Class 12 Physics Notes Chapter 6 (अर्धचालक इलेक्ट्रानिकी - पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ) – Bhautiki-II Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम कक्षा 12 भौतिकी के अध्याय 6, 'अर्धचालक इलेक्ट्रानिकी - पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ' का विस्तृत अध्ययन करेंगे, जो आपकी विभिन्न सरकारी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह अध्याय आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स का आधार है और इसमें से कई प्रश्न पूछे जाते हैं।
अध्याय 6: अर्धचालक इलेक्ट्रानिकी - पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ
1. परिचय: चालक, कुचालक और अर्धचालक
पदार्थों को उनकी विद्युत चालकता के आधार पर तीन मुख्य श्रेणियों में बांटा जा सकता है:
- चालक (Conductors): वे पदार्थ जिनकी चालकता बहुत अधिक होती है (जैसे धातुएँ - तांबा, चांदी)। इनमें मुक्त इलेक्ट्रॉन बहुतायत में होते हैं।
- कुचालक (Insulators): वे पदार्थ जिनकी चालकता बहुत कम या नगण्य होती है (जैसे लकड़ी, प्लास्टिक, कांच)। इनमें मुक्त इलेक्ट्रॉन लगभग नहीं होते।
- अर्धचालक (Semiconductors): वे पदार्थ जिनकी चालकता चालकों और कुचालकों के मध्य होती है (जैसे सिलिकॉन (Si), जर्मेनियम (Ge))। इनकी चालकता तापमान बढ़ाने पर बढ़ती है और अशुद्धियाँ मिलाने पर भी बढ़ाई जा सकती है।
2. ऊर्जा बैंड (Energy Bands)
परमाणुओं में इलेक्ट्रॉन विशिष्ट ऊर्जा स्तरों में रहते हैं। जब कई परमाणु मिलकर एक ठोस बनाते हैं, तो ये ऊर्जा स्तर मिलकर ऊर्जा बैंड बनाते हैं।
- संयोजकता बैंड (Valence Band): यह निम्नतम ऊर्जा बैंड होता है जिसमें संयोजकता इलेक्ट्रॉन उपस्थित होते हैं। ये इलेक्ट्रॉन परमाणु से कसकर बंधे होते हैं।
- चालन बैंड (Conduction Band): यह संयोजकता बैंड से ऊपर का ऊर्जा बैंड होता है। इसमें उपस्थित इलेक्ट्रॉन पदार्थ में मुक्त रूप से गति कर सकते हैं और विद्युत चालन में योगदान देते हैं।
- वर्जित ऊर्जा अंतराल (Forbidden Energy Gap, E_g): यह संयोजकता बैंड के शीर्ष और चालन बैंड के तल के बीच का ऊर्जा अंतराल होता है। इस अंतराल में कोई इलेक्ट्रॉन नहीं रह सकता।
चालक, कुचालक और अर्धचालक में ऊर्जा बैंड:
- चालक: संयोजकता बैंड और चालन बैंड एक-दूसरे पर अतिव्याप्त (overlap) होते हैं या उनके बीच बहुत कम ऊर्जा अंतराल होता है (E_g ≈ 0 eV)।
- कुचालक: वर्जित ऊर्जा अंतराल बहुत बड़ा होता है (E_g > 3 eV, जैसे हीरे के लिए ~6 eV)। इलेक्ट्रॉन संयोजकता बैंड से चालन बैंड में नहीं जा पाते।
- अर्धचालक: वर्जित ऊर्जा अंतराल मध्यम होता है (E_g ≈ 0.2 eV से 3 eV तक)।
- सिलिकॉन (Si) के लिए E_g ≈ 1.1 eV
- जर्मेनियम (Ge) के लिए E_g ≈ 0.7 eV
कमरे के तापमान पर कुछ इलेक्ट्रॉन ऊर्जा प्राप्त करके संयोजकता बैंड से चालन बैंड में जा सकते हैं।
3. अर्धचालक के प्रकार
a) शुद्ध अर्धचालक (Intrinsic Semiconductors):
- ये अपनी शुद्धतम अवस्था में होते हैं (जैसे शुद्ध सिलिकॉन या जर्मेनियम)।
- कमरे के तापमान पर, कुछ संयोजकता इलेक्ट्रॉन तापीय ऊर्जा प्राप्त करके संयोजकता बैंड से चालन बैंड में चले जाते हैं, जिससे चालन बैंड में मुक्त इलेक्ट्रॉन और संयोजकता बैंड में कोटर (Holes) उत्पन्न होते हैं।
