Class 12 Political Science Notes Chapter 2 (एक दल के प्रभुत्व का दौर) – Samkalin Vishwa Rajniti Book

Samkalin Vishwa Rajniti
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम आपकी राजनीति विज्ञान की पुस्तक 'समकालीन विश्व राजनीति' के अध्याय 2 'एक दल के प्रभुत्व का दौर' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय स्वतंत्र भारत की शुरुआती राजनीति को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, विशेषकर उन छात्रों के लिए जो विभिन्न सरकारी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। यहाँ आपको इस अध्याय के महत्वपूर्ण बिंदु, तथ्य और अवधारणाएँ विस्तृत रूप में मिलेंगी।


अध्याय 2: एक दल के प्रभुत्व का दौर

परिचय
भारत को 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता मिली, लेकिन इसके साथ ही देश के सामने अनेक चुनौतियाँ खड़ी थीं। इनमें सबसे बड़ी चुनौती थी लोकतंत्र को स्थापित करना और राष्ट्र का निर्माण करना। भारत ने विभाजन की त्रासदी झेली थी और रियासतों के एकीकरण का कार्य भी चुनौतीपूर्ण था। ऐसे में, लोकतांत्रिक शासन प्रणाली को अपनाना और उसे सफलतापूर्वक लागू करना एक साहसिक कदम था, जिस पर दुनिया के कई पर्यवेक्षक संदेह कर रहे थे।

1. लोकतंत्र स्थापित करने की चुनौती

  • विभाजन और रियासतों का एकीकरण: स्वतंत्रता के साथ ही देश का विभाजन हुआ और लगभग 565 रियासतों को भारतीय संघ में शामिल करने का कार्य भी पूरा करना था।
  • संविधान का निर्माण: भारत का संविधान 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत किया गया और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ। इस संविधान ने सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार (Universal Adult Franchise) को अपनाया, जो उस समय दुनिया के कई विकसित देशों में भी नहीं था।
  • लोकतंत्र के प्रति संदेह: कई विदेशी पर्यवेक्षकों और यहाँ तक कि कुछ भारतीयों को भी लगा कि भारत जैसे गरीब और अशिक्षित देश में लोकतंत्र सफल नहीं हो पाएगा। उन्हें लगा कि भारत में या तो सैन्य शासन आएगा या कोई एक नेता तानाशाही स्थापित करेगा।

2. पहला आम चुनाव (1952)

  • चुनाव आयोग का गठन: जनवरी 1950 में भारत के चुनाव आयोग का गठन किया गया और सुकुमार सेन को पहला मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया।
  • चुनाव प्रक्रिया की जटिलता:
    • भारत में पहली बार सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर चुनाव होने थे।
    • मतदाताओं की संख्या 17 करोड़ थी, जिनमें से अधिकांश अशिक्षित थे।
    • 3200 विधायक और 489 लोकसभा सदस्यों का चुनाव होना था।
    • मतदाता सूची बनाने में 6 महीने लगे, जिसमें 40 लाख महिला मतदाताओं के नाम "अमुक की बेटी/पत्नी" के रूप में दर्ज होने के कारण खारिज कर दिए गए।
    • चुनाव कराने के लिए 3 लाख से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया गया।
    • मतदान के लिए विशेष मतपेटियों का इस्तेमाल किया गया, जिन पर प्रत्येक उम्मीदवार का चुनाव चिह्न अंकित होता था।
  • चुनाव का समय: चुनाव अक्टूबर 1951 से फरवरी 1952 तक चले, लेकिन इन्हें आमतौर पर 1952 के चुनाव के रूप में जाना जाता है।
  • परिणाम और महत्व:
    • कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा में 489 सीटों में से 364 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत प्राप्त किया।
    • जवाहरलाल नेहरू भारत के पहले निर्वाचित प्रधानमंत्री बने।
    • राज्य विधानसभा चुनावों में भी कांग्रेस ने अधिकांश राज्यों में जीत हासिल की।
    • यह चुनाव भारतीय लोकतंत्र की सफलता का एक ऐतिहासिक प्रमाण था, जिसने दुनिया को चौंका दिया। भारत ने यह साबित कर दिया कि लोकतंत्र को कहीं भी स्थापित किया जा सकता है।

