Class 12 Physology Notes Chapter 5 (चिकित्सा उपागम) – Manovigyan Book

Manovigyan
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम मनोविज्ञान के एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय 'चिकित्सा उपागम' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय न केवल आपकी सैद्धांतिक समझ को विकसित करेगा, बल्कि विभिन्न मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान में प्रयुक्त होने वाली विधियों का भी परिचय कराएगा। सरकारी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से यह विषय अत्यधिक प्रासंगिक है, अतः प्रत्येक बिंदु पर ध्यान देना आवश्यक है।


अध्याय 5: चिकित्सा उपागम (Therapeutic Approaches)

यह अध्याय विभिन्न प्रकार की मनोचिकित्साओं और उनके सिद्धांतों, तकनीकों तथा लक्ष्यों का वर्णन करता है।

1. मनोचिकित्सा की प्रकृति और प्रक्रिया (Nature and Process of Psychotherapy)

  • परिभाषा: मनोचिकित्सा एक स्वैच्छिक संबंध है जिसमें एक प्रशिक्षित मनोचिकित्सक मानसिक और व्यवहारिक समस्याओं से ग्रस्त व्यक्ति (प्रार्थी) की सहायता करता है। इसका उद्देश्य प्रार्थी के अनुकूलन को बेहतर बनाना, उसके संकट को कम करना और उसके व्यक्तिगत विकास को बढ़ावा देना है।
  • प्रमुख घटक:
    • मनोचिकित्सक (Therapist): एक प्रशिक्षित पेशेवर, जिसके पास विशिष्ट चिकित्सीय विधियों का ज्ञान और अनुभव होता है।
    • प्रार्थी (Client/Patient): वह व्यक्ति जो भावनात्मक, व्यवहारिक या मनोवैज्ञानिक समस्याओं का सामना कर रहा है और सहायता चाहता है।
    • चिकित्सीय संबंध (Therapeutic Relationship): चिकित्सक और प्रार्थी के बीच एक विश्वास और सहयोग पर आधारित संबंध, जो चिकित्सा की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह संबंध गोपनीय और नैतिक सिद्धांतों पर आधारित होता है।
  • लक्ष्य:
    • प्रार्थी के संकट को कम करना।
    • अनुकूली व्यवहार को बढ़ावा देना।
    • आत्म-जागरूकता बढ़ाना।
    • पर्यावरणीय तनावों से निपटने की क्षमता में सुधार करना।
    • व्यक्तिगत विकास को बढ़ावा देना।
  • चिकित्सा की प्रभावशीलता: शोध दर्शाते हैं कि मनोचिकित्सा विभिन्न मानसिक विकारों के उपचार में प्रभावी होती है।

2. मनोगत्यात्मक चिकित्सा (Psychodynamic Therapy)

