Class 12 Physology Notes Chapter 9 (मनोवैज्ञानिक कौशलों का विकास) – Manovigyan Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम मनोविज्ञान के एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय 'मनोवैज्ञानिक कौशलों का विकास' पर विस्तृत चर्चा करेंगे। यह अध्याय न केवल आपको सैद्धांतिक ज्ञान प्रदान करेगा, बल्कि विभिन्न सरकारी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने के लिए आवश्यक व्यावहारिक समझ भी विकसित करेगा। इस विषय की गहरी समझ आपको व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में भी अत्यधिक लाभ पहुँचाएगी। आइए, इस अध्याय के महत्वपूर्ण बिंदुओं को विस्तार से समझते हैं, ताकि आप परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकें।
अध्याय 9: मनोवैज्ञानिक कौशलों का विकास (Development of Psychological Skills)
1. परिचय (Introduction)
मनोवैज्ञानिक कौशल वे क्षमताएँ और दक्षताएँ हैं जो व्यक्तियों को अपने और दूसरों के व्यवहार, विचारों और भावनाओं को समझने, व्याख्या करने और प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने में मदद करती हैं। ये कौशल केवल मनोवैज्ञानिकों के लिए ही नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण हैं जो व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में सफल होना चाहता है। ये कौशल हमें बेहतर निर्णय लेने, समस्याओं को हल करने, प्रभावी ढंग से संवाद करने और स्वस्थ संबंध बनाने में सक्षम बनाते हैं।
2. मनोवैज्ञानिक कौशलों की प्रकृति (Nature of Psychological Skills)
- सीखे जा सकते हैं: ये जन्मजात नहीं होते, बल्कि प्रशिक्षण, अभ्यास और अनुभव के माध्यम से विकसित किए जा सकते हैं।
- बहुआयामी: इनमें विभिन्न प्रकार की योग्यताएँ शामिल होती हैं, जैसे संज्ञानात्मक, भावनात्मक और व्यवहारिक।
- अभ्यास से सुधार: नियमित अभ्यास और आत्म-प्रतिबिंब से इन कौशलों में निखार आता है।
- संदर्भ-विशिष्ट: कुछ कौशल विशिष्ट संदर्भों (जैसे परामर्श, अनुसंधान) में अधिक महत्वपूर्ण होते हैं, जबकि कुछ सामान्य होते हैं।
3. प्रमुख मनोवैज्ञानिक कौशल (Key Psychological Skills)
3.1. प्रेक्षण कौशल (Observational Skills)
- अर्थ: प्रेक्षण का अर्थ है किसी व्यक्ति या घटना के व्यवहार को व्यवस्थित और उद्देश्यपूर्ण तरीके से देखना, सुनना और रिकॉर्ड करना। यह मनोवैज्ञानिक अनुसंधान और मूल्यांकन का एक मूलभूत उपकरण है।
- महत्व: यह हमें व्यवहार के पैटर्न, अंतःक्रियाओं और संदर्भ को समझने में मदद करता है।
- प्रेक्षण के चरण:
- चयन (Selection): क्या प्रेक्षण करना है, यह तय करना।
- रिकॉर्डिंग (Recording): प्रेक्षित व्यवहार को व्यवस्थित तरीके से दर्ज करना (जैसे नोट्स, वीडियो, ऑडियो)।
- विश्लेषण (Analysis): रिकॉर्ड किए गए डेटा का विश्लेषण करके निष्कर्ष निकालना।
- प्रेक्षण के प्रकार:
- सहभागी प्रेक्षण (Participant Observation): प्रेक्षक उस समूह या स्थिति का हिस्सा बन जाता है जिसका वह प्रेक्षण कर रहा है।
- असहभागी प्रेक्षण (Non-Participant Observation): प्रेक्षक दूर से प्रेक्षण करता है और समूह की गतिविधियों में शामिल नहीं होता।
- सीमाएँ: प्रेक्षक का पूर्वाग्रह, प्रेक्षित व्यक्ति पर प्रेक्षक के प्रभाव (हॉथोर्न प्रभाव), सभी व्यवहारों का प्रेक्षण असंभव।
3.2. संप्रेषण कौशल (Communication Skills)
- अर्थ: संप्रेषण वह प्रक्रिया है जिसमें एक व्यक्ति (प्रेषक) संदेश को एन्कोड करके दूसरे व्यक्ति (प्राप्तकर्ता) तक पहुँचाता है, और प्राप्तकर्ता उसे डिकोड करके प्रतिपुष्टि देता है।
- महत्व: प्रभावी संप्रेषण व्यक्तिगत और व्यावसायिक सफलता के लिए आवश्यक है। यह गलतफहमी को कम करता है और संबंधों को मजबूत करता है।
- संप्रेषण के घटक: प्रेषक, संदेश, माध्यम, प्राप्तकर्ता, प्रतिपुष्टि (फीडबैक), शोर (नॉइज़)।
- संप्रेषण के प्रकार:
- शाब्दिक संप्रेषण (Verbal Communication):
- मौखिक (Oral): बातचीत, भाषण, चर्चा।
- लिखित (Written): पत्र, ईमेल, रिपोर्ट।
- अशाब्दिक संप्रेषण (Non-Verbal Communication): शब्दों के बिना संदेश भेजना। इसमें शामिल हैं:
- हावभाव (Gestures): हाथों और शरीर की हरकतें।
- मुखाभिव्यक्ति (Facial Expressions): चेहरे के भाव।
- नेत्र संपर्क (Eye Contact): आँखों का संपर्क।
- शारीरिक मुद्रा (Body Posture): बैठने या खड़े होने का तरीका।
- स्पर्श (Touch): शारीरिक संपर्क।
- परा-भाषा (Para-language): बोलने का तरीका (आवाज का स्वर, गति, पिच, विराम)।
- निकटता (Proxemics): व्यक्तिगत स्थान का उपयोग।
- शाब्दिक संप्रेषण (Verbal Communication):
- प्रभावी संप्रेषण के अवरोधक: शोर, पूर्वाग्रह, ध्यान की कमी, भाषा बाधा, सांस्कृतिक अंतर।
- सक्रिय श्रवण (Active Listening): यह केवल सुनना नहीं, बल्कि संदेश को पूरी तरह से समझने, व्याख्या करने और प्रतिक्रिया देने की प्रक्रिया है। इसमें शामिल हैं:
- वक्ता पर ध्यान केंद्रित करना।
- स्पष्टीकरण प्रश्न पूछना।
- सारांशित करना।
- गैर-निर्णयात्मक दृष्टिकोण रखना।
3.3. मनोवैज्ञानिक परीक्षणों का अनुप्रयोग (Application of Psychological Testing Skills)
- अर्थ: मनोवैज्ञानिक परीक्षण एक मानकीकृत और उद्देश्यपूर्ण उपकरण है जिसका उपयोग व्यक्ति के व्यवहार, संज्ञानात्मक क्षमताओं, व्यक्तित्व लक्षणों, अभिरुचियों और अभिवृत्तियों को मापने के लिए किया जाता है।
- उद्देश्य: चयन, वर्गीकरण, निदान, मार्गदर्शन, मूल्यांकन और अनुसंधान।
- अच्छे मनोवैज्ञानिक परीक्षण की विशेषताएँ:
- विश्वसनीयता (Reliability): परीक्षण के परिणामों की संगति (consistency)। यदि एक ही व्यक्ति पर बार-बार परीक्षण किया जाए तो परिणाम समान होने चाहिए।
- वैधता (Validity): परीक्षण वास्तव में वही मापता है जिसे मापने का दावा करता है।
- मानकीकरण (Standardization): परीक्षण के प्रशासन, अंकन और व्याख्या के लिए एक समान प्रक्रिया। इसमें मानदंड (norms) का विकास भी शामिल है।
