Class 12 Physology Notes Chapter 6 (अभिवृत्ति एव सामाजिक संज्ञान) – Manovigyan Book

Manovigyan
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम मनोविज्ञान के एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय, 'अभिवृत्ति एवं सामाजिक संज्ञान' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय न केवल आपको मानव व्यवहार की गहरी समझ प्रदान करेगा, बल्कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। हम इसके प्रत्येक पहलू को विस्तार से समझेंगे।


अध्याय 6: अभिवृत्ति एवं सामाजिक संज्ञान (Attitude and Social Cognition)

यह अध्याय इस बात पर प्रकाश डालता है कि लोग सामाजिक दुनिया को कैसे समझते हैं, दूसरों के बारे में कैसे सोचते हैं, और कैसे अपनी अभिवृत्तियों का निर्माण व परिवर्तन करते हैं।


I. अभिवृत्ति (Attitude)

1. अभिवृत्ति की परिभाषा:
अभिवृत्ति किसी व्यक्ति, वस्तु, विचार या स्थिति के प्रति सकारात्मक या नकारात्मक मूल्यांकनपरक प्रतिक्रिया की एक मानसिक एवं तंत्रिका-मनोवैज्ञानिक तत्परता है। यह व्यवहार को प्रभावित करती है।

2. अभिवृत्ति की विशेषताएँ:

  • लक्ष्य-उन्मुखता: अभिवृत्ति हमेशा किसी विशेष व्यक्ति, वस्तु या विचार के प्रति होती है।
  • भावनात्मक घटक: इसमें पसंद या नापसंद की भावनाएँ शामिल होती हैं।
  • स्थायित्व: अभिवृत्तियाँ अपेक्षाकृत स्थिर होती हैं, लेकिन बदल भी सकती हैं।
  • सीखी हुई: अभिवृत्तियाँ जन्मजात नहीं होतीं, बल्कि सीखी जाती हैं।
  • व्यवहार को प्रभावित करना: अभिवृत्तियाँ व्यक्ति के व्यवहार को निर्देशित करती हैं।

3. अभिवृत्ति के घटक (ABC Model):
अभिवृत्ति के तीन मुख्य घटक होते हैं:

  • संज्ञानात्मक घटक (Cognitive Component - C): इसमें अभिवृत्ति के लक्ष्य के बारे में विचार, विश्वास, राय और ज्ञान शामिल होता है। (जैसे: "मुझे लगता है कि पर्यावरण संरक्षण महत्वपूर्ण है।")
  • भावनात्मक घटक (Affective Component - A): इसमें अभिवृत्ति के लक्ष्य के प्रति व्यक्ति की भावनाएँ, पसंद या नापसंद शामिल होती है। (जैसे: "मुझे पर्यावरण से प्यार है और मैं इसके लिए चिंतित हूँ।")
  • व्यवहारात्मक घटक (Behavioral Component - B): इसमें अभिवृत्ति के लक्ष्य के प्रति व्यक्ति की क्रियाएँ या व्यवहार करने की प्रवृत्ति शामिल होती है। (जैसे: "मैं पेड़ लगाता हूँ और प्लास्टिक का उपयोग कम करता हूँ।")

4. अभिवृत्ति के प्रकार:

  • सकारात्मक अभिवृत्ति: किसी लक्ष्य के प्रति अनुकूल भावनाएँ और विचार।
  • नकारात्मक अभिवृत्ति: किसी लक्ष्य के प्रति प्रतिकूल भावनाएँ और विचार।
  • तटस्थ अभिवृत्ति: किसी लक्ष्य के प्रति कोई विशेष भावना या विचार न होना।

5. अभिवृत्ति निर्माण (Attitude Formation):
अभिवृत्तियाँ विभिन्न तरीकों से बनती हैं:

  • अधिगम (Learning):
    • शास्त्रीय अनुबंधन (Classical Conditioning): दो उद्दीपकों के बार-बार साथ आने से एक के प्रति प्रतिक्रिया दूसरे के प्रति भी होने लगती है। (जैसे: किसी ब्रांड का विज्ञापन सुखद संगीत के साथ दिखाना)।
    • नैमित्तिक अनुबंधन (Operant Conditioning): वांछित व्यवहार को पुरस्कार और अवांछित व्यवहार को दंडित करके अभिवृत्ति का निर्माण।
    • प्रेक्षण अधिगम (Observational Learning): दूसरों को देखकर और उनके व्यवहार के परिणामों का अवलोकन करके अभिवृत्ति सीखना। (जैसे: माता-पिता को देखकर पर्यावरण के प्रति जागरूक होना)।
  • समूह या संस्कृति (Group or Culture): समूह के आदर्शों, मूल्यों और विश्वासों को अपनाकर अभिवृत्ति का निर्माण।
  • सूचना प्रदर्शन (Exposure to Information): मीडिया, शिक्षा या अन्य स्रोतों से प्राप्त जानकारी के माध्यम से।
  • प्रत्यक्ष अनुभव (Direct Experience): किसी वस्तु या व्यक्ति के साथ सीधे अनुभव से अभिवृत्ति का निर्माण। (जैसे: किसी विशेष भोजन को चखकर उसके प्रति पसंद या नापसंद विकसित करना)।

6. अभिवृत्ति परिवर्तन (Attitude Change):
अभिवृत्तियाँ हमेशा स्थिर नहीं रहतीं, वे बदल सकती हैं।

  • संतुलन सिद्धांत (Balance Theory - Heider): यह सिद्धांत बताता है कि लोग अपनी संज्ञानात्मक प्रणाली में संतुलन बनाए रखना चाहते हैं। यदि किसी व्यक्ति (P) की किसी अन्य व्यक्ति (O) और किसी वस्तु (X) के प्रति अभिवृत्तियों में असंतुलन होता है, तो वह उसे संतुलित करने का प्रयास करता है। (P-O-X त्रिकोण मॉडल)।
  • संज्ञानात्मक विसंगति सिद्धांत (Cognitive Dissonance Theory - Festinger): जब किसी व्यक्ति के दो या दो से अधिक संज्ञान (विचार, अभिवृत्तियाँ, विश्वास) एक-दूसरे के विरोधी होते हैं, तो वह एक असुविधाजनक मानसिक स्थिति (विसंगति) का अनुभव करता है। इस विसंगति को कम करने के लिए व्यक्ति अपनी अभिवृत्तियों या व्यवहार में परिवर्तन करता है। (जैसे: धूम्रपान करने वाला व्यक्ति जानता है कि धूम्रपान हानिकारक है, वह या तो धूम्रपान छोड़ देगा या अपने विश्वासों को बदल देगा कि "यह उतना भी बुरा नहीं है")।
  • दो-चरणीय संप्रत्यय (Two-Step Concept - Hovland, Janis, Kelly): अभिवृत्ति परिवर्तन की प्रक्रिया में कई कारक महत्वपूर्ण होते हैं:
    • स्रोत की विशेषताएँ (Source Characteristics):
      • विश्वसनीयता: विश्वसनीय स्रोत अधिक प्रभावी होते हैं।
      • आकर्षण: आकर्षक स्रोत अधिक प्रेरक होते हैं।
      • विशेषज्ञता: विशेषज्ञ की राय अधिक मानी जाती है।
    • संदेश की विशेषताएँ (Message Characteristics):
      • तर्कसंगतता: तार्किक और सुसंगत संदेश।
      • भावनात्मक अपील: भय या हास्य का उपयोग।
      • संदेश की मात्रा: बहुत अधिक या बहुत कम जानकारी नहीं।
      • संदेश की पुनरावृत्ति: बार-बार दोहराया गया संदेश।
    • लक्ष्य श्रोता की विशेषताएँ (Target Audience Characteristics):
      • पूर्व-अभिवृत्तियाँ: पहले से मौजूद अभिवृत्तियाँ।
      • आत्म-सम्मान: उच्च आत्म-सम्मान वाले लोग परिवर्तन के प्रति कम संवेदनशील हो सकते हैं।
      • बुद्धिमत्ता: उच्च बुद्धिमत्ता वाले लोग तार्किक अपीलों के प्रति अधिक प्रतिक्रियाशील हो सकते हैं।
      • व्यक्तित्व: कुछ व्यक्तित्व लक्षण परिवर्तन के प्रति अधिक खुले होते हैं।