  • प्रवर्तक: सिगमंड फ्रायड (Sigmund Freud)।
  • आधार: यह इस विचार पर आधारित है कि मनोवैज्ञानिक समस्याएँ अचेतन संघर्षों, दमित इच्छाओं और बचपन के अनुभवों के कारण उत्पन्न होती हैं।
  • लक्ष्य: अचेतन संघर्षों और भावनाओं को चेतन स्तर पर लाना, जिससे प्रार्थी अंतर्दृष्टि प्राप्त कर सके और समस्याओं का समाधान कर सके।
  • प्रमुख विधियाँ/तकनीकें:
    • मुक्त साहचर्य (Free Association): प्रार्थी को बिना किसी संपादन या रोक-टोक के अपने मन में आने वाले किसी भी विचार, भावना या स्मृति को व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। चिकित्सक इसका विश्लेषण करता है।
    • स्वप्न विश्लेषण (Dream Analysis): फ्रायड के अनुसार, स्वप्न "अचेतन तक पहुँचने का शाही मार्ग" हैं। चिकित्सक स्वप्नों के प्रकट (manifest) और सुप्त (latent) अर्थों का विश्लेषण करता है ताकि अचेतन इच्छाओं और संघर्षों को समझा जा सके।
    • अंतरण (Transference): प्रार्थी अपनी बचपन की महत्वपूर्ण शख्सियतों (जैसे माता-पिता) के प्रति अपनी भावनाओं को चिकित्सक पर स्थानांतरित करता है। यह सकारात्मक या नकारात्मक हो सकता है। चिकित्सक इसका विश्लेषण करके प्रार्थी के संबंधों के पैटर्न को समझने में मदद करता है।
    • प्रति-अंतरण (Counter-transference): चिकित्सक द्वारा प्रार्थी के प्रति अपनी अचेतन भावनाओं या प्रतिक्रियाओं को व्यक्त करना। एक प्रशिक्षित चिकित्सक इसे पहचान कर नियंत्रित करता है।
    • प्रतिरोध (Resistance): प्रार्थी द्वारा अचेतन सामग्री को चेतन में लाने से बचने के लिए किया गया कोई भी व्यवहार (जैसे सत्रों को छोड़ना, महत्वपूर्ण जानकारी छिपाना)। यह इंगित करता है कि चिकित्सक सही दिशा में काम कर रहा है।
    • व्याख्या (Interpretation): चिकित्सक द्वारा प्रार्थी के विचारों, भावनाओं, स्वप्नों और व्यवहारों के अचेतन अर्थों को स्पष्ट करना।
    • अंतर्दृष्टि (Insight): प्रार्थी द्वारा अपने अचेतन संघर्षों और उनके वर्तमान व्यवहार पर पड़ने वाले प्रभावों को समझना। यह चिकित्सा का अंतिम लक्ष्य है।

3. व्यवहार चिकित्सा (Behaviour Therapy)

  • आधार: यह अधिगम के सिद्धांतों (शास्त्रीय अनुबंधन, क्रियाप्रसूत अनुबंधन और प्रेक्षणात्मक अधिगम) पर आधारित है। इसका मानना है कि मनोवैज्ञानिक समस्याएँ गलत अधिगम (maladaptive learning) का परिणाम हैं और इन्हें नए अधिगम द्वारा बदला जा सकता है।
  • लक्ष्य: अवांछित व्यवहारों को बदलना और अनुकूल व्यवहारों को स्थापित करना। इसमें अंतर्निहित कारणों पर कम ध्यान दिया जाता है, बल्कि समस्याग्रस्त व्यवहार पर सीधा काम किया जाता है।
  • प्रमुख विधियाँ/तकनीकें:
    • व्यवस्थित विसंवेदीकरण (Systematic Desensitization): जोसेफ वोल्प (Joseph Wolpe) द्वारा विकसित। यह फोबिया और चिंता विकारों के लिए प्रभावी है। इसमें शामिल हैं:
      • चिंता उत्पन्न करने वाली स्थितियों की पदानुक्रम सूची बनाना।
      • प्रार्थी को विश्राम तकनीकों का प्रशिक्षण देना।
      • विश्राम की स्थिति में, प्रार्थी को धीरे-धीरे पदानुक्रम में ऊपर ले जाकर चिंताजनक स्थितियों से अवगत कराना।
    • प्रतिकूल अनुबंधन (Aversive Conditioning): अवांछित व्यवहार को एक अप्रिय उत्तेजना के साथ जोड़ना ताकि उस व्यवहार से घृणा उत्पन्न हो। उदाहरण: शराब की लत छुड़ाने के लिए शराब को मतली पैदा करने वाली दवा के साथ देना।
    • मॉडलिंग (Modelling): प्रार्थी को किसी अन्य व्यक्ति (मॉडल) के वांछित व्यवहार का अवलोकन करके सीखने के लिए प्रोत्साहित करना।
    • टोकन अर्थव्यवस्था (Token Economy): वांछित व्यवहार करने पर टोकन (जैसे सितारे या अंक) देना, जिन्हें बाद में किसी वांछित वस्तु या सुविधा के लिए बदला जा सकता है। यह अक्सर बच्चों और संस्थागत सेटिंग्स में उपयोग किया जाता है।
    • जैविक प्रतिपुष्टि (Biofeedback): प्रार्थी को अपने शरीर के अनैच्छिक कार्यों (जैसे हृदय गति, रक्तचाप, मांसपेशियों में तनाव) की जानकारी देना ताकि वह सचेत रूप से उन्हें नियंत्रित करना सीख सके।
    • सकारात्मक प्रबलन (Positive Reinforcement): वांछित व्यवहार के बाद एक सुखद परिणाम प्रदान करके उस व्यवहार की आवृत्ति बढ़ाना।
    • नकारात्मक प्रबलन (Negative Reinforcement): अप्रिय उत्तेजना को हटाकर वांछित व्यवहार की आवृत्ति बढ़ाना।
    • दंड (Punishment): अवांछित व्यवहार को कम करने के लिए एक अप्रिय परिणाम देना।
    • विलुप्तिकरण (Extinction): किसी व्यवहार को प्रबलन न देकर उसकी आवृत्ति को कम करना।