- वस्तुनिष्ठता (Objectivity): परीक्षण के अंकन और व्याख्या में व्यक्तिगत पूर्वाग्रह का अभाव।
- नैतिक विचार: परीक्षण का उपयोग प्रशिक्षित पेशेवरों द्वारा ही किया जाना चाहिए। गोपनीयता, सूचित सहमति और परिणामों की उचित व्याख्या महत्वपूर्ण है।
3.4. परामर्श कौशल (Counselling Skills)
- अर्थ: परामर्श एक पेशेवर संबंध है जिसमें एक प्रशिक्षित परामर्शदाता (counsellor) एक क्लाइंट (परामर्शार्थी) को व्यक्तिगत, सामाजिक, शैक्षिक या व्यावसायिक समस्याओं को समझने और उनका समाधान खोजने में मदद करता है।
- उद्देश्य: आत्म-जागरूकता बढ़ाना, समस्या-समाधान कौशल विकसित करना, निर्णय लेने में सहायता करना और भावनात्मक कल्याण में सुधार करना।
- परामर्श के चरण:
- संबंध स्थापना (Relationship Building): विश्वास और तालमेल बनाना।
- समस्या की पहचान और अन्वेषण (Problem Identification and Exploration): क्लाइंट की समस्या को समझना।
- लक्ष्य निर्धारण (Goal Setting): परामर्श के लिए स्पष्ट और प्राप्त करने योग्य लक्ष्य निर्धारित करना।
- हस्तक्षेप (Intervention): समस्याओं को हल करने के लिए रणनीतियों और तकनीकों का उपयोग करना।
- समापन (Termination): परामर्श प्रक्रिया को समाप्त करना और भविष्य की योजना बनाना।
- प्रभावी परामर्शदाता के गुण: सहानुभूति, प्रामाणिकता, गैर-निर्णयात्मक दृष्टिकोण, गोपनीयता, सक्रिय श्रवण।
- नैतिक मुद्दे: गोपनीयता, सूचित सहमति, क्षमता की सीमाएँ।
3.5. साक्षात्कार कौशल (Interviewing Skills)
- अर्थ: साक्षात्कार दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच एक उद्देश्यपूर्ण बातचीत है, जिसमें एक व्यक्ति (साक्षात्कारकर्ता) दूसरे व्यक्ति (साक्षात्कारार्थी) से जानकारी प्राप्त करने या उसे समझने का प्रयास करता है।
- उद्देश्य: जानकारी एकत्र करना, मूल्यांकन करना, निदान करना, मार्गदर्शन देना।
- प्रकार:
- संरचित साक्षात्कार (Structured Interview): पूर्वनिर्धारित प्रश्नों का एक सेट होता है।
- असंरचित साक्षात्कार (Unstructured Interview): लचीला होता है और प्रश्नों को बातचीत के दौरान तैयार किया जाता है।
- अर्ध-संरचित साक्षात्कार (Semi-structured Interview): संरचित और असंरचित का मिश्रण।
- प्रभावी साक्षात्कार के चरण: तैयारी, संबंध स्थापना, प्रश्न पूछना, सुनना, रिकॉर्डिंग, समापन।
3.6. रिपोर्ट लेखन कौशल (Report Writing Skills)
- अर्थ: मनोवैज्ञानिक रिपोर्टें व्यक्ति के मूल्यांकन, हस्तक्षेप या अनुसंधान के निष्कर्षों को व्यवस्थित और स्पष्ट तरीके से प्रस्तुत करती हैं।
- महत्व: यह जानकारी साझा करने, निर्णय लेने और भविष्य की कार्रवाई की योजना बनाने के लिए महत्वपूर्ण है।
- विशेषताएँ: स्पष्टता, संक्षिप्तता, सटीकता, उद्देश्यपूर्णता, गोपनीयता का ध्यान।
3.7. अनुसंधान कौशल (Research Skills)