7. अभिवृत्ति और व्यवहार का संबंध (Attitude-Behavior Relationship):
यह हमेशा सीधा संबंध नहीं होता कि अभिवृत्ति व्यवहार का पूर्वानुमान लगाएगी। कुछ कारक इस संबंध को प्रभावित करते हैं:

  • अभिवृत्ति की प्रबलता (Strength of Attitude): जितनी प्रबल अभिवृत्ति होगी, व्यवहार पर उसका उतना ही अधिक प्रभाव होगा।
  • अभिवृत्ति की अभिगम्यता (Accessibility of Attitude): जितनी आसानी से अभिवृत्ति मन में आती है, उतना ही अधिक वह व्यवहार को प्रभावित करती है।
  • अभिवृत्ति की विशिष्टता (Specificity of Attitude): जितनी अधिक विशिष्ट अभिवृत्ति होगी, उतना ही अधिक वह विशिष्ट व्यवहार का पूर्वानुमान लगाएगी।
  • सामाजिक दबाव (Social Pressure): सामाजिक मानदंड या दबाव व्यवहार को अभिवृत्ति के विपरीत भी ले जा सकते हैं।
  • व्यक्तिगत अनुभव (Personal Experience): प्रत्यक्ष अनुभव से बनी अभिवृत्तियाँ व्यवहार का बेहतर पूर्वानुमान लगाती हैं।

8. पूर्वाग्रह (Prejudice), रूढ़िवादिता (Stereotype) और भेदभाव (Discrimination):

  • पूर्वाग्रह (Prejudice): किसी समूह के सदस्यों के प्रति एक नकारात्मक अभिवृत्ति। इसमें संज्ञानात्मक (रूढ़िवादिता), भावनात्मक (घृणा, भय) और व्यवहारात्मक (भेदभाव की प्रवृत्ति) घटक होते हैं। यह बिना पर्याप्त जानकारी के, अक्सर नकारात्मक होता है।
  • रूढ़िवादिता (Stereotype): किसी समूह के सभी सदस्यों के बारे में अति-सामान्यीकृत, सरलीकृत और अक्सर गलत विश्वासों का एक समूह। यह पूर्वाग्रह का संज्ञानात्मक घटक है। (जैसे: "सभी वकील लालची होते हैं")।
  • भेदभाव (Discrimination): पूर्वाग्रह के कारण किसी समूह के सदस्यों के प्रति नकारात्मक व्यवहार या क्रियाएँ। यह पूर्वाग्रह का व्यवहारात्मक घटक है। (जैसे: किसी व्यक्ति को उसकी जाति या धर्म के कारण नौकरी न देना)।

9. पूर्वाग्रह के स्रोत (Sources of Prejudice):

  • अधिगम (Learning): दूसरों से देखकर या सुनकर पूर्वाग्रह सीखना।
  • प्रबल सामाजिक पहचान (Strong Social Identity): अपने समूह को श्रेष्ठ मानना और अन्य समूहों को नीचा दिखाना।
  • अंतःसमूह-बहिःसमूह भेद (In-group-Out-group Distinction): अपने समूह (अंतःसमूह) को सकारात्मक रूप से देखना और अन्य समूहों (बहिःसमूह) को नकारात्मक रूप से देखना।
  • स्कैपगोटिंग (Scapegoating): अपनी समस्याओं के लिए किसी कमजोर समूह को दोषी ठहराना।
  • सामाजिक समर्थन (Social Support): जब समाज या समूह पूर्वाग्रह को बढ़ावा देता है।

10. पूर्वाग्रह कम करने के उपाय (Strategies to Reduce Prejudice):

  • शिक्षा और सूचना: गलत रूढ़िवादिताओं को दूर करना।
  • अंतःसमूह संपर्क (Inter-group Contact): विभिन्न समूहों के लोगों के बीच सकारात्मक संपर्क को बढ़ावा देना, विशेषकर जब वे समान स्थिति में हों और समान लक्ष्यों पर काम करें।
  • सहयोगी अधिगम (Cooperative Learning): विभिन्न पृष्ठभूमि के छात्रों को एक साथ काम करने के लिए प्रोत्साहित करना।
  • कानूनी उपाय: भेदभाव के खिलाफ कानून बनाना।
  • सामाजिक मानदंड परिवर्तन: समाज में सहिष्णुता और समानता को बढ़ावा देना।

