Class 12 Physology Notes Chapter 7 (सामाजिक प्रभाव एव समूह प्रक्रम) – Manovigyan Book

Manovigyan
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम मनोविज्ञान के महत्वपूर्ण अध्याय 'सामाजिक प्रभाव एवं समूह प्रक्रम' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय न केवल आपकी सैद्धांतिक समझ को बढ़ाएगा, बल्कि सरकारी परीक्षाओं के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। हम इसमें निहित प्रत्येक अवधारणा, सिद्धांत और प्रयोग को गहराई से समझेंगे ताकि कोई भी महत्वपूर्ण जानकारी छूटने न पाए।


अध्याय 7: सामाजिक प्रभाव एवं समूह प्रक्रम (Social Influence and Group Processes)

यह अध्याय इस बात पर केंद्रित है कि व्यक्ति एक-दूसरे को कैसे प्रभावित करते हैं और समूह में व्यवहार कैसे बदलता है।


I. सामाजिक प्रभाव (Social Influence)

सामाजिक प्रभाव वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा व्यक्तियों के व्यवहार, दृष्टिकोण और भावनाएँ दूसरों की उपस्थिति या कार्यों से प्रभावित होती हैं।

1. अनुरूपता (Conformity)
अनुरूपता का अर्थ है किसी सामाजिक मानक या समूह के दबाव के कारण अपने व्यवहार या विश्वासों को बदलना।

  • एश का अनुरूपता प्रयोग (Asch's Conformity Experiment, 1951):
    • उद्देश्य: यह देखना कि क्या लोग समूह के बहुमत के गलत निर्णय के बावजूद अनुरूपता प्रदर्शित करेंगे।
    • विधि: प्रतिभागियों को एक रेखा की लंबाई का अनुमान लगाने के लिए कहा गया। समूह में अन्य सभी लोग (जो वास्तव में प्रयोगकर्ता के सहयोगी थे) जानबूझकर गलत उत्तर देते थे।
    • परिणाम: लगभग 75% प्रतिभागियों ने कम से कम एक बार समूह के गलत उत्तर का अनुपालन किया। औसतन, 33% उत्तर समूह के अनुरूप थे।
    • निष्कर्ष: लोग सामाजिक दबाव के कारण अपने स्वयं के स्पष्ट निर्णय के विरुद्ध भी अनुरूपता दिखाते हैं।
  • अनुरूपता के निर्धारक (Determinants of Conformity):
    • समूह का आकार (Size of the Group): 3-4 सदस्यों तक अनुरूपता बढ़ती है, फिर स्थिर हो जाती है।
    • बहुमत की प्रकृति (Nature of the Majority): एकमत बहुमत अधिक अनुरूपता पैदा करता है। यदि एक भी व्यक्ति बहुमत से अलग राय रखता है, तो अनुरूपता कम हो जाती है।
    • कार्य की प्रकृति (Nature of the Task): अस्पष्ट या कठिन कार्य अधिक अनुरूपता पैदा करते हैं।
    • व्यक्तिगत विशेषताएँ (Personal Characteristics): कम आत्म-सम्मान वाले लोग अधिक अनुरूप होते हैं।
    • सांस्कृतिक संदर्भ (Cultural Context): सामूहिकतावादी संस्कृतियों में व्यक्तिवादी संस्कृतियों की तुलना में अधिक अनुरूपता देखी जाती है।

2. अनुपालन (Compliance)
अनुपालन का अर्थ है किसी अन्य व्यक्ति के प्रत्यक्ष अनुरोध के कारण व्यवहार बदलना, भले ही वह व्यक्ति कोई अधिकार न रखता हो।