4. संज्ञानात्मक चिकित्सा (Cognitive Therapy)

  • आधार: यह इस विचार पर आधारित है कि व्यक्ति के विचार पैटर्न (संज्ञानात्मक विकृतियाँ) उसकी भावनाओं और व्यवहार को प्रभावित करते हैं। मनोवैज्ञानिक समस्याएँ अतार्किक या विकृत विचारों के कारण उत्पन्न होती हैं।
  • लक्ष्य: प्रार्थी के अतार्किक, नकारात्मक और विकृत विचार पैटर्न को पहचानना, चुनौती देना और उन्हें अधिक यथार्थवादी और अनुकूली विचारों से बदलना।
  • प्रमुख प्रणेता और विधियाँ:
    • अल्बर्ट एलिस (Albert Ellis) की तर्कसंगत भावनात्मक व्यवहार चिकित्सा (Rational Emotive Behaviour Therapy - REBT):
      • ABCDE मॉडल:
        • A (Activating Event): सक्रिय करने वाली घटना।
        • B (Beliefs): उस घटना के बारे में अतार्किक विश्वास।
        • C (Consequences): इन विश्वासों के भावनात्मक और व्यवहारिक परिणाम।
        • D (Disputing): अतार्किक विश्वासों को चुनौती देना और बहस करना।
        • E (Effective New Philosophy): एक प्रभावी नया दर्शन या विश्वास प्रणाली विकसित करना।
      • एलिस का मानना है कि घटनाओं से नहीं, बल्कि उनके बारे में हमारे विश्वासों से समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
    • एरॉन बेक (Aaron Beck) की संज्ञानात्मक चिकित्सा (Cognitive Therapy):
      • बेक ने अवसाद के उपचार के लिए इसे विकसित किया।
      • वह "संज्ञानात्मक त्रय" (Cognitive Triad) की बात करते हैं: स्वयं के बारे में नकारात्मक विचार, दुनिया के बारे में नकारात्मक विचार, और भविष्य के बारे में नकारात्मक विचार।
      • स्वचालित नकारात्मक विचार (Automatic Negative Thoughts - ANTs): प्रार्थी को अपने त्वरित, नकारात्मक विचारों को पहचानने और रिकॉर्ड करने के लिए सिखाया जाता है।
      • संज्ञानात्मक पुनर्संरचना (Cognitive Restructuring): इन नकारात्मक विचारों को चुनौती देना, उनके प्रमाणों की जांच करना और उन्हें अधिक संतुलित और यथार्थवादी विचारों से बदलना।

5. मानवतावादी-अस्तित्वपरक चिकित्सा (Humanistic-Existential Therapy)

