Class 12 Political Science Notes Chapter 4 (Chapter 4) – Swatantra Bharat me Rajniti-II Book

प्रिय विद्यार्थियों, आज हम 'स्वतंत्र भारत में राजनीति-II' पुस्तक के अध्याय 4, 'लोकतांत्रिक पुनरुत्थान और भारतीय राजनीति के नए आयाम' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भारतीय राजनीति में आए बड़े बदलावों और नए रुझानों को समझने में हमारी मदद करता है।
अध्याय 4: लोकतांत्रिक पुनरुत्थान और भारतीय राजनीति के नए आयाम
यह अध्याय 1980 के दशक के बाद भारतीय राजनीति में आए महत्वपूर्ण बदलावों का विश्लेषण करता है, जिन्होंने देश की राजनीतिक दिशा को पूरी तरह से बदल दिया।
विस्तृत नोट्स:
1. आपातकाल के बाद की राजनीति (1977 का चुनाव और जनता पार्टी):
- 1977 का लोकसभा चुनाव: आपातकाल के बाद 1977 में हुए लोकसभा चुनाव भारतीय राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ थे।
- कांग्रेस पार्टी को पहली बार केंद्र में सत्ता से बाहर होना पड़ा। उत्तर भारत में उसे भारी हार का सामना करना पड़ा।
- विभिन्न विपक्षी दलों ने एकजुट होकर 'जनता पार्टी' का गठन किया और 'लोकतंत्र बचाओ' के नारे के साथ चुनाव लड़ा।
- जनता पार्टी ने बहुमत प्राप्त किया और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी सरकार बनी।
- जनता पार्टी सरकार का पतन: यह सरकार आंतरिक कलह और गुटबाजी के कारण केवल दो वर्षों (1977-1979) तक ही चल पाई। मोरारजी देसाई के बाद चौधरी चरण सिंह प्रधानमंत्री बने, लेकिन उनकी सरकार भी अल्पमत में रही।
- 1980 का चुनाव: जनता पार्टी की अस्थिरता के कारण मध्यावधि चुनाव हुए, जिसमें कांग्रेस ने इंदिरा गांधी के नेतृत्व में शानदार वापसी की और सत्ता में लौटी।
2. मंडल मुद्दा और सामाजिक न्याय:
- पृष्ठभूमि: भारत में लंबे समय से अन्य पिछड़े वर्गों (OBCs) के लिए आरक्षण की मांग उठ रही थी।
- मंडल आयोग (द्वितीय पिछड़ा वर्ग आयोग):
- 1978 में मोरारजी देसाई के नेतृत्व वाली जनता पार्टी सरकार ने सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों की स्थिति का अध्ययन करने और उनके उत्थान के उपायों पर सिफारिशें देने के लिए एक आयोग का गठन किया।
- इसके अध्यक्ष बिन्देश्वरी प्रसाद मंडल (बी.पी. मंडल) थे, इसलिए इसे 'मंडल आयोग' के नाम से जाना जाता है।
- आयोग ने 1980 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।
- सिफारिशें: मंडल आयोग ने केंद्र सरकार की नौकरियों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में अन्य पिछड़े वर्गों (OBCs) के लिए 27% आरक्षण की सिफारिश की।
- कार्यान्वयन: 1990 में, वी.पी. सिंह के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय मोर्चा सरकार ने मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने की घोषणा की।
- प्रभाव:
- इस निर्णय से देश भर में, विशेषकर अगड़ी जातियों के छात्रों द्वारा, व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए।
- सर्वोच्च न्यायालय ने 'इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ' (1992) मामले में मंडल आयोग की सिफारिशों को कुछ शर्तों के साथ बरकरार रखा, जिसमें 'क्रीमी लेयर' (मलाईदार परत) के सिद्धांत को शामिल किया गया।
- मंडल मुद्दे ने भारतीय राजनीति में 'पिछड़ों की राजनीति' को जन्म दिया और कई क्षेत्रीय दलों के उदय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसने सामाजिक न्याय के मुद्दे को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया।
3. नई आर्थिक नीति (1991):
- पृष्ठभूमि: 1990 के दशक की शुरुआत में भारत गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा था। विदेशी मुद्रा भंडार लगभग समाप्त हो चुका था, मुद्रास्फीति उच्च थी और सरकार पर भारी कर्ज था।
- सुधार: 1991 में, पी.वी. नरसिम्हा राव के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने तत्कालीन वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के मार्गदर्शन में व्यापक आर्थिक सुधारों की शुरुआत की।
