Class 12 Physics Notes Chapter 8 (वैद्युचुंबकीय तरंगें) – Bhautiki-I Book

प्रिय विद्यार्थियों, आज हम भौतिकी के एक अत्यंत महत्वपूर्ण और रोचक अध्याय 'वैद्युतचुंबकीय तरंगें' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय न केवल आपकी बोर्ड परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में भी इससे संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। आइए, इस अध्याय के प्रमुख बिंदुओं को गहराई से समझते हैं।
अध्याय 8: वैद्युतचुंबकीय तरंगें (Electromagnetic Waves)
1. विस्थापन धारा (Displacement Current)
- एम्पीयर के परिपथीय नियम की विसंगति: एम्पीयर का परिपथीय नियम, $\oint \vec{B} \cdot d\vec{l} = \mu_0 I_c$, केवल स्थिर चालन धाराओं ($I_c$) के लिए मान्य था। जब एक संधारित्र आवेशित हो रहा होता है, तो उसकी प्लेटों के बीच कोई चालन धारा नहीं होती, लेकिन प्लेटों के बाहर परिपथ में धारा प्रवाहित होती है। यदि हम संधारित्र की प्लेटों के बीच एक बंद लूप पर एम्पीयर का नियम लागू करते हैं, तो यह नियम गलत परिणाम देता है क्योंकि वहाँ $I_c = 0$ है, जबकि चुंबकीय क्षेत्र मौजूद होता है।
- मैक्सवेल की अवधारणा: जेम्स क्लर्क मैक्सवेल ने इस विसंगति को दूर करने के लिए 'विस्थापन धारा' की अवधारणा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि समय के साथ परिवर्तित होने वाला वैद्युत क्षेत्र (या वैद्युत फ्लक्स) भी चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है, ठीक वैसे ही जैसे चालन धारा करती है।
- विस्थापन धारा का सूत्र: विस्थापन धारा ($I_d$) को इस प्रकार परिभाषित किया गया है:
$I_d = \epsilon_0 \frac{d\Phi_E}{dt}$
जहाँ,- $\epsilon_0$ निर्वात की वैद्युतशीलता है ($8.85 \times 10^{-12} \text{ C}^2 \text{ N}^{-1} \text{ m}^{-2}$)।
- $\Phi_E = \oint \vec{E} \cdot d\vec{A}$ वैद्युत फ्लक्स है।
- $\frac{d\Phi_E}{dt}$ वैद्युत फ्लक्स के परिवर्तन की दर है।
- संशोधित एम्पीयर-मैक्सवेल नियम: मैक्सवेल ने एम्पीयर के परिपथीय नियम को संशोधित किया, जिसमें चालन धारा ($I_c$) और विस्थापन धारा ($I_d$) दोनों को शामिल किया गया:
$\oint \vec{B} \cdot d\vec{l} = \mu_0 (I_c + I_d)$
या
$\oint \vec{B} \cdot d\vec{l} = \mu_0 I_c + \mu_0 \epsilon_0 \frac{d\Phi_E}{dt}$
यह नियम बताता है कि चुंबकीय क्षेत्र केवल चालन धारा से ही नहीं, बल्कि समय-परिवर्ती वैद्युत क्षेत्र से भी उत्पन्न होता है।
2. मैक्सवेल के समीकरण (Maxwell's Equations)
मैक्सवेल ने वैद्युत और चुंबकीय घटनाओं को चार मूलभूत समीकरणों में संकलित किया, जिन्हें मैक्सवेल के समीकरण कहा जाता है। ये समीकरण वैद्युतचुंबकीय तरंगों के अस्तित्व की भविष्यवाणी करते हैं और वैद्युतचुंबकत्व के सभी नियमों को समाहित करते हैं।
- 1. गाउस का नियम (स्थिरवैद्युतिकी):
$\oint \vec{E} \cdot d\vec{A} = \frac{Q}{\epsilon_0}$
यह नियम बताता है कि किसी बंद पृष्ठ से गुजरने वाला कुल वैद्युत फ्लक्स उस पृष्ठ द्वारा परिबद्ध कुल आवेश का $\frac{1}{\epsilon_0}$ गुना होता है। यह वैद्युत आवेशों के अस्तित्व और उनके द्वारा वैद्युत क्षेत्र उत्पन्न करने की व्याख्या करता है। - 2. गाउस का नियम (चुंबकत्व):