  • अनुपालन की तकनीकें (Techniques of Compliance):
    • पाद-इन-द-डोर तकनीक (Foot-in-the-Door Technique): पहले एक छोटा अनुरोध किया जाता है, जिसे स्वीकार करने के बाद, एक बड़ा और संबंधित अनुरोध किया जाता है। (उदाहरण: हस्ताक्षर के बाद दान मांगना)
    • द्वार-इन-द-फेस तकनीक (Door-in-the-Face Technique): पहले एक बहुत बड़ा अनुरोध किया जाता है जिसे अस्वीकार कर दिया जाता है, फिर एक छोटा और अधिक उचित अनुरोध किया जाता है जिसे स्वीकार किए जाने की संभावना बढ़ जाती है। (उदाहरण: बहुत बड़े दान के बाद छोटे दान का अनुरोध)
    • निम्न-गेंद तकनीक (Low-Ball Technique): पहले एक आकर्षक प्रस्ताव दिया जाता है जिसे स्वीकार कर लिया जाता है, फिर मूल प्रस्ताव के लिए अतिरिक्त लागत या शर्तें जोड़ी जाती हैं। (उदाहरण: कम कीमत पर कार बेचने का वादा, फिर अतिरिक्त शुल्क जोड़ना)
    • अनुनय (Persuasion): किसी व्यक्ति के दृष्टिकोण या व्यवहार को बदलने के लिए तर्क या भावनात्मक अपील का उपयोग करना। इसमें संदेश, स्रोत और दर्शक महत्वपूर्ण होते हैं।

3. आज्ञापालन (Obedience)
आज्ञापालन का अर्थ है किसी अधिकार प्राप्त व्यक्ति के आदेश या निर्देश का पालन करना।

  • मिलग्राम का आज्ञापालन प्रयोग (Milgram's Obedience Experiment, 1963):
    • उद्देश्य: यह देखना कि क्या लोग एक अधिकार प्राप्त व्यक्ति के आदेश पर दूसरों को नुकसान पहुँचाने को तैयार होंगे।
    • विधि: प्रतिभागियों को एक "शिक्षक" की भूमिका दी गई और उन्हें एक "शिक्षार्थी" (जो वास्तव में प्रयोगकर्ता का सहयोगी था) को गलत उत्तर देने पर बिजली के झटके देने का निर्देश दिया गया। झटके की तीव्रता हर गलत उत्तर पर बढ़ती जाती थी।
    • परिणाम: 65% प्रतिभागियों ने अधिकतम 450 वोल्ट के झटके दिए, भले ही "शिक्षार्थी" दर्द में चिल्ला रहा था।
    • निष्कर्ष: लोग अधिकार प्राप्त व्यक्ति के आदेश पर ऐसे कार्य करने को तैयार हो जाते हैं जो उनके नैतिक मूल्यों के विपरीत होते हैं।
  • आज्ञापालन के निर्धारक (Determinants of Obedience):
    • अधिकार की उपस्थिति (Presence of Authority): अधिकार प्राप्त व्यक्ति की शारीरिक उपस्थिति आज्ञापालन को बढ़ाती है।
    • अधिकार की वैधता (Legitimacy of Authority): यदि अधिकार वैध माना जाता है, तो आज्ञापालन अधिक होता है।
    • पीड़ित से दूरी (Distance from the Victim): पीड़ित से जितनी अधिक दूरी होती है, आज्ञापालन उतना ही अधिक होता है।
    • व्यक्तिगत विशेषताएँ (Personal Characteristics): कुछ व्यक्तित्व कारक (जैसे सत्तावादी व्यक्तित्व) आज्ञापालन को प्रभावित कर सकते हैं।

4. अभिनवता का प्रभाव (Impact of Minority Influence)
यह वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक छोटा समूह या व्यक्ति बहुमत के दृष्टिकोण या व्यवहार को प्रभावित करता है।

  • प्रमुख कारक: अल्पसंख्यक को सुसंगत (consistent) और आत्मविश्वासपूर्ण (confident) होना चाहिए।

II. समूह (Group)

1. समूह क्या है? (What is a Group?)
दो या दो से अधिक व्यक्ति जो एक-दूसरे के साथ अंतःक्रिया करते हैं, एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं, और सामान्य लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए संगठित होते हैं।

  • समूह की विशेषताएँ (Characteristics of a Group):
    • दो या अधिक व्यक्ति।
    • एक-दूसरे के साथ अंतःक्रिया।
    • सामान्य लक्ष्य।
    • एक-दूसरे पर निर्भरता।
    • समूह के सदस्यों के बीच कुछ मानक और भूमिकाएँ।

