Class 12 Physics Notes Chapter 7 (प्रत्यावर्ती धारा) – Bhautiki-I Book

Bhautiki-I
प्रिय विद्यार्थियों,

प्रत्यावर्ती धारा (Alternating Current - AC) भौतिकी का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय है, विशेषकर प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से। यह अध्याय विद्युत ऊर्जा के उत्पादन, संचरण और उपयोग के आधुनिक तरीकों की नींव रखता है। यहाँ इस अध्याय के विस्तृत नोट्स और कुछ बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं, जो आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होंगे।


अध्याय 7: प्रत्यावर्ती धारा (Alternating Current)

1. प्रत्यावर्ती धारा (AC) और दिष्ट धारा (DC) का परिचय

  • दिष्ट धारा (DC): वह धारा जो समय के साथ अपनी दिशा नहीं बदलती और जिसका परिमाण या तो स्थिर रहता है या एक ही दिशा में परिवर्तित होता है। उदाहरण: बैटरी से प्राप्त धारा।
  • प्रत्यावर्ती धारा (AC): वह धारा जो समय के साथ आवर्ती रूप से अपनी दिशा बदलती है और जिसका परिमाण भी आवर्ती रूप से परिवर्तित होता है। भारत में घरेलू विद्युत आपूर्ति 50 Hz आवृत्ति की AC होती है।
  • AC के लाभ:
    • ट्रांसफॉर्मर का उपयोग करके वोल्टेज को आसानी से बढ़ाया या घटाया जा सकता है।
    • लंबी दूरी तक कम ऊर्जा हानि के साथ संचरित किया जा सकता है।
    • DC की तुलना में AC जनित्र बनाना अधिक आसान और कुशल है।

2. प्रत्यावर्ती वोल्टता और धारा का तात्क्षणिक मान
प्रत्यावर्ती धारा या वोल्टता का तात्क्षणिक मान (instantaneous value) ज्यावक्रीय रूप से परिवर्तित होता है:

  • प्रत्यावर्ती वोल्टता: $V = V_m \sin(\omega t + \phi_V)$
  • प्रत्यावर्ती धारा: $I = I_m \sin(\omega t + \phi_I)$
    • $V_m$ और $I_m$: क्रमशः वोल्टता और धारा के शिखर मान (peak value) या अधिकतम मान।
    • $\omega$: कोणीय आवृत्ति (angular frequency), $\omega = 2\pi f = 2\pi/T$, जहाँ $f$ आवृत्ति और $T$ आवर्तकाल है।
    • $(\omega t + \phi)$: कला (phase)।
    • $\phi_V$ और $\phi_I$: क्रमशः वोल्टता और धारा की प्रारंभिक कला।
    • कलांतर ($\phi$): $\phi = \phi_V - \phi_I$ (वोल्टता और धारा के बीच का कला अंतर)।

3. औसत मान (Average Value)

  • एक पूर्ण चक्र के लिए प्रत्यावर्ती धारा या वोल्टता का औसत मान शून्य होता है, क्योंकि धनात्मक और ऋणात्मक अर्ध-चक्र एक दूसरे को रद्द कर देते हैं।
  • अर्ध-चक्र के लिए औसत मान:
    • $I_{avg} = \frac{2I_m}{\pi} \approx 0.637 I_m$
    • $V_{avg} = \frac{2V_m}{\pi} \approx 0.637 V_m$

4. वर्ग माध्य मूल (RMS) मान (Root Mean Square Value)

  • RMS मान वह स्थिर DC धारा है जो समान समय में समान प्रतिरोध में उतनी ही ऊष्मा उत्पन्न करती है जितनी कि AC धारा करती है। यह AC परिपथों में शक्ति गणना के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
  • $I_{rms} = \frac{I_m}{\sqrt{2}} \approx 0.707 I_m$
  • $V_{rms} = \frac{V_m}{\sqrt{2}} \approx 0.707 V_m$
  • घरेलू AC आपूर्ति (220 V) का मान RMS मान होता है। इसका शिखर मान $V_m = 220 \sqrt{2} \approx 311 V$ होता है।

5. AC परिपथ जिनमें केवल एक अवयव हो

a) शुद्ध प्रतिरोधी परिपथ (Purely Resistive Circuit)

  • परिपथ में केवल प्रतिरोध (R) लगा हो।
  • यदि $V = V_m \sin \omega t$, तो $I = I_m \sin \omega t = \frac{V_m}{R} \sin \omega t$.
  • कला संबंध: प्रत्यावर्ती वोल्टता और धारा समान कला में होते हैं (कलांतर $\phi = 0^\circ$)।
  • शक्ति: $P_{avg} = V_{rms} I_{rms} = I_{rms}^2 R = \frac{V_{rms}^2}{R}$

b) शुद्ध प्रेरक परिपथ (Purely Inductive Circuit)