- एक कोटर एक रिक्त स्थान होता है जो एक इलेक्ट्रॉन के अभाव को दर्शाता है और धनात्मक आवेश वाहक के रूप में कार्य करता है।
- शुद्ध अर्धचालक में, मुक्त इलेक्ट्रॉनों (n_e) की संख्या कोटरों (n_h) की संख्या के बराबर होती है (n_e = n_h)।
- इनकी चालकता बहुत कम होती है।
b) अपद्रव्यी अर्धचालक (Extrinsic Semiconductors):
-
शुद्ध अर्धचालकों की चालकता बढ़ाने के लिए उनमें नियंत्रित मात्रा में उपयुक्त अशुद्धियाँ मिलाई जाती हैं। इस प्रक्रिया को मादन (Doping) कहते हैं।
-
अशुद्धि मिलाने से बहुसंख्यक आवेश वाहकों की संख्या में अत्यधिक वृद्धि होती है।
-
ये दो प्रकार के होते हैं:
-
i) n-प्रकार अर्धचालक (n-type Semiconductor):
- जब शुद्ध अर्धचालक (जैसे Si, Ge) में पंचसंयोजी (Pentavalent) अशुद्धि (जैसे आर्सेनिक (As), एंटीमनी (Sb), फास्फोरस (P)) मिलाई जाती है।
- पंचसंयोजी परमाणु के 4 इलेक्ट्रॉन Si/Ge परमाणुओं के साथ सहसंयोजक बंध बनाते हैं, जबकि 5वां इलेक्ट्रॉन मुक्त हो जाता है।
- ये अशुद्धियाँ दाता अशुद्धि (Donor Impurity) कहलाती हैं क्योंकि ये मुक्त इलेक्ट्रॉन प्रदान करती हैं।
- इसमें इलेक्ट्रॉन बहुसंख्यक आवेश वाहक (Majority Carriers) होते हैं और कोटर अल्पसंख्यक आवेश वाहक (Minority Carriers) होते हैं।
- दाता ऊर्जा स्तर चालन बैंड के ठीक नीचे होता है।
-
ii) p-प्रकार अर्धचालक (p-type Semiconductor):
- जब शुद्ध अर्धचालक (जैसे Si, Ge) में त्रिसंयोजी (Trivalent) अशुद्धि (जैसे बोरॉन (B), एल्यूमीनियम (Al), गैलियम (Ga), इंडियम (In)) मिलाई जाती है।
- त्रिसंयोजी परमाणु के 3 इलेक्ट्रॉन Si/Ge परमाणुओं के साथ सहसंयोजक बंध बनाते हैं, जिससे एक इलेक्ट्रॉन की कमी होती है, जो एक कोटर बनाता है।
- ये अशुद्धियाँ ग्राही अशुद्धि (Acceptor Impurity) कहलाती हैं क्योंकि ये इलेक्ट्रॉन स्वीकार करती हैं (कोटर प्रदान करती हैं)।
- इसमें कोटर बहुसंख्यक आवेश वाहक होते हैं और इलेक्ट्रॉन अल्पसंख्यक आवेश वाहक होते हैं।
- ग्राही ऊर्जा स्तर संयोजकता बैंड के ठीक ऊपर होता है।
-
4. p-n संधि डायोड (p-n Junction Diode)
- जब एक p-प्रकार के अर्धचालक को एक n-प्रकार के अर्धचालक के साथ विशेष विधि से जोड़ा जाता है, तो इस संयोजन को p-n संधि (p-n Junction) कहते हैं।
- अवक्षय परत (Depletion Layer/Region):
- संधि के पास, p-क्षेत्र के कोटर n-क्षेत्र में विसरित होते हैं और n-क्षेत्र के इलेक्ट्रॉन p-क्षेत्र में विसरित होते हैं।
- ये इलेक्ट्रॉन और कोटर एक-दूसरे के साथ मिलकर उदासीन हो जाते हैं (पुनर्संयोजन)।
- इससे संधि के दोनों ओर एक ऐसा क्षेत्र बन जाता है जहाँ कोई मुक्त आवेश वाहक नहीं होते। p-क्षेत्र की ओर ऋणात्मक अचल आयन और n-क्षेत्र की ओर धनात्मक अचल आयन रह जाते हैं। इस क्षेत्र को अवक्षय परत कहते हैं।
- विभव प्राचीर (Potential Barrier):
- अवक्षय परत में अचल आयनों के कारण एक आंतरिक विद्युत क्षेत्र उत्पन्न होता है, जो p-क्षेत्र से n-क्षेत्र की ओर होता है।
- यह विद्युत क्षेत्र बहुसंख्यक आवेश वाहकों के आगे विसरण को रोकता है और एक विभव अंतर उत्पन्न करता है जिसे विभव प्राचीर कहते हैं।
