Class 12 Political Science Notes Chapter 7 (Chapter 7) – Swatantra Bharat me Rajniti-II Book

Swatantra Bharat me Rajniti-II
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम आपकी पुस्तक 'स्वतंत्र भारत में राजनीति-II' के अध्याय 7 'क्षेत्रीय आकांक्षाएँ' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय उन विभिन्न चुनौतियों और मांगों पर प्रकाश डालता है जो भारत की विविधतापूर्ण संघीय व्यवस्था में समय-समय पर उठती रही हैं। सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें भारत की एकता और अखंडता को बनाए रखने में सरकार की नीतियों और विभिन्न क्षेत्रीय आंदोलनों का विस्तृत विवरण है।


अध्याय 7: क्षेत्रीय आकांक्षाएँ (Regional Aspirations)

परिचय:
भारत एक विशाल और विविधतापूर्ण देश है, जहाँ विभिन्न भाषाएँ, संस्कृतियाँ, धर्म और जातीय समूह निवास करते हैं। स्वतंत्रता के बाद, भारतीय संघ ने इस विविधता को समायोजित करने का प्रयास किया। क्षेत्रीय आकांक्षाएँ, जो किसी विशेष क्षेत्र के लोगों द्वारा अपनी पहचान, स्वायत्तता, विकास या कभी-कभी अलग राज्य/देश की मांग के रूप में व्यक्त होती हैं, भारतीय राजनीति का एक अभिन्न अंग रही हैं। इन आकांक्षाओं को अक्सर राष्ट्र-निर्माण के लिए चुनौती के रूप में देखा जाता है, लेकिन भारतीय लोकतंत्र ने इन्हें समायोजित करने का एक अनूठा तरीका विकसित किया है।

1. भारत में विविधता और क्षेत्रीयता:

  • संघीय ढाँचा: भारत ने एक संघीय ढाँचा अपनाया, जहाँ राज्यों को अपनी पहचान और स्वायत्तता बनाए रखने का अधिकार है।
  • भाषा के आधार पर राज्यों का पुनर्गठन: स्वतंत्रता के बाद, भाषा के आधार पर राज्यों के पुनर्गठन की मांग उठी। 1953 में राज्य पुनर्गठन आयोग (States Reorganisation Commission - SRC) का गठन हुआ, जिसकी सिफारिशों के आधार पर 1956 में 14 राज्य और 6 केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए। यह भारत की विविधता को स्वीकार करने का एक महत्वपूर्ण कदम था।
  • लोकतांत्रिक समाधान: भारत ने क्षेत्रीय आकांक्षाओं को बलपूर्वक दबाने के बजाय लोकतांत्रिक बातचीत, समझौतों और संवैधानिक प्रावधानों के माध्यम से हल करने का प्रयास किया है।

2. क्षेत्रीय आकांक्षाओं के विभिन्न रूप:

  • अलग राज्य की मांग: भाषाई आधार पर (जैसे आंध्र प्रदेश), सांस्कृतिक पहचान के आधार पर (जैसे नागालैंड, मिजोरम), या आर्थिक पिछड़ेपन के आधार पर (जैसे झारखंड, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड)।
  • पूर्ण राज्य का दर्जा: केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त करने की मांग (जैसे हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, त्रिपुरा)।
  • अधिक स्वायत्तता की मांग: राज्यों द्वारा केंद्र से अधिक वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियाँ प्राप्त करने की मांग (जैसे पंजाब में आनंदपुर साहिब प्रस्ताव)।
  • आर्थिक विकास की मांग: किसी क्षेत्र द्वारा अपने आर्थिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए विशेष पैकेज या नीतियों की मांग।
  • अलगाववाद: कुछ मामलों में, क्षेत्रीय आकांक्षाएँ अलगाववाद का रूप ले लेती हैं, जहाँ एक अलग देश की मांग की जाती है (जैसे कश्मीर में कुछ समूह, पूर्वोत्तर में कुछ विद्रोही समूह)।

3. जम्मू-कश्मीर (Jammu & Kashmir):

