Class 12 Political Science Notes Chapter 4 (भारत के विदेश संबंध) – Samkalin Vishwa Rajniti Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम समकालीन विश्व राजनीति के अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय 'भारत के विदेश संबंध' का विस्तृत अध्ययन करेंगे, जो आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अत्यंत सहायक सिद्ध होगा। इस अध्याय में हम जानेंगे कि स्वतंत्रता के बाद भारत ने किस प्रकार अपनी विदेश नीति का निर्माण किया और विभिन्न वैश्विक चुनौतियों का सामना करते हुए अपने राष्ट्रीय हितों को साधने का प्रयास किया।
अध्याय 4: भारत के विदेश संबंध
I. परिचय: स्वतंत्र भारत की विदेश नीति
- पृष्ठभूमि: 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद, भारत को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। शीत युद्ध का दौर शुरू हो चुका था, उपनिवेशवाद का अंत हो रहा था, और नए-नए स्वतंत्र हुए देशों के सामने अपनी पहचान बनाने की चुनौती थी।
- नेहरू की भूमिका: भारत के पहले प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भारत की विदेश नीति के निर्माण में केंद्रीय भूमिका निभाई। उनकी नीति के तीन मुख्य उद्देश्य थे:
- कठिन संघर्ष से प्राप्त संप्रभुता को बचाए रखना।
- क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखना।
- तेज गति से आर्थिक विकास करना।
- घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव: भारत की विदेश नीति पर घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों परिस्थितियों का गहरा प्रभाव पड़ा। गरीबी, विभाजन की त्रासदी और आर्थिक पिछड़ेपन जैसी आंतरिक समस्याओं ने नीति निर्माण को प्रभावित किया, जबकि शीत युद्ध और उपनिवेशवाद के अंत जैसी बाहरी घटनाओं ने भी दिशा तय की।
II. गुटनिरपेक्षता की नीति (Non-Alignment)
- अर्थ: गुटनिरपेक्षता का अर्थ किसी भी सैन्य गुट में शामिल न होना था। शीत युद्ध के दौरान विश्व दो गुटों में बंटा हुआ था - अमेरिका के नेतृत्व वाला पश्चिमी गुट और सोवियत संघ के नेतृत्व वाला पूर्वी गुट। भारत ने इन दोनों गुटों से दूरी बनाए रखने का फैसला किया।
- उद्देश्य:
- स्वतंत्र विदेश नीति का संचालन करना।
- अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना।
- नव-स्वतंत्र देशों को एक मंच पर लाना।
- उपनिवेशवाद, साम्राज्यवाद और नस्लवाद का विरोध करना।
- विश्व में शक्ति संतुलन बनाए रखने में योगदान देना।
- एशियाई एकता के प्रयास: नेहरू ने एशियाई एकता के लिए अथक प्रयास किए।
- एशियाई संबंध सम्मेलन (1947): भारत की पहल पर दिल्ली में आयोजित।
- बांडुंग सम्मेलन (1955): इंडोनेशिया के बांडुंग में आयोजित यह सम्मेलन एशियाई और अफ्रीकी देशों की एकता का प्रतीक बना। यहीं पर गुटनिरपेक्ष आंदोलन की नींव रखी गई।
- गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) की स्थापना (1961): बेलग्रेड (यूगोस्लाविया) में आयोजित पहले शिखर सम्मेलन में गुटनिरपेक्ष आंदोलन की औपचारिक स्थापना हुई। इसके संस्थापक सदस्य थे: जवाहरलाल नेहरू (भारत), गमाल अब्दुल नासिर (मिस्र), मार्शल टीटो (यूगोस्लाविया), सुकर्णो (इंडोनेशिया) और क्वामे न्क्रूमा (घाना)।
III. चीन के साथ संबंध