- सिलिकॉन (Si) के लिए विभव प्राचीर लगभग 0.7 V और जर्मेनियम (Ge) के लिए लगभग 0.3 V होता है।
5. p-n संधि डायोड की बायसिंग (Biasing of p-n Junction Diode)
डायोड पर बाहरी वोल्टेज लगाने को बायसिंग कहते हैं।
a) अग्र अभिनति (Forward Bias):
- जब p-क्षेत्र को बैटरी के धनात्मक टर्मिनल से और n-क्षेत्र को ऋणात्मक टर्मिनल से जोड़ा जाता है।
- बाहरी वोल्टेज विभव प्राचीर का विरोध करता है, जिससे अवक्षय परत की चौड़ाई घट जाती है।
- बहुसंख्यक आवेश वाहक संधि को पार करते हैं और एक बड़ी धारा प्रवाहित होती है।
- I-V अभिलाक्षणिक वक्र में, धारा वोल्टेज के साथ तेजी से बढ़ती है (देहली वोल्टेज के बाद)।
b) पश्च अभिनति (Reverse Bias):
- जब p-क्षेत्र को बैटरी के ऋणात्मक टर्मिनल से और n-क्षेत्र को धनात्मक टर्मिनल से जोड़ा जाता है।
- बाहरी वोल्टेज विभव प्राचीर का समर्थन करता है, जिससे अवक्षय परत की चौड़ाई बढ़ जाती है।
- बहुसंख्यक आवेश वाहक संधि से दूर चले जाते हैं, और कोई धारा प्रवाहित नहीं होती (केवल बहुत कम अल्पसंख्यक वाहक धारा प्रवाहित होती है, जिसे पश्च संतृप्ति धारा कहते हैं)।
- I-V अभिलाक्षणिक वक्र में, धारा लगभग शून्य रहती है जब तक कि भंजन वोल्टता (Breakdown Voltage) तक नहीं पहुँच जाती, जिस पर अचानक बड़ी धारा प्रवाहित होती है (डायोड क्षतिग्रस्त हो सकता है)।
6. p-n संधि डायोड के अनुप्रयोग
a) दिष्टकारी (Rectifier):
- यह प्रत्यावर्ती धारा (AC) को दिष्ट धारा (DC) में परिवर्तित करता है।
- अर्ध-तरंग दिष्टकारी (Half-Wave Rectifier):
- यह AC इनपुट के केवल आधे चक्र को दिष्ट करता है।
- आउटपुट में केवल एक दिशा की पल्सिंग DC मिलती है।
- दक्षता कम होती है।
- पूर्ण-तरंग दिष्टकारी (Full-Wave Rectifier):
- यह AC इनपुट के दोनों आधे चक्रों को दिष्ट करता है।
- आउटपुट में अधिक चिकनी पल्सिंग DC मिलती है।
- दक्षता अधिक होती है। इसे सेंटर-टैप्ड या ब्रिज दिष्टकारी के रूप में बनाया जा सकता है।
- फिल्टर परिपथ (Filter Circuit): दिष्टकारी के आउटपुट में अभी भी कुछ AC घटक (ऊर्मिका/ripple) होते हैं। इन्हें हटाने के लिए संधारित्र (capacitor) और प्रेरक (inductor) वाले फिल्टर परिपथ का उपयोग किया जाता है।
b) विशिष्ट प्रयोजन p-n संधि डायोड:
-
i) जेनर डायोड (Zener Diode):
- यह एक विशेष रूप से डोपित p-n संधि डायोड है जिसे पश्च अभिनति में भंजन क्षेत्र में संचालित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- भंजन वोल्टता पर, यह एक स्थिर आउटपुट वोल्टेज बनाए रखता है, भले ही इनपुट वोल्टेज या लोड धारा में परिवर्तन हो।
- अनुप्रयोग: वोल्टता नियंत्रक (Voltage Regulator) के रूप में।
-
ii) प्रकाश उत्सर्जक डायोड (LED - Light Emitting Diode):
- यह एक अग्र अभिनत p-n संधि डायोड है जो विद्युत ऊर्जा को प्रकाश ऊर्जा में परिवर्तित करता है।
- जब इलेक्ट्रॉन और कोटर संधि पर पुनर्संयोजित होते हैं, तो वे फोटॉन के रूप में ऊर्जा उत्सर्जित करते हैं।
- विभिन्न रंगों के लिए विभिन्न अर्धचालक पदार्थों (जैसे GaAs, GaP, GaAsP) का उपयोग किया जाता है।
-
iii) फोटोडायोड (Photodiode):
