Class 12 Physology Notes Chapter 2 (आत्म एव व्यक्तित्व) – Manovigyan Book

Manovigyan
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम मनोविज्ञान के महत्वपूर्ण अध्याय 'आत्म एव व्यक्तित्व' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय न केवल आपकी सैद्धांतिक समझ के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि विभिन्न सरकारी परीक्षाओं में भी इससे संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। हम इस अध्याय के प्रत्येक पहलू को गहराई से समझेंगे ताकि आपकी तैयारी पुख्ता हो सके।


अध्याय 2: आत्म एव व्यक्तित्व (Self and Personality)

यह अध्याय आत्म (Self) और व्यक्तित्व (Personality) की अवधारणाओं, उनके विभिन्न सिद्धांतों और मापन विधियों पर केंद्रित है।


भाग 1: आत्म (Self)

1. आत्म की अवधारणा (Concept of Self):
आत्म व्यक्ति के अनुभवों, विचारों और भावनाओं का संगठित पुंज है, जो उसे उसकी पहचान देता है। यह वह तरीका है जिससे व्यक्ति स्वयं को देखता, सोचता और महसूस करता है।

2. आत्म-बोध (Self-concept):
यह व्यक्ति की अपने बारे में धारणाओं और विश्वासों का तंत्र है। इसमें शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक विशेषताएँ शामिल होती हैं।

  • उदाहरण: "मैं एक ईमानदार व्यक्ति हूँ," "मैं बुद्धिमान हूँ," "मैं एक अच्छा छात्र हूँ।"

3. आत्म-सम्मान (Self-esteem):
यह व्यक्ति द्वारा अपने मूल्य का मूल्यांकन है। उच्च आत्म-सम्मान वाले लोग स्वयं को अधिक योग्य, सक्षम और मूल्यवान मानते हैं, जबकि निम्न आत्म-सम्मान वाले लोग स्वयं को कमतर समझते हैं।

  • विकास: बचपन के अनुभव, माता-पिता की स्वीकृति, सामाजिक तुलनाएँ आत्म-सम्मान को प्रभावित करती हैं।

4. आत्म-क्षमता (Self-efficacy):
यह किसी कार्य को सफलतापूर्वक करने की अपनी क्षमता में व्यक्ति का विश्वास है। उच्च आत्म-क्षमता वाले लोग चुनौतियों का सामना करने में अधिक सफल होते हैं।

  • स्रोत: बंडूरा के अनुसार, यह चार स्रोतों से विकसित होती है:
    • निजी उपलब्धि के अनुभव (Mastery experiences)
    • परोक्ष अनुभव (Vicarious experiences)
    • मौखिक अनुनय (Verbal persuasion)
    • शारीरिक और भावनात्मक अवस्थाएँ (Physiological and emotional states)

5. आत्म-नियमन (Self-regulation):
यह अपनी भावनाओं, विचारों और व्यवहारों को नियंत्रित करने की क्षमता है ताकि वांछित लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके। इसमें आत्म-नियंत्रण (Self-control) और विलंबित संतुष्टि (Delay of gratification) शामिल है।

  • उदाहरण: परीक्षा के लिए देर रात तक पढ़ना, प्रलोभनों का विरोध करना।

6. आत्म के प्रकार (Types of Self):

  • व्यक्तिगत आत्म (Personal Self): यह उन गुणों को संदर्भित करता है जो व्यक्ति को दूसरों से अलग करते हैं (जैसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता, उपलब्धि, विशिष्टता)।
  • सामाजिक आत्म (Social Self): यह उन गुणों को संदर्भित करता है जो व्यक्ति को सामाजिक समूह से जोड़ते हैं (जैसे सहयोग, एकता, संबंध)।

7. संस्कृति और आत्म (Culture and Self):

  • पश्चिमी संस्कृति (Western Culture): आत्म को आमतौर पर एक स्वायत्त, स्वतंत्र इकाई के रूप में देखा जाता है, जो व्यक्तिगत पहचान और विशिष्टता पर जोर देती है।
  • भारतीय/पूर्वी संस्कृति (Indian/Eastern Culture): आत्म को अक्सर सामाजिक और सामुदायिक संबंधों के संदर्भ में परिभाषित किया जाता है, जहाँ व्यक्ति स्वयं को समूह के अभिन्न अंग के रूप में देखता है।