$\oint \vec{B} \cdot d\vec{A} = 0$
यह नियम बताता है कि किसी बंद पृष्ठ से गुजरने वाला कुल चुंबकीय फ्लक्स हमेशा शून्य होता है। इसका अर्थ है कि एकल चुंबकीय ध्रुव (मोनोपोल) का अस्तित्व नहीं होता; चुंबकीय ध्रुव हमेशा युग्मों में (उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव) होते हैं। - 3. फैराडे का प्रेरण का नियम:
$\oint \vec{E} \cdot d\vec{l} = -\frac{d\Phi_B}{dt}$
यह नियम बताता है कि समय के साथ परिवर्तित होने वाला चुंबकीय फ्लक्स एक प्रेरित वैद्युत क्षेत्र उत्पन्न करता है। यह वैद्युत जनरेटर और ट्रांसफार्मर के कार्य का आधार है। - 4. एम्पीयर-मैक्सवेल का नियम:
$\oint \vec{B} \cdot d\vec{l} = \mu_0 I_c + \mu_0 \epsilon_0 \frac{d\Phi_E}{dt}$
यह नियम बताता है कि चुंबकीय क्षेत्र चालन धारा ($I_c$) और समय-परिवर्ती वैद्युत क्षेत्र (विस्थापन धारा $I_d = \epsilon_0 \frac{d\Phi_E}{dt}$) दोनों द्वारा उत्पन्न होता है।
3. वैद्युतचुंबकीय तरंगें (Electromagnetic Waves - EM Waves)
मैक्सवेल के समीकरणों से यह निष्कर्ष निकला कि समय-परिवर्ती वैद्युत क्षेत्र चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है और समय-परिवर्ती चुंबकीय क्षेत्र वैद्युत क्षेत्र उत्पन्न करता है। ये दोनों क्षेत्र एक दूसरे को उत्पन्न करते हुए अंतरिक्ष में तरंग के रूप में संचरित हो सकते हैं।
- उत्पत्ति: वैद्युतचुंबकीय तरंगें त्वरित आवेशों (accelerated charges) द्वारा उत्पन्न होती हैं। एक दोलनशील आवेश वैद्युत और चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है जो समय के साथ बदलते रहते हैं और एक दूसरे को बनाए रखते हुए तरंग के रूप में आगे बढ़ते हैं।
- प्रकृति और विशेषताएँ:
- अनुप्रस्थ प्रकृति: वैद्युत क्षेत्र ($\vec{E}$) और चुंबकीय क्षेत्र ($\vec{B}$) के दोलन तरंग संचरण की दिशा के लंबवत होते हैं। साथ ही, $\vec{E}$ और $\vec{B}$ एक दूसरे के भी लंबवत होते हैं।
- माध्यम की आवश्यकता नहीं: वैद्युतचुंबकीय तरंगों को संचरण के लिए किसी भौतिक माध्यम की आवश्यकता नहीं होती। वे निर्वात में भी गमन कर सकती हैं।
- निर्वात में चाल: निर्वात में सभी वैद्युतचुंबकीय तरंगें प्रकाश की चाल ($c$) से चलती हैं।
$c = \frac{1}{\sqrt{\mu_0 \epsilon_0}}$
जहाँ $\mu_0 = 4\pi \times 10^{-7} \text{ T m A}^{-1}$ (निर्वात की चुंबकशीलता) और $\epsilon_0 = 8.85 \times 10^{-12} \text{ C}^2 \text{ N}^{-1} \text{ m}^{-2}$ (निर्वात की वैद्युतशीलता)।
$c \approx 3 \times 10^8 \text{ m/s}$ - कला संबंध: वैद्युत क्षेत्र और चुंबकीय क्षेत्र एक ही कला में होते हैं, अर्थात वे एक साथ अधिकतम और न्यूनतम मान प्राप्त करते हैं।
- शिखर मान संबंध: वैद्युत क्षेत्र के शिखर मान ($E_0$) और चुंबकीय क्षेत्र के शिखर मान ($B_0$) के बीच संबंध:
$E_0 = c B_0$
या सामान्य रूप में $E = cB$ - ऊर्जा और संवेग वहन: वैद्युतचुंबकीय तरंगें ऊर्जा और संवेग का वहन करती हैं। जब ये किसी सतह पर पड़ती हैं, तो दाब डालती हैं जिसे विकिरण दाब (radiation pressure) कहते हैं।
