Class 12 Political Science Notes Chapter 6 (Chapter 6) – Swatantra Bharat me Rajniti-II Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम आपकी पुस्तक 'स्वतंत्र भारत में राजनीति-II' के अध्याय 6, 'लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट', का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय भारतीय राजनीति के एक अत्यंत महत्वपूर्ण और विवादास्पद दौर को समझने में सहायक है, जो विभिन्न सरकारी परीक्षाओं के लिए भी महत्वपूर्ण है।
अध्याय 6: लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट
1. परिचय
1970 का दशक भारतीय राजनीति में भारी उथल-पुथल का दौर था। इस समय देश को कई आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप अंततः 1975 में आपातकाल की घोषणा हुई। यह दौर भारतीय लोकतंत्र की ताकत और कमजोरियों दोनों को उजागर करता है।
2. पृष्ठभूमि: आर्थिक संदर्भ और जन-असंतोष
- आर्थिक संकट: 1971 के बांग्लादेश युद्ध के बाद भारत की अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ पड़ा। अमेरिका ने भारत को मिलने वाली सभी सहायता रोक दी।
- अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव: 1973 के अंतर्राष्ट्रीय तेल संकट ने भारत में महंगाई को और बढ़ा दिया।
- घरेलू चुनौतियाँ: देश में औद्योगिक विकास की दर कम थी, बेरोजगारी बढ़ रही थी और खाद्यान्न उत्पादन अपर्याप्त था। सरकार ने कर्मचारियों के वेतन वृद्धि पर रोक लगा दी थी, जिससे जन-असंतोष बढ़ा।
- गैर-कांग्रेसी सरकारों का उदय: इस दौरान कई राज्यों में गैर-कांग्रेसी गठबंधन सरकारें बनीं, जिससे केंद्र में कांग्रेस के प्रभुत्व को चुनौती मिली।
- रेलवे हड़ताल (1974): जॉर्ज फर्नांडीस के नेतृत्व में रेलवे कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर देशव्यापी हड़ताल की, जिससे सरकार पर और दबाव बढ़ा।
3. गुजरात और बिहार आंदोलन
- गुजरात आंदोलन (1974):
- छात्रों ने खाद्य तेल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के खिलाफ आंदोलन शुरू किया।
- यह आंदोलन 'नव-निर्माण आंदोलन' के नाम से जाना गया।
- इसने तत्कालीन मुख्यमंत्री चिमनभाई पटेल की सरकार को इस्तीफा देने पर मजबूर किया और राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हुआ। बाद में विधानसभा चुनाव हुए।
- बिहार आंदोलन (1974):
- बिहार में भी छात्रों ने बढ़ती कीमतों, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन शुरू किया।
- इस आंदोलन का नेतृत्व समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने संभाला।
- जेपी ने छात्रों से आग्रह किया कि वे आंदोलन को केवल बिहार तक सीमित न रखें, बल्कि इसे देशव्यापी बनाएं।
- उन्होंने 'संपूर्ण क्रांति' का आह्वान किया और सेना, पुलिस तथा सरकारी कर्मचारियों से सरकार के 'अनैतिक' आदेशों को न मानने की अपील की।
- इस आंदोलन को गैर-कांग्रेसी दलों और विपक्षी नेताओं का व्यापक समर्थन मिला।
4. न्यायपालिका से टकराव
- संसद बनाम न्यायपालिका: 1970 के दशक में संसद और न्यायपालिका के बीच कई मुद्दों पर मतभेद उभरे, जिनमें भूमि सुधार, निवारक नजरबंदी और संपत्ति के अधिकार जैसे कानून शामिल थे।
- केशवानंद भारती मामला (1973): सर्वोच्च न्यायालय ने इस ऐतिहासिक मामले में 'संविधान के मूल ढांचे' (Basic Structure) का सिद्धांत प्रतिपादित किया। न्यायालय ने कहा कि संसद संविधान में संशोधन कर सकती है, लेकिन उसके मूल ढांचे को नहीं बदल सकती।
- न्यायाधीशों की नियुक्ति: सरकार ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता को चुनौती देते हुए 1973 में तीन वरिष्ठ न्यायाधीशों को दरकिनार कर ए.एन. रे को भारत का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया। 1975 में भी जस्टिस एच.आर. खन्ना को दरकिनार कर जस्टिस एम.एच. बेग को मुख्य न्यायाधीश बनाया गया।
5. आपातकाल की घोषणा (25 जून 1975)
- कारण:
- इलाहाबाद उच्च न्यायालय का फैसला (12 जून 1975): जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा ने इंदिरा गांधी के 1971 के लोकसभा चुनाव को अवैध घोषित कर दिया, क्योंकि उन्होंने चुनाव अभियान में सरकारी कर्मचारियों का इस्तेमाल किया था। न्यायालय ने उन्हें अगले 6 वर्षों तक कोई भी निर्वाचित पद धारण करने से रोक दिया।
- जेपी आंदोलन का बढ़ता प्रभाव: जेपी ने इंदिरा गांधी के इस्तीफे की मांग करते हुए देशव्यापी हड़ताल और विरोध प्रदर्शनों का आह्वान किया।
- आंतरिक गड़बड़ी: सरकार ने देश में 'आंतरिक गड़बड़ी' का हवाला देते हुए आपातकाल की घोषणा की।
- संवैधानिक प्रावधान: संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) के आधार पर आपातकाल की घोषणा की गई।
- परिणाम:
- विपक्षी नेताओं की बड़े पैमाने पर गिरफ्तारी (जयप्रकाश नारायण, मोरारजी देसाई, अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी, चरण सिंह आदि)।
- प्रेस सेंसरशिप लागू की गई, जिससे समाचार पत्रों को कुछ भी छापने से पहले सरकारी अनुमति लेनी पड़ती थी।
- नागरिकों के मौलिक अधिकार निष्प्रभावी हो गए, और वे अपने अधिकारों की बहाली के लिए अदालत नहीं जा सकते थे।
- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
- निवारक नजरबंदी कानूनों का व्यापक दुरुपयोग हुआ।
- सरकार के तर्क: सरकार ने तर्क दिया कि देश की एकता, अखंडता, विकास और व्यवस्था बनाए रखने के लिए आपातकाल आवश्यक था।
- आलोचना: आलोचकों ने इसे लोकतंत्र पर हमला, सत्ता का दुरुपयोग और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन बताया।
6. आपातकाल के दौरान की घटनाएँ
- संजय गांधी की भूमिका: इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी ने बिना किसी आधिकारिक पद के अत्यधिक शक्ति और प्रभाव का प्रयोग किया।
- सरकार के कार्यक्रम:
- बीस सूत्री कार्यक्रम: सरकार ने आर्थिक सुधारों और गरीबों के कल्याण के लिए बीस सूत्री कार्यक्रम की घोषणा की।
- अनिवार्य नसबंदी अभियान: जनसंख्या नियंत्रण के लिए बड़े पैमाने पर अनिवार्य नसबंदी अभियान चलाए गए, जिसमें जबरदस्ती के कई मामले सामने आए।
- झुग्गी-झोपड़ी हटाना: दिल्ली सहित कई शहरों में झुग्गी-झोपड़ी हटाने के अभियान चलाए गए, जिससे हजारों लोग विस्थापित हुए (जैसे दिल्ली में तुर्कमान गेट घटना)।
- 42वाँ संविधान संशोधन (1976):
- इस संशोधन को 'लघु संविधान' (Mini-Constitution) भी कहा जाता है।
- इसने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं का कार्यकाल 5 से बढ़ाकर 6 वर्ष कर दिया।
- न्यायपालिका की समीक्षा शक्तियों को सीमित किया गया।
- संविधान की प्रस्तावना में 'समाजवादी' और 'पंथनिरपेक्ष' शब्द जोड़े गए।
7. आपातकाल के बाद: चुनाव और जनता पार्टी
- चुनाव की घोषणा (1977): सरकार ने आपातकाल हटाने और लोकसभा चुनाव कराने का फैसला किया।
- जनता पार्टी का गठन: आपातकाल के विरोध में कांग्रेस (ओ), सोशलिस्ट पार्टी, भारतीय लोक दल और जनसंघ जैसे प्रमुख विपक्षी दलों ने मिलकर 'जनता पार्टी' का गठन किया।
- 1977 के चुनाव परिणाम:
- यह चुनाव भारतीय राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ था। जनता पार्टी ने 'लोकतंत्र बचाओ' के नारे के साथ चुनाव लड़ा।
- कांग्रेस पार्टी को पहली बार केंद्र में सत्ता से बाहर होना पड़ा। जनता पार्टी और उसके सहयोगियों को 542 में से 330 सीटें मिलीं।
- इंदिरा गांधी और संजय गांधी भी अपने निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव हार गए।
- उत्तर भारत में कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया, जबकि दक्षिण भारत में उसे कुछ सफलता मिली।
- जनता पार्टी की सरकार:
- मोरारजी देसाई जनता पार्टी के पहले प्रधानमंत्री बने।
- जनता पार्टी की सरकार आंतरिक कलह और गुटबाजी के कारण अस्थिर रही। मोरारजी देसाई के बाद चौधरी चरण सिंह प्रधानमंत्री बने, लेकिन उनकी सरकार भी ज्यादा समय तक नहीं चल पाई।
