Class 12 Physology Notes Chapter 3 (जीवन की चुनौतियों का सामना) – Manovigyan Book

Manovigyan
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम कक्षा 12 मनोविज्ञान के अध्याय 3 'जीवन की चुनौतियों का सामना' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय आपको तनाव, उसके प्रभावों और उससे निपटने के तरीकों को समझने में मदद करेगा, जो न केवल आपकी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि आपके व्यक्तिगत जीवन में भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए हमें प्रत्येक अवधारणा को गहराई से समझना होगा।


अध्याय 3: जीवन की चुनौतियों का सामना (Dealing with Life Challenges)

I. परिचय: तनाव क्या है?

तनाव (Stress) एक गतिशील अवस्था है जिसमें एक व्यक्ति किसी ऐसी मांग या चुनौती का सामना करता है जिसे वह अपने संसाधनों के लिए अत्यधिक या भारी मानता है। यह व्यक्ति और पर्यावरण के बीच एक असंतुलन की धारणा है, जो शारीरिक और मनोवैज्ञानिक प्रतिक्रियाओं को जन्म देती है।

  • तनाव की परिभाषा: तनाव एक ऐसी स्थिति है जो किसी व्यक्ति की शारीरिक या मनोवैज्ञानिक भलाई को खतरे में डालती है।
  • तनावकारक (Stressor): वे घटनाएँ या परिस्थितियाँ जो तनाव उत्पन्न करती हैं।
  • तनाव प्रतिक्रिया (Stress Response): तनावकारक के प्रति शरीर और मन की प्रतिक्रिया।

II. तनाव की प्रकृति, प्रकार और स्रोत

A. तनाव की प्रकृति:
तनाव कोई बाहरी घटना नहीं है, बल्कि व्यक्ति की उस घटना के प्रति प्रतिक्रिया है। यह व्यक्तिपरक (subjective) होता है।

B. तनाव के प्रकार:
हंस सेली (Hans Selye) ने तनाव को दो मुख्य प्रकारों में वर्गीकृत किया:

  1. यूस्ट्रेस (Eustress): यह सकारात्मक, स्वस्थ और वांछनीय तनाव है। यह हमें प्रेरित करता है, प्रदर्शन को बेहतर बनाता है और लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करता है (जैसे परीक्षा से पहले थोड़ी घबराहट जो आपको पढ़ने के लिए प्रेरित करती है)।
  2. डिस्ट्रेस (Distress): यह नकारात्मक, अस्वस्थ और हानिकारक तनाव है। यह प्रदर्शन को बाधित करता है, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाता है और चिंता, अवसाद जैसी समस्याओं का कारण बनता है।

C. तनाव के स्रोत (तनावकारक - Stressors):
तनाव के कई स्रोत हो सकते हैं, जिन्हें मुख्य रूप से चार श्रेणियों में बांटा जा सकता है:

  1. जीवन की घटनाएँ (Life Events): ये जीवन में होने वाले बड़े और महत्वपूर्ण परिवर्तन होते हैं, चाहे वे सकारात्मक हों या नकारात्मक।

    • उदाहरण: किसी प्रियजन की मृत्यु, विवाह, तलाक, नौकरी छूटना, नौकरी में पदोन्नति, नया घर खरीदना, परीक्षा में असफलता।
    • होम्स और रेहे (Holmes and Rahe) का सोशल रीडजस्टमेंट रेटिंग स्केल (Social Readjustment Rating Scale - SRRS): इन्होंने विभिन्न जीवन घटनाओं को तनाव के स्तर के अनुसार रैंक किया। उच्च स्कोर वाले व्यक्तियों में बीमारी का खतरा अधिक होता है।
  2. दैनिक परेशानियाँ (Hassles): ये रोजमर्रा की छोटी-छोटी, मामूली समस्याएँ होती हैं जो लगातार बनी रहती हैं और संचयी रूप से तनाव का कारण बनती हैं।

