Class 12 Political Science Notes Chapter 1 (राष्ट्र-निर्माण की चुनौतियाँ) – Samkalin Vishwa Rajniti Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम समकालीन विश्व राजनीति पुस्तक के अध्याय 1 'राष्ट्र-निर्माण की चुनौतियाँ' का विस्तार से अध्ययन करेंगे। यह अध्याय स्वतंत्र भारत के सामने आई शुरुआती चुनौतियों और उनके समाधान की प्रक्रिया को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आपको प्रत्येक बिंदु पर ध्यान देना होगा।
अध्याय 1: राष्ट्र-निर्माण की चुनौतियाँ (विस्तृत नोट्स)
परिचय:
15 अगस्त 1947 को भारत को ब्रिटिश उपनिवेशवाद से स्वतंत्रता मिली। यह एक खुशी का क्षण था, लेकिन इसके साथ ही देश को कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा। जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा में अपने प्रसिद्ध भाषण 'ट्रिस्ट विद डेस्टिनी' (नियति से साक्षात्कार) में इन चुनौतियों का जिक्र किया था।
स्वतंत्र भारत के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ:
स्वतंत्र भारत के सामने मुख्य रूप से तीन प्रकार की चुनौतियाँ थीं:
- एकता और अखंडता की चुनौती: भारत विविधताओं का देश था, जहाँ विभिन्न भाषाएँ, संस्कृतियाँ, धर्म और क्षेत्र थे। इन सभी को एक राष्ट्र के सूत्र में पिरोना और देश की क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती थी।
- लोकतंत्र स्थापित करने की चुनौती: भारत ने संसदीय लोकतंत्र पर आधारित शासन व्यवस्था अपनाने का निर्णय लिया था। संविधान निर्माण, चुनाव कराना और लोकतांत्रिक मूल्यों को स्थापित करना एक जटिल कार्य था।
- विकास और भलाई की चुनौती: नव स्वतंत्र भारत में गरीबी, अशिक्षा और असमानता व्यापक थी। सभी नागरिकों के लिए विकास और कल्याण सुनिश्चित करना, आर्थिक समानता स्थापित करना तथा समाज के वंचित वर्गों का उत्थान करना एक बड़ी चुनौती थी।
1. स्वतंत्रता और विभाजन:
- दो राष्ट्र सिद्धांत: मुस्लिम लीग ने 'दो राष्ट्र सिद्धांत' का प्रतिपादन किया, जिसके अनुसार भारत किसी एक कौम का नहीं, बल्कि हिंदू और मुस्लिम नामक दो कौमों का देश था। लीग ने मुसलमानों के लिए एक अलग राष्ट्र 'पाकिस्तान' की मांग की। कांग्रेस ने इस सिद्धांत का विरोध किया, लेकिन अंततः विभाजन को स्वीकार करना पड़ा।
- विभाजन की प्रक्रिया:
- भारत को भारत और पाकिस्तान नामक दो देशों में बाँटा गया।
- ब्रिटिश इंडिया को धार्मिक बहुसंख्यक के आधार पर विभाजित किया गया। मुस्लिम बहुल इलाकों को पाकिस्तान में शामिल किया गया।
- यह विभाजन आसान नहीं था क्योंकि ब्रिटिश इंडिया में कोई भी ऐसा क्षेत्र नहीं था जहाँ मुस्लिम बहुसंख्यक हों और वह पाकिस्तान में शामिल हो सके।
- दो मुस्लिम बहुल प्रांत थे - पंजाब और बंगाल। इन दोनों प्रांतों को भी विभाजित किया गया, जिससे बड़े पैमाने पर हिंसा हुई।
- विभाजन के परिणाम:
- हिंसा और विस्थापन: विभाजन के कारण बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक हिंसा हुई। लाखों लोग मारे गए, और करोड़ों लोगों को अपने घर-बार छोड़कर सीमा पार जाना पड़ा। अनुमानित 80 लाख लोगों को विस्थापित होना पड़ा।
- शरणार्थी समस्या: विभाजन के कारण लाखों शरणार्थी भारत आए, जिनके पुनर्वास की समस्या उत्पन्न हुई।
- महिलाओं पर अत्याचार: विभाजन के दौरान महिलाओं को विशेष रूप से निशाना बनाया गया, उनका अपहरण और बलात्कार किया गया।
- संपत्ति का बँटवारा: सरकारी कर्मचारियों, रेलवे, वित्तीय संपत्तियों आदि का भी बँटवारा हुआ।
- महात्मा गांधी की भूमिका: गांधीजी विभाजन के सख्त खिलाफ थे। उन्होंने नोआखली में सांप्रदायिक सद्भाव के लिए उपवास और प्रार्थना की। 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने उनकी हत्या कर दी, क्योंकि गोडसे को लगता था कि गांधीजी मुसलमानों के पक्षधर थे।