भाग 2: व्यक्तित्व (Personality)

1. व्यक्तित्व की परिभाषा (Definition of Personality):
व्यक्तित्व उन विशिष्ट तरीकों को संदर्भित करता है जिनमें व्यक्ति सोचता, महसूस करता और व्यवहार करता है। यह व्यक्ति के भीतर उन मनोदैहिक प्रणालियों का गतिशील संगठन है जो उसके पर्यावरण के साथ उसके अनूठे समायोजन को निर्धारित करता है।

2. व्यक्तित्व की विशेषताएँ (Characteristics of Personality):

  • स्थिरता और निरंतरता (Consistency and Stability): व्यक्तित्व विशेषताएँ समय और परिस्थितियों में अपेक्षाकृत स्थिर रहती हैं।
  • अनूठापन (Uniqueness): प्रत्येक व्यक्ति का व्यक्तित्व अनूठा होता है।
  • गत्यात्मकता (Dynamic): यह पूरी तरह से स्थिर नहीं होता, बल्कि पर्यावरणीय प्रभावों और अनुभवों के साथ विकसित होता रहता है।
  • मनोदैहिक संगठन (Psycho-physical Organization): इसमें मानसिक (विचार, भावनाएँ) और शारीरिक (तंत्रिका तंत्र, हार्मोन) दोनों पहलू शामिल होते हैं।

3. व्यक्तित्व के उपागम (Approaches to Personality):

A. प्रारूपी उपागम (Type Approaches):
ये उपागम व्यक्तित्व को कुछ व्यापक श्रेणियों या प्रकारों में वर्गीकृत करते हैं।

  • हिप्पोक्रेट्स (Hippocrates): शारीरिक द्रवों (humors) के आधार पर चार प्रकार:
    • पीत पित्त (Choleric): चिड़चिड़ा, गुस्सैल
    • कफ (Phlegmatic): शांत, धीमा
    • रक्त (Sanguine): आशावादी, मिलनसार
    • काला पित्त (Melancholic): उदास, निराशावादी
  • चरक संहिता (Charak Samhita): आयुर्वेद के अनुसार त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) के आधार पर व्यक्तित्व।
  • शेल्डन (Sheldon): शारीरिक बनावट के आधार पर:
    • एंडोमॉर्फी (Endomorphy): गोल, मोटा, मिलनसार, आराम पसंद।
    • मेसोमॉर्फी (Mesomorphy): मांसपेशीय, मजबूत, साहसी, आक्रामक।
    • एक्टोमॉर्फी (Ectomorphy): पतला, नाजुक, अंतर्मुखी, बौद्धिक।
  • जंग (Jung): मनोवैज्ञानिक ऊर्जा के प्रवाह के आधार पर:
    • अंतर्मुखी (Introvert): अपने विचारों और भावनाओं पर केंद्रित, शांत, आरक्षित।
    • बहिर्मुखी (Extrovert): बाहरी दुनिया पर केंद्रित, मिलनसार, सक्रिय।
  • फ्रीडमैन और रोज़ेनमैन (Friedman & Rosenman): हृदय रोग की प्रवृत्ति के आधार पर:
    • टाइप A (Type A): अत्यधिक प्रतिस्पर्धी, अधीर, आक्रामक, समय-दबाव में रहने वाले। (हृदय रोग का अधिक जोखिम)
    • टाइप B (Type B): शांत, धैर्यवान, कम प्रतिस्पर्धी, तनावमुक्त।
    • टाइप C (Type C): दमनकारी, आज्ञाकारी, दूसरों को खुश करने वाले, कैंसर से जुड़ाव।
    • टाइप D (Type D): नकारात्मक भावनात्मकता और सामाजिक अवरोधों वाले, हृदय रोग से जुड़ाव।

