Class 12 Physology Notes Chapter 4 (मनोवैज्ञानिक विकार) – Manovigyan Book

Manovigyan
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम मनोविज्ञान के एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय 'मनोवैज्ञानिक विकार' पर विस्तृत चर्चा करेंगे। यह अध्याय न केवल आपकी सैद्धांतिक समझ के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि विभिन्न सरकारी परीक्षाओं में भी इससे संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। हम इस अध्याय के हर पहलू को गहराई से समझेंगे ताकि आपकी तैयारी पुख्ता हो सके।


अध्याय 4: मनोवैज्ञानिक विकार (Psychological Disorders)

मनोवैज्ञानिक विकार उन व्यवहारों, विचारों और भावनाओं के पैटर्न को संदर्भित करते हैं जो व्यक्ति के जीवन में महत्वपूर्ण संकट, अक्षमता या कार्यक्षमता में कमी का कारण बनते हैं, और जो उसकी संस्कृति के संदर्भ में असामान्य या अनपेक्षित माने जाते हैं।

I. असामान्य व्यवहार की अवधारणा (Concept of Abnormal Behaviour)

असामान्य व्यवहार को परिभाषित करना जटिल है, क्योंकि 'सामान्य' और 'असामान्य' के बीच की रेखा अक्सर धुंधली होती है। विभिन्न दृष्टिकोणों से इसे समझने का प्रयास किया गया है:

  1. सांख्यिकीय मानदंड (Statistical Criterion): जो व्यवहार जनसंख्या के अधिकांश लोगों से बहुत भिन्न (या तो बहुत कम या बहुत अधिक) होते हैं, उन्हें असामान्य माना जा सकता है।

    • उदाहरण: बहुत कम या बहुत अधिक नींद लेना, अत्यधिक चिंता।
    • सीमा: यह मानदंड हमेशा उपयुक्त नहीं होता (जैसे उच्च बुद्धिमत्ता भी सांख्यिकीय रूप से असामान्य है, लेकिन यह विकार नहीं है)।
  2. विचलन मानदंड (Deviation Criterion): यह मानदंड सामाजिक मानदंडों और सांस्कृतिक अपेक्षाओं से विचलन पर आधारित है। जो व्यवहार समाज के स्थापित नियमों और मूल्यों का उल्लंघन करते हैं, उन्हें असामान्य माना जा सकता है।

    • उदाहरण: सार्वजनिक स्थानों पर अनुचित व्यवहार।
    • सीमा: सामाजिक मानदंड समय और संस्कृति के साथ बदलते रहते हैं।
  3. कष्ट मानदंड (Distress Criterion): यदि व्यवहार व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण भावनात्मक पीड़ा, दुख या असुविधा का कारण बनता है, तो उसे असामान्य माना जा सकता है।

    • उदाहरण: अवसाद, चिंता के कारण होने वाली आंतरिक पीड़ा।
  4. कार्य-क्षमता में कमी मानदंड (Dysfunction Criterion): यदि व्यवहार व्यक्ति की दैनिक गतिविधियों (जैसे काम, स्कूल, रिश्ते) में प्रभावी ढंग से कार्य करने की क्षमता को बाधित करता है, तो उसे असामान्य माना जाता है।

    • उदाहरण: अत्यधिक चिंता के कारण नौकरी पर ध्यान केंद्रित न कर पाना।
  5. खतरा मानदंड (Danger Criterion): यदि व्यवहार व्यक्ति या दूसरों के लिए शारीरिक या मनोवैज्ञानिक खतरा पैदा करता है, तो उसे असामान्य माना जाता है।

    • उदाहरण: आत्महत्या के विचार, आक्रामक व्यवहार।

II. असामान्य व्यवहार के ऐतिहासिक दृष्टिकोण (Historical Perspectives on Abnormal Behaviour)

मनोवैज्ञानिक विकारों को समझने के तरीके समय के साथ विकसित हुए हैं:

  1. प्राचीन काल (Ancient Times):