II. सामाजिक संज्ञान (Social Cognition)

1. सामाजिक संज्ञान की परिभाषा:
सामाजिक संज्ञान वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा लोग सामाजिक दुनिया को समझते हैं, व्याख्या करते हैं, विश्लेषण करते हैं और याद रखते हैं। इसमें यह शामिल है कि हम दूसरों के बारे में कैसे सोचते हैं, उनके व्यवहार को कैसे समझते हैं और सामाजिक जानकारी को कैसे संसाधित करते हैं।

2. स्कीमा (Schema):
स्कीमा संगठित ज्ञान संरचनाएँ या मानसिक ढाँचे होते हैं जो हमें जानकारी को संसाधित करने और समझने में मदद करते हैं। वे हमारे अनुभवों और ज्ञान के आधार पर बनते हैं।

  • व्यक्ति स्कीमा (Person Schema): विशिष्ट व्यक्तियों के बारे में ज्ञान।
  • स्व-स्कीमा (Self-Schema): अपने बारे में ज्ञान और विश्वास।
  • घटना स्कीमा (Event Schema/Script): विशिष्ट सामाजिक घटनाओं या अनुक्रमों के बारे में ज्ञान। (जैसे: रेस्तरां में जाने का स्कीमा)।
  • भूमिका स्कीमा (Role Schema): विशिष्ट सामाजिक भूमिकाओं (जैसे डॉक्टर, शिक्षक) से जुड़े व्यवहारों और विशेषताओं के बारे में ज्ञान।

3. रूढ़िवादिता (Stereotypes) - सामाजिक संज्ञान के संदर्भ में:
रूढ़िवादिता एक प्रकार की स्कीमा है जो हमें किसी समूह के सदस्यों के बारे में जानकारी को जल्दी से संसाधित करने में मदद करती है, लेकिन अक्सर यह गलत और अति-सरलीकृत होती है।

4. आरोपण (Attribution):
आरोपण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा हम दूसरों के और अपने स्वयं के व्यवहार के कारणों का पता लगाते हैं। हम यह जानने की कोशिश करते हैं कि कोई व्यक्ति किसी विशेष तरीके से क्यों व्यवहार कर रहा है।

5. आरोपण के सिद्धांत (Theories of Attribution):