- शुरुआती दौर: "हिंदी-चीनी भाई-भाई" (1950 का दशक): स्वतंत्रता के बाद भारत और चीन के संबंध मधुर थे। भारत ने चीन की कम्युनिस्ट सरकार को मान्यता देने वाले पहले देशों में से एक था।
- पंचशील सिद्धांत (1954): 29 अप्रैल 1954 को भारत के प्रधानमंत्री नेहरू और चीन के प्रधानमंत्री चाऊ एन-लाई ने पंचशील के सिद्धांतों पर हस्ताक्षर किए। ये सिद्धांत थे:
- एक-दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान।
- एक-दूसरे पर आक्रमण न करना।
- एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना।
- समानता और पारस्परिक लाभ।
- शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व।
- विवाद के मुद्दे:
- तिब्बत समस्या (1950-1959): 1950 में चीन ने तिब्बत पर कब्जा कर लिया। भारत ने शुरुआत में इसका विरोध नहीं किया, लेकिन 1959 में जब चीन ने तिब्बत में विद्रोह को दबाया और दलाई लामा ने भारत में शरण मांगी, तो भारत ने उन्हें शरण दी। चीन ने इसे अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप माना।
- सीमा विवाद: भारत और चीन के बीच दो मुख्य सीमा विवाद थे:
- पश्चिमी क्षेत्र: लद्दाख के अक्साई चिन क्षेत्र पर चीन का दावा। चीन ने 1950 के दशक में इस क्षेत्र में एक रणनीतिक सड़क का निर्माण किया।
- पूर्वी क्षेत्र: अरुणाचल प्रदेश (तत्कालीन NEFA - नॉर्थ-ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी) पर चीन का दावा।
- भारत-चीन युद्ध (1962):
- कारण: सीमा विवाद, तिब्बत समस्या, चीन द्वारा भारत की अग्रगामी नीति (Forward Policy) पर आपत्ति।
- परिणाम: चीन ने एकतरफा युद्धविराम की घोषणा की और अपनी सेनाओं को वापस बुला लिया, लेकिन अक्साई चिन पर उसका कब्जा बना रहा।
- प्रभाव:
- भारत को सैन्य रूप से बड़ा झटका लगा।
- नेहरू की छवि को नुकसान पहुंचा और उनकी विदेश नीति की आलोचना हुई।
- भारत ने अपनी रक्षा नीति में बदलाव किए और सैन्य आधुनिकीकरण पर जोर दिया।
- कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) में विभाजन हुआ।
IV. पाकिस्तान के साथ संबंध
- विभाजन की विरासत: भारत और पाकिस्तान के संबंध विभाजन के बाद से ही तनावपूर्ण रहे हैं, जिसका मुख्य कारण कश्मीर मुद्दा है।
- 1947-48 का कश्मीर युद्ध: विभाजन के तुरंत बाद कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने भारत में विलय का फैसला किया, जिसके बाद पाकिस्तानी सेना और कबायलियों ने कश्मीर पर हमला कर दिया। भारत ने अपनी सेना भेजी और युद्ध हुआ। संयुक्त राष्ट्र के हस्तक्षेप से युद्धविराम हुआ, लेकिन कश्मीर का एक हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में चला गया (POK)।
- 1965 का युद्ध:
- कारण: पाकिस्तान ने कश्मीर पर कब्जा करने के उद्देश्य से 'ऑपरेशन जिब्राल्टर' शुरू किया। कच्छ के रण में भी झड़पें हुईं।
- परिणाम: भारत ने लाहौर तक हमला कर दिया। संयुक्त राष्ट्र के हस्तक्षेप से युद्धविराम हुआ।
- ताशकंद समझौता (1966): सोवियत संघ की मध्यस्थता से ताशकंद (उज्बेकिस्तान) में भारत के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के बीच समझौता हुआ। समझौते के बाद शास्त्री जी की रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु हो गई।
- 1971 का बांग्लादेश युद्ध:
- पृष्ठभूमि: पाकिस्तान दो हिस्सों (पूर्वी और पश्चिमी) में बंटा हुआ था। पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) में पश्चिमी पाकिस्तान के प्रभुत्व के खिलाफ जन आंदोलन चल रहा था, जिसका नेतृत्व शेख मुजीबुर रहमान की अवामी लीग कर रही थी। 1970 के चुनाव में अवामी लीग ने जीत हासिल की, लेकिन पश्चिमी पाकिस्तान ने सत्ता हस्तांतरित करने से इनकार कर दिया और पूर्वी पाकिस्तान में सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी।
- शरणार्थी संकट: पूर्वी पाकिस्तान से लाखों शरणार्थी भारत आ गए, जिससे भारत पर भारी आर्थिक और सामाजिक दबाव पड़ा।
- भारत का हस्तक्षेप: भारत ने पूर्वी पाकिस्तान के मुक्ति संग्राम का समर्थन किया। अगस्त 1971 में भारत ने सोवियत संघ के साथ 20 वर्षीय शांति और मैत्री संधि पर हस्ताक्षर किए, जिससे उसे अंतर्राष्ट्रीय समर्थन मिला।
- युद्ध: दिसंबर 1971 में पाकिस्तान ने भारत पर हमला कर दिया, जिसके बाद भारत ने पूर्वी पाकिस्तान में अपनी सेना भेजी। 10 दिनों के भीतर भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना को आत्मसमर्पण करने पर मजबूर कर दिया।
- परिणाम: पूर्वी पाकिस्तान एक स्वतंत्र देश 'बांग्लादेश' के रूप में अस्तित्व में आया।
- शिमला समझौता (1972): भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पाकिस्तान के राष्ट्रपति जुल्फिकार अली भुट्टो के बीच शिमला में समझौता हुआ, जिसमें दोनों देशों ने भविष्य के विवादों को द्विपक्षीय बातचीत से हल करने पर सहमति व्यक्त की।
V. भारत की परमाणु नीति
- पृष्ठभूमि:
- चीन ने 1964 में अपना परमाणु परीक्षण किया।
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य (अमेरिका, सोवियत संघ, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन) परमाणु शक्ति संपन्न थे।
- परमाणु अप्रसार संधि (NPT) 1968: इस संधि ने परमाणु शक्ति संपन्न देशों और गैर-परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच भेदभाव किया। भारत ने इसे भेदभावपूर्ण मानते हुए इस पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया।
- पहला परमाणु परीक्षण (मई 1974): भारत ने मई 1974 में पोखरण (राजस्थान) में अपना पहला परमाणु परीक्षण किया। भारत ने इसे "शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए" और "स्माइलिंग बुद्धा" नाम दिया।
- दूसरा परमाणु परीक्षण (मई 1998): भारत ने मई 1998 में पोखरण में पांच परमाणु परीक्षण किए (पोखरण-II)। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने घोषणा की कि भारत ने "न्यूनतम विश्वसनीय प्रतिरोधक क्षमता" हासिल कर ली है।
- भारत की परमाणु नीति के सिद्धांत:
- "नो फर्स्ट यूज" (पहले उपयोग न करने की नीति): भारत परमाणु हथियारों का उपयोग पहले नहीं करेगा।
- केवल परमाणु हमला होने की स्थिति में ही जवाबी कार्रवाई करेगा।
- गैर-परमाणु शक्ति संपन्न देशों के खिलाफ परमाणु हथियारों का उपयोग नहीं करेगा।
- न्यूनतम विश्वसनीय प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखना।
VI. भारत की बदलती विदेश नीति (शीत युद्ध के बाद)
- शीत युद्ध का अंत (1991): सोवियत संघ के विघटन के बाद विश्व में एकध्रुवीयता (अमेरिका का प्रभुत्व) का दौर शुरू हुआ।
- आर्थिक उदारीकरण: भारत ने 1991 में आर्थिक उदारीकरण की नीति अपनाई, जिससे उसकी विदेश नीति में भी आर्थिक आयामों का महत्व बढ़ा।
- बहुध्रुवीय विश्व की ओर: भारत अब एक बहुध्रुवीय विश्व की कल्पना करता है, जहाँ विभिन्न शक्तियाँ संतुलन बनाए रखें।
