Class 12 Political Science Notes Chapter 3 (Chapter 3) – Swatantra Bharat me Rajniti-II Book

Swatantra Bharat me Rajniti-II
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम आपकी पुस्तक 'स्वतंत्र भारत में राजनीति-II' के अध्याय 3, 'लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट' पर विस्तार से चर्चा करेंगे। यह अध्याय भारतीय राजनीति के एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील दौर को समझने में हमारी सहायता करता है। सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यह अध्याय बहुत महत्वपूर्ण है, इसलिए हम इसके हर पहलू को गहराई से समझेंगे।


अध्याय 3: लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट

यह अध्याय 1970 के दशक में भारतीय राजनीति में आए संकट, आपातकाल की घोषणा और उसके परिणामों पर केंद्रित है।

1. आपातकाल की पृष्ठभूमि (Background to Emergency)

1970 के दशक की शुरुआत में भारत में कई आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियाँ सामने आईं, जिन्होंने आपातकाल के लिए जमीन तैयार की।

  • आर्थिक संदर्भ (Economic Context):

    • बांग्लादेश युद्ध का बोझ: 1971 के बांग्लादेश युद्ध के कारण भारत की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव पड़ा। लगभग 80 लाख शरणार्थियों को संभालना पड़ा।
    • अंतर्राष्ट्रीय तेल संकट (1973): कच्चे तेल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हुई, जिससे भारत में महंगाई और बढ़ गई।
    • मानसून की विफलता: 1972-73 में मानसून की विफलता के कारण कृषि उत्पादन में गिरावट आई।
    • बेरोजगारी और कीमतें: देश में बेरोजगारी और महंगाई चरम पर थी, जिससे जनता में असंतोष बढ़ रहा था।
    • सरकारी खर्च: सरकार ने अपने खर्चों को कम करने और सब्सिडी को रोकने का निर्णय लिया, जिससे जनता में और नाराजगी फैली।
    • औद्योगिक विकास की धीमी गति: उद्योगों में विकास दर धीमी थी, जिससे आर्थिक समस्याएं और जटिल हो गईं।
  • गुजरात और बिहार आंदोलन (Gujarat and Bihar Movements):

    • गुजरात आंदोलन (1974): जनवरी 1974 में गुजरात के छात्रों ने खाद्य तेल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों, भ्रष्टाचार और उच्च पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ आंदोलन शुरू किया। इस आंदोलन में विपक्षी दलों ने भी हिस्सा लिया और राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया। बाद में, मोरारजी देसाई के नेतृत्व में विधानसभा भंग करने की मांग और नए चुनाव कराने के लिए अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की गई। अंततः, मार्च 1975 में चुनाव हुए, जिसमें कांग्रेस हार गई।
    • बिहार आंदोलन (1974): मार्च 1974 में बिहार के छात्रों ने भी बढ़ती कीमतों, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन शुरू किया। इस आंदोलन को समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने नेतृत्व प्रदान किया। जेपी ने इसे 'संपूर्ण क्रांति' का नारा दिया और मांग की कि इंदिरा गांधी की सरकार इस्तीफा दे दे। उन्होंने सेना, पुलिस और सरकारी कर्मचारियों से सरकार के 'अवैध और अनैतिक' आदेशों को न मानने का आह्वान किया।
  • रेलवे हड़ताल (1974):

    • मई 1974 में जॉर्ज फर्नांडीस के नेतृत्व में अखिल भारतीय रेलवे कर्मचारियों ने अपनी बोनस और सेवा शर्तों में सुधार की मांग को लेकर राष्ट्रव्यापी हड़ताल की। सरकार ने इस हड़ताल को अवैध घोषित कर दिया और दमनकारी तरीके से कुचल दिया, जिससे मजदूरों में असंतोष बढ़ा।
  • न्यायपालिका से टकराव (Conflict with Judiciary):