    • अलौकिक/दैवीय दृष्टिकोण: माना जाता था कि मानसिक विकार बुरी आत्माओं, राक्षसों या देवताओं के क्रोध के कारण होते हैं। उपचार में झाड़-फूंक, प्रार्थना, ताबीज शामिल थे।
    • जैविक दृष्टिकोण: हिप्पोक्रेट्स ने शरीर में चार तरल पदार्थों (रक्त, पीला पित्त, काला पित्त, कफ) के असंतुलन को मानसिक विकारों का कारण बताया।
    • मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण: प्लेटो ने तर्क दिया कि मानसिक विकार तर्क और आवेग के बीच संघर्ष से उत्पन्न होते हैं।
  2. मध्यकालीन काल (Medieval Period):

    • अलौकिक दृष्टिकोण फिर से हावी हो गया। मानसिक रूप से बीमार लोगों को अक्सर जादू टोना या दानव-ग्रस्त माना जाता था और उन्हें प्रताड़ित किया जाता था।
    • कुछ मुस्लिम चिकित्सकों ने मानवीय उपचार और मानसिक अस्पतालों की स्थापना की।
  3. पुनर्जागरण काल (Renaissance):

    • मानवतावादी दृष्टिकोण का उदय हुआ, जिसमें मानसिक विकारों को बीमारी के रूप में देखा गया, न कि दानवी कब्जे के रूप में।
    • सुधार आंदोलनों ने मानसिक रूप से बीमार लोगों के लिए बेहतर देखभाल और आश्रयों की वकालत की।
  4. आधुनिक काल (Modern Era):

    • जैविक मॉडल: 19वीं सदी में साइफिलिस के कारण होने वाले पक्षाघात (paresis) के जैविक कारण की खोज ने इस विचार को बल दिया कि कई मानसिक विकारों के जैविक आधार होते हैं।
    • मनोवैज्ञानिक मॉडल: सिगमंड फ्रायड ने मनोगत्यात्मक मॉडल विकसित किया, जिसमें अचेतन संघर्षों और प्रारंभिक अनुभवों को मानसिक विकारों का कारण बताया गया।

III. असामान्य व्यवहार के मॉडल (Models of Abnormal Behaviour)

विभिन्न मॉडल असामान्य व्यवहार के कारणों और उपचारों की व्याख्या करते हैं:

  1. जैविक मॉडल (Biological Model):

    • मान्यता: मानसिक विकार मस्तिष्क की संरचना, न्यूरोट्रांसमीटर (जैसे डोपामाइन, सेरोटोनिन, नॉरपेनेफ्रिन) के असंतुलन, आनुवंशिकी या हार्मोनल असंतुलन के कारण होते हैं।
    • उपचार: दवाएं (साइकोफार्माकोलॉजी), इलेक्ट्रोकन्वल्सिव थेरेपी (ECT)।
  2. मनोगत्यात्मक मॉडल (Psychodynamic Model):

    • मान्यता: सिगमंड फ्रायड द्वारा विकसित। अचेतन संघर्ष, दमित इच्छाएं, प्रारंभिक बचपन के अनुभव और रक्षा तंत्रों का अत्यधिक उपयोग मानसिक विकारों का कारण बनते हैं।
    • उपचार: मनोविश्लेषण (मुक्त साहचर्य, स्वप्न विश्लेषण, स्थानांतरण का विश्लेषण)।
  3. व्यवहारवादी मॉडल (Behavioural Model):

    • मान्यता: असामान्य व्यवहार अधिगम (सीखे गए) व्यवहार होते हैं, जो शास्त्रीय अनुबंधन, क्रिया प्रसूत अनुबंधन या सामाजिक अधिगम के माध्यम से विकसित होते हैं।
    • उपचार: व्यवहार चिकित्सा (व्यवस्थित विसंवेदीकरण, बाढ़, टोकन अर्थव्यवस्था)।
  4. संज्ञानात्मक मॉडल (Cognitive Model):