  • आधार: यह मानव की अंतर्निहित अच्छाई, आत्म-वास्तविकीकरण की क्षमता और व्यक्तिगत जिम्मेदारी पर जोर देती है। यह मानती है कि व्यक्ति अपनी समस्याओं का समाधान स्वयं कर सकता है यदि उसे सही वातावरण मिले।
  • प्रमुख प्रणेता और विधियाँ:
    • कार्ल रोजर्स (Carl Rogers) की क्लाइंट-केंद्रित चिकित्सा (Client-Centred Therapy) / व्यक्ति-केंद्रित चिकित्सा:
      • लक्ष्य: प्रार्थी की आत्म-अवधारणा (self-concept) और उसके अनुभवों के बीच की विसंगति (incongruence) को कम करना, जिससे वह अपनी वास्तविक क्षमता को प्राप्त कर सके (आत्म-वास्तविकीकरण)।
      • चिकित्सक के आवश्यक गुण (कोर कंडीशन्स):
        • समानुभूति (Empathy): चिकित्सक द्वारा प्रार्थी की भावनाओं और अनुभवों को उसकी ही दृष्टि से समझना और उसे यह महसूस कराना कि उसे समझा जा रहा है।
        • सकारात्मक सम्मान (Unconditional Positive Regard): प्रार्थी को बिना किसी शर्त या निर्णय के स्वीकार करना और उसका सम्मान करना।
        • वास्तविकता/ईमानदारी (Genuineness/Congruence): चिकित्सक का अपने प्रति सच्चा होना और प्रार्थी के साथ अपने वास्तविक विचारों और भावनाओं को साझा करना।
    • विक्टर फ्रैंकल (Viktor Frankl) की लोगोथेरेपी (Logotherapy):
      • आधार: यह अस्तित्वगत मनोविज्ञान पर आधारित है और जीवन में अर्थ की खोज (Search for Meaning) पर केंद्रित है।
      • लक्ष्य: प्रार्थी को जीवन में अर्थ खोजने में मदद करना, विशेषकर जब वे 'अस्तित्वगत शून्यता' (existential vacuum) का अनुभव कर रहे हों।
      • मुख्य अवधारणा: व्यक्ति को अपनी पीड़ा में भी अर्थ खोजने की क्षमता होती है।

6. समग्र चिकित्सा (Gestalt Therapy)

  • प्रवर्तक: फ्रिट्ज पर्ल्स (Fritz Perls)।
  • आधार: यह 'यहाँ और अभी' (here and now) के अनुभव पर जोर देती है। इसका मानना है कि व्यक्ति को अपने वर्तमान अनुभवों और अप्रकट भावनाओं को एकीकृत करना चाहिए।
  • लक्ष्य: प्रार्थी को अपनी भावनाओं, विचारों और व्यवहारों के प्रति अधिक जागरूक बनाना, और उन्हें अपने 'अधूरे मामलों' (unfinished business) को पूरा करने में मदद करना।
  • प्रमुख विधियाँ:
    • खाली कुर्सी तकनीक (Empty Chair Technique): प्रार्थी को एक खाली कुर्सी पर किसी व्यक्ति (या अपने किसी हिस्से) की कल्पना करने और उससे बात करने के लिए कहा जाता है, जिससे दमित भावनाएँ व्यक्त हो सकें।
    • प्रार्थी को अपनी शारीरिक संवेदनाओं और गैर-मौखिक संकेतों पर ध्यान देने के लिए प्रोत्साहित करना।

7. जैव-चिकित्सा (Bio-Medical Therapy)