B. विशेषक उपागम (Trait Approaches):
ये उपागम व्यक्तित्व को कुछ स्थायी विशेषकों (traits) के संयोजन के रूप में देखते हैं।

  • ऑलपोर्ट (Gordon Allport):
    • कार्डिनल विशेषक (Cardinal Traits): व्यक्ति के जीवन पर हावी, दुर्लभ, बहुत शक्तिशाली (जैसे गांधी का अहिंसा)।
    • केंद्रीय विशेषक (Central Traits): व्यक्ति के व्यवहार में सामान्यतः देखे जाने वाले (5-10 विशेषक, जैसे ईमानदार, दयालु)।
    • गौण विशेषक (Secondary Traits): विशिष्ट परिस्थितियों में प्रकट होने वाले, कम स्थायी (जैसे भोजन पसंद)।
  • कैटेल (Raymond Cattell):
    • सतही विशेषक (Surface Traits): आसानी से देखे जा सकने वाले व्यवहार (जैसे खुशमिजाज)।
    • स्रोत विशेषक (Source Traits): सतही विशेषकों के अंतर्निहित, अधिक मौलिक और स्थिर (जैसे बहिर्मुखता)। कैटेल ने 16 स्रोत विशेषकों की पहचान की (16 PF प्रश्नावली)।
  • आइज़ेनक (Hans Eysenck): तीन आयामों पर आधारित:
    • अंतर्मुखता-बहिर्मुखता (Introversion-Extraversion): सामाजिकता, आवेग, उत्तेजना की आवश्यकता।
    • तंत्रिकाताप-स्थिरता (Neuroticism-Stability): भावनात्मक अस्थिरता, चिंता, मूड स्विंग।
    • मनस्ताप-सामाजिकता (Psychoticism-Sociability): आक्रामकता, असामाजिकता, संवेदनहीनता।
  • पंच-कारक मॉडल (Five-Factor Model / Big Five Model): सबसे व्यापक रूप से स्वीकृत मॉडल, पाँच व्यापक विशेषक:
    • खुलेपन (Openness to Experience): कल्पनाशील, जिज्ञासु, कलात्मक, नए अनुभवों के प्रति खुला।
    • कर्तव्यनिष्ठा (Conscientiousness): संगठित, जिम्मेदार, अनुशासित, लक्ष्य-उन्मुख।
    • बहिर्मुखता (Extraversion): मिलनसार, ऊर्जावान, मुखर, उत्तेजना पसंद।
    • सहमतिशीलता (Agreeableness): दयालु, सहयोगी, भरोसेमंद, सहानुभूतिपूर्ण।
    • तंत्रिकाताप (Neuroticism): चिंतित, मूडी, असुरक्षित, भावनात्मक रूप से अस्थिर। (OCEAN या CANOE)

C. मनोगत्यात्मक उपागम (Psychodynamic Approaches):
ये उपागम अचेतन प्रक्रियाओं और प्रारंभिक बचपन के अनुभवों पर जोर देते हैं।