  • हेडर का सामान्य ज्ञान मनोविज्ञान (Heider's Naive Psychology):
    • हेडर ने सुझाव दिया कि लोग दूसरों के व्यवहार को समझने के लिए "सामान्य ज्ञान" का उपयोग करते हैं।
    • वे व्यवहार के कारणों को आंतरिक (Internal/Dispositional) (व्यक्ति के व्यक्तित्व, क्षमता, प्रेरणा) या बाह्य (External/Situational) (परिस्थिति, भाग्य, पर्यावरण) में वर्गीकृत करते हैं।
    • उदाहरण: यदि कोई छात्र परीक्षा में असफल होता है, तो आंतरिक आरोपण यह होगा कि वह आलसी है, जबकि बाह्य आरोपण यह होगा कि परीक्षा बहुत कठिन थी।
  • जोन्स और डेविस का संगत अनुमान सिद्धांत (Jones & Davis' Correspondent Inference Theory):
    • यह सिद्धांत बताता है कि हम दूसरों के व्यवहार से उनके आंतरिक गुणों (व्यक्तित्व लक्षणों) के बारे में कब अनुमान लगाते हैं।
    • हम ऐसे व्यवहारों से अनुमान लगाते हैं जो:
      • कम सामाजिक वांछनीयता (Low Social Desirability): असामान्य या सामाजिक मानदंडों के विपरीत हों।
      • पसंद की स्वतंत्रता (Freedom of Choice): व्यक्ति ने स्वेच्छा से किया हो।
      • गैर-सामान्य प्रभाव (Non-common Effects): व्यवहार के कुछ अद्वितीय परिणाम हों जो अन्य विकल्पों में नहीं होते।
  • केली का सह-परिवर्तन सिद्धांत (Kelley's Covariation Model):
    • यह सिद्धांत बताता है कि हम व्यवहार के कारणों का पता लगाने के लिए विभिन्न स्थितियों में व्यवहार के सह-परिवर्तन (co-variation) का विश्लेषण करते हैं।
    • तीन प्रकार की जानकारी का उपयोग किया जाता है:
      • विशिष्टता (Distinctiveness): क्या व्यक्ति केवल इस विशेष उद्दीपक के प्रति ही इस तरह से व्यवहार करता है, या अन्य उद्दीपकों के प्रति भी? (उच्च विशिष्टता = बाह्य आरोपण)।
      • सर्वसम्मतता (Consensus): क्या अन्य लोग भी इस उद्दीपक के प्रति इसी तरह से व्यवहार करते हैं? (उच्च सर्वसम्मतता = बाह्य आरोपण)।
      • संगति (Consistency): क्या व्यक्ति हमेशा इस उद्दीपक के प्रति इसी तरह से व्यवहार करता है? (उच्च संगति = आंतरिक आरोपण)।
    • उदाहरण: यदि आपका मित्र एक फिल्म को पसंद करता है:
      • उच्च विशिष्टता: वह केवल इसी फिल्म को पसंद करता है, अन्य फिल्मों को नहीं।
      • उच्च सर्वसम्मतता: सभी लोग इस फिल्म को पसंद करते हैं।
      • उच्च संगति: वह हमेशा इस फिल्म को पसंद करता है।
      • यदि तीनों उच्च हैं, तो हम फिल्म (बाह्य) को पसंद करने का आरोपण करेंगे। यदि विशिष्टता और सर्वसम्मतता कम है, लेकिन संगति उच्च है, तो हम मित्र (आंतरिक) को पसंद करने का आरोपण करेंगे।

6. आरोपण में त्रुटियाँ और पूर्वाग्रह (Errors and Biases in Attribution):

  • मूलभूत आरोपण त्रुटि (Fundamental Attribution Error - FAE):
    • दूसरों के व्यवहार की व्याख्या करते समय, हम उनके आंतरिक (व्यक्तित्व) कारकों को अधिक महत्व देते हैं और बाह्य (परिस्थितिगत) कारकों को कम महत्व देते हैं।
    • उदाहरण: यदि कोई व्यक्ति देर से आता है, तो हम सोचते हैं कि वह आलसी है (आंतरिक), बजाय यह सोचने के कि शायद ट्रैफिक जाम था (बाह्य)।
  • अभिनेता-प्रेक्षक प्रभाव (Actor-Observer Effect):
    • यह मूलभूत आरोपण त्रुटि का एक विस्तार है।
    • हम अपने स्वयं के व्यवहार की व्याख्या करते समय बाह्य कारकों को अधिक महत्व देते हैं (अभिनेता), जबकि दूसरों के व्यवहार की व्याख्या करते समय आंतरिक कारकों को अधिक महत्व देते हैं (प्रेक्षक)।
    • उदाहरण: "मैं देर से आया क्योंकि ट्रैफिक था" (बाह्य), लेकिन "वह देर से आया क्योंकि वह गैर-जिम्मेदार है" (आंतरिक)।
  • आत्म-सेवारत पूर्वाग्रह (Self-Serving Bias):
    • हम अपनी सफलताओं का आरोपण आंतरिक कारकों (अपनी क्षमता, कड़ी मेहनत) को करते हैं और अपनी असफलताओं का आरोपण बाह्य कारकों (भाग्य, खराब परिस्थितियाँ) को करते हैं।
    • यह आत्म-सम्मान को बनाए रखने या बढ़ाने के लिए किया जाता है।
    • उदाहरण: "मैंने परीक्षा पास की क्योंकि मैं होशियार हूँ", लेकिन "मैं परीक्षा में फेल हो गया क्योंकि पेपर बहुत कठिन था"।

III. सामाजिक प्रभाव की प्रक्रियाएँ (Processes of Social Influence)

1. सामाजिक सुगमीकरण (Social Facilitation) और सामाजिक अवरोध (Social Loafing):