3. कांग्रेस के प्रभुत्व की प्रकृति
भारत में एक दलीय प्रभुत्व का दौर 1952 से 1967 तक चला, जिसमें कांग्रेस पार्टी ने लगातार तीन आम चुनावों (1952, 1957, 1962) में लोकसभा और अधिकांश राज्य विधानसभाओं में भारी बहुमत से जीत हासिल की।

  • कांग्रेस की विरासत:
    • कांग्रेस भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की विरासत थी, जिसने राष्ट्रीय आंदोलन का नेतृत्व किया था।
    • महात्मा गांधी के नेतृत्व में इसने जन-जन तक अपनी पहुँच बनाई थी।
    • जवाहरलाल नेहरू का करिश्माई नेतृत्व और लोकप्रियता भी इसकी जीत का एक बड़ा कारण थी।
  • संगठनात्मक ताकत:
    • कांग्रेस का संगठन पूरे देश में फैला हुआ था, गाँव-गाँव तक इसकी इकाइयाँ थीं।
    • यह एकमात्र पार्टी थी जिसका संगठन इतना मजबूत और व्यापक था।
  • सामाजिक और वैचारिक गठबंधन (Social and Ideological Coalition):
    • कांग्रेस एक 'छतरी संगठन' (Umbrella Organization) की तरह थी, जिसने समाज के विभिन्न वर्गों, जातियों, धर्मों और भाषाओं के लोगों को अपने अंदर समाहित किया था।
    • इसमें विभिन्न विचारधाराओं (क्रांतिकारी, शांतिवादी, रूढ़िवादी, उदारवादी, दक्षिणपंथी, वामपंथी) के लोग शामिल थे।
    • यह एक ऐसा मंच था जहाँ विभिन्न गुट और नेता अपनी बात रख सकते थे और पार्टी के भीतर ही बहस और समायोजन की प्रक्रिया चलती रहती थी।
    • इसने कांग्रेस को लचीला बनाया और उसे विभिन्न हितों को साधने में मदद की।
  • कांग्रेस एक पार्टी के रूप में, विपक्ष के रूप में: कांग्रेस के प्रभुत्व के दौर में, कांग्रेस के भीतर ही विभिन्न गुटों का अस्तित्व था। ये गुट अक्सर एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करते थे और पार्टी के भीतर ही विपक्ष की भूमिका निभाते थे। इससे पार्टी के भीतर आंतरिक लोकतंत्र बना रहा।

4. विपक्ष का उद्भव और भूमिका
कांग्रेस के प्रभुत्व के बावजूद, भारत में विपक्षी दलों का अस्तित्व था और उन्होंने भारतीय लोकतंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