    • मान्यता: असामान्य व्यवहार तर्कहीन विचारों, गलत धारणाओं, नकारात्मक स्कीमा और संज्ञानात्मक विकृतियों (जैसे अति-सामान्यीकरण, चयनात्मक अमूर्तन) के कारण होते हैं।
    • उपचार: संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा (CBT), जिसमें गलत विचारों को पहचानना और बदलना शामिल है।
  5. मानवतावादी-अस्तित्ववादी मॉडल (Humanistic-Existential Model):

    • मान्यता: व्यक्ति की आत्म-वास्तविकरण (self-actualization) की प्रवृत्ति में बाधा, अर्थ की कमी, या अस्तित्वगत चिंताएं मानसिक विकारों का कारण बनती हैं।
    • उपचार: ग्राहक-केंद्रित चिकित्सा (रॉजर्स), गेस्टाल्ट थेरेपी (पर्ल्स)।
  6. सामाजिक-सांस्कृतिक मॉडल (Socio-cultural Model):

    • मान्यता: सामाजिक लेबलिंग, गरीबी, भेदभाव, पारिवारिक संघर्ष, सामाजिक दबाव और सांस्कृतिक कारक असामान्य व्यवहार में योगदान करते हैं।
    • उपचार: सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम, परिवार चिकित्सा।
  7. द्वि-मनोदैहिक मॉडल (Diathesis-Stress Model):

    • मान्यता: मानसिक विकार एक अंतर्निहित जैविक या मनोवैज्ञानिक प्रवृत्ति (diathesis) और पर्यावरणीय तनावों (stressors) के संयोजन का परिणाम होते हैं।
    • उदाहरण: किसी व्यक्ति में स्किज़ोफ्रेनिया की आनुवंशिक प्रवृत्ति हो सकती है, लेकिन यह केवल तब प्रकट होता है जब वे अत्यधिक तनाव का अनुभव करते हैं।

IV. मनोवैज्ञानिक विकारों का वर्गीकरण (Classification of Psychological Disorders)

मनोवैज्ञानिक विकारों का वर्गीकरण निदान, उपचार और अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण है। दो प्रमुख वर्गीकरण प्रणालियाँ हैं:

  1. मानसिक विकारों का नैदानिक और सांख्यिकीय मैनुअल (DSM-5): अमेरिकन साइकिएट्रिक एसोसिएशन (APA) द्वारा प्रकाशित। यह वर्तमान में DSM-5 (पांचवां संस्करण) है।
  2. रोगों का अंतर्राष्ट्रीय वर्गीकरण (ICD-10): विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा प्रकाशित। इसमें सभी प्रकार की बीमारियों के साथ-साथ मानसिक और व्यवहार संबंधी विकारों का भी वर्गीकरण है।

V. प्रमुख मनोवैज्ञानिक विकार (Major Psychological Disorders)

  1. चिंता विकार (Anxiety Disorders):

    • सामान्यीकृत चिंता विकार (Generalized Anxiety Disorder - GAD): लगातार, अत्यधिक और अवास्तविक चिंता और बेचैनी, जो विभिन्न घटनाओं या गतिविधियों से संबंधित होती है। शारीरिक लक्षणों में मांसपेशियों में तनाव, नींद की समस्या, चिड़चिड़ापन शामिल हैं।
    • पैनिक विकार (Panic Disorder): अप्रत्याशित, तीव्र पैनिक हमलों की पुनरावृत्ति, जिसमें तीव्र भय, सीने में दर्द, सांस फूलना, चक्कर आना और मृत्यु का भय शामिल होता है।
    • फोबिया (Phobias): किसी विशिष्ट वस्तु या स्थिति (जैसे ऊँचाई, जानवर, इंजेक्शन) के प्रति तीव्र, तर्कहीन और लगातार भय।
      • विशिष्ट फोबिया (Specific Phobia): किसी विशेष वस्तु या स्थिति का भय।
      • सामाजिक चिंता विकार (Social Anxiety Disorder/Social Phobia): सामाजिक स्थितियों में शर्मिंदगी या अपमानित होने का तीव्र भय।
      • एगोराफोबिया (Agoraphobia): ऐसी स्थितियों से बचने का भय जहाँ से भागना मुश्किल हो सकता है या मदद न मिल पाए (जैसे भीड़भाड़ वाली जगहें, खुले स्थान)।
    • पृथक्करण चिंता विकार (Separation Anxiety Disorder): घर या उन व्यक्तियों से अलग होने पर अत्यधिक चिंता जो व्यक्ति से जुड़े हुए हैं।
  2. मनोग्रस्ति-बाध्यता और संबंधित विकार (Obsessive-Compulsive and Related Disorders):