  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:
    • 1947 में, जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने भारत के साथ 'विलय पत्र' (Instrument of Accession) पर हस्ताक्षर किए, जिससे यह भारत का अभिन्न अंग बना।
    • भारत ने अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा दिया, जिसमें रक्षा, विदेश मामले और संचार को छोड़कर अन्य सभी मामलों में राज्य को अपनी विधानसभा की सहमति से कानून बनाने की शक्ति थी।
    • 'कश्मीरियत' (Kashmiriyat) की अवधारणा - कश्मीर की अनूठी सांस्कृतिक पहचान, जिसमें विभिन्न धर्मों और परंपराओं का सह-अस्तित्व शामिल है।
  • क्षेत्रीय आकांक्षाएँ और संघर्ष:
    • स्वायत्तता की मांग: राज्य के भीतर कुछ समूह अनुच्छेद 370 के तहत अधिक स्वायत्तता की मांग करते रहे हैं।
    • अलगाववाद: 1980 के दशक के अंत से, पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद और अलगाववादी आंदोलनों ने राज्य को प्रभावित किया। जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) जैसे संगठनों ने एक स्वतंत्र कश्मीर की मांग की।
    • धारा 370 और 35A का निरसन: 5 अगस्त 2019 को, भारत सरकार ने अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधानों को निरस्त कर दिया और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों - जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख में विभाजित कर दिया। यह एक महत्वपूर्ण और विवादास्पद कदम था।
  • प्रमुख नेता: शेख अब्दुल्ला (नेशनल कॉन्फ्रेंस के संस्थापक), फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती।

4. पंजाब:

  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:
    • 1947 के विभाजन से पंजाब सबसे अधिक प्रभावित हुआ।
    • 1966 में, भाषा के आधार पर पंजाब का पुनर्गठन हुआ, जिससे पंजाब (पंजाबी भाषी), हरियाणा (हिंदी भाषी) और हिमाचल प्रदेश (पहाड़ी भाषी) राज्य बने। चंडीगढ़ को दोनों राज्यों की राजधानी बनाया गया।
  • क्षेत्रीय आकांक्षाएँ और संघर्ष:
    • अकाली दल की मांगें: अकाली दल ने पंजाब को अधिक स्वायत्तता देने, चंडीगढ़ को पूरी तरह पंजाब को सौंपने, रावी-ब्यास नदियों के पानी के बंटवारे पर पुनर्विचार करने और सेना में सिखों के लिए विशेष कोटा जैसी मांगें उठाईं।
    • आनंदपुर साहिब प्रस्ताव (1973): अकाली दल ने इस प्रस्ताव में केंद्र-राज्य संबंधों को पुनर्गठित करने और राज्यों को अधिक स्वायत्तता देने की मांग की।
    • चरमपंथ का उदय: 1980 के दशक में, जरनैल सिंह भिंडरांवाले के नेतृत्व में एक चरमपंथी आंदोलन ने खालिस्तान (अलग सिख राष्ट्र) की मांग की।
    • ऑपरेशन ब्लू स्टार (जून 1984): भारतीय सेना ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में छिपे आतंकवादियों को निकालने के लिए यह अभियान चलाया, जिससे सिख समुदाय में गहरा रोष उत्पन्न हुआ।
    • 1984 के सिख विरोधी दंगे: इंदिरा गांधी की हत्या के बाद, दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में सिखों के खिलाफ व्यापक हिंसा हुई।
    • राजीव-लोंगोवाल समझौता (1985): राजीव गांधी और अकाली दल के अध्यक्ष हरचंद सिंह लोंगोवाल के बीच एक समझौता हुआ, जिसने पंजाब में शांति बहाल करने में मदद की।
  • शांति की बहाली: 1990 के दशक के मध्य तक, पंजाब में शांति और सामान्य स्थिति बहाल हो गई।

5. पूर्वोत्तर भारत:

  • विविधता और चुनौतियाँ:
    • पूर्वोत्तर भारत में 'सेवन सिस्टर्स' (असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा) और सिक्किम शामिल हैं।
    • यह क्षेत्र भौगोलिक रूप से अलग-थलग, अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं से घिरा और जातीय तथा भाषाई रूप से अत्यधिक विविध है।
    • आर्थिक पिछड़ापन, बुनियादी ढांचे की कमी और बाहरी लोगों के मुद्दे (प्रवासन) यहाँ की प्रमुख चुनौतियाँ हैं।
  • राज्यों का पुनर्गठन:
    • स्वतंत्रता के समय, असम ही एकमात्र बड़ा राज्य था।
    • नागालैंड (1963), मेघालय (1972), मणिपुर (1972), त्रिपुरा (1972), अरुणाचल प्रदेश (1987) और मिजोरम (1987) जैसे राज्य असम से अलग होकर बने।
  • प्रमुख आंदोलन और मुद्दे:
    • नागालैंड: नागा नेशनल काउंसिल (NNC) के तहत अंगामी जापू फिजो के नेतृत्व में एक स्वतंत्र नागालैंड की मांग। बाद में नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड (NSCN) जैसे समूह सक्रिय हुए।
    • मिजोरम: मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) के लालडेंगा के नेतृत्व में 1966 में एक स्वतंत्र मिजोरम की मांग को लेकर सशस्त्र विद्रोह। 1986 में मिजो शांति समझौता हुआ, जिससे मिजोरम को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला और लालडेंगा मुख्यमंत्री बने।
    • असम:
      • बाहरी लोगों का मुद्दा: बांग्लादेश से अवैध प्रवासियों के आगमन के कारण स्थानीय पहचान और संसाधनों पर खतरे की आशंका से असम आंदोलन (1979-1985) चला।
      • असम गण परिषद (AGP) का गठन हुआ।
      • असम समझौता (1985): राजीव गांधी सरकार और असम आंदोलन के नेताओं के बीच समझौता, जिसके तहत अवैध प्रवासियों की पहचान और निर्वासन का प्रावधान किया गया।
      • यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (ULFA) जैसे उग्रवादी समूह भी सक्रिय रहे हैं।
    • त्रिपुरा और मणिपुर: इन राज्यों में भी जातीय संघर्ष और अलगाववादी आंदोलन देखे गए हैं।
  • समाधान: केंद्र सरकार ने बातचीत, शांति समझौतों और विकास परियोजनाओं के माध्यम से इन आकांक्षाओं को संबोधित करने का प्रयास किया है।