- यह एक पश्च अभिनत p-n संधि डायोड है जो प्रकाश ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है।
- जब प्रकाश संधि पर पड़ता है, तो इलेक्ट्रॉन-कोटर युग्म उत्पन्न होते हैं, जिससे पश्च धारा में वृद्धि होती है।
- अनुप्रयोग: प्रकाश संसूचक (Light Detector), ऑप्टिकल संचार।
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iv) सौर सेल (Solar Cell):
- यह एक p-n संधि डायोड है जो बिना किसी बाहरी बायसिंग के सौर ऊर्जा को सीधे विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है (फोटोवोल्टिक प्रभाव)।
- जब प्रकाश संधि पर पड़ता है, तो इलेक्ट्रॉन-कोटर युग्म उत्पन्न होते हैं और आंतरिक विद्युत क्षेत्र द्वारा अलग हो जाते हैं, जिससे बाहरी परिपथ में धारा प्रवाहित होती है।
- अनुप्रयोग: सौर ऊर्जा उत्पादन।
7. संधि ट्रांजिस्टर (Junction Transistor)
- ट्रांजिस्टर एक अर्धचालक युक्ति है जिसका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक संकेतों को प्रवर्धित करने या इलेक्ट्रॉनिक स्विच के रूप में करने के लिए किया जाता है।
- यह तीन स्तरों वाली एक युक्ति है।
- प्रकार:
- npn ट्रांजिस्टर: दो n-प्रकार के अर्धचालक क्षेत्रों के बीच एक पतला p-प्रकार का क्षेत्र।
- pnp ट्रांजिस्टर: दो p-प्रकार के अर्धचालक क्षेत्रों के बीच एक पतला n-प्रकार का क्षेत्र।
- तीन टर्मिनल:
- उत्सर्जक (Emitter, E): अत्यधिक डोपित, बहुसंख्यक आवेश वाहक प्रदान करता है।
- आधार (Base, B): बहुत पतला और हल्का डोपित, उत्सर्जक और संग्राहक के बीच संपर्क बनाता है।
- संग्राहक (Collector, C): मध्यम डोपित और बड़ा, उत्सर्जक से आने वाले बहुसंख्यक आवेश वाहकों को एकत्र करता है।
8. ट्रांजिस्टर की कार्यप्रणाली (npn ट्रांजिस्टर के संदर्भ में)
- बायसिंग:
- उत्सर्जक-आधार संधि (E-B Junction) को हमेशा अग्र अभिनत किया जाता है।
- संग्राहक-आधार संधि (C-B Junction) को हमेशा पश्च अभिनत किया जाता है।
- कार्य:
- उत्सर्जक से इलेक्ट्रॉन आधार में प्रवेश करते हैं (E-B अग्र अभिनत)।
- आधार पतला और हल्का डोपित होने के कारण, आधार में केवल कुछ इलेक्ट्रॉन (लगभग 2-5%) कोटरों के साथ पुनर्संयोजित होते हैं और आधार धारा (I_B) बनाते हैं।
- शेष अधिकांश इलेक्ट्रॉन (लगभग 95-98%) संग्राहक में पहुँच जाते हैं (C-B पश्च अभिनत होने के कारण) और संग्राहक धारा (I_C) बनाते हैं।
- धारा संबंध: I_E = I_B + I_C (किरचॉफ के धारा नियम के अनुसार)
9. ट्रांजिस्टर विन्यास (Transistor Configurations)
ट्रांजिस्टर को तीन मुख्य विन्यासों में उपयोग किया जा सकता है, जिसमें एक टर्मिनल इनपुट और आउटपुट दोनों के लिए उभयनिष्ठ होता है:
- a) उभयनिष्ठ आधार (Common Base, CB): आधार उभयनिष्ठ होता है।
- धारा लाभ (α) = ΔI_C / ΔI_E (लगभग 0.95 से 0.99, हमेशा 1 से कम)।
- b) उभयनिष्ठ उत्सर्जक (Common Emitter, CE): उत्सर्जक उभयनिष्ठ होता है। यह सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला विन्यास है।
- धारा लाभ (β) = ΔI_C / ΔI_B (लगभग 20 से 500, 1 से बहुत अधिक)।
- α और β के बीच संबंध: β = α / (1 - α) या α = β / (1 + β)।
- c) उभयनिष्ठ संग्राहक (Common Collector, CC): संग्राहक उभयनिष्ठ होता है।
10. ट्रांजिस्टर के अनुप्रयोग