    • उदाहरण: ट्रैफिक जाम, शोर, कतारों में इंतजार करना, बिलों का भुगतान, काम पर सहकर्मियों से बहस, पढ़ाई का बोझ।
  3. आघातजन्य घटनाएँ (Traumatic Events): ये गंभीर, अचानक और जीवन को खतरे में डालने वाली घटनाएँ होती हैं जो व्यक्ति पर गहरा मनोवैज्ञानिक प्रभाव डालती हैं।

    • उदाहरण: प्राकृतिक आपदाएँ (भूकंप, बाढ़), युद्ध, दुर्घटनाएँ, बलात्कार, शारीरिक हमला।
    • पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD): ऐसी घटनाओं के बाद होने वाला एक गंभीर मनोवैज्ञानिक विकार जिसमें व्यक्ति को घटना की बार-बार यादें आती हैं, बुरे सपने आते हैं और वह अत्यधिक चिंता में रहता है।
  4. पर्यावरणीय तनाव (Environmental Stress): ये व्यक्ति के बाहरी वातावरण से संबंधित तनावकारक होते हैं।

    • उदाहरण: प्रदूषण, भीड़भाड़, अत्यधिक शोर, खराब आवास की स्थिति, गरीबी, सामाजिक भेदभाव।

III. तनाव का मूल्यांकन (Appraisal of Stress)

रिचर्ड लाजारस और सुसान फोकमैन (Richard Lazarus and Susan Folkman) ने संज्ञानात्मक मूल्यांकन सिद्धांत (Cognitive Appraisal Theory) प्रस्तुत किया। इसके अनुसार, तनाव किसी घटना में नहीं, बल्कि उस घटना के प्रति व्यक्ति की सोच और मूल्यांकन में होता है। मूल्यांकन दो चरणों में होता है:

  1. प्राथमिक मूल्यांकन (Primary Appraisal): व्यक्ति घटना या स्थिति का मूल्यांकन करता है कि वह उसके लिए:

    • हानिकारक/हानि (Harm/Loss): पहले से हो चुका नुकसान।
    • खतरा (Threat): भविष्य में होने वाला संभावित नुकसान।
    • चुनौती (Challenge): एक अवसर जिसे सकारात्मक रूप से देखा जा सकता है और जिससे कुछ सीखा जा सकता है।
    • अप्रासंगिक (Irrelevant): मेरे लिए कोई मायने नहीं रखता।
      यदि प्राथमिक मूल्यांकन में स्थिति को खतरा या चुनौती के रूप में देखा जाता है, तो द्वितीयक मूल्यांकन होता है।
  2. द्वितीयक मूल्यांकन (Secondary Appraisal): व्यक्ति अपनी क्षमताओं और संसाधनों का मूल्यांकन करता है कि वह उस स्थिति का सामना कैसे कर सकता है। इसमें शामिल हैं:

    • क्या मेरे पास पर्याप्त संसाधन हैं?
    • मैं इस स्थिति से कैसे निपट सकता हूँ?
    • क्या मैं इसे नियंत्रित कर सकता हूँ?
      यदि व्यक्ति को लगता है कि उसके पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं, तो तनाव की भावना बढ़ जाती है।

IV. तनाव के प्रभाव (Effects of Stress)

तनाव शरीर और मन पर बहुआयामी प्रभाव डालता है:

A. शारीरिक प्रभाव (Physiological Effects):

  • हंस सेली का सामान्य अनुकूलन संलक्षण (General Adaptation Syndrome - GAS): सेली ने तनाव के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया के तीन चरणों का वर्णन किया:
    1. अलार्म प्रतिक्रिया (Alarm Reaction): शरीर आपातकाल के लिए तैयार होता है। एड्रेनालाईन और नॉरएड्रेनालाईन जैसे स्ट्रेस हार्मोन स्रावित होते हैं। हृदय गति, रक्तचाप बढ़ता है।
    2. प्रतिरोध अवस्था (Resistance Stage): यदि तनाव बना रहता है, तो शरीर तनावकारक से मुकाबला करने की कोशिश करता है। शरीर सामान्य स्थिति में लौटने की कोशिश करता है, लेकिन ऊर्जा का स्तर उच्च रहता है।
    3. थकावट अवस्था (Exhaustion Stage): यदि तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो शरीर के संसाधन समाप्त हो जाते हैं। व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से थक जाता है, प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है, और बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है।
  • हार्मोनल परिवर्तन: कोर्टिसोल (Cortisol) का स्तर बढ़ता है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को दबा सकता है।
  • शारीरिक लक्षण: सिरदर्द, मांसपेशियों में तनाव, पाचन संबंधी समस्याएँ (अल्सर), उच्च रक्तचाप, नींद न आना।