    • सरकार और न्यायपालिका के बीच टकराव कई मुद्दों पर चल रहा था, जैसे कि संसद मौलिक अधिकारों में संशोधन कर सकती है या नहीं और संपत्ति के अधिकार का दायरा क्या होना चाहिए।
    • गोलकनाथ मामला (1967): सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि संसद मौलिक अधिकारों में कटौती नहीं कर सकती।
    • केशवानंद भारती मामला (1973): सर्वोच्च न्यायालय ने 'संविधान के मूल ढांचे' का सिद्धांत दिया। इसने कहा कि संसद संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन कर सकती है, लेकिन इसके 'मूल ढांचे' को नहीं बदल सकती।
    • मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति: सरकार ने वरिष्ठता के सिद्धांत को दरकिनार करते हुए, तीन वरिष्ठ न्यायाधीशों को पीछे छोड़ते हुए, न्यायमूर्ति ए.एन. रे को मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया। इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल उठे।
  • इंदिरा गांधी का चुनाव अवैध घोषित (Indira Gandhi's Election Declared Invalid):

    • 12 जून 1975: इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जगमोहन लाल सिन्हा ने एक फैसला सुनाया, जिसमें उन्होंने इंदिरा गांधी के 1971 के लोकसभा चुनाव को अवैध घोषित कर दिया। यह फैसला समाजवादी नेता राज नारायण द्वारा दायर एक याचिका पर आया था, जिन्होंने आरोप लगाया था कि इंदिरा गांधी ने चुनाव में सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किया था।
    • 24 जून 1975: सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय के फैसले पर आंशिक स्थगन (conditional stay) दिया, जिसका अर्थ था कि इंदिरा गांधी सांसद बनी रहेंगी, लेकिन लोकसभा की कार्यवाही में भाग नहीं ले पाएंगी।
    • विपक्षी दलों की लामबंदी: इस फैसले के बाद, विपक्षी दलों ने जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में इंदिरा गांधी के इस्तीफे की मांग को लेकर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू कर दिए। 25 जून 1975 को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक विशाल रैली का आयोजन किया गया, जिसमें जेपी ने सेना, पुलिस और सरकारी कर्मचारियों से सरकार के आदेशों को न मानने का आह्वान किया।

2. आपातकाल की घोषणा (Declaration of Emergency)

  • दिनांक: 25 जून 1975 की रात
  • घोषणा: प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद से संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत देश में आपातकाल लागू करने की सिफारिश की।
  • कारण: सरकार ने तर्क दिया कि देश में 'आंतरिक गड़बड़ी' का खतरा है और विपक्षी दल देश की एकता और अखंडता को खतरे में डाल रहे हैं।
  • तत्काल प्रभाव: आपातकाल की घोषणा के तुरंत बाद, देश भर में प्रमुख विपक्षी नेताओं (जैसे जयप्रकाश नारायण, मोरारजी देसाई, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी आदि) को गिरफ्तार कर लिया गया।

3. आपातकाल के दौरान क्या हुआ? (What happened during Emergency?)

आपातकाल 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक, यानी लगभग 19 महीने तक चला।

  • मौलिक अधिकारों का निलंबन: नागरिकों के सभी मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए। सरकार ने निवारक नजरबंदी (preventive detention) कानूनों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया, जिसके तहत लोगों को बिना किसी आरोप के लंबे समय तक हिरासत में रखा जा सकता था।
  • प्रेस सेंसरशिप: प्रेस की स्वतंत्रता पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया। समाचार पत्रों को कोई भी खबर छापने से पहले सरकारी अनुमति लेनी पड़ती थी। 'इंडियन एक्सप्रेस' और 'स्टेट्समैन' जैसे अखबारों ने सेंसरशिप का विरोध किया। कई पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया।
  • विरोध प्रदर्शनों पर रोक: सभी प्रकार की हड़तालों, प्रदर्शनों और सार्वजनिक सभाओं पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
  • संविधान में संशोधन (42वां संशोधन, 1976):
    • संसद ने 42वां संविधान संशोधन पारित किया, जिसे 'लघु संविधान' भी कहा जाता है।
    • इसने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं का कार्यकाल 5 साल से बढ़ाकर 6 साल कर दिया।
    • इसने न्यायपालिका की शक्तियों को सीमित किया और संसद की सर्वोच्चता स्थापित करने का प्रयास किया।
    • इसने मौलिक कर्तव्यों को संविधान में जोड़ा।
  • सरकार की दमनकारी नीतियां और ज्यादतियाँ:
    • नसबंदी अभियान: संजय गांधी के नेतृत्व में जनसंख्या नियंत्रण के लिए जबरन नसबंदी अभियान चलाया गया, जिससे जनता में भारी आक्रोश था।
    • झुग्गी-झोपड़ी का विस्थापन: दिल्ली में झुग्गियों को हटाने और सौंदर्यीकरण के नाम पर लोगों को विस्थापित किया गया।
    • अतिरिक्त-संवैधानिक शक्तियां: संजय गांधी ने बिना किसी संवैधानिक पद के अत्यधिक शक्ति का प्रयोग किया।
    • पुलिस हिरासत में मौतें और यातनाएं भी रिपोर्ट की गईं।