निष्कर्ष:
क्षेत्रीय आकांक्षाएँ भारतीय लोकतंत्र की जीवंतता का प्रमाण हैं। भारत ने इन आकांक्षाओं को समायोजित करने के लिए बातचीत, संवैधानिक संशोधन, राज्य पुनर्गठन और विकास नीतियों का उपयोग किया है। यह दर्शाता है कि एक मजबूत संघीय ढाँचा और लोकतांत्रिक प्रक्रियाएँ विविधता को समायोजित करने और राष्ट्र-निर्माण को मजबूत करने में सहायक होती हैं।


बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs):

  1. आनंदपुर साहिब प्रस्ताव (1973) का संबंध किस राज्य से था?
    a) जम्मू-कश्मीर
    b) पंजाब
    c) असम
    d) मिजोरम

  2. ऑपरेशन ब्लू स्टार किस वर्ष हुआ था?
    a) 1980
    b) 1982
    c) 1984
    d) 1986

  3. मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) के संस्थापक कौन थे?
    a) शेख अब्दुल्ला
    b) जरनैल सिंह भिंडरांवाले
    c) लालडेंगा
    d) अंगामी जापू फिजो

  4. जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय किस दस्तावेज़ के तहत हुआ था?
    a) शिमला समझौता
    b) विलय पत्र
    c) ताशकंद समझौता
    d) लाहौर घोषणा

  5. राज्य पुनर्गठन आयोग (SRC) का गठन किस वर्ष किया गया था?
    a) 1947
    b) 1950
    c) 1953
    d) 1956

  6. पूर्वोत्तर भारत के किस राज्य को 'सेवन सिस्टर्स' में शामिल नहीं किया जाता है?
    a) सिक्किम
    b) असम
    c) मेघालय
    d) त्रिपुरा

  7. असम आंदोलन का मुख्य मुद्दा क्या था?
    a) अधिक स्वायत्तता की मांग
    b) अलग राज्य की मांग
    c) बांग्लादेशी प्रवासियों का मुद्दा
    d) भाषाई पुनर्गठन

  8. किस अनुच्छेद के तहत जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा प्राप्त था, जिसे 2019 में निरस्त कर दिया गया?
    a) अनुच्छेद 371
    b) अनुच्छेद 370
    c) अनुच्छेद 356
    d) अनुच्छेद 360

  9. 1984 के सिख विरोधी दंगे किस घटना के बाद हुए थे?
    a) ऑपरेशन ब्लू स्टार
    b) आनंदपुर साहिब प्रस्ताव
    c) इंदिरा गांधी की हत्या
    d) राजीव-लोंगोवाल समझौता

  10. 'कश्मीरियत' शब्द का क्या अर्थ है?
    a) कश्मीर का अलगाववादी आंदोलन
    b) कश्मीर की अनूठी सांस्कृतिक पहचान
    c) कश्मीर में आतंकवाद का नाम
    d) कश्मीर के आर्थिक विकास की योजना


उत्तरमाला:

  1. b) पंजाब
  2. c) 1984
  3. c) लालडेंगा
  4. b) विलय पत्र
  5. c) 1953
  6. a) सिक्किम (सिक्किम को 'सेवन सिस्टर्स' के बजाय 'ब्रदर' के रूप में देखा जाता है, क्योंकि यह बाद में शामिल हुआ)
  7. c) बांग्लादेशी प्रवासियों का मुद्दा
  8. b) अनुच्छेद 370
  9. c) इंदिरा गांधी की हत्या
  10. b) कश्मीर की अनूठी सांस्कृतिक पहचान

मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको इस अध्याय को समझने और सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होंगे। किसी भी अन्य प्रश्न के लिए आप पूछ सकते हैं।

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