    • मनोग्रस्ति-बाध्यता विकार (Obsessive-Compulsive Disorder - OCD):
      • मनोग्रस्ति (Obsessions): लगातार, अवांछित विचार, कल्पनाएँ या आवेग जो चिंता का कारण बनते हैं (जैसे गंदगी का डर, समरूपता की आवश्यकता)।
      • बाध्यता (Compulsions): मनोग्रस्ति से उत्पन्न चिंता को कम करने के लिए दोहराए जाने वाले व्यवहार या मानसिक कार्य (जैसे बार-बार हाथ धोना, चीजों को व्यवस्थित करना)।
    • शरीर विरूपता विकार (Body Dysmorphic Disorder): अपने शरीर के किसी कल्पित या मामूली दोष के बारे में अत्यधिक चिंता।
    • होर्डिंग विकार (Hoarding Disorder): वस्तुओं को त्यागने में लगातार कठिनाई, जिसके परिणामस्वरूप अत्यधिक जमावड़ा होता है जो रहने की जगह को बाधित करता है।
  3. आघात-संबंधित और तनाव-संबंधित विकार (Trauma- and Stressor-Related Disorders):

    • पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (Post-Traumatic Stress Disorder - PTSD): किसी दर्दनाक घटना (जैसे युद्ध, दुर्घटना, हिंसा) के बाद होने वाले लक्षण जैसे फ्लैशबैक, बुरे सपने, अत्यधिक सतर्कता, भावनात्मक सुन्नता और घटना से बचना।
    • एक्यूट स्ट्रेस डिसऑर्डर (Acute Stress Disorder - ASD): PTSD के समान लक्षण, लेकिन घटना के एक महीने के भीतर शुरू होते हैं और एक महीने से कम समय तक रहते हैं।
  4. दैहिक लक्षण और संबंधित विकार (Somatic Symptom and Related Disorders):

    • दैहिक लक्षण विकार (Somatic Symptom Disorder): एक या अधिक शारीरिक लक्षणों के बारे में अत्यधिक चिंता, जो वास्तविक बीमारी के बिना भी हो सकते हैं, और जिसके परिणामस्वरूप महत्वपूर्ण संकट या कार्यक्षमता में कमी आती है।
    • रोग चिंता विकार (Illness Anxiety Disorder): किसी गंभीर बीमारी होने या होने के बारे में अत्यधिक चिंता, भले ही कोई शारीरिक लक्षण न हों या बहुत हल्के हों।
    • रूपांतरण विकार (Conversion Disorder): तंत्रिका संबंधी लक्षण (जैसे पक्षाघात, अंधापन, दौरे) जो किसी ज्ञात शारीरिक कारण से मेल नहीं खाते और अक्सर मनोवैज्ञानिक तनाव से जुड़े होते हैं।
  5. वियोजनी विकार (Dissociative Disorders):