4. आपातकाल के परिणाम (Consequences of Emergency)

  • लोकतांत्रिक संस्थाओं पर प्रभाव: आपातकाल ने भारतीय लोकतंत्र की संस्थाओं, विशेषकर न्यायपालिका और प्रेस की स्वतंत्रता को गंभीर रूप से प्रभावित किया।
  • नागरिक स्वतंत्रता का हनन: नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन हुआ, जिससे लोगों में भय और असंतोष बढ़ा।
  • शाह आयोग (Shah Commission): आपातकाल के बाद, जनता पार्टी सरकार ने न्यायमूर्ति जे.सी. शाह की अध्यक्षता में एक जांच आयोग का गठन किया, जिसने आपातकाल के दौरान हुई ज्यादतियों और सत्ता के दुरुपयोग की जांच की। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में सरकार की कई कार्रवाियों को असंवैधानिक और दमनकारी बताया।
  • विपक्षी एकता का उदय: आपातकाल ने विपक्षी दलों को एकजुट होने का अवसर दिया। विभिन्न दल, जैसे कि भारतीय लोक दल, जनसंघ, सोशलिस्ट पार्टी और कांग्रेस (ओ), मिलकर जनता पार्टी का गठन किया।

5. आपातकाल से सबक (Lessons from Emergency)

  • भारतीय लोकतंत्र की मजबूती: आपातकाल ने यह साबित किया कि भारत में लोकतंत्र की जड़ें कितनी गहरी हैं। जनता ने चुनाव के माध्यम से सत्तावादी सरकार को हराया।
  • संविधान में संशोधन (44वां संशोधन, 1978):
    • जनता पार्टी सरकार ने 44वां संविधान संशोधन पारित किया।
    • इसने 'आंतरिक गड़बड़ी' शब्द को हटाकर 'सशस्त्र विद्रोह' शब्द जोड़ा, ताकि भविष्य में सरकार आसानी से आपातकाल न लगा सके।
    • यह प्रावधान किया गया कि आपातकाल की घोषणा केवल कैबिनेट की लिखित सलाह पर ही की जा सकती है।
    • लोकसभा और राज्य विधानसभाओं का कार्यकाल पुनः 5 वर्ष कर दिया गया।
    • संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकार से हटाकर कानूनी अधिकार बना दिया गया।
  • न्यायपालिका की भूमिका: आपातकाल ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता और उसकी 'संविधान के मूल ढांचे' की रक्षा करने की भूमिका के महत्व को रेखांकित किया।
  • प्रेस की स्वतंत्रता: इसने प्रेस की स्वतंत्रता के महत्व को भी उजागर किया, जिसे लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है।

6. जनता पार्टी का उदय और पतन (Rise and Fall of Janata Party)

  • 1977 के चुनाव: आपातकाल के बाद, इंदिरा गांधी ने 1977 में लोकसभा चुनाव कराने का फैसला किया। विपक्षी दल एकजुट होकर जनता पार्टी के बैनर तले चुनाव लड़े और 'लोकतंत्र बचाओ' के नारे के साथ प्रचार किया।
  • कांग्रेस की हार: 1977 के चुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा। आजादी के बाद पहली बार कांग्रेस केंद्र में सत्ता से बाहर हुई। इंदिरा गांधी और संजय गांधी भी अपनी सीटों से चुनाव हार गए।
  • जनता पार्टी की जीत: जनता पार्टी को भारी बहुमत मिला और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में सरकार बनी। यह भारत में पहली गैर-कांग्रेसी सरकार थी।
  • जनता पार्टी का पतन: जनता पार्टी सरकार आंतरिक कलह, गुटबाजी और नेताओं के बीच मतभेदों के कारण केवल ढाई साल ही चल पाई। मोरारजी देसाई के बाद चरण सिंह प्रधानमंत्री बने, लेकिन वे भी बहुमत साबित नहीं कर पाए।
  • 1980 के चुनाव: जनता पार्टी सरकार के पतन के बाद 1980 में फिर से चुनाव हुए, जिसमें कांग्रेस (आई) ने इंदिरा गांधी के नेतृत्व में शानदार वापसी की और बहुमत के साथ सत्ता में लौटी।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