  • सामाजिक सुगमीकरण (Social Facilitation):
    • दूसरों की उपस्थिति में व्यक्ति के प्रदर्शन में सुधार होना।
    • यह आमतौर पर तब होता है जब कार्य सरल या अच्छी तरह से सीखा हुआ होता है।
    • कारण: दूसरों की उपस्थिति से शारीरिक उत्तेजना (arousal) बढ़ती है, जिससे प्रमुख प्रतिक्रियाएँ (dominant responses) बेहतर होती हैं।
  • सामाजिक अवरोध (Social Loafing):
    • जब व्यक्ति समूह में काम करता है तो अकेले काम करने की तुलना में कम प्रयास करता है।
    • यह तब होता है जब व्यक्तिगत योगदान का मूल्यांकन नहीं किया जा रहा हो।
    • कारण:
      • जिम्मेदारी का फैलाव (Diffusion of Responsibility): व्यक्ति को लगता है कि उसकी जिम्मेदारी दूसरों के बीच बँट गई है।
      • कम प्रेरणा: व्यक्तिगत योगदान का महत्व कम लगना।
    • कम करने के उपाय: व्यक्तिगत योगदान को पहचानने योग्य बनाना, कार्य को चुनौतीपूर्ण बनाना, समूह के सदस्यों के बीच सामंजस्य बढ़ाना।

2. समूह ध्रुवीकरण (Group Polarization):

  • जब एक समूह में चर्चा होती है, तो समूह के सदस्यों की औसत पूर्व-मौजूदा अभिवृत्ति या राय अधिक चरम (ध्रुवीकृत) हो जाती है।
  • यह तब होता है जब समूह के सभी सदस्य पहले से ही एक ही दिशा में झुके हुए हों।
  • कारण:
    • सामाजिक तुलना: लोग खुद को समूह के अन्य सदस्यों से बेहतर या अधिक सही दिखाना चाहते हैं।
    • सूचनात्मक प्रभाव: समूह में अधिक तर्क और जानकारी मिलती है जो पहले से मौजूद राय का समर्थन करती है।

3. समूह सोच (Groupthink):

  • एक समूह में निर्णय लेने की एक ऐसी शैली जिसमें सामंजस्य (cohesiveness) और एकरूपता की प्रबल इच्छा के कारण समूह यथार्थवादी विकल्पों का मूल्यांकन करने में विफल रहता है।
  • परिणामस्वरूप, समूह अक्सर खराब या त्रुटिपूर्ण निर्णय लेता है।
  • लक्षण:
    • अजेयता का भ्रम (Illusion of Invulnerability): समूह खुद को अजेय समझता है।
    • नैतिकता में विश्वास (Belief in Inherent Morality): समूह अपने निर्णयों को नैतिक रूप से सही मानता है।
    • बाह्य समूह का रूढ़िवादन (Stereotyping of Out-groups): विरोधी समूहों को कमजोर या मूर्ख समझना।
    • दबाव (Pressure): असहमति व्यक्त करने वालों पर दबाव डालना।
    • आत्म-सेंसरशिप (Self-Censorship): समूह के सदस्यों द्वारा अपनी असहमति को दबाना।
    • एकमत का भ्रम (Illusion of Unanimity): यह मानना कि सभी सहमत हैं।
    • मन-रक्षक (Mindguards): कुछ सदस्य समूह को असहमतिपूर्ण जानकारी से बचाते हैं।
  • बचने के उपाय:
    • नेतृत्व द्वारा आलोचना को प्रोत्साहित करना।
    • बाहरी विशेषज्ञों की राय लेना।
    • "शैतान के वकील" की भूमिका निभाना।
    • उप-समूहों में निर्णय लेना।

यह अध्याय सामाजिक मनोविज्ञान के मूल सिद्धांतों को समझने के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है। इन अवधारणाओं को अच्छी तरह से समझकर आप न केवल अपनी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं, बल्कि अपने दैनिक जीवन में भी सामाजिक अंतःक्रियाओं को अधिक प्रभावी ढंग से समझ सकते हैं।


बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)

