Class 12 Physology Notes Chapter 8 (मनोविज्ञान एव जीवन) – Manovigyan Book

प्रिय विद्यार्थियों, आज हम आपकी मनोविज्ञान की पाठ्यपुस्तक के अध्याय 8, 'मनोविज्ञान एवं जीवन' का गहनता से अध्ययन करेंगे। यह अध्याय न केवल सैद्धांतिक ज्ञान प्रदान करता है, बल्कि हमें यह भी सिखाता है कि मनोविज्ञान के सिद्धांत और अनुप्रयोग हमारे दैनिक जीवन की चुनौतियों और अनुभवों को कैसे समझने और बेहतर बनाने में सहायक हैं। सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यह खंड अत्यंत महत्वपूर्ण है, अतः प्रत्येक बिंदु पर विशेष ध्यान दें और इसे आत्मसात करने का प्रयास करें।
अध्याय 8: मनोविज्ञान एवं जीवन (Psychology and Life)
परिचय:
यह अध्याय इस बात पर प्रकाश डालता है कि मनोविज्ञान के सिद्धांत और शोध हमारे दैनिक जीवन को कैसे प्रभावित करते हैं और विभिन्न सामाजिक तथा पर्यावरणीय समस्याओं को समझने व उनका समाधान करने में कैसे सहायक हैं। यह हमें मानव व्यवहार और अनुभव के जटिल अंतर्संबंधों को समझने में मदद करता है।
1. पर्यावरण एवं मानव व्यवहार (Environment and Human Behaviour)
- पर्यावरण मनोविज्ञान (Environmental Psychology): यह मनोविज्ञान की वह शाखा है जो मानव और उसके भौतिक पर्यावरण के बीच के अंतर्संबंधों का अध्ययन करती है। इसका उद्देश्य पर्यावरण के मानव व्यवहार, अनुभव और कल्याण पर पड़ने वाले प्रभावों को समझना है।
- पर्यावरण के प्रकार:
- प्राकृतिक पर्यावरण (Natural Environment): पर्वत, नदियाँ, जंगल, मौसम, जलवायु आदि।
- निर्मित पर्यावरण (Built Environment): भवन, सड़कें, शहर, गाँव, पुल आदि जो मानव द्वारा निर्मित होते हैं।
- पर्यावरण तनावकारक (Environmental Stressors): वे पर्यावरणीय कारक जो व्यक्ति में तनाव या नकारात्मक प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न करते हैं।
- शोर (Noise): अवांछित ध्वनि जो एकाग्रता में बाधा डालती है, चिड़चिड़ापन बढ़ाती है, नींद में खलल डालती है और शारीरिक (जैसे रक्तचाप) व मानसिक तनाव का कारण बन सकती है।
- प्रदूषण (Pollution): वायु, जल और मृदा प्रदूषण जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। इससे श्वसन संबंधी बीमारियाँ, कैंसर और मनोवैज्ञानिक तनाव हो सकता है।
- भीड़ (Crowding): सीमित स्थान में अधिक लोगों का होना। यह एक व्यक्तिपरक अनुभव है (भीड़भाड़ का अनुभव), न कि केवल वस्तुनिष्ठ घनत्व। इसके कारण तनाव, नियंत्रण का अभाव, सामाजिक संपर्क से अलगाव, चिड़चिड़ापन और प्रदर्शन में कमी महसूस हो सकती है।
- प्राकृतिक आपदाएँ (Natural Disasters): भूकंप, बाढ़, सूखा, सुनामी आदि जो व्यापक मनोवैज्ञानिक आघात (PTSD), भय, चिंता, अवसाद और सामाजिक विस्थापन का कारण बनते हैं।
- पर्यावरण के प्रति मानव प्रतिक्रियाएँ:
- संज्ञानात्मक (Cognitive): पर्यावरण के बारे में धारणाएँ, विश्वास, ज्ञान और मूल्यांकन।
- भावनात्मक (Emotional): पर्यावरण के प्रति भावनाएँ जैसे आनंद, भय, चिंता, आराम।
- व्यवहारिक (Behavioural): पर्यावरण के साथ बातचीत करने के तरीके, जैसे अनुकूलन, पलायन, संरक्षण, या उसे बदलना।
- पर्यावरण पर मानव का प्रभाव:
- मानव गतिविधियाँ जैसे औद्योगिकीकरण, शहरीकरण, अति-उपभोग, वनों की कटाई और जीवाश्म ईंधन का उपयोग पर्यावरण को प्रदूषित और नष्ट कर रहा है, जिससे जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं।
- पर्यावरण संरक्षण में मनोविज्ञान की भूमिका:
- पर्यावरण के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और मूल्यों को विकसित करना।
