। 1 Ci = 3.7 × 10¹⁰ Bq
  • रदरफोर्ड (Rutherford, Rd): एक अन्य पुरानी इकाई। 1 Rd = 10⁶ Bq

7. नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission)

यह वह प्रक्रिया है जिसमें एक भारी नाभिक (जैसे यूरेनियम-235) पर न्यूट्रॉन की बमबारी करने पर वह लगभग समान द्रव्यमान वाले दो या अधिक हल्के नाभिकों में टूट जाता है, और इस प्रक्रिया में भारी मात्रा में ऊर्जा तथा कुछ न्यूट्रॉन उत्सर्जित होते हैं।

  • उदाहरण: ²³⁵₉₂U + ¹₀n → ¹⁴¹₅₆Ba + ⁹²₃₆Kr + 3 ¹₀n + ऊर्जा
  • श्रृंखला अभिक्रिया (Chain Reaction): विखंडन में उत्पन्न न्यूट्रॉन आगे और नाभिकों का विखंडन करते हैं, जिससे एक स्व-पोषक श्रृंखला अभिक्रिया शुरू हो जाती है।
    • नियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया: नाभिकीय रिएक्टरों में ऊर्जा उत्पादन के लिए उपयोग की जाती है।
    • अनियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया: परमाणु बम का आधार।
  • नाभिकीय रिएक्टर (Nuclear Reactor):
    • ईंधन: यूरेनियम-235, प्लूटोनियम-239।
    • मंदक (Moderator): न्यूट्रॉनों की गति को धीमा करने के लिए (जैसे भारी जल D₂O, ग्रेफाइट)।
    • नियंत्रक छड़ें (Control Rods): न्यूट्रॉनों को अवशोषित करके श्रृंखला अभिक्रिया को नियंत्रित करने के लिए (जैसे कैडमियम या बोरॉन की छड़ें)।
    • शीतलक (Coolant): उत्पन्न ऊष्मा को बाहर निकालने के लिए (जैसे जल, कार्बन डाइऑक्साइड, तरल सोडियम)।
    • परिरक्षक (Shielding): हानिकारक विकिरणों से बचाव के लिए।

8. नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion)

यह वह प्रक्रिया है जिसमें दो या अधिक हल्के नाभिक अत्यधिक उच्च तापमान (≈ 10⁷ K) और दाब पर मिलकर एक भारी नाभिक बनाते हैं, और इस प्रक्रिया में भी भारी मात्रा में ऊर्जा मुक्त होती है।

  • उदाहरण: ²₁H + ³₁H → ⁴₂He + ¹₀n + ऊर्जा (ड्यूटेरियम-ट्राइटियम संलयन)
  • सूर्य और तारों में ऊर्जा का स्रोत: नाभिकीय संलयन ही सूर्य और अन्य तारों में ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है, जहाँ प्रोटॉन-प्रोटॉन चक्र के माध्यम से हाइड्रोजन नाभिक हीलियम में संलयित होते हैं।
  • आवश्यक शर्तें: नाभिकीय संलयन के लिए अत्यंत उच्च तापमान (लगभग 10⁷ K से 10⁸ K) और उच्च दाब की आवश्यकता होती है ताकि नाभिकों के बीच प्रतिकर्षण बल को पार किया जा सके। इसे 'थर्मोन्यूक्लियर अभिक्रिया' भी कहते हैं।

बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)

  1. नाभिकीय घनत्व का मान लगभग कितना होता है?
    a) 2.3 × 10¹⁰ kg/m³
    b) 2.3 × 10¹⁴ kg/m³
    c) 2.3 × 10¹⁷ kg/m³
    d) 2.3 × 10²⁰ kg/m³

  2. प्रति न्यूक्लियॉन बंधन ऊर्जा वक्र में, अधिकतम स्थायित्व किस तत्व के लिए होता है?
    a) हाइड्रोजन
    b) हीलियम
    c) आयरन
    d) यूरेनियम

  3. नाभिकीय बलों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन असत्य है?
    a) ये बल प्रकृति में सबसे प्रबल होते हैं।
    b) ये बल आवेश स्वतंत्र होते हैं।
    c) ये बल लंबी दूरी तक प्रभावी होते हैं।
    d) ये बल संतृप्त बल होते हैं।

  4. रेडियोऐक्टिव क्षय की SI इकाई क्या है?
    a) क्यूरी
    b) रदरफोर्ड
    c) बेकरल
    d) फर्मी

  5. यदि किसी रेडियोऐक्टिव पदार्थ की अर्ध-आयु 10 दिन है, तो 20 दिनों के बाद प्रारंभिक मात्रा का कितना अंश शेष रहेगा?
    a) 1/2
    b) 1/4
    c) 1/8
    d) 1/16

  6. एक नाभिक ᴬ_Z X एक अल्फा कण उत्सर्जित करता है। नया नाभिक क्या होगा?
    a) ᴬ⁻²_Z⁻² Y
    b) ᴬ⁻⁴_Z⁻² Y
    c) ᴬ_Z⁻¹ Y
    d) ᴬ⁻⁴_Z Y

  7. नाभिकीय रिएक्टर में मंदक (moderator) का मुख्य कार्य क्या है?
    a) न्यूट्रॉनों को अवशोषित करना
    b) न्यूट्रॉनों की गति बढ़ाना
    c) न्यूट्रॉनों की गति धीमी करना
    d) रिएक्टर को ठंडा करना

  8. द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता समीकरण E = mc² में, 'c' क्या दर्शाता है?
    a) नाभिकीय बल की शक्ति
    b) प्रकाश का वेग
    c) क्षय नियतांक
    d) इलेक्ट्रॉन का आवेश

  9. समस्थानिकों में क्या समान होता है?
    a) न्यूट्रॉनों की संख्या
    b) द्रव्यमान संख्या
    c) प्रोटॉनों की संख्या
    d) नाभिकीय घनत्व

  10. नाभिकीय संलयन अभिक्रियाओं के लिए आवश्यक अत्यधिक उच्च तापमान और दाब का कारण क्या है?
    a) न्यूट्रॉनों को त्वरित करना
    b) नाभिकों के बीच प्रतिकर्षण बल को पार करना
    c) ऊर्जा उत्पादन को नियंत्रित करना
    d) रेडियोऐक्टिव क्षय को रोकना


MCQs के उत्तर:

  1. c) 2.3 × 10¹⁷ kg/m³
  2. c) आयरन
  3. c) ये बल लंबी दूरी तक प्रभावी होते हैं।
  4. c) बेकरल
  5. b) 1/4 (20 दिन = 2 अर्ध-आयु, इसलिए (1/2)² = 1/4)
  6. b) ᴬ⁻⁴_Z⁻² Y
  7. c) न्यूट्रॉनों की गति धीमी करना
  8. b) प्रकाश का वेग
  9. c) प्रोटॉनों की संख्या
  10. b) नाभिकों के बीच प्रतिकर्षण बल को पार करना

मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी 'नाभिक' अध्याय की तैयारी में सहायक होंगे। किसी भी संदेह या अतिरिक्त जानकारी के लिए आप पूछ सकते हैं। शुभकामनाएँ!

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By NCERT Books