B. संज्ञानात्मक प्रभाव (Cognitive Effects):

  • एकाग्रता में कमी, स्मृति समस्याएँ।
  • निर्णय लेने में कठिनाई, तर्कशक्ति का ह्रास।
  • नकारात्मक सोच, चिंताजनक विचार।

C. भावनात्मक प्रभाव (Emotional Effects):

  • चिंता, अवसाद, क्रोध, चिड़चिड़ापन।
  • घबराहट, असुरक्षा, निराशा।

D. व्यवहारिक प्रभाव (Behavioral Effects):

  • नींद की आदतों में बदलाव (अनिद्रा या अत्यधिक नींद)।
  • खान-पान की आदतों में बदलाव (अत्यधिक खाना या कम खाना)।
  • सामाजिक अलगाव, रिश्तों में समस्याएँ।
  • पदार्थों का सेवन (शराब, धूम्रपान, ड्रग्स)।
  • जोखिम भरा व्यवहार।

V. तनाव और स्वास्थ्य (Stress and Health)

तनाव का स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है, खासकर दीर्घकालिक तनाव।

  • मनो-तंत्रिका प्रतिरक्षा विज्ञान (Psychoneuroimmunology - PNI): यह मनोविज्ञान, तंत्रिका विज्ञान और प्रतिरक्षा विज्ञान के बीच संबंधों का अध्ययन करता है। यह बताता है कि मन (मनोवैज्ञानिक अवस्थाएँ), मस्तिष्क (तंत्रिका प्रणाली) और प्रतिरक्षा प्रणाली एक-दूसरे को कैसे प्रभावित करते हैं।
    • तनाव प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करता है, जिससे शरीर संक्रमण और बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है (जैसे सर्दी-खांसी, एलर्जी, कैंसर, हृदय रोग)।
  • जीवन शैली से संबंधित बीमारियाँ (Lifestyle Diseases): तनाव कई जीवन शैली से संबंधित बीमारियों का एक प्रमुख कारक है।
    • उच्च रक्तचाप (Hypertension): तनाव से रक्तचाप बढ़ता है।
    • मधुमेह (Diabetes): तनाव रक्त शर्करा के स्तर को प्रभावित कर सकता है।
    • मोटापा (Obesity): तनाव से खाने की आदतें बिगड़ सकती हैं।
    • कोरोनरी हृदय रोग (Coronary Heart Disease - CHD): तनाव CHD के जोखिम को बढ़ाता है।
      • टाइप ए व्यक्तित्व (Type A Personality): मियर फ्राइडमैन और रे रोज़ेनमैन (Meyer Friedman and Ray Rosenman) ने इस व्यक्तित्व प्रकार का वर्णन किया, जिसमें अत्यधिक प्रतिस्पर्धात्मकता, अधीरता, समय की कमी का एहसास, और शत्रुता/आक्रामकता जैसे लक्षण होते हैं। ऐसे व्यक्तियों में CHD का खतरा अधिक होता है।
      • टाइप बी व्यक्तित्व (Type B Personality): शांत, धैर्यवान और कम प्रतिस्पर्धी।
      • टाइप सी व्यक्तित्व (Type C Personality): कैंसर से जुड़ा माना जाता है, जिसमें व्यक्ति भावनाओं को दबाता है, अत्यधिक सहयोगी होता है और निराशावादी होता है।

VI. तनाव का सामना करना (Coping with Stress)

मुकाबला (Coping) तनावपूर्ण स्थितियों का सामना करने, उन्हें कम करने या सहन करने के लिए किए गए संज्ञानात्मक और व्यवहारिक प्रयास हैं।

