Class 12 Political Science Notes Chapter 1 (Chapter 1) – Swatantra Bharat me Rajniti-II Book

Swatantra Bharat me Rajniti-II
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम स्वतंत्र भारत में राजनीति-II पुस्तक के अध्याय 1 'राष्ट्र निर्माण की चुनौतियाँ' का विस्तार से अध्ययन करेंगे। यह अध्याय सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह स्वतंत्र भारत की नींव से जुड़े मूलभूत मुद्दों को स्पष्ट करता है।


अध्याय 1: राष्ट्र निर्माण की चुनौतियाँ

1. परिचय: स्वतंत्रता की पृष्ठभूमि
भारत को 14-15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि को स्वतंत्रता मिली। यह एक ऐतिहासिक क्षण था, लेकिन इसके साथ ही देश को कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा। स्वतंत्रता के साथ ही भारत का विभाजन भी हुआ, जिसने राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया को और जटिल बना दिया।

2. स्वतंत्रता के समय की तीन प्रमुख चुनौतियाँ
स्वतंत्र भारत के सामने मुख्य रूप से तीन प्रकार की चुनौतियाँ थीं:

  • 2.1. एकता और अखंडता की चुनौती:

    • भारत एक विशाल और विविधतापूर्ण देश था जहाँ विभिन्न धर्मों, भाषाओं, संस्कृतियों और क्षेत्रों के लोग रहते थे।
    • विभाजन की त्रासदी (भारत-पाकिस्तान विभाजन) ने इस चुनौती को और बढ़ा दिया था। देश की क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखना और विभिन्न समुदायों को एक राष्ट्र के रूप में एकजुट करना सबसे पहली और सबसे बड़ी चुनौती थी।
    • रियासतों के विलय का मुद्दा भी इसी चुनौती का हिस्सा था।
  • 2.2. लोकतंत्र स्थापित करने की चुनौती:

    • भारत ने संसदीय लोकतंत्र पर आधारित शासन प्रणाली को अपनाया था।
    • संविधान में मौलिक अधिकारों, सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार और प्रतिनिधि सरकार के सिद्धांत को स्वीकार किया गया था।
    • चुनौती यह थी कि इस लोकतांत्रिक व्यवस्था को वास्तविक रूप से ज़मीन पर कैसे उतारा जाए और सभी नागरिकों को इसमें समान भागीदारी कैसे सुनिश्चित की जाए।
  • 2.3. समतामूलक विकास की चुनौती:

    • स्वतंत्रता के समय भारत की अधिकांश जनता गरीबी और अभाव में जी रही थी।
    • संविधान में समानता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को अपनाया गया था।
    • चुनौती यह थी कि आर्थिक विकास इस प्रकार हो कि वह केवल कुछ लोगों को नहीं, बल्कि पूरे समाज को लाभ पहुँचाए, और सामाजिक रूप से वंचित समूहों का विशेष ध्यान रखा जाए।

3. विभाजन, विस्थापन और पुनर्वास

  • 3.1. द्वि-राष्ट्र सिद्धांत:

    • मुस्लिम लीग ने 'द्वि-राष्ट्र सिद्धांत' का प्रतिपादन किया था, जिसके अनुसार भारत किसी एक कौम का नहीं, बल्कि हिंदू और मुस्लिम नामक दो कौमों का देश था।
    • लीग ने मुसलमानों के लिए एक अलग राष्ट्र 'पाकिस्तान' की मांग की। कांग्रेस ने इस सिद्धांत का विरोध किया, लेकिन अंततः विभाजन को स्वीकार करना पड़ा।
  • 3.2. विभाजन की प्रक्रिया और समस्याएँ:

    • ब्रिटिश इंडिया को 'भारत' और 'पाकिस्तान' में बाँटा जाना था।
    • विभाजन का आधार धार्मिक बहुसंख्यक था: मुस्लिम बहुल इलाकों को पाकिस्तान में शामिल किया जाना था।
    • समस्याएँ:
      • ब्रिटिश इंडिया में कोई एक भी ऐसा क्षेत्र नहीं था जहाँ मुस्लिम बहुसंख्यक हों। पश्चिमी और पूर्वी भारत में मुस्लिम बहुल इलाके थे, जिन्हें जोड़ना संभव नहीं था। अतः पाकिस्तान में दो हिस्से (पश्चिमी और पूर्वी पाकिस्तान) बने।
      • सभी मुस्लिम बहुल इलाके पाकिस्तान में शामिल नहीं होना चाहते थे (जैसे उत्तर-पश्चिमी सीमांत प्रांत)।
      • पंजाब और बंगाल जैसे प्रांतों में मुस्लिम और गैर-मुस्लिम आबादी लगभग बराबर थी। इन प्रांतों को भी धार्मिक आधार पर बाँटना पड़ा, जिससे बड़े पैमाने पर हिंसा हुई।
      • अल्पसंख्यकों की समस्या: विभाजन के बाद दोनों देशों में बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक रह गए थे, जिनकी सुरक्षा एक बड़ी चिंता थी।
      • सीमा निर्धारण: सीमा रेखा का निर्धारण रातों-रात किया गया, जिससे कई लोग गलत देश में फँस गए।
  • 3.3. विभाजन के परिणाम:

    • बड़ी त्रासदी: 1947 का विभाजन मानव इतिहास के सबसे बड़े विस्थापनों में से एक था। लाखों लोग विस्थापित हुए।
    • हिंसा और हत्याएँ: दोनों तरफ के समुदायों ने एक-दूसरे को निशाना बनाया। अनुमानतः 5 से 10 लाख लोग मारे गए।
    • महिलाओं पर अत्याचार: महिलाओं को अगवा किया गया, बलात्कार किया गया और धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया गया।
    • शरणार्थी समस्या: लाखों शरणार्थियों को सीमा पार करके नए देश में जाना पड़ा। उनके लिए शिविर बनाए गए और पुनर्वास की व्यवस्था की गई।
    • संपत्ति का नुकसान: लोगों को अपनी संपत्ति, घर-बार छोड़कर जाना पड़ा।
    • सांप्रदायिक सद्भाव को क्षति: विभाजन ने सांप्रदायिक सद्भाव को गहरा आघात पहुँचाया।
  • 3.4. गांधीजी की भूमिका:

    • महात्मा गांधी ने विभाजन का कड़ा विरोध किया था।
    • उन्होंने सांप्रदायिक हिंसा को रोकने के लिए अथक प्रयास किए, उपवास रखे और शांति स्थापित करने की कोशिश की।
    • 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने उनकी हत्या कर दी, क्योंकि गोडसे का मानना था कि गांधीजी मुसलमानों के पक्षधर थे।

4. रियासतों का विलय

  • 4.1. समस्या और सरकार का रुख:

    • ब्रिटिश राज के समय भारत में 565 छोटी-बड़ी रियासतें थीं।
    • ब्रिटिश प्रभुसत्ता (Paramountcy) की समाप्ति के साथ ही रियासतों को यह स्वतंत्रता दी गई कि वे भारत या पाकिस्तान में शामिल हों या स्वतंत्र रहें।
    • यह भारत की एकता और अखंडता के लिए एक गंभीर खतरा था।
    • भारत सरकार का रुख स्पष्ट था: रियासतों को भारत संघ में शामिल किया जाना चाहिए। सरकार ने लचीला रुख अपनाया और कुछ क्षेत्रों को स्वायत्तता देने का भी वादा किया।
  • 4.2. सरदार वल्लभभाई पटेल की भूमिका:

    • गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने रियासतों के विलय में निर्णायक भूमिका निभाई।
    • उन्होंने कूटनीति, बातचीत और जहाँ आवश्यक हो, बल प्रयोग का सहारा लेकर अधिकांश रियासतों को 'विलय पत्र' (Instrument of Accession) पर हस्ताक्षर करने के लिए राजी किया।
    • विलय पत्र का अर्थ था कि रियासतें भारतीय संघ का हिस्सा बनने के लिए सहमत हैं।
  • 4.3. कुछ प्रमुख रियासतों का विलय:

    • जूनागढ़: यह गुजरात के तट पर स्थित एक रियासत थी जिसके शासक मुस्लिम थे लेकिन अधिकतर प्रजा हिंदू थी। शासक पाकिस्तान में शामिल होना चाहता था। जनमत संग्रह के बाद इसे भारत में मिलाया गया।
    • हैदराबाद: यह सबसे बड़ी रियासतों में से एक थी। इसका शासक (निज़ाम) स्वतंत्र रहना चाहता था। निज़ाम के अर्धसैनिक बल 'रजाकार' ने लोगों पर अत्याचार किए। सितंबर 1948 में भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन पोलो' चलाकर निज़ाम को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर किया और हैदराबाद को भारत में मिला लिया गया।
    • मणिपुर: महाराजा बोधचंद्र सिंह ने विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। लेकिन जनता के दबाव में उन्होंने जून 1948 में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर चुनाव कराए। यह भारत का पहला हिस्सा था जहाँ चुनाव हुए। महाराजा ने जनमत के विरुद्ध भारतीय संघ में विलय के समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिससे कुछ समय के लिए तनाव रहा।
    • जम्मू और कश्मीर: महाराजा हरि सिंह ने स्वतंत्र रहने का निर्णय लिया था। अक्टूबर 1947 में पाकिस्तान समर्थित कबायलियों ने कश्मीर पर हमला कर दिया। महाराजा ने भारत से मदद मांगी और भारत में विलय के विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद भारतीय सेना ने हमलावरों को खदेड़ा। यह मुद्दा आज भी भारत-पाकिस्तान के बीच विवाद का कारण है।

5. राज्यों का पुनर्गठन

  • 5.1. भाषाई राज्यों की मांग:

    • औपनिवेशिक काल में राज्यों की सीमाएँ प्रशासनिक सुविधा या ब्रिटिश विजय के आधार पर तय की गई थीं।
    • स्वतंत्रता के बाद भाषा के आधार पर राज्यों के पुनर्गठन की मांग उठने लगी।
    • कांग्रेस ने नागपुर अधिवेशन (1920) में भाषाई राज्यों के पुनर्गठन के सिद्धांत को स्वीकार किया था।
    • लेकिन स्वतंत्रता के बाद, विभाजन की त्रासदी के कारण, नेताओं को लगा कि भाषाई आधार पर राज्यों का पुनर्गठन देश की एकता के लिए खतरा हो सकता है।
  • 5.2. आंध्र प्रदेश का गठन:

    • तेलुगु भाषी लोगों ने मद्रास प्रांत से अलग होकर एक पृथक आंध्र राज्य की मांग की।
    • कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता, पोट्टी श्रीरामुलु, ने इस मांग को लेकर 56 दिनों का अनशन किया और दिसंबर 1952 में उनकी मृत्यु हो गई।
    • उनकी मृत्यु के बाद बड़े पैमाने पर हिंसा और विरोध प्रदर्शन हुए।
    • परिणामस्वरूप, दिसंबर 1952 में प्रधानमंत्री नेहरू ने आंध्र प्रदेश नामक एक अलग तेलुगु भाषी राज्य बनाने की घोषणा की।
  • 5.3. राज्य पुनर्गठन आयोग और अधिनियम, 1956:

    • आंध्र प्रदेश के गठन के बाद अन्य भाषाई समूहों ने भी अपने लिए अलग राज्य की मांग की।
    • भारत सरकार ने 1953 में 'राज्य पुनर्गठन आयोग' का गठन किया, जिसने राज्यों के पुनर्गठन के मुद्दे पर विचार किया।
    • आयोग ने अपनी रिपोर्ट में स्वीकार किया कि राज्यों की सीमाएँ भाषा के आधार पर निर्धारित की जानी चाहिए।
    • इस रिपोर्ट के आधार पर 1956 में 'राज्य पुनर्गठन अधिनियम' पारित किया गया।
    • इस अधिनियम के तहत 14 राज्य और 6 केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए।
  • 5.4. अन्य राज्यों का पुनर्गठन:

    • 1960 में बंबई प्रांत को विभाजित करके मराठी भाषी 'महाराष्ट्र' और गुजराती भाषी 'गुजरात' राज्य बनाए गए।
    • 1966 में पंजाब को विभाजित करके पंजाबी भाषी 'पंजाब' और हिंदी भाषी 'हरियाणा' राज्य बनाए गए। हिमाचल प्रदेश को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया।
    • बाद में पूर्वोत्तर भारत में भी कई नए राज्य बनाए गए (जैसे मेघालय, मणिपुर, त्रिपुरा, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश)।
    • 2000 में छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और झारखंड राज्य बनाए गए।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

  1. भारत को स्वतंत्रता किस वर्ष मिली?
    a) 1942
    b) 1945
    c) 1947
    d) 1950

  2. 'द्वि-राष्ट्र सिद्धांत' किस संगठन द्वारा प्रतिपादित किया गया था?
    a) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
    b) मुस्लिम लीग
    c) फॉरवर्ड ब्लॉक
    d) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी

  3. स्वतंत्रता के बाद भारत में कुल कितनी रियासतें थीं?
    a) लगभग 300
    b) लगभग 450
    c) लगभग 565
    d) लगभग 600

  4. रियासतों के विलय में किस भारतीय नेता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई?
    a) जवाहरलाल नेहरू
    b) महात्मा गांधी
    c) सरदार वल्लभभाई पटेल
    d) डॉ. बी.आर. अम्बेडकर

  5. हैदराबाद रियासत के शासक को किस नाम से जाना जाता था?
    a) नवाब
    b) सुल्तान
    c) महाराजा
    d) निज़ाम

  6. भारतीय सेना ने हैदराबाद को भारत में मिलाने के लिए कौन सा ऑपरेशन चलाया था?
    a) ऑपरेशन विजय
    b) ऑपरेशन पोलो
    c) ऑपरेशन ब्लू स्टार
    d) ऑपरेशन मेघदूत

  7. भाषा के आधार पर बनने वाला पहला भारतीय राज्य कौन सा था?
    a) महाराष्ट्र
    b) गुजरात
    c) आंध्र प्रदेश
    d) तमिलनाडु

  8. आंध्र प्रदेश के गठन की मांग को लेकर किस नेता ने अनशन किया और उनकी मृत्यु हो गई?
    a) महात्मा गांधी
    b) पोट्टी श्रीरामुलु
    c) सी. राजगोपालाचारी
    d) टी.टी. कृष्णामाचारी

  9. राज्य पुनर्गठन आयोग का गठन किस वर्ष किया गया था?
    a) 1947
    b) 1950
    c) 1953
    d) 1956

  10. राज्य पुनर्गठन अधिनियम कब पारित किया गया, जिसके तहत 14 राज्य और 6 केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए?
    a) 1952
    b) 1956
    c) 1960
    d) 1966


उत्तरमाला (MCQs):

  1. c) 1947
  2. b) मुस्लिम लीग
  3. c) लगभग 565
  4. c) सरदार वल्लभभाई पटेल
  5. d) निज़ाम
  6. b) ऑपरेशन पोलो
  7. c) आंध्र प्रदेश
  8. b) पोट्टी श्रीरामुलु
  9. c) 1953
  10. b) 1956

मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपके सरकारी परीक्षा की तैयारी में सहायक सिद्ध होंगे। इस अध्याय के प्रत्येक बिंदु को ध्यानपूर्वक पढ़ें और समझें। शुभकामनाएँ!

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