- मुख्य स्तंभ (LPG मॉडल):
- उदारीकरण (Liberalization): उद्योगों और व्यापार पर लगे सरकारी नियंत्रणों और प्रतिबंधों को कम करना। लाइसेंस राज को समाप्त करना।
- निजीकरण (Privatization): सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों की हिस्सेदारी निजी क्षेत्र को बेचना या उन्हें निजी हाथों में सौंपना।
- वैश्वीकरण (Globalization): भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व अर्थव्यवस्था के साथ एकीकृत करना, विदेशी निवेश को बढ़ावा देना और आयात-निर्यात को आसान बनाना।
- प्रभाव: इन नीतियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को गति दी, विदेशी निवेश आकर्षित किया और आर्थिक विकास दर को बढ़ाया। हालांकि, आलोचकों का मानना है कि इसने असमानता बढ़ाई और कल्याणकारी राज्य की भूमिका को कम किया।
4. अयोध्या विवाद और हिंदुत्व:
- पृष्ठभूमि: अयोध्या में राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद को लेकर विवाद सदियों पुराना था। हिंदू संगठनों का मानना था कि यह भगवान राम का जन्मस्थान है और वहां एक प्राचीन मंदिर था जिसे तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी।
- राम जन्मभूमि आंदोलन: 1980 के दशक में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े संगठनों ने राम मंदिर निर्माण के लिए एक बड़ा आंदोलन शुरू किया।
- बाबरी मस्जिद विध्वंस: 6 दिसंबर 1992 को, अयोध्या में कारसेवकों की एक बड़ी भीड़ ने विवादित बाबरी मस्जिद को ढहा दिया।
- प्रभाव:
- इस घटना से देश भर में सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे, जिससे भारी जान-माल का नुकसान हुआ।
- इसने भारतीय राजनीति में हिंदुत्व की विचारधारा को मजबूत किया और भाजपा के राजनीतिक उदय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- इसने धर्मनिरपेक्षता की बहस को फिर से गरमा दिया।
- शाहबानो विवाद (1985): यह विवाद एक मुस्लिम महिला शाहबानो को तलाक के बाद गुजारा भत्ता देने से संबंधित था। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद सरकार ने 'मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 1986' पारित किया, जिसने धार्मिक व्यक्तिगत कानूनों और धर्मनिरपेक्षता पर बहस को तेज किया।
5. गठबंधन का युग (1989 के बाद):
- पृष्ठभूमि: 1989 के लोकसभा चुनाव के बाद किसी भी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, जिससे केंद्र में गठबंधन सरकारों का दौर शुरू हुआ।
- कारण:
- कांग्रेस के प्रभुत्व का अंत।
- क्षेत्रीय दलों का उदय और उनकी बढ़ती ताकत।
- सामाजिक और राजनीतिक ध्रुवीकरण।
- प्रमुख गठबंधन:
- राष्ट्रीय मोर्चा (National Front): 1989 में वी.पी. सिंह के नेतृत्व में।
- संयुक्त मोर्चा (United Front): 1996 में।
- राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA): 1998 में भाजपा के नेतृत्व में (अटल बिहारी वाजपेयी)।
- संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA): 2004 में कांग्रेस के नेतृत्व में (मनमोहन सिंह)।
- प्रभाव:
- गठबंधन की राजनीति ने क्षेत्रीय दलों को राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका दी।
- केंद्र-राज्य संबंध अधिक सहयोगात्मक और संघीय ढांचा मजबूत हुआ।
- राजनीतिक स्थिरता पर कभी-कभी नकारात्मक प्रभाव पड़ा, जिससे सरकारों का कार्यकाल छोटा रहा।
6. लोकतांत्रिक पुनरुत्थान (Democratic Resurgence):
भारतीय लोकतंत्र में तीन चरणों में पुनरुत्थान देखा गया है:
- प्रथम पुनरुत्थान (1950-60 के दशक): सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के साथ दलितों, आदिवासियों और महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी की शुरुआत।
- द्वितीय पुनरुत्थान (1980 के दशक): अन्य पिछड़े वर्गों (OBCs) की राजनीति में बढ़ती भागीदारी। मंडल आयोग के बाद यह और मुखर हुई, जिससे सत्ता में उनकी हिस्सेदारी बढ़ी।