2. समूह के प्रकार (Types of Groups):

  • प्राथमिक समूह (Primary Group): छोटे, घनिष्ठ, व्यक्तिगत और दीर्घकालिक संबंध। (जैसे परिवार, मित्र)
  • द्वितीयक समूह (Secondary Group): बड़े, औपचारिक, अवैयक्तिक और अल्पकालिक संबंध, विशिष्ट लक्ष्यों के लिए। (जैसे कर्मचारी संघ, राजनीतिक दल)
  • अंतःसमूह (In-group): वह समूह जिससे व्यक्ति संबंधित महसूस करता है ("हम" समूह)।
  • बहिःसमूह (Out-group): वह समूह जिससे व्यक्ति संबंधित नहीं महसूस करता है ("वे" समूह)।

3. समूह निर्माण (Group Formation):
समूह विभिन्न कारणों से बनते हैं: सुरक्षा, सामाजिक आवश्यकताएँ, लक्ष्य प्राप्ति, आत्म-सम्मान में वृद्धि।

4. समूह संरचना (Group Structure):
समूह के भीतर सदस्यों के बीच संबंधों का पैटर्न।

  • भूमिकाएँ (Roles): एक समूह के सदस्य से अपेक्षित व्यवहार का एक सेट। (जैसे नेता, अनुयायी)
  • मानक (Norms): समूह के सदस्यों के लिए व्यवहार के अलिखित नियम या अपेक्षाएँ।
  • स्थिति (Status): समूह के भीतर एक सदस्य की सापेक्षिक सामाजिक स्थिति या प्रतिष्ठा।
  • संसक्ति (Cohesiveness): वह डिग्री जिस तक समूह के सदस्य एक-दूसरे को पसंद करते हैं और समूह में बने रहना चाहते हैं।

III. समूह के प्रभाव (Impact of Groups)

1. सामाजिक सुगमीकरण (Social Facilitation) और सामाजिक अवरोध (Social Inhibition)

  • सामाजिक सुगमीकरण: दूसरों की उपस्थिति में किसी कार्य के प्रदर्शन में सुधार। यह आमतौर पर उन कार्यों के लिए होता है जिनमें व्यक्ति कुशल होता है या जो सरल होते हैं (प्रबल प्रतिक्रियाएँ)।
  • सामाजिक अवरोध: दूसरों की उपस्थिति में किसी कार्य के प्रदर्शन में गिरावट। यह आमतौर पर उन कार्यों के लिए होता है जिनमें व्यक्ति कुशल नहीं होता है या जो जटिल होते हैं (अप्रबल प्रतिक्रियाएँ)।
  • ज़ायोनक (Zajonc) का सिद्धांत: दूसरों की उपस्थिति उत्तेजना (arousal) बढ़ाती है। बढ़ी हुई उत्तेजना प्रबल प्रतिक्रियाओं को बढ़ाती है और अप्रबल प्रतिक्रियाओं को बाधित करती है।

2. सामाजिक श्रमावनति (Social Loafing)
जब लोग एक समूह में काम करते हैं तो व्यक्तिगत प्रयास में कमी आना, क्योंकि वे महसूस करते हैं कि उनके व्यक्तिगत योगदान का मूल्यांकन नहीं किया जा रहा है या वे दूसरों पर निर्भर हो सकते हैं।

  • कारण:
    • व्यक्तिगत योगदान की पहचान न होना।
    • जिम्मेदारी का विसरण (diffusion of responsibility)।
    • कार्य को कम महत्वपूर्ण मानना।
  • कम करने के उपाय: छोटे समूह, व्यक्तिगत जवाबदेही, कार्य को महत्वपूर्ण बनाना।

3. समूह ध्रुवीकरण (Group Polarization)
समूह चर्चा के परिणामस्वरूप समूह के सदस्यों का प्रारंभिक औसत दृष्टिकोण अधिक चरम हो जाता है।

  • कारण:
    • सूचनात्मक प्रभाव (Informational Influence): समूह के सदस्य एक ही पक्ष के तर्कों को सुनते हैं, जिससे उनका विश्वास मजबूत होता है।
    • मानक प्रभाव (Normative Influence): सदस्य समूह के अन्य सदस्यों द्वारा पसंद किए जाने के लिए अपनी राय को समूह के औसत की ओर धकेलते हैं।