  • सिगमंड फ्रायड (Sigmund Freud):
    • व्यक्तित्व की संरचना (Structure of Personality):
      • इड (Id): सुख सिद्धांत पर आधारित, आदिम इच्छाएँ (भूख, प्यास, यौन इच्छा)।
      • अहम् (Ego): वास्तविकता सिद्धांत पर आधारित, इड की इच्छाओं को वास्तविकता के अनुरूप पूरा करता है।
      • पराहम् (Superego): नैतिकता सिद्धांत पर आधारित, सामाजिक आदर्शों और मूल्यों का आंतरिककरण।
    • चेतना के स्तर (Levels of Consciousness):
      • चेतन (Conscious): वर्तमान में जागरूक विचार।
      • पूर्वचेतन (Preconscious): आसानी से याद किए जा सकने वाले विचार।
      • अचेतन (Unconscious): दमित इच्छाएँ, विचार जो सीधे अभिगम्य नहीं हैं, व्यक्तित्व का सबसे बड़ा हिस्सा।
    • मनोलैंगिक विकास की अवस्थाएँ (Psychosexual Stages):
      • मौखिक अवस्था (Oral Stage): (जन्म-1 वर्ष) मुख पर केंद्रित आनंद।
      • गुदीय अवस्था (Anal Stage): (1-3 वर्ष) मलत्याग पर नियंत्रण।
      • लैंगिक अवस्था (Phallic Stage): (3-6 वर्ष) जननांगों पर केंद्रित, ओडिपस/इलेक्ट्रा कॉम्प्लेक्स।
      • सुप्त अवस्था (Latency Stage): (6-यौवन) यौन इच्छाएँ सुप्त, सामाजिक और बौद्धिक विकास।
      • जननांगीय अवस्था (Genital Stage): (यौवन-मृत्यु) परिपक्व यौन रुचि।
    • रक्षा युक्तियाँ (Defense Mechanisms): अहम् द्वारा चिंता से बचने के लिए उपयोग की जाने वाली अचेतन रणनीतियाँ:
      • दमन (Repression): दर्दनाक विचारों को अचेतन में धकेलना।
      • अस्वीकरण (Denial): वास्तविकता को स्वीकार करने से इनकार।
      • प्रक्षेपण (Projection): अपनी अवांछित विशेषताओं को दूसरों पर आरोपित करना।
      • युक्तिकरण (Rationalization): अस्वीकार्य व्यवहारों के लिए तार्किक बहाने बनाना।
      • प्रतिक्रिया निर्माण (Reaction Formation): अपनी वास्तविक इच्छाओं के विपरीत व्यवहार करना।
      • विस्थापन (Displacement): भावनाओं को मूल लक्ष्य से कम खतरनाक लक्ष्य पर स्थानांतरित करना।
      • उदात्तीकरण (Sublimation): अस्वीकार्य आवेगों को सामाजिक रूप से स्वीकार्य गतिविधियों में बदलना।
      • प्रतिगमन (Regression): तनाव में बचपन के व्यवहार पर लौटना।
  • उत्तर-फ्रायडियन (Post-Freudians):
    • कार्ल जंग (Carl Jung): सामूहिक अचेतन (Collective Unconscious), आर्कटाइप्स (Archetypes) की अवधारणा (जैसे माता, नायक, छाया)।
    • अल्फ्रेड एडलर (Alfred Adler): हीनता ग्रंथि (Inferiority Complex), श्रेष्ठता के लिए संघर्ष (Striving for Superiority), जीवन शैली (Life Style)।
    • कैरेन हॉर्नी (Karen Horney): बुनियादी दुश्चिंता (Basic Anxiety), व्यक्तित्व के प्रकार (लोगों की ओर बढ़ना, लोगों से दूर जाना, लोगों के खिलाफ जाना)।
    • एरिक एरिकसन (Erik Erikson): मनोसमाजिक विकास की 8 अवस्थाएँ, पहचान संकट (Identity Crisis)।

D. मानवतावादी उपागम (Humanistic Approaches):
ये उपागम मानव क्षमता, आत्म-सिद्धि और स्वतंत्र इच्छा पर जोर देते हैं।

  • कार्ल रोजर्स (Carl Rogers):
    • स्व का सिद्धांत (Self-Theory): वास्तविक स्व (Real Self) और आदर्श स्व (Ideal Self)।
    • बिना शर्त सकारात्मक सम्मान (Unconditional Positive Regard): व्यक्ति को बिना शर्त स्वीकार करना।
    • पूर्णतः क्रियाशील व्यक्ति (Fully Functioning Person): वह व्यक्ति जो अपनी पूरी क्षमता का उपयोग कर रहा हो।
  • अब्राहम मैस्लो (Abraham Maslow):
    • आवश्यकताओं का पदानुक्रम (Hierarchy of Needs): शारीरिक → सुरक्षा → प्रेम/जुड़ाव → सम्मान → आत्म-सिद्धि (Self-actualization)।
    • आत्म-सिद्धि (Self-actualization): अपनी पूरी क्षमता को प्राप्त करना, मानवतावादी उपागम का केंद्रीय लक्ष्य।

E. व्यवहारवादी उपागम (Behavioral Approaches):
व्यक्तित्व को अधिगम के अनुभवों और पर्यावरणीय सुदृढीकरण के उत्पाद के रूप में देखते हैं (स्किनर, पावलव, वाटसन)।

F. सामाजिक-संज्ञानात्मक उपागम (Socio-Cognitive Approaches):
यह उपागम व्यक्ति, व्यवहार और पर्यावरण के बीच परस्पर क्रिया पर जोर देता है।

  • अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura):
    • प्रेक्षणात्मक अधिगम (Observational Learning): दूसरों को देखकर सीखना।
    • पारस्परिक नियतत्ववाद (Reciprocal Determinism): व्यक्ति, व्यवहार और पर्यावरण एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं।
    • आत्म-क्षमता (Self-efficacy): किसी कार्य को सफलतापूर्वक करने की अपनी क्षमता में विश्वास।

4. व्यक्तित्व का मापन (Assessment of Personality):