- ध्रुवीकरण: वैद्युतचुंबकीय तरंगों को ध्रुवीकृत किया जा सकता है।
- वैद्युतचुंबकीय तरंग का समीकरण:
यदि तरंग x-अक्ष की दिशा में संचरित हो रही है, वैद्युत क्षेत्र y-अक्ष के अनुदिश और चुंबकीय क्षेत्र z-अक्ष के अनुदिश दोलन कर रहा है, तो उनके समीकरण इस प्रकार होंगे:
$E_y = E_0 \sin(kx - \omega t)$
$B_z = B_0 \sin(kx - \omega t)$
जहाँ:- $E_0$ और $B_0$ क्रमशः वैद्युत और चुंबकीय क्षेत्र के आयाम (शिखर मान) हैं।
- $k = \frac{2\pi}{\lambda}$ तरंग संख्या (angular wave number) है, जहाँ $\lambda$ तरंगदैर्ध्य है।
- $\omega = 2\pi\nu$ कोणीय आवृत्ति (angular frequency) है, जहाँ $\nu$ आवृत्ति है।
- तरंग की चाल $c = \frac{\omega}{k} = \nu \lambda$
4. ऊर्जा घनत्व और तीव्रता (Energy Density and Intensity)
- वैद्युत क्षेत्र का ऊर्जा घनत्व ($u_E$):
$u_E = \frac{1}{2} \epsilon_0 E^2$ - चुंबकीय क्षेत्र का ऊर्जा घनत्व ($u_B$):
$u_B = \frac{1}{2\mu_0} B^2$ - कुल ऊर्जा घनत्व ($u$): वैद्युतचुंबकीय तरंग में वैद्युत क्षेत्र और चुंबकीय क्षेत्र की ऊर्जा घनत्व बराबर होती है ($u_E = u_B$)।
$u = u_E + u_B = \epsilon_0 E^2 = \frac{1}{\mu_0} B^2$
औसत ऊर्जा घनत्व के लिए, $E^2$ और $B^2$ के वर्ग माध्य मूल (rms) मानों का उपयोग किया जाता है।
$\langle u \rangle = \frac{1}{2} \epsilon_0 E_0^2 = \frac{1}{2\mu_0} B_0^2$ - तीव्रता (Intensity - $I$): किसी सतह के प्रति इकाई क्षेत्रफल प्रति इकाई समय में आपतित होने वाली औसत ऊर्जा को तीव्रता कहते हैं।
$I = \langle u \rangle c = \frac{1}{2} \epsilon_0 E_0^2 c = \frac{1}{2\mu_0} B_0^2 c$
5. विकिरण दाब (Radiation Pressure)
जब वैद्युतचुंबकीय तरंगें किसी सतह पर आपतित होती हैं, तो वे उस पर संवेग स्थानांतरित करती हैं, जिससे एक दाब उत्पन्न होता है जिसे विकिरण दाब कहते हैं।
- पूर्ण अवशोषण के लिए: $P = \frac{I}{c}$
- पूर्ण परावर्तन के लिए: $P = \frac{2I}{c}$
जहाँ $I$ तरंग की तीव्रता है और $c$ प्रकाश की चाल है।
6. वैद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम (Electromagnetic Spectrum)
विभिन्न तरंगदैर्ध्य (या आवृत्तियों) की वैद्युतचुंबकीय तरंगों के सुव्यवस्थित समूह को वैद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम कहते हैं। सभी वैद्युतचुंबकीय तरंगें निर्वात में समान चाल ($c$) से चलती हैं।
आवृत्ति के बढ़ते क्रम (या तरंगदैर्ध्य के घटते क्रम) में वैद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम इस प्रकार है:
- 1. रेडियो तरंगें (Radio Waves):
- तरंगदैर्ध्य परास: $0.1 \text{ m}$ से $10^4 \text{ m}$ तक।
- आवृत्ति परास: कुछ $\text{Hz}$ से $10^9 \text{ Hz}$ तक।
- उत्पत्ति: LC परिपथों में त्वरित आवेशों के दोलन द्वारा।
- उपयोग: रेडियो और टेलीविजन संचार, मोबाइल फोन, रिमोट कंट्रोल।
- 2. सूक्ष्म तरंगें (Microwaves):
- तरंगदैर्ध्य परास: $10^{-3} \text{ m}$ से $0.1 \text{ m}$ तक।
- आवृत्ति परास: $10^9 \text{ Hz}$ से $10^{12} \text{ Hz}$ तक।