a) प्रवर्धक के रूप में (As an Amplifier):
- उभयनिष्ठ उत्सर्जक (CE) विन्यास का उपयोग आमतौर पर प्रवर्धक के रूप में किया जाता है।
- यह एक छोटे इनपुट सिग्नल (आधार पर) को एक बड़े आउटपुट सिग्नल (संग्राहक पर) में प्रवर्धित करता है।
- वोल्टेज लाभ (A_v): आउटपुट वोल्टेज में परिवर्तन / इनपुट वोल्टेज में परिवर्तन।
- धारा लाभ (A_i): आउटपुट धारा में परिवर्तन / इनपुट धारा में परिवर्तन (जो कि β है)।
- शक्ति लाभ (A_p): वोल्टेज लाभ × धारा लाभ।
- CE प्रवर्धक में, आउटपुट वोल्टेज इनपुट वोल्टेज के सापेक्ष 180° कला विपरीत (phase inverted) होता है।
b) स्विच के रूप में (As a Switch):
- ट्रांजिस्टर को डिजिटल परिपथों में ऑन/ऑफ स्विच के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
- जब आधार धारा शून्य होती है, तो ट्रांजिस्टर अंतक क्षेत्र (Cut-off Region) में होता है (ऑफ स्विच)।
- जब आधार धारा इतनी अधिक होती है कि संग्राहक धारा अधिकतम हो जाती है, तो ट्रांजिस्टर संतृप्ति क्षेत्र (Saturation Region) में होता है (ऑन स्विच)।
11. लॉजिक गेट (Logic Gates)
- लॉजिक गेट डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स के मूल निर्माण खंड हैं।
- ये एक या अधिक इनपुट लेते हैं और एक एकल आउटपुट उत्पन्न करते हैं, जो इनपुट के तार्किक संयोजन पर निर्भर करता है।
- आउटपुट केवल दो अवस्थाओं में से एक हो सकता है: उच्च (High, 1) या निम्न (Low, 0)।
- प्रत्येक गेट का एक प्रतीक (Symbol), एक बूलियन व्यंजक (Boolean Expression) और एक सत्य सारणी (Truth Table) होती है।
a) मूल लॉजिक गेट (Basic Logic Gates):
-
i) OR गेट:
- आउटपुट '1' होता है यदि कोई भी इनपुट '1' हो।
- बूलियन व्यंजक: Y = A + B
- सत्य सारणी:
A B Y 0 0 0 0 1 1 1 0 1 1 1 1
-
ii) AND गेट:
- आउटपुट '1' होता है यदि सभी इनपुट '1' हों।
- बूलियन व्यंजक: Y = A . B
- सत्य सारणी:
A B Y 0 0 0 0 1 0 1 0 0 1 1 1
-
iii) NOT गेट (इन्वर्टर):
- यह इनपुट को व्युत्क्रमित करता है (उल्टा करता है)।
- बूलियन व्यंजक: Y = A' (या Ā)
- सत्य सारणी:
A Y 0 1 1 0
b) सार्वभौमिक गेट (Universal Gates):
-
इन गेटों का उपयोग करके अन्य सभी लॉजिक गेट (AND, OR, NOT) बनाए जा सकते हैं।
-
i) NAND गेट (NOT + AND):
- आउटपुट '1' होता है यदि कोई भी इनपुट '0' हो (या दोनों '1' न हों)।
- बूलियन व्यंजक: Y = (A . B)'
- सत्य सारणी:
A B Y 0 0 1 0 1 1 1 0 1 1 1 0
-
ii) NOR गेट (NOT + OR):
- आउटपुट '1' होता है यदि सभी इनपुट '0' हों।
- बूलियन व्यंजक: Y = (A + B)'
- सत्य सारणी:
A B Y 0 0 1 0 1 0 1 0 0 1 1 0
c) अन्य गेट:
-
i) XOR गेट (Exclusive OR):
- आउटपुट '1' होता है यदि इनपुट भिन्न हों।
- बूलियन व्यंजक: Y = A ⊕ B = A'B + AB'
- सत्य सारणी:
A B Y 0 0 0 0 1 1 1 0 1 1 1 0
-
ii) XNOR गेट (Exclusive NOR):
- आउटपुट '1' होता है यदि इनपुट समान हों।
- बूलियन व्यंजक: Y = (A ⊕ B)' = AB + A'B'
- सत्य सारणी:
A B Y 0 0 1 0 1 0 1 0 0 1 1 1
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) - 10 प्रश्न
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p-प्रकार के अर्धचालक में बहुसंख्यक आवेश वाहक कौन होते हैं?