    • चेतना, स्मृति, पहचान या धारणा में विघटन या व्यवधान।
    • वियोजनी स्मृतिलोप (Dissociative Amnesia): महत्वपूर्ण व्यक्तिगत जानकारी को याद करने में असमर्थता, आमतौर पर दर्दनाक या तनावपूर्ण प्रकृति की।
      • वियोजनी भगोड़ा (Dissociative Fugue): स्मृतिलोप के साथ-साथ घर या सामान्य परिवेश से अचानक, अप्रत्याशित यात्रा और नई पहचान अपनाना।
    • वियोजनी पहचान विकार (Dissociative Identity Disorder - DID): जिसे पहले मल्टीपल पर्सनैलिटी डिसऑर्डर कहा जाता था। दो या दो से अधिक अलग-अलग पहचानों या व्यक्तित्व अवस्थाओं की उपस्थिति जो व्यवहार को नियंत्रित करती हैं।
    • निर्व्यक्तिकरण/निर्वस्तुकरण विकार (Depersonalization/Derealization Disorder): स्वयं से (निर्व्यक्तिकरण) या परिवेश से (निर्वस्तुकरण) अलग होने की लगातार या आवर्ती भावनाएँ।
  6. अवसादग्रस्तता विकार (Depressive Disorders):

    • प्रमुख अवसादग्रस्तता विकार (Major Depressive Disorder - MDD): कम से कम दो सप्ताह तक लगभग हर दिन उदास मन, रुचि या खुशी का नुकसान, नींद और भूख में बदलाव, ऊर्जा की कमी, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, अपराधबोध और आत्महत्या के विचार।
    • लगातार अवसादग्रस्तता विकार (Persistent Depressive Disorder - Dysthymia): MDD की तुलना में कम गंभीर लेकिन कम से कम दो साल तक रहने वाले अवसादग्रस्तता के लक्षण।
  7. द्विध्रुवी और संबंधित विकार (Bipolar and Related Disorders):

    • मनोदशा में अत्यधिक उतार-चढ़ाव, जिसमें अवसादग्रस्तता के एपिसोड और उन्मत्त (manic) या अल्पोन्मत्त (hypomanic) एपिसोड शामिल होते हैं।
    • उन्मत्त एपिसोड (Manic Episode): असामान्य रूप से ऊंचा, उत्तेजित या चिड़चिड़ा मूड, बढ़ी हुई ऊर्जा, नींद की कम आवश्यकता, अत्यधिक बात करना, विचारों की उड़ान, जोखिम भरा व्यवहार।
    • द्विध्रुवी I विकार (Bipolar I Disorder): कम से कम एक उन्मत्त एपिसोड।
    • द्विध्रुवी II विकार (Bipolar II Disorder): कम से कम एक अल्पोन्मत्त एपिसोड और कम से कम एक प्रमुख अवसादग्रस्तता एपिसोड।
    • साइक्लोथाइमिक विकार (Cyclothymic Disorder): द्विध्रुवी II के समान, लेकिन कम गंभीर उन्मत्त और अवसादग्रस्तता के लक्षण कम से कम दो साल तक रहते हैं।
  8. मनोविदलता (Schizophrenia):

    • विचार, धारणा, भावना और व्यवहार में गंभीर विकृति की विशेषता वाला एक गंभीर मानसिक विकार।
    • सकारात्मक लक्षण (Positive Symptoms): वे लक्षण जो सामान्य रूप से मौजूद नहीं होते हैं लेकिन मनोविदलता वाले व्यक्तियों में देखे जाते हैं।
      • भ्रम (Delusions): गलत, दृढ़ विश्वास जो वास्तविकता पर आधारित नहीं होते (जैसे उत्पीड़न का भ्रम, भव्यता का भ्रम)।
      • मतिभ्रम (Hallucinations): वास्तविक उत्तेजना की अनुपस्थिति में संवेदी अनुभव (जैसे आवाजें सुनना, चीजें देखना)।
      • असंगठित भाषण (Disorganized Speech): असंगत या तर्कहीन भाषण।
      • असंगठित व्यवहार (Disorganized Behaviour): अजीबोगरीब या अनुचित व्यवहार।
    • नकारात्मक लक्षण (Negative Symptoms): सामान्य कार्यों का अभाव या कमी।
      • अफेक्ट का सपाट होना (Flat Affect): भावनाओं को व्यक्त करने में कमी।
      • अलोगिया (Alogia): भाषण की कमी।
      • एवोलिशन (Avolition): लक्ष्यों को प्राप्त करने या गतिविधियों में संलग्न होने की प्रेरणा की कमी।
  9. न्यूरोविकासात्मक विकार (Neurodevelopmental Disorders):