- उत्पत्ति: विशेष निर्वात नलिकाएँ जैसे क्लिस्ट्रॉन, मैग्नेट्रॉन।
- उपयोग: रडार प्रणाली, माइक्रोवेव ओवन, विमान नेविगेशन, उपग्रह संचार।
- 3. अवरक्त किरणें (Infrared Rays - IR):
- तरंगदैर्ध्य परास: $7 \times 10^{-7} \text{ m}$ से $10^{-3} \text{ m}$ तक।
- आवृत्ति परास: $10^{12} \text{ Hz}$ से $4 \times 10^{14} \text{ Hz}$ तक।
- उत्पत्ति: गर्म पिंडों और अणुओं द्वारा।
- उपयोग: रिमोट कंट्रोल, रात्रि दृष्टि उपकरण, ग्रीनहाउस प्रभाव, शारीरिक चिकित्सा, कोहरे में फोटोग्राफी, मौसम उपग्रह।
- 4. दृश्य प्रकाश (Visible Light):
- तरंगदैर्ध्य परास: $4 \times 10^{-7} \text{ m}$ (बैंगनी) से $7 \times 10^{-7} \text{ m}$ (लाल) तक।
- आवृत्ति परास: $4 \times 10^{14} \text{ Hz}$ से $7 \times 10^{14} \text{ Hz}$ तक।
- उत्पत्ति: परमाणुओं में इलेक्ट्रॉनों के संक्रमण द्वारा।
- उपयोग: हमें वस्तुओं को देखने में मदद करता है, प्रकाशिकी में।
- वर्णक्रम: VIBGYOR (बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल)।
- 5. पराबैंगनी किरणें (Ultraviolet Rays - UV):
- तरंगदैर्ध्य परास: $10^{-8} \text{ m}$ से $4 \times 10^{-7} \text{ m}$ तक।
- आवृत्ति परास: $7 \times 10^{14} \text{ Hz}$ से $10^{16} \text{ Hz}$ तक।
- उत्पत्ति: परमाणुओं में इलेक्ट्रॉनों के उच्च ऊर्जा स्तरों से संक्रमण द्वारा, सूर्य।
- उपयोग: जल शोधन, स्टेरिलाइजेशन (कीटाणुशोधन), लेसिक नेत्र शल्य चिकित्सा, अदृश्य स्याही का पता लगाना।
- हानिकारक प्रभाव: त्वचा कैंसर, आँखों को नुकसान। ओजोन परत इन्हें पृथ्वी तक पहुँचने से रोकती है।
- 6. एक्स-किरणें (X-rays):
- तरंगदैर्ध्य परास: $10^{-13} \text{ m}$ से $10^{-8} \text{ m}$ तक।
- आवृत्ति परास: $10^{16} \text{ Hz}$ से $10^{20} \text{ Hz}$ तक।
- उत्पत्ति: उच्च ऊर्जा वाले इलेक्ट्रॉनों द्वारा धातु लक्ष्य पर बमबारी करने पर या परमाणुओं के आंतरिक कोशों में इलेक्ट्रॉनों के संक्रमण द्वारा।
- उपयोग: चिकित्सा निदान (हड्डी के फ्रैक्चर का पता लगाना), सुरक्षा जांच (एयरपोर्ट स्कैनर), क्रिस्टल संरचना का अध्ययन।
- 7. गामा किरणें (Gamma Rays - $\gamma$-rays):
- तरंगदैर्ध्य परास: $10^{-14} \text{ m}$ से $10^{-10} \text{ m}$ तक (सबसे कम तरंगदैर्ध्य)।
- आवृत्ति परास: $10^{18} \text{ Hz}$ से $10^{23} \text{ Hz}$ तक (सबसे अधिक आवृत्ति)।
- उत्पत्ति: नाभिकीय अभिक्रियाओं और रेडियोधर्मी क्षय के दौरान।
- उपयोग: कैंसर उपचार (रेडियोथेरेपी), खाद्य पदार्थों का संरक्षण, औद्योगिक रेडियोग्राफी।
- भेदन क्षमता: सबसे अधिक भेदन क्षमता।
याद रखने योग्य महत्वपूर्ण क्रम:
आवृत्ति के बढ़ते क्रम में: रेडियो तरंगें < सूक्ष्म तरंगें < अवरक्त किरणें < दृश्य प्रकाश < पराबैंगनी किरणें < एक्स-किरणें < गामा किरणें
तरंगदैर्ध्य के घटते क्रम में: रेडियो तरंगें > सूक्ष्म तरंगें > अवरक्त किरणें > दृश्य प्रकाश > पराबैंगनी किरणें > एक्स-किरणें > गामा किरणें
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
-
प्रश्न 1: मैक्सवेल द्वारा प्रस्तुत विस्थापन धारा का सूत्र क्या है?