- पर्यावरण-अनुकूल व्यवहारों को बढ़ावा देना (जैसे कम उपभोग, पुनर्चक्रण, ऊर्जा संरक्षण, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग)।
- पर्यावरणीय शिक्षा और जागरूकता बढ़ाना।
- पर्यावरणीय समस्याओं के प्रति लोगों की उदासीनता (Environmental Apathy) को कम करना।
2. गरीबी एवं भेदभाव (Poverty and Discrimination)
- गरीबी (Poverty):
- वस्तुनिष्ठ गरीबी (Objective Poverty): जब व्यक्ति के पास आय, भोजन, आश्रय, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जैसी बुनियादी आवश्यकताओं की कमी होती है। इसे मापने योग्य संकेतकों (जैसे आय स्तर) से परिभाषित किया जाता है।
- व्यक्तिपरक गरीबी (Subjective Poverty): जब व्यक्ति स्वयं को दूसरों की तुलना में गरीब या वंचित महसूस करता है, भले ही उसकी वस्तुनिष्ठ स्थिति उतनी खराब न हो। यह एक मनोवैज्ञानिक अनुभव है।
- गरीबी के मनोवैज्ञानिक परिणाम:
- आत्म-सम्मान में कमी, असहायता का अनुभव (Learned Helplessness), निराशा और अवसाद।
- नियंत्रण के अभाव की भावना और भविष्य के प्रति अनिश्चितता।
- सामाजिक बहिष्कार, अलगाव और कलंक (Stigma)।
- उच्च स्तर का तनाव और चिंता, जो शारीरिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है।
- संज्ञानात्मक कार्यप्रणाली पर नकारात्मक प्रभाव (जैसे निर्णय लेने की क्षमता)।
- भेदभाव (Discrimination):
- किसी व्यक्ति या समूह के प्रति उनके लिंग, जाति, धर्म, वर्ग, विकलांगता, यौन अभिविन्यास आदि के आधार पर अनुचित, नकारात्मक या हानिकारक व्यवहार करना।
- यह पूर्वाग्रहों (Prejudices) और रूढ़िवादिता (Stereotypes) का व्यवहारिक प्रकटीकरण है।
- भेदभाव के मनोवैज्ञानिक प्रभाव:
- तनाव, चिंता और अवसाद, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का उच्च जोखिम।
- पहचान संकट, आत्म-सम्मान में कमी और आत्म-मूल्य की भावना का क्षरण।
- प्रदर्शन में कमी (स्टीरियोटाइप थ्रेट - जब व्यक्ति किसी नकारात्मक रूढ़िवादिता के कारण अपने समूह के बारे में चिंतित होता है और उसका प्रदर्शन प्रभावित होता है)।
- सामाजिक अन्याय और अलगाव की भावना, अविश्वास।
- गुस्सा और कुंठा।
- समाधान में मनोविज्ञान की भूमिका:
- भेदभाव और पूर्वाग्रह के अंतर्निहित कारणों (जैसे सामाजिक अधिगम, संज्ञानात्मक पूर्वाग्रह) को समझना।
- सामाजिक न्याय और समानता को बढ़ावा देना।
- भेदभावपूर्ण व्यवहारों को कम करने के लिए हस्तक्षेप कार्यक्रम विकसित करना (जैसे अंतर-समूह संपर्क, शिक्षा)।
- गरीबी के मनोवैज्ञानिक प्रभावों को कम करने के लिए सहायता प्रदान करना और लचीलापन (Resilience) विकसित करना।
3. आक्रामकता, हिंसा एवं शांति (Aggression, Violence and Peace)
- आक्रामकता (Aggression):
- किसी अन्य व्यक्ति को शारीरिक या मनोवैज्ञानिक रूप से नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से किया गया व्यवहार।
- प्रकार:
- शारीरिक आक्रामकता: मारना, धक्का देना।
- मौखिक आक्रामकता: चिल्लाना, अपमान करना।
- संबंधपरक आक्रामकता: सामाजिक बहिष्कार, अफवाहें फैलाना।
- आक्रामकता के कारण:
- जैविक कारक: हार्मोन (जैसे टेस्टोस्टेरोन), मस्तिष्क संरचनाएँ (जैसे एमिग्डाला), आनुवंशिकी।
- सामाजिक-सांस्कृतिक कारक: सामाजिक अधिगम (मॉडलिंग - बंडूरा), मीडिया में हिंसा का प्रदर्शन, सांस्कृतिक मानदंड जो हिंसा को स्वीकार करते हैं, गरीबी और सामाजिक असमानता।
- व्यक्तिगत कारक: कुंठा-आक्रामकता परिकल्पना, उत्तेजना (Arousal), व्यक्तित्व लक्षण (जैसे आवेगशीलता, कम सहानुभूति), शराब और नशीले पदार्थों का सेवन।
- हिंसा (Violence):
- आक्रामकता का एक चरम और गंभीर रूप जिसमें गंभीर शारीरिक या मनोवैज्ञानिक क्षति पहुँचाई जाती है, अक्सर शक्ति के असंतुलन के साथ।