    • बचपन में शुरू होने वाले विकार जो व्यक्तिगत, सामाजिक, शैक्षणिक या व्यावसायिक कार्यप्रणाली में हानि का कारण बनते हैं।
    • बौद्धिक अक्षमता (Intellectual Disability): बौद्धिक कार्यप्रणाली (तर्क, समस्या-समाधान) और अनुकूली व्यवहार (सामाजिक, वैचारिक, व्यावहारिक कौशल) दोनों में कमी।
    • ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार (Autism Spectrum Disorder - ASD): सामाजिक संचार और सामाजिक संपर्क में लगातार कमी, और प्रतिबंधित, दोहराए जाने वाले व्यवहार पैटर्न, रुचियां या गतिविधियां।
    • अटेंशन डेफिसिट/हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD): ध्यान न दे पाना, अत्यधिक सक्रियता और आवेगशीलता के लगातार पैटर्न।
    • विशिष्ट अधिगम विकार (Specific Learning Disorder): पढ़ने, लिखने या गणितीय कौशल में महत्वपूर्ण कठिनाइयाँ, जो व्यक्ति की आयु, बुद्धि और शिक्षा के स्तर से अपेक्षित नहीं होती हैं।
  10. व्यवहारात्मक और विघटनकारी विकार (Disruptive, Impulse-Control, and Conduct Disorders):

    • आचरण विकार (Conduct Disorder): दूसरों के अधिकारों का उल्लंघन करने वाले या प्रमुख सामाजिक मानदंडों का उल्लंघन करने वाले दोहराए जाने वाले और लगातार व्यवहार पैटर्न (जैसे आक्रामकता, संपत्ति का विनाश, चोरी)।
    • विपरीत उद्दंडता विकार (Oppositional Defiant Disorder - ODD): अधिकार के आंकड़ों के प्रति क्रोधित/चिड़चिड़ा मूड, तर्कपूर्ण/उद्दंड व्यवहार और प्रतिशोधी व्यवहार का एक पैटर्न।
  11. आहार विकार (Eating Disorders):

    • एनोरेक्सिया नर्वोसा (Anorexia Nervosa): शरीर के वजन को बनाए रखने से इनकार करना जो न्यूनतम सामान्य वजन से कम है, वजन बढ़ने का तीव्र भय, और शरीर की छवि में विकृति।
    • बुलिमिया नर्वोसा (Bulimia Nervosa): बार-बार अत्यधिक भोजन (binge eating) के एपिसोड, जिसके बाद वजन बढ़ने से रोकने के लिए क्षतिपूरक व्यवहार (जैसे उल्टी, रेचक का दुरुपयोग, अत्यधिक व्यायाम) होता है।
    • बिंज ईटिंग डिसऑर्डर (Binge Eating Disorder): बुलिमिया के समान अत्यधिक भोजन के एपिसोड, लेकिन क्षतिपूरक व्यवहार के बिना।
  12. पदार्थ से संबंधित और व्यसनकारी विकार (Substance-Related and Addictive Disorders):

    • विभिन्न पदार्थों (जैसे शराब, निकोटीन, कैफीन, ओपिओइड, कैनबिस) के उपयोग से उत्पन्न होने वाली समस्याएं।
    • पदार्थ का दुरुपयोग (Substance Abuse): पदार्थ के उपयोग के कारण महत्वपूर्ण नकारात्मक परिणाम (जैसे काम या स्कूल में समस्याएं, कानूनी समस्याएं)।
    • पदार्थ पर निर्भरता (Substance Dependence): पदार्थ के प्रति शारीरिक या मनोवैज्ञानिक निर्भरता, जिसमें सहनशीलता (tolerance) और निकासी (withdrawal) के लक्षण शामिल हो सकते हैं।
  13. व्यक्तित्व विकार (Personality Disorders):