  • शुरुआती दौर में विपक्ष की भूमिका:
    • विपक्षी दलों ने कांग्रेस की नीतियों की आलोचना की और उसे जवाबदेह बनाया।
    • उन्होंने वैकल्पिक नीतियाँ और कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
    • उन्होंने भविष्य के नेताओं को तैयार करने का मंच प्रदान किया।
    • विपक्ष ने भारतीय लोकतंत्र को जीवंत बनाए रखा।
  • प्रमुख विपक्षी दल और उनकी विचारधाराएँ:
    • सोशलिस्ट पार्टी:
      • स्थापना: 1934 में कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के रूप में, कांग्रेस के भीतर ही। 1948 में कांग्रेस से अलग होकर सोशलिस्ट पार्टी बनी।
      • विचारधारा: लोकतांत्रिक समाजवाद, कांग्रेस की पूँजीवादी नीतियों की आलोचना।
      • प्रमुख नेता: आचार्य नरेंद्र देव, जयप्रकाश नारायण (JP), राममनोहर लोहिया, एस.एम. जोशी।
      • विभाजन: बाद में यह प्रजा सोशलिस्ट पार्टी (PSP) और संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी (SSP) में विभाजित हुई।
    • भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI):
      • स्थापना: 1920 के दशक में।
      • विचारधारा: साम्यवाद, सोवियत संघ के प्रति झुकाव।
      • आजादी के बाद: शुरू में हिंसा का रास्ता अपनाया, लेकिन बाद में संसदीय लोकतंत्र में विश्वास जताया।
      • पहले चुनाव में: 16 सीटें जीतकर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी।
      • विभाजन: 1964 में चीन-सोवियत मतभेद और भारत-चीन युद्ध के बाद यह दो भागों में विभाजित हो गई - भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)]।
    • भारतीय जनसंघ:
      • स्थापना: 1951 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा।
      • विचारधारा: "एक देश, एक संस्कृति और एक राष्ट्र" (अखंड भारत) पर बल, हिंदी को राजभाषा बनाने का समर्थन, धार्मिक और सांस्कृतिक अल्पसंख्यकों को रियायतें देने का विरोध, पाकिस्तान के साथ संबंधों पर कठोर रुख, परमाणु हथियार विकसित करने का समर्थन।
      • प्रमुख नेता: श्यामा प्रसाद मुखर्जी, दीनदयाल उपाध्याय, बलराज मधोक।
      • भविष्य: बाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का आधार बना।
    • स्वतंत्र पार्टी:
      • स्थापना: 1959 में सी. राजगोपालाचारी द्वारा।
      • विचारधारा: राज्य के हस्तक्षेप के बिना अर्थव्यवस्था (मुक्त अर्थव्यवस्था), निजी क्षेत्र को बढ़ावा, गुटनिरपेक्षता की आलोचना, सोवियत संघ के साथ घनिष्ठ संबंधों का विरोध, संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ संबंध मजबूत करने का समर्थन।
      • प्रमुख नेता: सी. राजगोपालाचारी, के.एम. मुंशी, एन.जी. रंगा, मीनू मसानी।
    • अन्य दल: भारतीय बोल्शेविक दल, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी, फॉरवर्ड ब्लॉक (सुभाष चंद्र बोस द्वारा स्थापित), रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (डॉ. बी.आर. अंबेडकर द्वारा स्थापित अनुसूचित जाति फेडरेशन का नया रूप)।

5. एक दलीय प्रभुत्व प्रणाली बनाम एक दलीय प्रणाली
भारत में कांग्रेस का प्रभुत्व अन्य देशों की एक दलीय प्रणाली से भिन्न था।

  • भारत में एक दलीय प्रभुत्व: यह लोकतांत्रिक संदर्भ में था। यहाँ कई पार्टियाँ चुनाव लड़ती थीं, लेकिन कांग्रेस लगातार चुनाव जीतती थी। यह बहुदलीय प्रतिस्पर्धा के बावजूद एक दल का प्रभुत्व था।
  • अन्य देशों में एक दलीय प्रणाली: चीन (कम्युनिस्ट पार्टी), क्यूबा, सीरिया जैसे देशों में केवल एक ही पार्टी को शासन करने की अनुमति होती है। मेक्सिको में इंस्टीट्यूशनल रिवोल्यूशनरी पार्टी (PRI) ने लगभग 60 वर्षों तक शासन किया, लेकिन यह अक्सर चुनावों में धांधली और हेरफेर का सहारा लेती थी। दक्षिण कोरिया में भी डेमोक्रेटिक रिपब्लिकन पार्टी का प्रभुत्व था। ये प्रणालियाँ अक्सर गैर-लोकतांत्रिक होती हैं या चुनावों में पारदर्शिता का अभाव होता है। भारत का अनुभव इनसे बिल्कुल अलग था।