  • यह चिकित्सा जैविक कारकों को संबोधित करती है और अक्सर मनोचिकित्सा के साथ संयोजन में उपयोग की जाती है।
  • दवा चिकित्सा (Drug Therapy): विभिन्न प्रकार की दवाएँ मानसिक विकारों के लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए उपयोग की जाती हैं।
    • मनोविक्षिप्तिरोधी (Antipsychotics): सिज़ोफ्रेनिया जैसे विकारों में मतिभ्रम और भ्रम को कम करने के लिए। (उदा. क्लोरप्रोमाज़ीन, हैलोपेरिडोल)।
    • अवसादरोधी (Antidepressants): अवसाद और चिंता विकारों के लिए। (उदा. SSRIs जैसे फ्लुओक्सेटीन)।
    • चिंता-रोधी (Anxiolytics): चिंता और पैनिक अटैक को कम करने के लिए। (उदा. बेंजोडायजेपाइन जैसे डायजेपाम, अल्प्राजोलम)।
    • मनःस्थिरक (Mood Stabilizers): बाइपोलर डिसऑर्डर में मूड स्विंग्स को नियंत्रित करने के लिए। (उदा. लिथियम)।
  • विद्युत-आक्षेपी चिकित्सा (Electro-Convulsive Therapy - ECT):
    • यह एक विवादास्पद लेकिन प्रभावी उपचार है, जो गंभीर अवसाद या सिज़ोफ्रेनिया के उन मामलों में उपयोग किया जाता है जहाँ अन्य उपचार विफल हो गए हों।
    • इसमें मस्तिष्क में एक छोटा विद्युत प्रवाह पारित किया जाता है, जिससे एक संक्षिप्त दौरे जैसी गतिविधि उत्पन्न होती है।

8. वैकल्पिक चिकित्सा (Alternative Therapies)

  • योग (Yoga): शारीरिक आसन, श्वास नियंत्रण (प्राणायाम) और ध्यान का संयोजन। यह तनाव कम करने, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद करता है।
  • ध्यान (Meditation): मन को शांत करने और एकाग्रता बढ़ाने की एक तकनीक। यह तनाव, चिंता और अवसाद को कम करने में प्रभावी है।
  • सुदर्शन क्रिया योग (Sudarshan Kriya Yoga - SKY): एक विशिष्ट लयबद्ध श्वास तकनीक जो तनाव को कम करने और भावनात्मक कल्याण को बढ़ावा देने में मदद करती है।

9. विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों का एकीकरण (Integration of Different Therapies)

  • आधुनिक मनोविज्ञान में, अक्सर एक ही प्रार्थी के लिए विभिन्न चिकित्सीय उपागमों की तकनीकों को संयोजित किया जाता है।
  • संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा (Cognitive Behaviour Therapy - CBT): यह संज्ञानात्मक चिकित्सा (विचारों को बदलना) और व्यवहार चिकित्सा (व्यवहार को बदलना) का एक लोकप्रिय और अत्यधिक प्रभावी संयोजन है। यह कई विकारों (जैसे अवसाद, चिंता, फोबिया) के लिए स्वर्ण मानक उपचार मानी जाती है।

10. चिकित्सा के नैतिक सिद्धांत (Ethical Principles of Therapy)

  • गोपनीयता (Confidentiality): प्रार्थी की जानकारी को गोपनीय रखना।
  • सक्षमता (Competence): चिकित्सक को केवल उन क्षेत्रों में अभ्यास करना चाहिए जिनके लिए वे प्रशिक्षित और सक्षम हैं।
  • सूचित सहमति (Informed Consent): चिकित्सा शुरू करने से पहले प्रार्थी को उपचार की प्रकृति, जोखिमों और लाभों के बारे में पूरी जानकारी देना और उसकी सहमति प्राप्त करना।
  • हितों का टकराव (Conflict of Interest): चिकित्सक को ऐसे संबंधों या स्थितियों से बचना चाहिए जो प्रार्थी के सर्वोत्तम हित में बाधा डाल सकते हैं।
  • गैर-हानिकारक सिद्धांत (Non-maleficence): प्रार्थी को किसी भी प्रकार की हानि न पहुँचाना।