a) इलेक्ट्रॉन
b) कोटर
c) प्रोटॉन
d) न्यूट्रॉन -
सिलिकॉन p-n संधि डायोड के लिए विभव प्राचीर का मान लगभग कितना होता है?
a) 0.3 V
b) 0.7 V
c) 1.1 V
d) 2.0 V -
p-n संधि डायोड को पश्च अभिनति में जोड़ने पर उसकी अवक्षय परत पर क्या प्रभाव पड़ता है?
a) चौड़ाई घट जाती है
b) चौड़ाई बढ़ जाती है
c) चौड़ाई अपरिवर्तित रहती है
d) पहले घटती है फिर बढ़ती है -
निम्न में से कौन सी युक्ति AC को DC में परिवर्तित करती है?
a) ट्रांजिस्टर
b) दिष्टकारी
c) प्रवर्धक
d) लॉजिक गेट -
जेनर डायोड का मुख्य अनुप्रयोग क्या है?
a) धारा प्रवर्धन
b) वोल्टता नियमन (Voltage Regulation)
c) प्रकाश उत्सर्जन
d) स्विचिंग -
एक npn ट्रांजिस्टर में, उत्सर्जक-आधार संधि और संग्राहक-आधार संधि को क्रमशः कैसे अभिनत किया जाता है?
a) अग्र अभिनत, अग्र अभिनत
b) पश्च अभिनत, पश्च अभिनत
c) अग्र अभिनत, पश्च अभिनत
d) पश्च अभिनत, अग्र अभिनत -
उभयनिष्ठ उत्सर्जक (CE) विन्यास में ट्रांजिस्टर के धारा लाभ (β) और उभयनिष्ठ आधार (CB) विन्यास के धारा लाभ (α) के बीच सही संबंध क्या है?
a) β = α / (1 + α)
b) β = α / (1 - α)
c) α = β / (1 - β)
d) α = β / (1 + β) -
वह लॉजिक गेट जिसका आउटपुट '1' होता है यदि उसके सभी इनपुट '0' हों, वह कौन सा गेट है?
a) AND गेट
b) OR गेट
c) NOR गेट
d) NAND गेट -
एक लॉजिक गेट जिसका बूलियन व्यंजक Y = A' है, वह कौन सा गेट है?
a) AND गेट
b) OR गेट
c) NOT गेट
d) XOR गेट -
निम्न में से कौन सा सार्वभौमिक गेट (Universal Gate) है?
a) OR गेट
b) AND गेट
c) NOT गेट
d) NAND गेट
उत्तर कुंजी:
- b) कोटर
- b) 0.7 V
- b) चौड़ाई बढ़ जाती है
- b) दिष्टकारी
- b) वोल्टता नियमन (Voltage Regulation)
- c) अग्र अभिनत, पश्च अभिनत
- b) β = α / (1 - α)
- c) NOR गेट
- c) NOT गेट
- d) NAND गेट
मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक सिद्ध होंगे। इस अध्याय के सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को ध्यान से पढ़ें और समझें। शुभकामनाएँ!