2. रियासतों का एकीकरण:
- रियासतों की समस्या: ब्रिटिश इंडिया दो हिस्सों में बंटा हुआ था: ब्रिटिश प्रभुत्व वाले प्रांत और रियासतें (जो ब्रिटिश नियंत्रण में थीं लेकिन उनके शासक स्थानीय थे)। कुल 565 रियासतें थीं, जो भारत के एक-तिहाई भू-भाग और एक-चौथाई आबादी पर शासन करती थीं।
- ब्रिटिश सरकार का रुख: ब्रिटिश सरकार ने घोषणा की कि भारत की स्वतंत्रता के साथ ही रियासतों पर से ब्रिटिश प्रभुत्व समाप्त हो जाएगा। इसका मतलब था कि रियासतें या तो भारत में शामिल हो सकती थीं, पाकिस्तान में शामिल हो सकती थीं या स्वतंत्र रह सकती थीं। यह भारत की एकता और अखंडता के लिए एक गंभीर खतरा था।
- सरकार का दृष्टिकोण:
- भारत सरकार ने रियासतों के शासकों को भारत संघ में शामिल होने के लिए राजी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- सरदार वल्लभभाई पटेल (उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री) ने रियासतों के एकीकरण में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उन्होंने कूटनीति और आवश्यकता पड़ने पर बल प्रयोग का सहारा लिया।
- सरकार का मुख्य उद्देश्य था कि रियासतें भारतीय संघ में शामिल हों।
- अधिकांश रियासतों ने 'इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन' (विलय पत्र) पर हस्ताक्षर करके भारतीय संघ में शामिल होने की सहमति दी।
- समस्याग्रस्त रियासतें: कुछ रियासतों ने भारत में शामिल होने से इनकार कर दिया, जिससे समस्या उत्पन्न हुई:
- जूनागढ़: यहाँ के नवाब पाकिस्तान में शामिल होना चाहते थे, लेकिन जनता भारत में शामिल होना चाहती थी। जनमत संग्रह के बाद इसे भारत में मिलाया गया।
- हैदराबाद: यहाँ के निजाम स्वतंत्र रहना चाहते थे। उनकी सेना 'रजाकार' ने जनता पर अत्याचार किए। सितंबर 1948 में भारतीय सेना ने हस्तक्षेप किया और हैदराबाद को भारत में मिला लिया गया।
- कश्मीर: यहाँ के महाराजा हरि सिंह स्वतंत्र रहना चाहते थे। पाकिस्तान ने कबायलियों को भेजकर कश्मीर पर हमला कर दिया। महाराजा ने भारत से मदद मांगी और 26 अक्टूबर 1947 को 'विलय पत्र' पर हस्ताक्षर कर दिए। भारतीय सेना ने हस्तक्षेप किया और कश्मीर का एक हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में चला गया (पाक अधिकृत कश्मीर)।
- मणिपुर: यहाँ के महाराजा बोधचंद्र सिंह ने भारत के साथ विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए, लेकिन जनता के दबाव में उन्होंने जून 1948 में संवैधानिक राजतंत्र स्थापित किया और चुनाव कराए। यह भारत का पहला राज्य था जहाँ सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर चुनाव हुए। भारतीय सरकार ने महाराजा पर दबाव डालकर इसे भारत में मिला लिया।
3. राज्यों का पुनर्गठन:
- भाषा के आधार पर राज्यों की मांग: रियासतों के एकीकरण के बाद, अब प्रांतों की आंतरिक सीमाओं को फिर से निर्धारित करने की चुनौती थी। स्वतंत्रता से पहले ही कांग्रेस ने भाषा के आधार पर राज्यों के पुनर्गठन का वादा किया था।
- शुरुआती हिचकिचाहट: विभाजन के बाद, नेताओं को लगा कि भाषा के आधार पर राज्यों का पुनर्गठन देश की एकता के लिए खतरा हो सकता है।
- आंध्र प्रदेश का गठन:
- तेलुगु भाषी क्षेत्रों को मद्रास प्रांत से अलग करके एक अलग आंध्र राज्य बनाने की मांग उठी।
- कांग्रेस नेता पोटी श्रीरामुलु ने इस मांग को लेकर 56 दिनों का आमरण अनशन किया और उनकी मृत्यु हो गई।
- उनकी मृत्यु के बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए, जिसके परिणामस्वरूप दिसंबर 1952 में प्रधानमंत्री नेहरू ने आंध्र प्रदेश नामक अलग राज्य बनाने की घोषणा की।