यह विस्तृत नोट्स आपको अध्याय की गहन समझ प्रदान करेंगे और सरकारी परीक्षाओं के लिए आपकी तैयारी में सहायक होंगे। अब, आइए इस अध्याय पर आधारित कुछ बहुविकल्पीय प्रश्न देखें।


बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)

  1. मनोगत्यात्मक चिकित्सा का मुख्य लक्ष्य क्या है?
    a) अवांछित व्यवहार को बदलना
    b) अचेतन संघर्षों को चेतन में लाना
    c) अतार्किक विचारों को चुनौती देना
    d) जीवन में अर्थ खोजना

  2. "व्यवस्थित विसंवेदीकरण" तकनीक किस चिकित्सीय उपागम से संबंधित है?
    a) मनोगत्यात्मक चिकित्सा
    b) व्यवहार चिकित्सा
    c) संज्ञानात्मक चिकित्सा
    d) मानवतावादी चिकित्सा

  3. अल्बर्ट एलिस द्वारा विकसित चिकित्सा का नाम क्या है?
    a) क्लाइंट-केंद्रित चिकित्सा
    b) लोगोथेरेपी
    c) तर्कसंगत भावनात्मक व्यवहार चिकित्सा (REBT)
    d) समग्र चिकित्सा

  4. कार्ल रोजर्स की क्लाइंट-केंद्रित चिकित्सा में चिकित्सक का कौन सा गुण सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है?
    a) व्याख्या
    b) समानुभूति
    c) प्रतिरोध का विश्लेषण
    d) स्वप्न विश्लेषण

  5. किस चिकित्सीय उपागम में "खाली कुर्सी तकनीक" का उपयोग किया जाता है?
    a) व्यवहार चिकित्सा
    b) संज्ञानात्मक चिकित्सा
    c) समग्र चिकित्सा
    d) मनोगत्यात्मक चिकित्सा

  6. "संज्ञानात्मक त्रय" (स्वयं, दुनिया और भविष्य के बारे में नकारात्मक विचार) की अवधारणा किस चिकित्सक से संबंधित है?
    a) सिगमंड फ्रायड
    b) एरॉन बेक
    c) कार्ल रोजर्स
    d) विक्टर फ्रैंकल

  7. गंभीर अवसाद के उपचार में, जब अन्य विधियाँ विफल हो जाती हैं, तो किस जैव-चिकित्सा का उपयोग किया जा सकता है?
    a) एंटी-एंग्जायटी दवाएँ
    b) एंटीडिप्रेसेंट दवाएँ
    c) विद्युत-आक्षेपी चिकित्सा (ECT)
    d) मूड स्टेबलाइजर

  8. टोकन अर्थव्यवस्था (Token Economy) किस अधिगम सिद्धांत पर आधारित है?
    a) शास्त्रीय अनुबंधन
    b) क्रियाप्रसूत अनुबंधन
    c) प्रेक्षणात्मक अधिगम
    d) अंतर्दृष्टि अधिगम

  9. मनोचिकित्सा में "अंतरण" (Transference) की अवधारणा किसने दी?
    a) अल्बर्ट एलिस
    b) सिगमंड फ्रायड
    c) कार्ल रोजर्स
    d) फ्रिट्ज पर्ल्स

  10. निम्नलिखित में से कौन सा वैकल्पिक चिकित्सा का एक रूप है?
    a) संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा
    b) लोगोथेरेपी
    c) सुदर्शन क्रिया योग
    d) मनोगत्यात्मक चिकित्सा


उत्तर कुंजी:

  1. b
  2. b
  3. c
  4. b
  5. c
  6. b
  7. c
  8. b
  9. b
  10. c

मुझे आशा है कि यह विस्तृत सामग्री आपकी परीक्षा की तैयारी में अत्यंत सहायक सिद्ध होगी। अपनी पढ़ाई जारी रखें और किसी भी संदेह के लिए पूछने में संकोच न करें। शुभकामनाएँ!

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