  • परिपथ में केवल प्रेरक (L) लगा हो।
  • यदि $V = V_m \sin \omega t$, तो $I = I_m \sin (\omega t - \pi/2)$.
  • कला संबंध: धारा वोल्टता से $\pi/2$ (90°) पश्चगामी (lagging) होती है।
  • प्रेरकीय प्रतिघात ($X_L$): प्रेरक द्वारा धारा के प्रवाह में उत्पन्न प्रभावी प्रतिरोध।
    • $X_L = \omega L = 2\pi f L$
    • इसकी इकाई ओम (ohm) है। DC के लिए ($f=0$), $X_L=0$ होता है।
  • शक्ति: औसत शक्ति शून्य होती है, क्योंकि प्रेरक ऊर्जा को चुंबकीय क्षेत्र में संग्रहीत करता है और फिर वापस स्रोत को लौटा देता है।

c) शुद्ध संधारित्री परिपथ (Purely Capacitive Circuit)

  • परिपथ में केवल संधारित्र (C) लगा हो।
  • यदि $V = V_m \sin \omega t$, तो $I = I_m \sin (\omega t + \pi/2)$.
  • कला संबंध: धारा वोल्टता से $\pi/2$ (90°) अग्रगामी (leading) होती है।
  • संधारित्री प्रतिघात ($X_C$): संधारित्र द्वारा धारा के प्रवाह में उत्पन्न प्रभावी प्रतिरोध।
    • $X_C = \frac{1}{\omega C} = \frac{1}{2\pi f C}$
    • इसकी इकाई ओम (ohm) है। DC के लिए ($f=0$), $X_C=\infty$ होता है (अर्थात् संधारित्र DC को ब्लॉक करता है)।
  • शक्ति: औसत शक्ति शून्य होती है, क्योंकि संधारित्र ऊर्जा को विद्युत क्षेत्र में संग्रहीत करता है और फिर वापस स्रोत को लौटा देता है।

6. श्रेणीबद्ध LCR परिपथ (Series LCR Circuit)

  • इस परिपथ में प्रतिरोध (R), प्रेरक (L) और संधारित्र (C) श्रेणी क्रम में जुड़े होते हैं।
  • प्रतिबाधा (Impedance, Z): AC परिपथ में धारा के प्रवाह में कुल प्रभावी बाधा।
    • $Z = \sqrt{R^2 + (X_L - X_C)^2}$
    • ओह्म के नियम के अनुसार, $I_{rms} = V_{rms}/Z$ और $I_m = V_m/Z$.
  • कलांतर ($\phi$): वोल्टता और धारा के बीच का कला अंतर।
    • $\tan \phi = \frac{X_L - X_C}{R}$
    • यदि $X_L > X_C$, परिपथ प्रेरकत्व प्रधान होता है और धारा वोल्टता से पश्चगामी होती है।
    • यदि $X_C > X_L$, परिपथ धारिता प्रधान होता है और धारा वोल्टता से अग्रगामी होती है।
    • यदि $X_L = X_C$, परिपथ प्रतिरोध प्रधान होता है और धारा वोल्टता के साथ कला में होती है।

7. अनुनाद (Resonance)

  • LCR परिपथ में अनुनाद तब होता है जब प्रेरकत्व प्रतिघात ($X_L$) संधारित्री प्रतिघात ($X_C$) के बराबर हो जाता है।
    • $X_L = X_C \implies \omega_r L = \frac{1}{\omega_r C}$
  • अनुनादी आवृत्ति ($f_r$):
    • $\omega_r^2 = \frac{1}{LC} \implies \omega_r = \frac{1}{\sqrt{LC}}$
    • $f_r = \frac{1}{2\pi\sqrt{LC}}$
  • अनुनाद की स्थिति में:
    • प्रतिबाधा न्यूनतम होती है ($Z = R$)।
    • धारा अधिकतम होती है ($I_{max} = V_{rms}/R$)।
    • कलांतर $\phi = 0$ होता है (धारा और वोल्टता कला में होते हैं)।
  • Q-कारक (Quality Factor) या तीक्ष्णता: यह अनुनाद की तीक्ष्णता को मापता है। उच्च Q-कारक वाला परिपथ अधिक चयनात्मक होता है।
    • $Q = \frac{\omega_r L}{R} = \frac{1}{\omega_r C R} = \frac{1}{R}\sqrt{\frac{L}{C}}$