(a) $I_d = \epsilon_0 \frac{dQ}{dt}$
(b) $I_d = \epsilon_0 \frac{d\Phi_B}{dt}$
(c) $I_d = \epsilon_0 \frac{d\Phi_E}{dt}$
(d) $I_d = \mu_0 \frac{d\Phi_E}{dt}$ -
प्रश्न 2: निर्वात में वैद्युतचुंबकीय तरंगों की चाल का सूत्र क्या है?
(a) $c = \sqrt{\mu_0 \epsilon_0}$
(b) $c = \frac{1}{\mu_0 \epsilon_0}$
(c) $c = \frac{1}{\sqrt{\mu_0 \epsilon_0}}$
(d) $c = \frac{\mu_0}{\epsilon_0}$ -
प्रश्न 3: वैद्युतचुंबकीय तरंगों की प्रकृति कैसी होती है?
(a) अनुदैर्ध्य
(b) अनुप्रस्थ
(c) अनुप्रस्थ और अनुदैर्ध्य दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं -
प्रश्न 4: एक वैद्युतचुंबकीय तरंग में वैद्युत क्षेत्र ($E$) और चुंबकीय क्षेत्र ($B$) के आयामों के बीच क्या संबंध होता है?
(a) $E_0 B_0 = c$
(b) $E_0 = c B_0$
(c) $B_0 = c E_0$
(d) $E_0 = \frac{B_0}{c^2}$ -
प्रश्न 5: निम्नलिखित में से कौन सी वैद्युतचुंबकीय तरंगों को संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है?
(a) ध्वनि तरंगें
(b) जल तरंगें
(c) वैद्युतचुंबकीय तरंगें
(d) भूकंपीय तरंगें -
प्रश्न 6: वैद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम में सबसे अधिक आवृत्ति वाली तरंगें कौन सी हैं?
(a) रेडियो तरंगें
(b) गामा किरणें
(c) एक्स-किरणें
(d) पराबैंगनी किरणें -
प्रश्न 7: माइक्रोवेव ओवन में खाना पकाने के लिए किस प्रकार की वैद्युतचुंबकीय तरंगों का उपयोग किया जाता है?
(a) अवरक्त किरणें
(b) रेडियो तरंगें
(c) सूक्ष्म तरंगें (माइक्रोवेव)
(d) पराबैंगनी किरणें -
प्रश्न 8: विकिरण दाब के लिए पूर्ण अवशोषण की स्थिति में सही सूत्र क्या है, जहाँ $I$ तीव्रता है और $c$ प्रकाश की चाल है?
(a) $P = \frac{2I}{c}$
(b) $P = \frac{I}{c^2}$
(c) $P = \frac{I}{c}$
(d) $P = Ic$ -
प्रश्न 9: ओजोन परत पृथ्वी को किस हानिकारक वैद्युतचुंबकीय विकिरण से बचाती है?
(a) अवरक्त किरणें
(b) एक्स-किरणें
(c) पराबैंगनी किरणें
(d) गामा किरणें -
प्रश्न 10: वैद्युतचुंबकीय तरंगों की उत्पत्ति का मुख्य कारण क्या है?
(a) स्थिर आवेश
(b) एकसमान वेग से गतिमान आवेश
(c) त्वरित आवेश
(d) उदासीन कण
उत्तरमाला (Answer Key):
- (c)
- (c)
- (b)
- (b)
- (c)
- (b)
- (c)
- (c)
- (c)
- (c)