1. अभिवृत्ति के 'ABC मॉडल' में 'C' किस घटक को दर्शाता है?
a) भावनात्मक घटक
b) व्यवहारात्मक घटक
c) संज्ञानात्मक घटक
d) क्रियात्मक घटक

2. जब कोई व्यक्ति अपनी सफलताओं का आरोपण आंतरिक कारकों को और असफलताओं का आरोपण बाह्य कारकों को करता है, तो इसे क्या कहते हैं?
a) मूलभूत आरोपण त्रुटि
b) अभिनेता-प्रेक्षक प्रभाव
c) आत्म-सेवारत पूर्वाग्रह
d) संज्ञानात्मक विसंगति

3. केली के सह-परिवर्तन सिद्धांत के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति का व्यवहार एक विशिष्ट उद्दीपक के प्रति हमेशा एक जैसा रहता है, और अन्य लोग भी उसी उद्दीपक के प्रति ऐसा ही व्यवहार करते हैं, तो यह किस प्रकार के आरोपण की ओर संकेत करता है?
a) आंतरिक आरोपण
b) बाह्य आरोपण
c) विशिष्टता आरोपण
d) संगति आरोपण

4. किसी समूह के सभी सदस्यों के बारे में अति-सामान्यीकृत और अक्सर गलत विश्वासों के समूह को क्या कहा जाता है?
a) पूर्वाग्रह
b) भेदभाव
c) रूढ़िवादिता
d) समूह सोच

5. संज्ञानात्मक विसंगति सिद्धांत किसने प्रतिपादित किया था?
a) फ्रिट्ज हेडर
b) लियोन फेस्टिंगर
c) जॉन बी. वॉटसन
d) अल्बर्ट बंडूरा

6. दूसरों की उपस्थिति में किसी व्यक्ति के प्रदर्शन में सुधार होना, विशेषकर जब कार्य सरल हो, कहलाता है:
a) सामाजिक अवरोध
b) समूह ध्रुवीकरण
c) सामाजिक सुगमीकरण
d) समूह सोच

7. पूर्वाग्रह को कम करने के लिए विभिन्न समूहों के लोगों के बीच सकारात्मक संपर्क को बढ़ावा देना किस रणनीति का हिस्सा है?
a) स्कैपगोटिंग
b) अंतःसमूह संपर्क
c) समूह ध्रुवीकरण
d) आत्म-सेंसरशिप

8. जब एक समूह में सामंजस्य और एकरूपता की प्रबल इच्छा के कारण समूह यथार्थवादी विकल्पों का मूल्यांकन करने में विफल रहता है, तो इसे क्या कहते हैं?
a) समूह ध्रुवीकरण
b) सामाजिक अवरोध
c) समूह सोच
d) सामाजिक सुगमीकरण

9. अभिवृत्ति निर्माण में 'प्रेक्षण अधिगम' का क्या अर्थ है?
a) पुरस्कार और दंड के माध्यम से सीखना
b) दो उद्दीपकों के सह-संबंध से सीखना
c) दूसरों को देखकर और उनके व्यवहार के परिणामों का अवलोकन करके सीखना
d) प्रत्यक्ष अनुभव से सीखना

10. मूलभूत आरोपण त्रुटि में, हम दूसरों के व्यवहार की व्याख्या करते समय किस प्रकार के कारकों को अधिक महत्व देते हैं?
a) बाह्य (परिस्थितिगत) कारक
b) आंतरिक (व्यक्तित्व) कारक
c) सामाजिक कारक
d) सांस्कृतिक कारक


उत्तरमाला:

  1. c) संज्ञानात्मक घटक
  2. c) आत्म-सेवारत पूर्वाग्रह
  3. b) बाह्य आरोपण (उच्च सर्वसम्मतता और उच्च संगति, यदि विशिष्टता भी उच्च हो तो बाह्य)
  4. c) रूढ़िवादिता
  5. b) लियोन फेस्टिंगर
  6. c) सामाजिक सुगमीकरण
  7. b) अंतःसमूह संपर्क
  8. c) समूह सोच
  9. c) दूसरों को देखकर और उनके व्यवहार के परिणामों का अवलोकन करके सीखना
  10. b) आंतरिक (व्यक्तित्व) कारक

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