- शाह आयोग: जनता पार्टी सरकार ने आपातकाल के दौरान हुई ज्यादतियों की जांच के लिए जस्टिस जे.सी. शाह की अध्यक्षता में 'शाह आयोग' का गठन किया। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में आपातकाल के दौरान सत्ता के दुरुपयोग और मानवाधिकारों के उल्लंघन की कई घटनाओं का खुलासा किया।
- 44वाँ संविधान संशोधन (1978): जनता पार्टी सरकार ने 42वें संविधान संशोधन के कई प्रावधानों को निरस्त करने के लिए यह संशोधन पारित किया। इसने लोकसभा का कार्यकाल वापस 5 वर्ष किया और 'आंतरिक गड़बड़ी' शब्द को बदलकर 'सशस्त्र विद्रोह' किया, ताकि भविष्य में आपातकाल के दुरुपयोग को रोका जा सके। संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकार से हटाकर कानूनी अधिकार बनाया गया।
8. आपातकाल के सबक
- लोकतंत्र की मजबूती: आपातकाल ने भारतीय लोकतंत्र की मजबूती और लचीलेपन को साबित किया। विषम परिस्थितियों के बावजूद, लोकतांत्रिक भावना जीवित रही और लोगों ने चुनाव के माध्यम से सत्ता परिवर्तन किया।
- नागरिक स्वतंत्रता का महत्व: इसने नागरिक स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों के महत्व को रेखांकित किया।
- संविधान के मूल ढांचे का सिद्धांत: आपातकाल ने संविधान के 'मूल ढांचे' के सिद्धांत और न्यायपालिका की भूमिका की पुष्टि की।
- आपातकाल के प्रावधानों का दुरुपयोग: भविष्य में आपातकाल के प्रावधानों के दुरुपयोग को रोकने के लिए संवैधानिक संशोधन किए गए।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
-
गुजरात में छात्र आंदोलन किस वर्ष हुआ था?
a) 1971
b) 1973
c) 1974
d) 1975 -
'संपूर्ण क्रांति' का आह्वान किसने किया था?
a) इंदिरा गांधी
b) मोरारजी देसाई
c) जयप्रकाश नारायण
d) जॉर्ज फर्नांडीस -
केशवानंद भारती मामला किस वर्ष से संबंधित है, जिसमें 'संविधान के मूल ढांचे' का सिद्धांत प्रतिपादित किया गया था?
a) 1971
b) 1973
c) 1975
d) 1977 -
इंदिरा गांधी के 1971 के लोकसभा चुनाव को किस उच्च न्यायालय ने अवैध घोषित किया था?
a) दिल्ली उच्च न्यायालय
b) मुंबई उच्च न्यायालय
c) इलाहाबाद उच्च न्यायालय
d) कलकत्ता उच्च न्यायालय -
भारत में आंतरिक आपातकाल की घोषणा संविधान के किस अनुच्छेद के तहत की गई थी?
a) अनुच्छेद 352
b) अनुच्छेद 356
c) अनुच्छेद 360
d) अनुच्छेद 370 -
आपातकाल के दौरान सरकार द्वारा कौन सा संविधान संशोधन पारित किया गया था, जिसे 'लघु संविधान' भी कहा जाता है?
a) 40वाँ संशोधन
b) 42वाँ संशोधन
c) 44वाँ संशोधन
d) 46वाँ संशोधन -
1977 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की हार के बाद, जनता पार्टी के पहले प्रधानमंत्री कौन बने?
a) चौधरी चरण सिंह
b) अटल बिहारी वाजपेयी
c) मोरारजी देसाई
d) जयप्रकाश नारायण -
आपातकाल की ज्यादतियों की जांच के लिए किस आयोग का गठन किया गया था?
a) कोठारी आयोग
b) मंडल आयोग
c) शाह आयोग
d) सच्चर आयोग -
44वें संविधान संशोधन (1978) का मुख्य उद्देश्य क्या था?
a) लोकसभा का कार्यकाल 6 वर्ष करना
b) संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाना
c) 42वें संशोधन के कई प्रावधानों को निरस्त करना
d) प्रस्तावना में 'समाजवादी' और 'पंथनिरपेक्ष' शब्द जोड़ना -
आपातकाल के दौरान किस संगठन पर प्रतिबंध लगाया गया था?
a) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
b) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
c) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS)
d) द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK)
उत्तरमाला:
- c) 1974
- c) जयप्रकाश नारायण
- b) 1973
- c) इलाहाबाद उच्च न्यायालय
- a) अनुच्छेद 352
- b) 42वाँ संशोधन
- c) मोरारजी देसाई
- c) शाह आयोग
- c) 42वें संशोधन के कई प्रावधानों को निरस्त करना
- c) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS)
मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको इस अध्याय को गहराई से समझने और आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होंगे। किसी भी अन्य प्रश्न के लिए आप पूछ सकते हैं।