- राज्य पुनर्गठन आयोग (SRC):
- आंध्र प्रदेश के गठन के बाद, अन्य क्षेत्रों से भी भाषा के आधार पर राज्यों की मांग उठने लगी।
- भारत सरकार ने 1953 में राज्य पुनर्गठन आयोग का गठन किया।
- इस आयोग ने 1956 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें सुझाव दिया गया कि राज्यों की सीमाओं का निर्धारण भाषा के आधार पर किया जाना चाहिए।
- राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956:
- इस अधिनियम के तहत 14 राज्य और 6 केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए।
- बॉम्बे प्रांत को 1960 में महाराष्ट्र (मराठी भाषी) और गुजरात (गुजराती भाषी) में विभाजित किया गया।
- पंजाब को 1966 में पंजाब (पंजाबी भाषी) और हरियाणा (हिंदी भाषी) में विभाजित किया गया, और चंडीगढ़ को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया।
- पूर्वोत्तर के राज्यों का पुनर्गठन भी बाद में किया गया (जैसे नागालैंड 1963, मेघालय 1972, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश 1987)।
निष्कर्ष:
भारत ने विभाजन, रियासतों के एकीकरण और राज्यों के पुनर्गठन जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना करते हुए अपनी एकता और लोकतांत्रिक पहचान को सफलतापूर्वक स्थापित किया। इन शुरुआती निर्णयों ने भारतीय राष्ट्र-निर्माण की नींव रखी।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
यहाँ इस अध्याय पर आधारित 10 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं:
-
भारत को स्वतंत्रता किस तिथि को मिली?
a) 26 जनवरी 1950
b) 15 अगस्त 1947
c) 2 अक्टूबर 1869
d) 14 अगस्त 1947 -
'नियति से साक्षात्कार' (Tryst with Destiny) नामक प्रसिद्ध भाषण किसने दिया था?
a) महात्मा गांधी
b) सरदार वल्लभभाई पटेल
c) जवाहरलाल नेहरू
d) डॉ. बी.आर. अंबेडकर -
भारत के विभाजन के लिए कौन सा सिद्धांत जिम्मेदार था?
a) एक राष्ट्र सिद्धांत
b) दो राष्ट्र सिद्धांत
c) बहु-राष्ट्र सिद्धांत
d) धर्मनिरपेक्षता का सिद्धांत -
भारत के विभाजन के समय, कौन से दो प्रांत सबसे अधिक प्रभावित हुए थे?
a) उत्तर प्रदेश और बिहार
b) मद्रास और मैसूर
c) पंजाब और बंगाल
d) महाराष्ट्र और गुजरात -
स्वतंत्रता के समय भारत में रियासतों की संख्या लगभग कितनी थी?
a) 250
b) 365
c) 565
d) 600 -
रियासतों के भारतीय संघ में विलय में किस नेता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई?
a) महात्मा गांधी
b) जवाहरलाल नेहरू
c) सरदार वल्लभभाई पटेल
d) राजेंद्र प्रसाद -
किस रियासत के शासक को 'निजाम' कहा जाता था और भारतीय सेना ने 1948 में इसे भारत में मिलाया?
a) जूनागढ़
b) कश्मीर
c) हैदराबाद
d) मणिपुर -
भाषा के आधार पर बनने वाला भारत का पहला राज्य कौन सा था?
a) महाराष्ट्र
b) गुजरात
c) आंध्र प्रदेश
d) तमिलनाडु -
आंध्र प्रदेश के गठन की मांग को लेकर आमरण अनशन करने वाले नेता का नाम क्या था, जिनकी मृत्यु हो गई थी?
a) महात्मा गांधी
b) पोटी श्रीरामुलु
c) सी. राजगोपालाचारी
d) के. कामराज -
राज्य पुनर्गठन आयोग (States Reorganization Commission) का गठन किस वर्ष किया गया था?
a) 1947
b) 1950
c) 1953
d) 1956
उत्तरमाला:
- b) 15 अगस्त 1947
- c) जवाहरलाल नेहरू
- b) दो राष्ट्र सिद्धांत
- c) पंजाब और बंगाल
- c) 565
- c) सरदार वल्लभभाई पटेल
- c) हैदराबाद
- c) आंध्र प्रदेश
- b) पोटी श्रीरामुलु
- c) 1953
मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी परीक्षा की तैयारी में सहायक सिद्ध होंगे। अपनी पढ़ाई जारी रखें और किसी भी संदेह के लिए पूछने में संकोच न करें।