  1. भारत में आपातकाल की घोषणा किस तिथि को की गई थी?
    a) 25 जून 1974
    b) 25 जून 1975
    c) 26 जनवरी 1975
    d) 15 अगस्त 1975

  2. आपातकाल की घोषणा के समय भारत के प्रधानमंत्री कौन थे?
    a) मोरारजी देसाई
    b) जवाहरलाल नेहरू
    c) इंदिरा गांधी
    d) राजीव गांधी

  3. आपातकाल की घोषणा के लिए संविधान के किस अनुच्छेद का प्रयोग किया गया था?
    a) अनुच्छेद 356
    b) अनुच्छेद 360
    c) अनुच्छेद 352
    d) अनुच्छेद 370

  4. किस उच्च न्यायालय ने इंदिरा गांधी के 1971 के लोकसभा चुनाव को अवैध घोषित किया था?
    a) दिल्ली उच्च न्यायालय
    b) कलकत्ता उच्च न्यायालय
    c) इलाहाबाद उच्च न्यायालय
    d) मुंबई उच्च न्यायालय

  5. जयप्रकाश नारायण ने किस आंदोलन का नेतृत्व किया था और क्या नारा दिया था?
    a) चिपको आंदोलन, 'पर्यावरण बचाओ'
    b) संपूर्ण क्रांति, 'संपूर्ण क्रांति अब नारा है'
    c) नर्मदा बचाओ आंदोलन, 'नर्मदा बचाओ'
    d) दलित पैंथर आंदोलन, 'दलितों को न्याय'

  6. आपातकाल के दौरान सरकार द्वारा प्रेस पर लगाए गए प्रतिबंधों को क्या कहा जाता है?
    a) सेंसरशिप
    b) लिबरलाइजेशन
    c) निजीकरण
    d) राष्ट्रीयकरण

  7. किस संविधान संशोधन को 'लघु संविधान' के नाम से जाना जाता है और इसे आपातकाल के दौरान पारित किया गया था?
    a) 42वां संशोधन
    b) 44वां संशोधन
    c) 24वां संशोधन
    d) 25वां संशोधन

  8. आपातकाल के बाद, आपातकाल के दौरान हुई ज्यादतियों की जांच के लिए किस आयोग का गठन किया गया था?
    a) मंडल आयोग
    b) शाह आयोग
    c) कोठारी आयोग
    d) सरकारी आयोग

  9. 1977 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद, केंद्र में पहली गैर-कांग्रेसी सरकार किस पार्टी ने बनाई थी?
    a) भारतीय जनता पार्टी
    b) कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया
    c) जनता पार्टी
    d) द्रविड़ मुनेत्र कड़गम

  10. 44वें संविधान संशोधन (1978) द्वारा 'आंतरिक गड़बड़ी' शब्द को किस शब्द से प्रतिस्थापित किया गया था?
    a) बाहरी आक्रमण
    b) आर्थिक संकट
    c) सशस्त्र विद्रोह
    d) सांप्रदायिक दंगे


उत्तरमाला:

  1. b) 25 जून 1975
  2. c) इंदिरा गांधी
  3. c) अनुच्छेद 352
  4. c) इलाहाबाद उच्च न्यायालय
  5. b) संपूर्ण क्रांति, 'संपूर्ण क्रांति अब नारा है'
  6. a) सेंसरशिप
  7. a) 42वां संशोधन
  8. b) शाह आयोग
  9. c) जनता पार्टी
  10. c) सशस्त्र विद्रोह

मुझे उम्मीद है कि ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको इस अध्याय को गहराई से समझने और अपनी परीक्षाओं की तैयारी में मदद करेंगे। यदि आपके कोई और प्रश्न हैं, तो बेझिझक पूछें। शुभकामनाएँ!

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