    • विचार, भावना, अंतर-व्यक्तिगत संबंध और आवेग नियंत्रण के पैटर्न में एक स्थायी, अनम्य और व्यापक पैटर्न जो सांस्कृतिक अपेक्षाओं से काफी विचलित होता है और संकट या हानि का कारण बनता है।
    • क्लस्टर A (अजीब या सनकी):
      • पैरानॉयड व्यक्तित्व विकार (Paranoid Personality Disorder): दूसरों पर अविश्वास और संदेह, उनके इरादों को दुर्भावनापूर्ण के रूप में व्याख्या करना।
      • स्किज़ॉइड व्यक्तित्व विकार (Schizoid Personality Disorder): सामाजिक संबंधों से अलगाव, भावनाओं की सीमित सीमा।
      • स्किज़ोटाइपल व्यक्तित्व विकार (Schizotypal Personality Disorder): तीव्र सामाजिक और अंतर-व्यक्तिगत कमी, संज्ञानात्मक या अवधारणात्मक विकृतियाँ, और विलक्षण व्यवहार।
    • क्लस्टर B (नाटकीय, भावनात्मक या अनियमित):
      • असामाजिक व्यक्तित्व विकार (Antisocial Personality Disorder): दूसरों के अधिकारों की उपेक्षा और उल्लंघन, छल, आवेगशीलता, पश्चाताप की कमी।
      • सीमावर्ती व्यक्तित्व विकार (Borderline Personality Disorder): अंतर-व्यक्तिगत संबंधों, आत्म-छवि और भावनाओं में अस्थिरता, आवेगशीलता।
      • हिस्ट्रियोनिक व्यक्तित्व विकार (Histrionic Personality Disorder): अत्यधिक भावनात्मकता और ध्यान आकर्षित करने वाला व्यवहार।
      • नार्सिसिस्टिक व्यक्तित्व विकार (Narcissistic Personality Disorder): भव्यता की भावना, प्रशंसा की आवश्यकता, सहानुभूति की कमी।
    • क्लस्टर C (चिंतित या भयभीत):
      • परिहारक व्यक्तित्व विकार (Avoidant Personality Disorder): सामाजिक अवरोध, अपर्याप्तता की भावनाएं, नकारात्मक मूल्यांकन के प्रति अतिसंवेदनशीलता।
      • निर्भर व्यक्तित्व विकार (Dependent Personality Disorder): अत्यधिक देखभाल की आवश्यकता, अधीनता और अलगाव का भय।
      • जुनूनी-बाध्यकारी व्यक्तित्व विकार (Obsessive-Compulsive Personality Disorder): व्यवस्था, पूर्णतावाद और अंतर-व्यक्तिगत नियंत्रण में अत्यधिक व्यस्तता।

VI. भारत में मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health in India)
भारत में मानसिक स्वास्थ्य एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, जहाँ मानसिक विकारों से पीड़ित व्यक्तियों को अक्सर कलंक (stigma) और भेदभाव का सामना करना पड़ता है। जागरूकता की कमी, प्रशिक्षित पेशेवरों की कमी और अपर्याप्त बुनियादी ढांचा उपचार प्राप्त करने में बाधा डालता है। मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम 2017 जैसे कानून मानसिक रूप से बीमार व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा और देखभाल तक पहुंच में सुधार के लिए महत्वपूर्ण कदम हैं।


बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

यहाँ इस अध्याय पर आधारित 10 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं:

  1. निम्नलिखित में से कौन सा असामान्य व्यवहार का मानदंड नहीं है?
    a) कष्ट (Distress)
    b) कार्य-क्षमता में कमी (Dysfunction)
    c) खतरा (Danger)
    d) अनुरूपता (Conformity)

  2. सिगमंड फ्रायड द्वारा विकसित असामान्य व्यवहार का मॉडल कौन सा है?
    a) जैविक मॉडल
    b) व्यवहारवादी मॉडल
    c) मनोगत्यात्मक मॉडल
    d) संज्ञानात्मक मॉडल