A. आत्म-रिपोर्ट मापन (Self-report Measures):
व्यक्ति स्वयं अपने बारे में जानकारी प्रदान करता है।

  • MMPI (मिनेसोटा बहुपक्षीय व्यक्तित्व सूची - Minnesota Multiphasic Personality Inventory): सबसे व्यापक रूप से उपयोग किया जाने वाला, 567 प्रश्न, 10 नैदानिक ​​पैमाने और वैधता पैमाने।
  • 16 PF (कैटेल का 16 व्यक्तित्व कारक प्रश्नावली - Cattell's 16 Personality Factor Questionnaire): 16 स्रोत विशेषकों को मापता है।
  • आइज़ेनक व्यक्तित्व प्रश्नावली (EPQ - Eysenck Personality Questionnaire): आइज़ेनक के तीन आयामों को मापता है।

B. प्रक्षेपी तकनीकें (Projective Techniques):
असंरचित उद्दीपकों का उपयोग करके व्यक्ति के अचेतन विचारों और भावनाओं को प्रकट करने का प्रयास करती हैं।

  • रोर्शा स्याही-धब्बा परीक्षण (Rorschach Inkblot Test): हरमन रोर्शा द्वारा विकसित, 10 स्याही-धब्बे कार्ड (5 रंगीन, 5 काले और सफेद)। व्यक्ति को बताना होता है कि उसे धब्बे में क्या दिखता है।
  • विषय संप्रत्यक्षण परीक्षण (TAT - Thematic Apperception Test): मॉर्गन और मरे द्वारा विकसित, 30 अस्पष्ट चित्र कार्ड। व्यक्ति को चित्रों के आधार पर कहानियाँ बनानी होती हैं।
  • बाल संप्रत्यक्षण परीक्षण (CAT - Children's Apperception Test): लियोपोल्ड बेलक द्वारा विकसित, बच्चों के लिए TAT का एक रूपांतर, जानवरों के चित्र।
  • वाक्य पूर्ति परीक्षण (Sentence Completion Test): व्यक्ति को अधूरे वाक्यों को पूरा करना होता है।
  • चित्र कुंठा अध्ययन (Picture Frustration Study): रोज़ेनवीग द्वारा विकसित, कुंठाजनक स्थितियों को दर्शाने वाले कार्टून।

C. व्यवहारपरक विश्लेषण (Behavioral Analysis):
व्यक्ति के वास्तविक व्यवहार का अवलोकन और विश्लेषण।

  • साक्षात्कार (Interview): संरचित या असंरचित बातचीत।
  • प्रेक्षण (Observation): व्यक्ति के व्यवहार का व्यवस्थित अवलोकन।
  • स्थितिपरक परीक्षण (Situational Tests): विशिष्ट परिस्थितियों में व्यक्ति के व्यवहार का मूल्यांकन (जैसे समूह चर्चा, लीडरलेस ग्रुप डिस्कशन)।
  • नामांकन (Nomination): समूह के सदस्यों द्वारा एक-दूसरे को विशिष्ट गुणों के लिए नामित करना।
  • समाजमिति (Sociometry): समूह के भीतर सामाजिक संबंधों और पसंद-नापसंद का अध्ययन।

5. भारतीय परिप्रेक्ष्य में व्यक्तित्व (Indian Perspective on Personality):

  • गुण (Gunas): सांख्य दर्शन के अनुसार, तीन गुण व्यक्तित्व को प्रभावित करते हैं:
    • सत्व (Sattva): शुद्धता, ज्ञान, शांति, रचनात्मकता।
    • रजस (Rajas): क्रिया, जुनून, गति, महत्वाकांक्षा।
    • तमस (Tamas): अंधकार, आलस्य, अज्ञान, विनाश।
  • पुरुषार्थ (Purusharthas): जीवन के चार लक्ष्य जो व्यक्तित्व को आकार देते हैं:
    • धर्म (Dharma): नैतिक कर्तव्य, धार्मिकता।
    • अर्थ (Artha): धन, भौतिक समृद्धि।
    • काम (Kama): इच्छा, आनंद।
    • मोक्ष (Moksha): मुक्ति, आत्म-सिद्धि।
  • योग (Yoga): शारीरिक और मानसिक अनुशासन जो आत्म-विकास और आत्म-नियंत्रण पर जोर देता है।
  • अष्टांग योग (Ashtanga Yoga): यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि।
  • आत्म का भारतीय दृष्टिकोण: आत्म को ब्रह्मांड का एक अविभाज्य हिस्सा माना जाता है, जो व्यक्तिगत पहचान से परे है।

बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)

1. "मैं एक ईमानदार व्यक्ति हूँ" यह कथन किस अवधारणा को दर्शाता है?
a) आत्म-सम्मान
b) आत्म-क्षमता
c) आत्म-बोध
d) आत्म-नियमन

2. सिगमंड फ्रायड के अनुसार, व्यक्तित्व का वह हिस्सा जो सुख सिद्धांत पर कार्य करता है और आदिम इच्छाओं को पूरा करता है, कहलाता है:
a) अहम् (Ego)
b) पराहम् (Superego)
c) इड (Id)
d) चेतन (Conscious)

3. निम्नलिखित में से कौन सा व्यक्तित्व विशेषक पंच-कारक मॉडल (Big Five Model) का हिस्सा नहीं है?
a) खुलेपन (Openness)
b) कर्तव्यनिष्ठा (Conscientiousness)
c) अंतर्मुखता (Introversion)
d) सहमतता (Agreeableness)

4. कार्ल रोजर्स ने किस अवधारणा पर जोर दिया, जिसमें व्यक्ति को उसकी कमियों के बावजूद स्वीकार किया जाता है?
a) आत्म-सिद्धि
b) बिना शर्त सकारात्मक सम्मान
c) सामूहिक अचेतन
d) हीनता ग्रंथि

5. रोर्शा स्याही-धब्बा परीक्षण किस प्रकार की व्यक्तित्व मापन विधि का उदाहरण है?
a) आत्म-रिपोर्ट मापन
b) व्यवहारपरक विश्लेषण
c) प्रक्षेपी तकनीक
d) स्थितिपरक परीक्षण

6. अल्बर्ट बंडूरा द्वारा प्रतिपादित 'पारस्परिक नियतत्ववाद' में किन तीन कारकों के बीच परस्पर क्रिया पर जोर दिया गया है?
a) इड, अहम्, पराहम्
b) चेतन, अचेतन, पूर्वचेतन
c) व्यक्ति, व्यवहार, पर्यावरण
d) सत्व, रजस, तमस

7. कैटेल के अनुसार, व्यक्तित्व के मौलिक और स्थिर विशेषक क्या कहलाते हैं?
a) कार्डिनल विशेषक
b) सतही विशेषक
c) स्रोत विशेषक
d) गौण विशेषक

8. टाइप A व्यक्तित्व वाले लोग किस विशेषता के लिए जाने जाते हैं?
a) शांत और धैर्यवान
b) अत्यधिक प्रतिस्पर्धी और आक्रामक
c) दमनकारी और दूसरों को खुश करने वाले
d) नकारात्मक भावनात्मकता और सामाजिक अवरोध

9. भारतीय परिप्रेक्ष्य में, 'सत्व', 'रजस' और 'तमस' क्या कहलाते हैं?
a) पुरुषार्थ
b) दोष
c) गुण
d) योग

10. फ्रायड के अनुसार, चिंता से बचने के लिए अहम् द्वारा उपयोग की जाने वाली अचेतन रणनीतियाँ क्या कहलाती हैं?
a) आत्म-नियमन
b) आत्म-क्षमता
c) रक्षा युक्तियाँ
d) मनोलैंगिक अवस्थाएँ


उत्तरमाला:

  1. c) आत्म-बोध
  2. c) इड (Id)
  3. c) अंतर्मुखता (यह बहिर्मुखता-अंतर्मुखता आयाम का एक ध्रुव है, न कि एक स्वतंत्र 'बिग फाइव' कारक)
  4. b) बिना शर्त सकारात्मक सम्मान
  5. c) प्रक्षेपी तकनीक
  6. c) व्यक्ति, व्यवहार, पर्यावरण
  7. c) स्रोत विशेषक
  8. b) अत्यधिक प्रतिस्पर्धी और आक्रामक
  9. c) गुण
  10. c) रक्षा युक्तियाँ

मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी सरकारी परीक्षा की तैयारी में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे। अपनी पढ़ाई को निरंतर जारी रखें और सफलता अवश्य मिलेगी।

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