- अर्थ: यह व्यवस्थित रूप से जानकारी एकत्र करने, विश्लेषण करने और व्याख्या करने की क्षमता है ताकि किसी विशिष्ट प्रश्न का उत्तर दिया जा सके या किसी समस्या का समाधान किया जा सके।
- महत्व: यह नए ज्ञान का सृजन करने, मौजूदा सिद्धांतों का परीक्षण करने और साक्ष्य-आधारित अभ्यास को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक है।
- चरण: समस्या की पहचान, साहित्य समीक्षा, परिकल्पना निर्माण, डेटा संग्रह, डेटा विश्लेषण, निष्कर्ष निकालना।
3.8. आत्म-प्रतिबिंब कौशल (Self-Reflection Skills)
- अर्थ: यह अपनी स्वयं की भावनाओं, विचारों, अनुभवों और व्यवहारों का आलोचनात्मक रूप से विश्लेषण करने की क्षमता है।
- महत्व: यह आत्म-जागरूकता, व्यक्तिगत विकास और व्यावसायिक दक्षता के लिए महत्वपूर्ण है। यह हमें अपनी शक्तियों और कमजोरियों को समझने में मदद करता है।
4. कौशलों का विकास कैसे करें (How to Develop Skills)
- प्रशिक्षण और कार्यशालाएँ: संरचित शिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेना।
- अभ्यास: वास्तविक जीवन की स्थितियों में कौशलों का लगातार अभ्यास करना।
- प्रतिपुष्टि (Feedback): दूसरों से रचनात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त करना और उस पर कार्य करना।
- आत्म-मूल्यांकन: अपनी प्रगति का नियमित रूप से मूल्यांकन करना।
- पर्यवेक्षण (Supervision): अनुभवी पेशेवरों से मार्गदर्शन प्राप्त करना।
5. निष्कर्ष (Conclusion)
मनोवैज्ञानिक कौशलों का विकास एक सतत प्रक्रिया है। इन कौशलों में महारत हासिल करके, व्यक्ति न केवल अपने पेशेवर लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि एक अधिक संतुष्ट और प्रभावी व्यक्तिगत जीवन भी जी सकते हैं। ये कौशल आपको विभिन्न सरकारी परीक्षाओं में सफल होने के साथ-साथ एक बेहतर इंसान बनने में भी मदद करेंगे।
बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)
-
निम्नलिखित में से कौन-सा एक अच्छे मनोवैज्ञानिक परीक्षण की विशेषता नहीं है?
अ) विश्वसनीयता
ब) वैधता
स) मानकीकरण
द) व्यक्तिपरकता
उत्तर: द) व्यक्तिपरकता -
सक्रिय श्रवण का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
अ) वक्ता को बाधित करना
ब) अपनी प्रतिक्रिया की योजना बनाना
स) संदेश को पूरी तरह से समझना
द) अरुचि दिखाना
उत्तर: स) संदेश को पूरी तरह से समझना -
किस प्रकार के संप्रेषण में शारीरिक भाषा, मुखाभिव्यक्ति और हावभाव शामिल होते हैं?
अ) शाब्दिक संप्रेषण
ब) अशाब्दिक संप्रेषण
स) लिखित संप्रेषण
द) मौखिक संप्रेषण
उत्तर: ब) अशाब्दिक संप्रेषण -
परामर्श प्रक्रिया का पहला चरण क्या है?
अ) समस्या की पहचान
ब) संबंध स्थापना
स) लक्ष्य निर्धारण
द) हस्तक्षेप
उत्तर: ब) संबंध स्थापना -
प्रेक्षण विधि में, यदि प्रेक्षक उस समूह का हिस्सा बन जाता है जिसका वह प्रेक्षण कर रहा है, तो उसे क्या कहते हैं?
अ) असहभागी प्रेक्षक
ब) सहभागी प्रेक्षक
स) प्रत्यक्ष प्रेक्षक
द) अप्रत्यक्ष प्रेक्षक
उत्तर: ब) सहभागी प्रेक्षक -
निम्नलिखित में से कौन-सा परा-भाषा