- तृतीय पुनरुत्थान (1990 के दशक के बाद):
- बढ़ती भागीदारी: दलित, आदिवासी, महिला और युवा मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी में वृद्धि।
- गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) का प्रभाव: नागरिक समाज संगठन विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर सरकार पर दबाव डालते हैं।
- सूचना प्रौद्योगिकी का प्रभाव: सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने राजनीतिक संवाद और जनमत निर्माण को बदल दिया है।
- लोकतांत्रिक आधार का विस्तार: यह पुनरुत्थान भारतीय लोकतंत्र के आधार को व्यापक और समावेशी बनाता है।
7. भारतीय राजनीति के नए आयाम:
- सहमति का युग: प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच कई मुद्दों पर सहमति बनी है, जैसे नई आर्थिक नीति, OBC आरक्षण, राज्यों की बढ़ती भूमिका और सुशासन।
- राज्यों की बढ़ती भूमिका: गठबंधन की राजनीति के कारण राज्यों के मुख्यमंत्री और क्षेत्रीय दल राष्ट्रीय राजनीति में अधिक प्रभावी हो गए हैं। केंद्र सरकार को राज्यों की आकांक्षाओं को अधिक महत्व देना पड़ा है।
- गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और जन आंदोलनों का प्रभाव: नागरिक समाज संगठन, जैसे नर्मदा बचाओ आंदोलन, सूचना का अधिकार आंदोलन आदि, विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर सरकार पर दबाव डालते हैं और नीति निर्माण को प्रभावित करते हैं।
- सूचना प्रौद्योगिकी का प्रभाव: सोशल मीडिया, इंटरनेट और मोबाइल प्रौद्योगिकी ने राजनीतिक दलों को मतदाताओं तक पहुंचने, अभियान चलाने और जनमत को प्रभावित करने के नए तरीके दिए हैं।
- विकास और सुशासन पर जोर: चुनावी राजनीति में अब विकास, भ्रष्टाचार मुक्त शासन और सुशासन के मुद्दे अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs):
-
मंडल आयोग का गठन किस प्रधानमंत्री के कार्यकाल में हुआ था?
क) इंदिरा गांधी
ख) मोरारजी देसाई
ग) वी.पी. सिंह
घ) राजीव गांधी -
मंडल आयोग की मुख्य सिफारिश क्या थी?
क) अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षण
ख) अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण
ग) अन्य पिछड़े वर्गों (OBCs) के लिए 27% आरक्षण
घ) महिलाओं के लिए आरक्षण -
भारत में नई आर्थिक नीति किस वर्ष लागू की गई थी?
क) 1989
ख) 1990
ग) 1991
घ) 1992 -
नई आर्थिक नीति के समय भारत के वित्त मंत्री कौन थे?
क) पी. चिदंबरम
ख) अरुण जेटली
ग) मनमोहन सिंह
घ) प्रणब मुखर्जी -
बाबरी मस्जिद का विध्वंस किस वर्ष हुआ था?
क) 1989
ख) 1990
ग) 1991
घ) 1992 -
1977 के लोकसभा चुनाव में किस पार्टी को बहुमत मिला था?
क) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
ख) जनता पार्टी
ग) भारतीय जनता पार्टी
घ) संयुक्त मोर्चा -
'क्रीमी लेयर' का सिद्धांत किस आयोग की सिफारिशों से संबंधित है?
क) शाह आयोग
ख) सरकारिया आयोग
ग) मंडल आयोग
घ) कोठारी आयोग -
1989 के बाद भारतीय राजनीति में किस प्रवृत्ति का उदय हुआ?
क) एकदलीय प्रभुत्व
ख) गठबंधन की राजनीति
ग) राष्ट्रपति शासन का प्रभुत्व
घ) क्षेत्रीय दलों का अंत -
निम्नलिखित में से कौन-सा एक नई आर्थिक नीति (LPG मॉडल) का घटक नहीं है?
क) उदारीकरण
ख) निजीकरण
ग) वैश्वीकरण
घ) राष्ट्रीयकरण -
शाहबानो विवाद किस मुद्दे से संबंधित था?
क) आरक्षण नीति
ख) आर्थिक सुधार
ग) धार्मिक व्यक्तिगत कानून और महिला अधिकार
घ) केंद्र-राज्य संबंध
उत्तरमाला (MCQs):
- ख) मोरारजी देसाई
- ग) अन्य पिछड़े वर्गों (OBCs) के लिए 27% आरक्षण
- ग) 1991
- ग) मनमोहन सिंह
- घ) 1992
- ख) जनता पार्टी
- ग) मंडल आयोग
- ख) गठबंधन की राजनीति
- घ) राष्ट्रीयकरण
- ग) धार्मिक व्यक्तिगत कानून और महिला अधिकार
मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपके सरकारी परीक्षा की तैयारी में सहायक सिद्ध होंगे। इस अध्याय को ध्यानपूर्वक पढ़ें और महत्वपूर्ण घटनाओं तथा अवधारणाओं को याद रखें। शुभकामनाएँ!