A. मुकाबला करने की रणनीतियाँ (Coping Strategies):
लाजारस और फोकमैन ने दो मुख्य प्रकार की मुकाबला रणनीतियाँ बताईं:

  1. समस्या-केंद्रित मुकाबला (Problem-Focused Coping): इस रणनीति में व्यक्ति तनाव के स्रोत को बदलने या हल करने पर ध्यान केंद्रित करता है।

    • उदाहरण: समस्या के बारे में जानकारी एकत्र करना, योजना बनाना, वैकल्पिक समाधान खोजना, समय प्रबंधन।
    • यह तब प्रभावी होता है जब व्यक्ति को लगता है कि वह स्थिति को नियंत्रित कर सकता है।
  2. भावनात्मक-केंद्रित मुकाबला (Emotion-Focused Coping): इस रणनीति में व्यक्ति तनाव से जुड़ी नकारात्मक भावनाओं को प्रबंधित करने पर ध्यान केंद्रित करता है, न कि समस्या को हल करने पर।

    • उदाहरण: भावनाओं को व्यक्त करना, सामाजिक समर्थन खोजना, स्थिति का सकारात्मक पुनर्मूल्यांकन करना, ध्यान भटकाना, विश्राम तकनीकें।
    • यह तब प्रभावी होता है जब व्यक्ति को लगता है कि वह स्थिति को नियंत्रित नहीं कर सकता है।

B. तनाव प्रबंधन तकनीकें (Stress Management Techniques):
ये वे विधियाँ हैं जो तनाव के शारीरिक और मनोवैज्ञानिक प्रभावों को कम करने में मदद करती हैं।

  1. विश्राम तकनीकें (Relaxation Techniques):

    • गहरी साँस लेना (Deep Breathing): धीमी, गहरी साँसें लेना जो पैरासिम्पेथेटिक तंत्रिका तंत्र को सक्रिय करती हैं।
    • प्रगतिशील मांसपेशी विश्राम (Progressive Muscle Relaxation - PMR): शरीर की विभिन्न मांसपेशियों को बारी-बारी से कसना और ढीला करना।
  2. ध्यान (Meditation): मन को शांत करने और वर्तमान क्षण पर ध्यान केंद्रित करने की एक तकनीक, जिससे मानसिक स्पष्टता और शांति मिलती है।

  3. बायोफीडबैक (Biofeedback): एक ऐसी तकनीक जिसमें व्यक्ति को अपने शरीर के अनैच्छिक कार्यों (जैसे हृदय गति, रक्तचाप, मांसपेशियों का तनाव) के बारे में जानकारी दी जाती है, ताकि वह उन्हें स्वेच्छा से नियंत्रित करना सीख सके।

  4. रचनात्मक दृश्य (Creative Visualization): मन में सकारात्मक और शांत दृश्यों की कल्पना करना, जिससे विश्राम और सकारात्मकता बढ़ती है।

  5. संज्ञानात्मक व्यवहारिक तकनीकें (Cognitive Behavioral Techniques - CBT): नकारात्मक और तर्कहीन विचारों को पहचानना, चुनौती देना और उन्हें अधिक यथार्थवादी और सकारात्मक विचारों से बदलना।

  6. व्यायाम (Exercise): नियमित शारीरिक गतिविधि तनाव हार्मोन को कम करती है, एंडोर्फिन जारी करती है, और मूड को बेहतर बनाती है।

VII. तनाव को कम करने वाले कारक (Factors that Moderate Stress)

कुछ कारक तनाव के नकारात्मक प्रभावों को कम करने में मदद करते हैं:

  1. सामाजिक समर्थन (Social Support): परिवार, दोस्तों और समुदाय से मिलने वाली सहायता और देखभाल। यह तनावपूर्ण समय में भावनात्मक और व्यावहारिक सहायता प्रदान करता है।

    • उपकरण संबंधी समर्थन (Tangible Support): भौतिक सहायता (जैसे पैसे, भोजन)।
    • सूचनात्मक समर्थन (Informational Support): सलाह, मार्गदर्शन, जानकारी।
    • भावनात्मक समर्थन (Emotional Support): सहानुभूति, देखभाल, आश्वासन।
  2. व्यक्तिगत विशेषताएँ (Personality Traits):