- प्रकार: घरेलू हिंसा, सामुदायिक हिंसा, आतंकवाद, युद्ध, लैंगिक हिंसा।
- हिंसा के मनोवैज्ञानिक परिणाम:
- भय, आघात (पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर - PTSD), अविश्वास, अवसाद, चिंता।
- सामाजिक संबंधों का टूटना और समुदाय का विखंडन।
- पीड़ितों और गवाहों दोनों पर दीर्घकालिक मनोवैज्ञानिक प्रभाव।
- आक्रामकता का अंतर-पीढ़ीगत संचरण।
- शांति (Peace):
- नकारात्मक शांति (Negative Peace): युद्ध या प्रत्यक्ष हिंसा की अनुपस्थिति। यह केवल संघर्ष की अनुपस्थिति है।
- सकारात्मक शांति (Positive Peace): न्याय, समानता, सामाजिक सद्भाव, सहयोग और संरचनात्मक हिंसा (जैसे गरीबी, भेदभाव) की अनुपस्थिति की उपस्थिति। यह एक सक्रिय और रचनात्मक स्थिति है।
- शांति स्थापना में मनोविज्ञान की भूमिका:
- संघर्ष समाधान (Conflict Resolution) और मध्यस्थता (Mediation) तकनीकों का विकास और अनुप्रयोग।
- सहिष्णुता, सहानुभूति, अंतर-समूह समझ और सहयोग को बढ़ावा देना।
- पूर्वाग्रह और रूढ़िवादिता को कम करना।
- शांति शिक्षा कार्यक्रमों का विकास और अहिंसक संचार कौशल सिखाना।
- आघात से उबरने में मदद करना और सामाजिक सामंजस्य का पुनर्निर्माण करना।
4. स्वास्थ्य एवं कल्याण (Health and Well-being)
- स्वास्थ्य (Health):
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, स्वास्थ्य केवल रोग या दुर्बलता की अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कल्याण की एक पूर्ण स्थिति है। यह एक समग्र दृष्टिकोण है।
- स्वास्थ्य मनोविज्ञान (Health Psychology): मनोविज्ञान की वह शाखा जो स्वास्थ्य, बीमारी और संबंधित कार्यात्मक अक्षमता के मनोवैज्ञानिक, व्यवहारिक और सांस्कृतिक कारकों का अध्ययन करती है। यह स्वास्थ्य को बढ़ावा देने, बीमारी को रोकने और इलाज में मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों का उपयोग करती है।
- स्वास्थ्य पर तनाव का प्रभाव:
- हंस सेली का सामान्य अनुकूलन संलक्षण (General Adaptation Syndrome - GAS): यह मॉडल बताता है कि शरीर तनाव के प्रति कैसे प्रतिक्रिया करता है।
- अलार्म प्रतिक्रिया (Alarm Reaction): शरीर तनाव के प्रति प्रारंभिक प्रतिक्रिया करता है (जैसे "लड़ो या भागो" प्रतिक्रिया), हार्मोन जारी होते हैं।
- प्रतिरोध अवस्था (Resistance Stage): शरीर तनाव से निपटने का प्रयास करता है और अनुकूलन करता है, लेकिन ऊर्जा का उपयोग होता रहता है।
- परिश्रांति अवस्था (Exhaustion Stage): यदि तनाव जारी रहता है और शरीर के संसाधन समाप्त हो जाते हैं, तो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, जिससे बीमारी, क्षति या मृत्यु हो सकती है।
- हंस सेली का सामान्य अनुकूलन संलक्षण (General Adaptation Syndrome - GAS): यह मॉडल बताता है कि शरीर तनाव के प्रति कैसे प्रतिक्रिया करता है।
- स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाले कारक:
- स्वस्थ जीवन शैली: संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, धूम्रपान और शराब से परहेज।
- सामाजिक समर्थन (Social Support): परिवार, मित्र और समुदाय से भावनात्मक, सूचनात्मक और व्यावहारिक सहायता। यह तनाव के नकारात्मक प्रभावों को कम करता है।
- सकारात्मक सोच और आशावाद: चुनौतियों का सामना करने की क्षमता बढ़ाना और लचीलापन विकसित करना।
- तनाव प्रबंधन तकनीकें: योग, ध्यान, विश्राम तकनीकें, समय प्रबंधन।
- आत्म-प्रभावकारिता (Self-efficacy): अपनी क्षमताओं पर विश्वास कि व्यक्ति लक्ष्यों को प्राप्त कर सकता है।
- रोगों की रोकथाम एवं प्रबंधन में मनोविज्ञान की भूमिका:
- व्यवहारिक परिवर्तनों को बढ़ावा देना (जैसे धूम्रपान छोड़ना, व्यायाम करना, स्वस्थ भोजन)।
- पुरानी बीमारियों वाले व्यक्तियों को मुकाबला करने की रणनीतियाँ (Coping Strategies) सिखाना और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना।
- रोगों की रोकथाम के लिए जागरूकता कार्यक्रम और स्वास्थ्य शिक्षा।
- चिकित्सा उपचार का पालन सुनिश्चित करना (Adherence to treatment)।
- कल्याण (Well-being):
- व्यक्तिपरक कल्याण (Subjective Well-being - SWB): व्यक्ति का अपने जीवन के बारे में मूल्यांकन, जिसमें जीवन संतुष्टि, सकारात्मक भावनाएँ (खुशी) और नकारात्मक भावनाओं की अनुपस्थिति शामिल है।
- मनोवैज्ञानिक कल्याण (Psychological Well-being - PWB): इसमें आत्म-स्वीकृति, व्यक्तिगत विकास, जीवन का उद्देश्य, स्वायत्तता, पर्यावरण पर निपुणता और दूसरों के साथ सकारात्मक संबंध जैसे घटक शामिल हैं (कैरल रिफ़ का मॉडल)।
- सकारात्मक मनोविज्ञान (Positive Psychology): यह मनोविज्ञान की वह शाखा है जो मानव की शक्तियों, गुणों और कल्याण को बढ़ावा देने पर केंद्रित है, न कि केवल मानसिक विकारों के उपचार पर। इसका उद्देश्य व्यक्तियों और समुदायों को फलने-फूलने में मदद करना है।
5. मनोविज्ञान का सामाजिक समस्याओं के समाधान में अनुप्रयोग (Application of Psychology in Solving Social Problems)
- सामुदायिक मनोविज्ञान (Community Psychology): यह समुदाय के स्तर पर समस्याओं को समझने और उनका समाधान करने पर केंद्रित है, जिससे व्यक्तियों और समुदायों का सशक्तिकरण होता है। यह रोकथाम और सामाजिक परिवर्तन पर जोर देता है।
- परामर्श मनोविज्ञान (Counseling Psychology): व्यक्तियों को व्यक्तिगत, सामाजिक, शैक्षिक और व्यावसायिक समायोजन की समस्याओं से निपटने में मदद करता है। यह सामान्य जीवन की चुनौतियों और विकास संबंधी मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करता है।
- संगठनात्मक मनोविज्ञान (Organizational Psychology): कार्यस्थल में मानव व्यवहार का अध्ययन करता है ताकि उत्पादकता, कर्मचारी संतुष्टि, प्रेरणा और संगठनात्मक प्रभावशीलता में सुधार किया जा सके।
- अन्य अनुप्रयोग:
- शिक्षा मनोविज्ञान: शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं को बेहतर बनाना, सीखने की कठिनाइयों का समाधान।
- न्यायिक मनोविज्ञान: कानूनी प्रणाली में मनोविज्ञान का अनुप्रयोग (जैसे गवाहों की विश्वसनीयता, अपराधी प्रोफाइलिंग)।
- खेल मनोविज्ञान: एथलीटों के प्रदर्शन में सुधार, प्रेरणा और तनाव प्रबंधन।
- उपभोक्ता मनोविज्ञान: उपभोक्ता व्यवहार को समझना, विपणन रणनीतियों का विकास।
- आपदा मनोविज्ञान: आपदा प्रभावित लोगों को मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करना।
निष्कर्ष:
मनोविज्ञान हमें न केवल स्वयं को और दूसरों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करता है, बल्कि यह हमें समाज और पर्यावरण से संबंधित कई जटिल समस्याओं का सामना करने और उनका समाधान खोजने के लिए व्यावहारिक उपकरण भी प्रदान करता है। यह हमारे जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाने और एक अधिक सामंजस्यपूर्ण तथा स्वस्थ समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)
निर्देश: प्रत्येक प्रश्न के लिए सही विकल्प चुनें।
-
मनोविज्ञान की वह शाखा जो मानव और उसके भौतिक पर्यावरण के बीच के अंतर्संबंधों का अध्ययन करती है, कहलाती है:
अ) नैदानिक मनोविज्ञान
ब) सामाजिक मनोविज्ञान
स) पर्यावरण मनोविज्ञान
द) विकासात्मक मनोविज्ञान -
भीड़ (Crowding) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सबसे सटीक है?