4. समूह चिंतन (Groupthink)
समूह के सदस्यों द्वारा एकमत होने की अत्यधिक इच्छा, जो महत्वपूर्ण जानकारी के प्रसंस्करण और वैकल्पिक समाधानों के मूल्यांकन को बाधित करती है। यह अक्सर खराब निर्णयों की ओर ले जाता है।

  • जेनिस (Janis, 1972) द्वारा प्रतिपादित:
  • शर्तें: उच्च संसक्ति, बाहरी खतरों की उपस्थिति, एक मजबूत नेता, निर्णय लेने की प्रक्रिया में व्यवस्थित प्रक्रियाओं का अभाव।
  • लक्षण:
    • अभेद्यता का भ्रम (Illusion of invulnerability)।
    • समूह की अंतर्निहित नैतिकता में विश्वास (Belief in inherent morality of the group)।
    • विरोधी विचारों का युक्तिकरण (Rationalization of opposing views)।
    • बाहरी लोगों के बारे में रूढ़िवादिता (Stereotypes about outsiders)।
    • आत्म-सेंसरशिप (Self-censorship)।
    • एकमत का भ्रम (Illusion of unanimity)।
    • मन-रक्षक (Mindguards) - समूह के सदस्यों को असंतोषजनक जानकारी से बचाना।
    • प्रत्यक्ष दबाव (Direct pressure) - असहमति व्यक्त करने वालों पर दबाव।

5. वि-व्यक्तिगतिकरण (Deindividuation)
समूह की भीड़ में व्यक्ति की पहचान का खो जाना, जिससे वह ऐसे व्यवहार कर सकता है जो वह सामान्यतः अकेला होने पर नहीं करता।

  • कारण: गुमनामी (anonymity), जिम्मेदारी का विसरण, बढ़ी हुई उत्तेजना।
  • परिणाम: आवेगपूर्ण, असामाजिक या हिंसक व्यवहार।

IV. संघर्ष और सहयोग (Conflict and Cooperation)

1. संघर्ष (Conflict)
जब दो या दो से अधिक व्यक्ति या समूह असंगत लक्ष्यों, हितों या मूल्यों को धारण करते हैं।

  • संघर्ष के स्रोत (Sources of Conflict):
    • संसाधनों की कमी।
    • संचार का अभाव या गलतफहमी।
    • असंगत लक्ष्य।
    • व्यक्तिगत मतभेद।
    • अविश्वास।

2. संघर्ष समाधान की रणनीतियाँ (Strategies for Conflict Resolution):

  • समझौता वार्ता (Bargaining): सीधे बातचीत करके समझौता करना।
  • मध्यस्थता (Mediation): एक तटस्थ तीसरा पक्ष विवादित पक्षों को समझौते तक पहुँचने में मदद करता है।
  • मध्यस्थता (Arbitration): एक तटस्थ तीसरा पक्ष विवादित पक्षों के लिए एक बाध्यकारी निर्णय लेता है।
  • सुपरऑर्डिनेट लक्ष्य (Superordinate Goals): ऐसे लक्ष्य जिन्हें प्राप्त करने के लिए दोनों विरोधी पक्षों को सहयोग करना पड़ता है। (शेरिफ का रॉबर्स केव प्रयोग - Robbers Cave Experiment)

3. सहयोग को बढ़ावा देना (Promoting Cooperation):

  • सुपरऑर्डिनेट लक्ष्य।
  • संरचनात्मक परिवर्तन (जैसे समान स्थिति संपर्क)।
  • संचार में सुधार।
  • पारस्परिक निर्भरता को बढ़ावा देना।

यह अध्याय सामाजिक मनोविज्ञान के मूलभूत सिद्धांतों को स्पष्ट करता है, जो हमें यह समझने में मदद करते हैं कि व्यक्ति और समूह एक-दूसरे के साथ कैसे अंतःक्रिया करते हैं और क्यों कुछ विशेष तरीकों से व्यवहार करते हैं।


बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)