8. AC परिपथ में शक्ति (Power in AC Circuit)

  • तात्क्षणिक शक्ति: $P = V I$
  • औसत शक्ति: $P_{avg} = V_{rms} I_{rms} \cos \phi$
    • $\cos \phi$ को शक्ति गुणांक (Power Factor) कहते हैं।
    • शक्ति गुणांक $\cos \phi = R/Z$ होता है।
  • वाटहीन धारा (Wattless Current): जब कलांतर $\phi = \pm \pi/2$ (जैसे शुद्ध प्रेरक या संधारित्र परिपथ में), तो $\cos \phi = 0$ होता है, और औसत शक्ति शून्य होती है। इस स्थिति में परिपथ में प्रवाहित धारा को वाटहीन धारा कहते हैं, क्योंकि यह कोई शक्ति क्षय नहीं करती।
  • आभासी शक्ति (Apparent Power): $P_{apparent} = V_{rms} I_{rms}$ (इकाई VA - वोल्ट-एम्पीयर)
  • वास्तविक शक्ति (True Power): $P_{actual} = V_{rms} I_{rms} \cos \phi$ (इकाई W - वाट)

9. LC दोलन (LC Oscillations)

  • एक आदर्श LC परिपथ में, संधारित्र में संचित विद्युत ऊर्जा ($U_E = \frac{1}{2}CV^2$) और प्रेरक में संचित चुंबकीय ऊर्जा ($U_B = \frac{1}{2}LI^2$) के बीच ऊर्जा का आदान-प्रदान होता है।
  • यह एक विद्युत चुम्बकीय दोलन है जिसकी कोणीय आवृत्ति $\omega_0 = \frac{1}{\sqrt{LC}}$ होती है।
  • कुल ऊर्जा संरक्षित रहती है: $U_E + U_B = नियत$।

10. ट्रांसफॉर्मर (Transformer)

  • कार्य सिद्धांत: अन्योन्य प्रेरण (mutual induction) के सिद्धांत पर कार्य करता है। यह AC वोल्टता को बिना आवृत्ति बदले बढ़ाता या घटाता है।
  • संरचना: इसमें एक नर्म लोहे का क्रोड होता है जिस पर दो कुंडलियाँ लिपटी होती हैं:
    • प्राथमिक कुंडली (Primary Coil): जिससे इनपुट AC वोल्टता जुड़ी होती है ($N_p$ फेरे)।
    • द्वितीयक कुंडली (Secondary Coil): जिससे आउटपुट लोड जुड़ा होता है ($N_s$ फेरे)।
  • ट्रांसफॉर्मर समीकरण (आदर्श ट्रांसफॉर्मर के लिए):
    • $\frac{V_s}{V_p} = \frac{N_s}{N_p} = \frac{I_p}{I_s}$
    • जहाँ $V_p, I_p, N_p$ प्राथमिक कुंडली के लिए और $V_s, I_s, N_s$ द्वितीयक कुंडली के लिए हैं।
  • प्रकार:
    • उच्चायी ट्रांसफॉर्मर (Step-up Transformer): $N_s > N_p \implies V_s > V_p$ (वोल्टेज बढ़ाता है, धारा घटाता है)।
    • अपचायी ट्रांसफॉर्मर (Step-down Transformer): $N_s < N_p \implies V_s < V_p$ (वोल्टेज घटाता है, धारा बढ़ाता है)।
  • दक्षता ($\eta$): $\eta = \frac{\text{आउटपुट शक्ति}}{\text{इनपुट शक्ति}} = \frac{P_{out}}{P_{in}}$
  • ऊर्जा हानियाँ:
    • फ्लक्स क्षरण: प्राथमिक कुंडली से उत्पन्न सारा फ्लक्स द्वितीयक कुंडली से नहीं जुड़ पाता।
    • प्रतिरोध: कुंडलियों के प्रतिरोध के कारण $I^2R$ ऊष्मा के रूप में ऊर्जा हानि।
    • भंवर धाराएँ (Eddy Currents): क्रोड में उत्पन्न होने वाली भंवर धाराओं के कारण ऊष्मा हानि। इसे परतदार क्रोड (laminated core) का उपयोग करके कम किया जाता है।
    • शैथिल्य हानि (Hysteresis Loss): क्रोड के बार-बार चुंबकित और विचुंबकित होने के कारण ऊर्जा हानि।
  • उपयोग: लंबी दूरी तक विद्युत ऊर्जा के संचरण में (उच्चायी ट्रांसफॉर्मर द्वारा वोल्टेज बढ़ाकर धारा कम की जाती है, जिससे $I^2R$ हानि कम होती है)।