निष्कर्ष
कांग्रेस के प्रभुत्व का दौर भारतीय राजनीति के लिए एक अनूठा और महत्वपूर्ण काल था। इसने भारतीय लोकतंत्र की नींव रखी और एक मजबूत लोकतांत्रिक परंपरा को स्थापित किया। विपक्षी दलों ने भी इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे भारत में एक जीवंत और बहुआयामी लोकतंत्र का विकास हुआ।


बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

  1. भारत के पहले मुख्य चुनाव आयुक्त कौन थे?
    (A) डॉ. राजेंद्र प्रसाद
    (B) जवाहरलाल नेहरू
    (C) सुकुमार सेन
    (D) बी.आर. अंबेडकर

  2. भारत में पहले आम चुनाव किस वर्ष हुए थे?
    (A) 1947
    (B) 1950
    (C) 1952
    (D) 1957

  3. पहले आम चुनाव में लोकसभा की कुल 489 सीटों में से कांग्रेस पार्टी ने कितनी सीटें जीती थीं?
    (A) 250
    (B) 364
    (C) 400
    (D) 489

  4. भारतीय जनसंघ की स्थापना किस वर्ष हुई थी?
    (A) 1947
    (B) 1950
    (C) 1951
    (D) 1959

  5. किस दल ने "एक देश, एक संस्कृति और एक राष्ट्र" के विचार पर बल दिया?
    (A) सोशलिस्ट पार्टी
    (B) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
    (C) भारतीय जनसंघ
    (D) स्वतंत्र पार्टी

  6. स्वतंत्र पार्टी की स्थापना किसने की थी?
    (A) आचार्य नरेंद्र देव
    (B) श्यामा प्रसाद मुखर्जी
    (C) सी. राजगोपालाचारी
    (D) मीनू मसानी

  7. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) का विभाजन CPI और CPI(M) में किस वर्ष हुआ था?
    (A) 1952
    (B) 1957
    (C) 1962
    (D) 1964

  8. आचार्य नरेंद्र देव किस पार्टी के प्रमुख नेता थे?
    (A) भारतीय जनसंघ
    (B) सोशलिस्ट पार्टी
    (C) स्वतंत्र पार्टी
    (D) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी

  9. मेक्सिको में किस पार्टी ने लगभग 60 वर्षों तक शासन किया?
    (A) कम्युनिस्ट पार्टी
    (B) डेमोक्रेटिक रिपब्लिकन पार्टी
    (C) इंस्टीट्यूशनल रिवोल्यूशनरी पार्टी (PRI)
    (D) लिबरल पार्टी

  10. कांग्रेस को 'छतरी संगठन' (Umbrella Organization) क्यों कहा जाता था?
    (A) क्योंकि यह केवल उच्च वर्ग के लोगों का प्रतिनिधित्व करती थी।
    (B) क्योंकि इसमें विभिन्न सामाजिक समूहों और विचारधाराओं के लोग शामिल थे।
    (C) क्योंकि यह केवल एक विशेष क्षेत्र तक सीमित थी।
    (D) क्योंकि यह केवल स्वतंत्रता संग्राम के नेताओं का समूह थी।


उत्तरमाला:

  1. (C) सुकुमार सेन
  2. (C) 1952
  3. (B) 364
  4. (C) 1951
  5. (C) भारतीय जनसंघ
  6. (C) सी. राजगोपालाचारी
  7. (D) 1964
  8. (B) सोशलिस्ट पार्टी
  9. (C) इंस्टीट्यूशनल रिवोल्यूशनरी पार्टी (PRI)
  10. (B) क्योंकि इसमें विभिन्न सामाजिक समूहों और विचारधाराओं के लोग शामिल थे।

मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको इस अध्याय को गहराई से समझने और आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होंगे। किसी भी अन्य सहायता के लिए आप पूछ सकते हैं।

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