    • दृढ़ता (Hardiness) - सुसान कोबासा (Suzanne Kobasa): यह एक व्यक्तित्व विशेषता है जो व्यक्तियों को तनाव के प्रति अधिक प्रतिरोधी बनाती है। इसके तीन घटक हैं:
      • प्रतिबद्धता (Commitment): जीवन में उद्देश्य की गहरी भावना और गतिविधियों में संलग्नता।
      • नियंत्रण (Control): यह विश्वास कि व्यक्ति अपने जीवन की घटनाओं को नियंत्रित कर सकता है या उन पर प्रभाव डाल सकता है।
      • चुनौती (Challenge): परिवर्तन को एक खतरे के बजाय विकास और सीखने के अवसर के रूप में देखना।
    • आशावाद (Optimism): भविष्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखना। आशावादी लोग तनावपूर्ण घटनाओं को अस्थायी और नियंत्रणीय मानते हैं।
    • आत्म-प्रभावकारिता (Self-Efficacy) - अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura): किसी कार्य को सफलतापूर्वक करने की अपनी क्षमता में विश्वास। उच्च आत्म-प्रभावकारिता वाले लोग चुनौतियों का सामना करने में अधिक सक्षम महसूस करते हैं।
  3. जीवन कौशल (Life Skills): ये वे क्षमताएँ हैं जो व्यक्तियों को रोजमर्रा की जिंदगी की मांगों और चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने में मदद करती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा सुझाए गए कुछ महत्वपूर्ण जीवन कौशल:

    • आत्म-जागरूकता (Self-awareness)
    • समानुभूति (Empathy)
    • आलोचनात्मक सोच (Critical thinking)
    • रचनात्मक सोच (Creative thinking)
    • निर्णय लेना (Decision-making)
    • समस्या-समाधान (Problem-solving)
    • प्रभावी संचार (Effective communication)
    • अंतर-व्यक्तिगत संबंध कौशल (Interpersonal relationship skills)
    • भावनाओं का सामना करना (Coping with emotions)
    • तनाव का सामना करना (Coping with stress)

VIII. स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देना (Promoting Positive Health and Well-being)

सकारात्मक स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण आवश्यक है:

  • संतुलित आहार (Balanced Diet): स्वस्थ भोजन शरीर को ऊर्जा और पोषक तत्व प्रदान करता है।
  • नियमित व्यायाम (Regular Exercise): शारीरिक गतिविधि तनाव कम करती है और मूड को बेहतर बनाती है।
  • पर्याप्त नींद (Adequate Sleep): अच्छी नींद शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।
  • सकारात्मक सोच (Positive Thinking): आशावादी दृष्टिकोण अपनाना।
  • सामाजिक जुड़ाव (Social Engagement): मजबूत सामाजिक संबंध बनाना और बनाए रखना।
  • उद्देश्य की भावना (Sense of Purpose): जीवन में अर्थ और दिशा खोजना।
  • पर्यावरण के साथ सद्भाव (Harmony with Environment): प्रकृति के साथ जुड़ना।

बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)

यहाँ अध्याय 'जीवन की चुनौतियों का सामना' पर आधारित 10 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं:

  1. निम्नलिखित में से कौन सा तनाव का एक सकारात्मक और स्वस्थ प्रकार है जो प्रदर्शन को बेहतर बनाता है?
    a) डिस्ट्रेस
    b) यूस्ट्रेस
    c) आघातजन्य तनाव
    d) दैनिक परेशानी

  2. हंस सेली द्वारा प्रतिपादित 'सामान्य अनुकूलन संलक्षण (GAS)' के चरणों का सही क्रम क्या है?
    a) प्रतिरोध, अलार्म प्रतिक्रिया, थकावट
    b) अलार्म प्रतिक्रिया, थकावट, प्रतिरोध
    c) अलार्म प्रतिक्रिया, प्रतिरोध, थकावट
    d) थकावट, प्रतिरोध, अलार्म प्रतिक्रिया