यहाँ इस अध्याय पर आधारित 10 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं, जो आपकी तैयारी में सहायक होंगे:

1. एश के अनुरूपता प्रयोग में, लगभग कितने प्रतिशत प्रतिभागियों ने कम से कम एक बार समूह के गलत उत्तर का अनुपालन किया?
a) 25%
b) 50%
c) 75%
d) 100%

2. मिलग्राम के आज्ञापालन प्रयोग में, कितने प्रतिशत प्रतिभागियों ने अधिकतम 450 वोल्ट के झटके दिए?
a) 35%
b) 50%
c) 65%
d) 80%

3. जब एक व्यक्ति पहले एक छोटा अनुरोध स्वीकार कर लेता है और फिर एक बड़ा और संबंधित अनुरोध स्वीकार करने की अधिक संभावना रखता है, तो इस तकनीक को क्या कहते हैं?
a) द्वार-इन-द-फेस तकनीक
b) निम्न-गेंद तकनीक
c) पाद-इन-द-डोर तकनीक
d) अनुनय तकनीक

4. दूसरों की उपस्थिति में किसी कार्य के प्रदर्शन में सुधार को क्या कहा जाता है, खासकर जब कार्य सरल या अच्छी तरह से सीखा हुआ हो?
a) सामाजिक श्रमावनति
b) सामाजिक अवरोध
c) सामाजिक सुगमीकरण
d) समूह ध्रुवीकरण

5. जब समूह चर्चा के परिणामस्वरूप समूह के सदस्यों का प्रारंभिक औसत दृष्टिकोण अधिक चरम हो जाता है, तो इस घटना को क्या कहते हैं?
a) समूह चिंतन
b) वि-व्यक्तिगतिकरण
c) समूह ध्रुवीकरण
d) सामाजिक श्रमावनति

6. जेनिस द्वारा प्रतिपादित 'समूह चिंतन' की अवधारणा में, समूह के सदस्यों द्वारा एकमत होने की अत्यधिक इच्छा के कारण क्या होता है?
a) रचनात्मकता में वृद्धि
b) बेहतर निर्णय लेना
c) महत्वपूर्ण जानकारी के प्रसंस्करण में बाधा
d) व्यक्तिगत जवाबदेही में वृद्धि

7. वह स्थिति जिसमें एक समूह में व्यक्ति की पहचान खो जाती है और वह ऐसे व्यवहार कर सकता है जो वह सामान्यतः अकेला होने पर नहीं करता, क्या कहलाती है?
a) सामाजिक सुगमीकरण
b) सामाजिक श्रमावनति
c) वि-व्यक्तिगतिकरण
d) समूह ध्रुवीकरण

8. दो या दो से अधिक व्यक्ति जो एक-दूसरे के साथ अंतःक्रिया करते हैं, एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं, और सामान्य लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए संगठित होते हैं, उन्हें क्या कहा जाता है?
a) भीड़
b) श्रेणी
c) समूह
d) जनसंख्या

9. शेरिफ के रॉबर्स केव प्रयोग में संघर्ष को कम करने के लिए किस रणनीति का उपयोग किया गया था?
a) समझौता वार्ता
b) मध्यस्थता
c) सुपरऑर्डिनेट लक्ष्य
d) प्रत्यक्ष दबाव

10. सामूहिकतावादी संस्कृतियों में व्यक्तिवादी संस्कृतियों की तुलना में अनुरूपता का स्तर कैसा होता है?
a) कम
b) अधिक
c) समान
d) अप्रभावी


उत्तर कुंजी (Answer Key):

  1. c) 75%
  2. c) 65%
  3. c) पाद-इन-द-डोर तकनीक
  4. c) सामाजिक सुगमीकरण
  5. c) समूह ध्रुवीकरण
  6. c) महत्वपूर्ण जानकारी के प्रसंस्करण में बाधा
  7. c) वि-व्यक्तिगतिकरण
  8. c) समूह
  9. c) सुपरऑर्डिनेट लक्ष्य
  10. b) अधिक

मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी तैयारी में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे। किसी भी संदेह या प्रश्न के लिए, आप पूछ सकते हैं। शुभकामनाएँ!

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