- नए संबंध:
- अमेरिका के साथ संबंध: शीत युद्ध के दौरान तनावपूर्ण रहे संबंधों में सुधार आया।
- रूस के साथ संबंध: रूस भारत का पारंपरिक मित्र बना रहा।
- इज़राइल के साथ संबंध: 1992 में पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित हुए।
- एशियाई देशों के साथ संबंध: "लुक ईस्ट" (अब "एक्ट ईस्ट") नीति के तहत दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ संबंधों को मजबूत किया गया।
- वैश्विक मंचों पर भूमिका: भारत संयुक्त राष्ट्र, WTO, G20 जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
VII. प्रमुख व्यक्ति और अवधारणाएँ
- जवाहरलाल नेहरू: गुटनिरपेक्षता, पंचशील, एशियाई एकता।
- लाल बहादुर शास्त्री: ताशकंद समझौता।
- इंदिरा गांधी: बांग्लादेश मुक्ति युद्ध, शिमला समझौता, पहला परमाणु परीक्षण।
- अटल बिहारी वाजपेयी: दूसरा परमाणु परीक्षण, "नो फर्स्ट यूज" नीति।
- गुटनिरपेक्षता: किसी भी गुट में शामिल न होना।
- पंचशील: शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के पांच सिद्धांत।
- शीत युद्ध: अमेरिका और सोवियत संघ के बीच वैचारिक और भू-राजनीतिक संघर्ष।
- उपनिवेशवाद: किसी देश द्वारा दूसरे देश पर राजनीतिक और आर्थिक नियंत्रण।
- परमाणु अप्रसार संधि (NPT): परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय संधि।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
-
गुटनिरपेक्ष आंदोलन का पहला शिखर सम्मेलन कब और कहाँ आयोजित किया गया था?
a) 1955, बांडुंग
b) 1961, बेलग्रेड
c) 1974, नई दिल्ली
d) 1965, ताशकंद -
पंचशील के सिद्धांतों पर भारत और चीन ने किस वर्ष हस्ताक्षर किए थे?
a) 1950
b) 1954
c) 1959
d) 1962 -
भारत-चीन युद्ध किस वर्ष हुआ था?
a) 1959
b) 1962
c) 1965
d) 1971 -
दलाई लामा ने भारत में कब शरण ली थी?
a) 1950
b) 1954
c) 1959
d) 1962 -
ताशकंद समझौता किन देशों के बीच हुआ था और कब?
a) भारत और चीन, 1962
b) भारत और पाकिस्तान, 1965
c) भारत और पाकिस्तान, 1966
d) भारत और बांग्लादेश, 1971 -
शिमला समझौता किन नेताओं के बीच हुआ था?
a) जवाहरलाल नेहरू और चाऊ एन-लाई
b) लाल बहादुर शास्त्री और अयूब खान
c) इंदिरा गांधी और जुल्फिकार अली भुट्टो
d) अटल बिहारी वाजपेयी और नवाज शरीफ -
भारत ने अपना पहला परमाणु परीक्षण कब किया था?
a) मई 1971
b) मई 1974
c) मई 1998
d) मई 1968 -
भारत की परमाणु नीति का मुख्य सिद्धांत क्या है?
a) पहले हमला करना
b) पहले उपयोग न करना (No First Use)
c) सभी देशों के खिलाफ उपयोग करना
d) केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए उपयोग करना (बिना हथियार बनाए) -
बांग्लादेश का निर्माण किस वर्ष हुआ था?
a) 1965
b) 1971
c) 1972
d) 1974 -
परमाणु अप्रसार संधि (NPT) पर भारत ने हस्ताक्षर क्यों नहीं किए?
a) भारत परमाणु हथियार नहीं बनाना चाहता था।
b) भारत को इस संधि की जानकारी नहीं थी।
c) भारत इसे भेदभावपूर्ण मानता था।
d) भारत को अमेरिका का समर्थन नहीं था।
MCQs के उत्तर:
- b) 1961, बेलग्रेड
- b) 1954
- b) 1962
- c) 1959
- c) भारत और पाकिस्तान, 1966
- c) इंदिरा गांधी और जुल्फिकार अली भुट्टो
- b) मई 1974
- b) पहले उपयोग न करना (No First Use)
- b) 1971
- c) भारत इसे भेदभावपूर्ण मानता था।
मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे। अपनी पढ़ाई जारी रखें!