अ) यह हमेशा एक वस्तुनिष्ठ स्थिति होती है।
ब) यह एक व्यक्तिपरक अनुभव है जिसमें व्यक्ति को स्थान की कमी महसूस होती है।
स) यह केवल शारीरिक आराम को प्रभावित करता है।
द) इसका मानव व्यवहार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। -
गरीबी के मनोवैज्ञानिक परिणामों में निम्नलिखित में से क्या शामिल नहीं है?
अ) आत्म-सम्मान में कमी
ब) नियंत्रण के अभाव की भावना
स) अत्यधिक आशावाद और उच्च आत्म-प्रभावकारिता
द) निराशा और अवसाद -
किसी व्यक्ति या समूह के प्रति उनके लिंग, जाति, धर्म आदि के आधार पर अनुचित व्यवहार करना कहलाता है:
अ) पूर्वाग्रह
ब) रूढ़िवादिता
स) भेदभाव
द) सहानुभूति -
हंस सेली द्वारा प्रतिपादित सामान्य अनुकूलन संलक्षण (General Adaptation Syndrome - GAS) की तीसरी अवस्था कौन सी है?
अ) अलार्म प्रतिक्रिया
ब) प्रतिरोध अवस्था
स) परिश्रांति अवस्था
द) तनाव-मुक्त अवस्था -
निम्नलिखित में से कौन सा आक्रामकता का एक जैविक कारण हो सकता है?
अ) सामाजिक अधिगम
ब) कुंठा
स) टेस्टोस्टेरोन का उच्च स्तर
द) मीडिया में हिंसा का प्रदर्शन -
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, स्वास्थ्य की परिभाषा में शामिल है:
अ) केवल रोग की अनुपस्थिति
ब) केवल शारीरिक कल्याण
स) शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कल्याण की एक पूर्ण स्थिति
द) केवल मानसिक कल्याण -
सकारात्मक मनोविज्ञान (Positive Psychology) किस पर केंद्रित है?
अ) मानसिक विकारों का निदान और उपचार
ब) मानव की कमजोरियों और कमियों का अध्ययन
स) मानव की शक्तियों, गुणों और कल्याण को बढ़ावा देना
द) सामाजिक समस्याओं के मूल कारणों का विश्लेषण -
संघर्ष समाधान और मध्यस्थता तकनीकों का विकास किस क्षेत्र में मनोविज्ञान की भूमिका का एक उदाहरण है?
अ) पर्यावरण संरक्षण
ब) गरीबी उन्मूलन
स) शांति स्थापना
द) स्वास्थ्य संवर्धन -
जब व्यक्ति स्वयं को दूसरों की तुलना में गरीब या वंचित महसूस करता है, तो यह किस प्रकार की गरीबी कहलाती है?
अ) वस्तुनिष्ठ गरीबी
ब) व्यक्तिपरक गरीबी
स) पूर्ण गरीबी
द) सापेक्ष गरीबी
उत्तरमाला (Answer Key):
- स) पर्यावरण मनोविज्ञान
- ब) यह एक व्यक्तिपरक अनुभव है जिसमें व्यक्ति को स्थान की कमी महसूस होती है।
- स) अत्यधिक आशावाद और उच्च आत्म-प्रभावकारिता
- स) भेदभाव
- स) परिश्रांति अवस्था
- स) टेस्टोस्टेरोन का उच्च स्तर
- स) शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कल्याण की एक पूर्ण स्थिति
- स) मानव की शक्तियों, गुणों और कल्याण को बढ़ावा देना
- स) शांति स्थापना
- ब) व्यक्तिपरक गरीबी