11. AC जनित्र (AC Generator)

  • कार्य सिद्धांत: विद्युत चुम्बकीय प्रेरण (electromagnetic induction) के सिद्धांत पर कार्य करता है। यह यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है।
  • संरचना:
    • आर्मेचर (Armature): एक कुंडली जिसे चुंबकीय क्षेत्र में घुमाया जाता है।
    • क्षेत्र चुंबक (Field Magnet): मजबूत चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है।
    • सर्पी वलय (Slip Rings): आर्मेचर के साथ घूमते हैं और बाहरी परिपथ से कनेक्शन प्रदान करते हैं।
    • ब्रश (Brushes): सर्पी वलय से संपर्क बनाए रखते हैं और बाहरी परिपथ में धारा प्रवाहित करते हैं।
  • उत्पन्न प्रेरित EMF: जब कुंडली को कोणीय वेग $\omega$ से घुमाया जाता है, तो प्रेरित EMF का मान $E = E_m \sin \omega t$ होता है, जहाँ $E_m = NBA\omega$ (N = फेरों की संख्या, B = चुंबकीय क्षेत्र, A = कुंडली का क्षेत्रफल)।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

  1. प्रत्यावर्ती धारा के वर्ग माध्य मूल (RMS) मान और शिखर मान ($I_m$) के बीच क्या संबंध है?
    a) $I_{rms} = \sqrt{2} I_m$
    b) $I_{rms} = I_m / \sqrt{2}$
    c) $I_{rms} = 2 I_m / \pi$
    d) $I_{rms} = I_m$

  2. शुद्ध प्रतिरोधी AC परिपथ में, वोल्टता और धारा के बीच कलांतर कितना होता है?
    a) $0^\circ$
    b) $45^\circ$
    c) $90^\circ$
    d) $180^\circ$

  3. एक शुद्ध प्रेरक AC परिपथ में, धारा वोल्टता से __________ होती है।
    a) $90^\circ$ अग्रगामी
    b) $90^\circ$ पश्चगामी
    c) समान कला में
    d) $180^\circ$ पश्चगामी

  4. संधारित्री प्रतिघात ($X_C$) का सूत्र क्या है?
    a) $X_C = \omega L$
    b) $X_C = 1 / (\omega L)$
    c) $X_C = \omega C$
    d) $X_C = 1 / (\omega C)$

  5. LCR श्रेणी अनुनादी परिपथ में, अनुनाद की स्थिति में प्रतिबाधा (Z) का मान क्या होता है?
    a) $Z = R$
    b) $Z = \sqrt{R^2 + X_L^2}$
    c) $Z = \sqrt{R^2 + X_C^2}$
    d) $Z = \sqrt{R^2 + (X_L - X_C)^2}$

  6. एक AC परिपथ में औसत शक्ति का सूत्र क्या है?
    a) $P_{avg} = V_{rms} I_{rms}$
    b) $P_{avg} = V_{rms} I_{rms} \sin \phi$
    c) $P_{avg} = V_{rms} I_{rms} \cos \phi$
    d) $P_{avg} = V_m I_m$

  7. ट्रांसफॉर्मर किस सिद्धांत पर कार्य करता है?
    a) स्वप्रेरण
    b) अन्योन्य प्रेरण
    c) फैराडे का विद्युत चुम्बकीय प्रेरण का नियम
    d) a और b दोनों

  8. एक उच्चायी ट्रांसफॉर्मर में, द्वितीयक कुंडली में फेरों की संख्या प्राथमिक कुंडली की तुलना में __________ होती है।
    a) कम
    b) अधिक
    c) समान
    d) आधी

  9. ट्रांसफॉर्मर में भंवर धाराओं (Eddy Currents) के कारण होने वाली ऊर्जा हानि को कम करने के लिए क्या किया जाता है?
    a) मोटी तार का उपयोग
    b) उच्च प्रतिरोधकता वाले पदार्थ का उपयोग
    c) परतदार क्रोड (laminated core) का उपयोग
    d) क्रोड को हवा में रखना

  10. यदि किसी LCR परिपथ में $X_L = X_C$ है, तो परिपथ का शक्ति गुणांक ($\cos \phi$) क्या होगा?
    a) 0
    b) 0.5
    c) 1
    d) अनंत

उत्तर:

  1. b) $I_{rms} = I_m / \sqrt{2}$
  2. a) $0^\circ$
  3. b) $90^\circ$ पश्चगामी
  4. d) $X_C = 1 / (\omega C)$
  5. a) $Z = R$
  6. c) $P_{avg} = V_{rms} I_{rms} \cos \phi$
  7. b) अन्योन्य प्रेरण
  8. b) अधिक
  9. c) परतदार क्रोड (laminated core) का उपयोग
  10. c) 1

मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और प्रश्न आपकी तैयारी में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे। अपनी पढ़ाई जारी रखें और किसी भी संदेह के लिए पूछने में संकोच न करें।

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