  3. बार-बार हाथ धोना या चीजों को बार-बार जांचना किस विकार का एक सामान्य लक्षण है?
    a) सामान्यीकृत चिंता विकार
    b) पैनिक विकार
    c) मनोग्रस्ति-बाध्यता विकार
    d) पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर

  4. DSM-5 का पूर्ण रूप क्या है?
    a) Diagnostic and Statistical Manual of Mental Disorders
    b) Diseases and Symptoms Manual for Mental Disorders
    c) Developmental Stages Manual of Mental Disorders
    d) Dynamic Systems Manual of Mental Disorders

  5. एक व्यक्ति जो लगातार उदास महसूस करता है, रुचि खो देता है, और नींद व भूख में बदलाव का अनुभव करता है, वह किस विकार से पीड़ित हो सकता है?
    a) द्विध्रुवी विकार
    b) स्किज़ोफ्रेनिया
    c) प्रमुख अवसादग्रस्तता विकार
    d) सामान्यीकृत चिंता विकार

  6. भ्रम (Delusions) और मतिभ्रम (Hallucinations) किस गंभीर मानसिक विकार के प्रमुख लक्षण हैं?
    a) फोबिया
    b) स्किज़ोफ्रेनिया
    c) वियोजनी पहचान विकार
    d) एनोरेक्सिया नर्वोसा

  7. अत्यधिक भोजन (binge eating) के एपिसोड, जिसके बाद वजन बढ़ने से रोकने के लिए उल्टी या रेचक का उपयोग किया जाता है, किस विकार की विशेषता है?
    a) एनोरेक्सिया नर्वोसा
    b) बुलिमिया नर्वोसा
    c) बिंज ईटिंग डिसऑर्डर
    d) दैहिक लक्षण विकार

  8. एक बच्चे में सामाजिक संचार और सामाजिक संपर्क में लगातार कमी, और प्रतिबंधित, दोहराए जाने वाले व्यवहार पैटर्न किस न्यूरोविकासात्मक विकार के लक्षण हैं?
    a) अटेंशन डेफिसिट/हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD)
    b) बौद्धिक अक्षमता
    c) विशिष्ट अधिगम विकार
    d) ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार

  9. वह व्यक्तित्व विकार जिसमें व्यक्ति दूसरों के अधिकारों की उपेक्षा और उल्लंघन करता है, छल करता है, और पश्चाताप की कमी दिखाता है, कहलाता है:
    a) सीमावर्ती व्यक्तित्व विकार
    b) नार्सिसिस्टिक व्यक्तित्व विकार
    c) असामाजिक व्यक्तित्व विकार
    d) पैरानॉयड व्यक्तित्व विकार

  10. द्वि-मनोदैहिक मॉडल (Diathesis-Stress Model) के अनुसार, मानसिक विकार किसके संयोजन का परिणाम हैं?
    a) केवल जैविक कारक
    b) केवल पर्यावरणीय कारक
    c) अंतर्निहित प्रवृत्ति और पर्यावरणीय तनाव
    d) सामाजिक और सांस्कृतिक मानदंड


उत्तरमाला:

  1. d) अनुरूपता
  2. c) मनोगत्यात्मक मॉडल
  3. c) मनोग्रस्ति-बाध्यता विकार
  4. a) Diagnostic and Statistical Manual of Mental Disorders
  5. c) प्रमुख अवसादग्रस्तता विकार
  6. b) स्किज़ोफ्रेनिया
  7. b) बुलिमिया नर्वोसा
  8. d) ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार
  9. c) असामाजिक व्यक्तित्व विकार
  10. c) अंतर्निहित प्रवृत्ति और पर्यावरणीय तनाव

मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको 'मनोवैज्ञानिक विकार' अध्याय की गहन समझ प्रदान करेंगे और आपकी सरकारी परीक्षा की तैयारी में सहायक होंगे। किसी भी अन्य प्रश्न या स्पष्टीकरण के लिए आप पूछ सकते हैं। शुभकामनाएँ!

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