  3. लाजारस और फोकमैन के संज्ञानात्मक मूल्यांकन सिद्धांत के अनुसार, जब एक व्यक्ति यह मूल्यांकन करता है कि उसके पास तनावपूर्ण स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं या नहीं, तो यह किस प्रकार का मूल्यांकन है?
    a) प्राथमिक मूल्यांकन
    b) द्वितीयक मूल्यांकन
    c) भावनात्मक मूल्यांकन
    d) व्यवहारिक मूल्यांकन

  4. टाइप ए व्यक्तित्व वाले व्यक्तियों में निम्नलिखित में से कौन सी विशेषताएँ प्रमुख होती हैं?
    a) शांत, धैर्यवान और कम प्रतिस्पर्धी
    b) अत्यधिक प्रतिस्पर्धी, अधीर और शत्रुतापूर्ण
    c) भावनाओं को दबाने वाले और अत्यधिक सहयोगी
    d) आशावादी और लचीले

  5. मनो-तंत्रिका प्रतिरक्षा विज्ञान (Psychoneuroimmunology - PNI) किस-किस के बीच संबंधों का अध्ययन करता है?
    a) मन, हृदय और फेफड़े
    b) मन, मस्तिष्क और प्रतिरक्षा प्रणाली
    c) मस्तिष्क, पाचन तंत्र और अंतःस्रावी ग्रंथियाँ
    d) मन, सामाजिक संबंध और पर्यावरण

  6. जब कोई व्यक्ति तनाव के स्रोत को बदलने या हल करने पर ध्यान केंद्रित करता है, तो वह किस प्रकार की मुकाबला रणनीति का उपयोग कर रहा है?
    a) भावनात्मक-केंद्रित मुकाबला
    b) समस्या-केंद्रित मुकाबला
    c) आत्म-दोषारोपण
    d) सामाजिक वापसी

  7. सुसान कोबासा द्वारा प्रतिपादित 'दृढ़ता (Hardiness)' के तीन घटक कौन से हैं?
    a) आशावाद, आत्म-प्रभावकारिता, सामाजिक समर्थन
    b) प्रतिबद्धता, नियंत्रण, चुनौती
    c) लचीलापन, अनुकूलनशीलता, धैर्य
    d) आत्म-जागरूकता, समानुभूति, संचार

  8. निम्नलिखित में से कौन सा सामाजिक समर्थन का एक प्रकार नहीं है?
    a) उपकरण संबंधी समर्थन
    b) सूचनात्मक समर्थन
    c) भावनात्मक समर्थन
    d) संज्ञानात्मक समर्थन

  9. गहरी साँस लेना और प्रगतिशील मांसपेशी विश्राम जैसी तकनीकें किस तनाव प्रबंधन श्रेणी के अंतर्गत आती हैं?
    a) संज्ञानात्मक पुनर्संरचना
    b) बायोफीडबैक
    c) विश्राम तकनीकें
    d) रचनात्मक दृश्य

  10. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा सुझाए गए जीवन कौशलों में से कौन सा एक व्यक्ति को अपनी भावनाओं को समझने और प्रबंधित करने में मदद करता है?
    a) आलोचनात्मक सोच
    b) समस्या-समाधान
    c) भावनाओं का सामना करना
    d) प्रभावी संचार


MCQ उत्तर कुंजी:

  1. b) यूस्ट्रेस
  2. c) अलार्म प्रतिक्रिया, प्रतिरोध, थकावट
  3. b) द्वितीयक मूल्यांकन
  4. b) अत्यधिक प्रतिस्पर्धी, अधीर और शत्रुतापूर्ण
  5. b) मन, मस्तिष्क और प्रतिरक्षा प्रणाली
  6. b) समस्या-केंद्रित मुकाबला
  7. b) प्रतिबद्धता, नियंत्रण, चुनौती
  8. d) संज्ञानात्मक समर्थन
  9. c) विश्राम तकनीकें
  10. c) भावनाओं का सामना करना

मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको इस अध्याय को गहराई से समझने और सरकारी परीक्षाओं के लिए बेहतर तैयारी करने में सहायक होंगे। अपनी पढ़ाई जारी रखें और किसी भी संदेह के लिए पूछने में संकोच न करें।

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