Class 12 Political Science Notes Chapter 8 (Chapter 8) – Swatantra Bharat me Rajniti-II Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम आपकी 'स्वतंत्र भारत में राजनीति-II' पुस्तक के अध्याय 8, 'भारतीय राजनीति: नए बदलाव' पर विस्तार से चर्चा करेंगे। यह अध्याय भारतीय राजनीति में आए महत्वपूर्ण परिवर्तनों को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, विशेषकर उन विद्यार्थियों के लिए जो विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। इस अध्याय में हम 1989 के बाद भारतीय राजनीति में आए प्रमुख मोड़ों, जैसे कांग्रेस प्रणाली के अंत, गठबंधन की राजनीति के उदय, मंडल मुद्दे, नई आर्थिक नीति, बाबरी मस्जिद विध्वंस और नई सहमतियों के विकास का विश्लेषण करेंगे।
अध्याय 8: भारतीय राजनीति: नए बदलाव (Indian Politics: New Changes)
परिचय:
1989 के बाद भारतीय राजनीति में कई बड़े बदलाव आए, जिन्होंने एक दल के प्रभुत्व के युग को समाप्त कर दिया और गठबंधन की राजनीति का नया दौर शुरू किया। इस अवधि में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक मोर्चों पर कई नए मुद्दे उभरे, जिन्होंने भारतीय लोकतंत्र की दिशा को नया आकार दिया।
1. कांग्रेस प्रणाली का अंत और गठबंधन का युग (End of Congress System and Era of Coalitions)
- 1989 के लोकसभा चुनाव:
- इन चुनावों में कांग्रेस पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। यह 1980 के बाद पहली बार था जब कांग्रेस को बहुमत से कम सीटें मिलीं।
- कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनी रही लेकिन बहुमत से काफी दूर थी।
- जनता दल के नेतृत्व में राष्ट्रीय मोर्चा (National Front) सरकार बनी, जिसे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और वाम मोर्चे (Left Front) ने बाहर से समर्थन दिया। यह एक गठबंधन सरकार थी।
- वी.पी. सिंह राष्ट्रीय मोर्चा सरकार के प्रधानमंत्री बने।
- यह भारतीय राजनीति में गठबंधन के युग की शुरुआत थी, जहाँ किसी एक दल का प्रभुत्व समाप्त हो गया और विभिन्न दलों को मिलकर सरकार बनानी पड़ी।
- गठबंधन की राजनीति का उदय:
- 1989 के बाद से, भारतीय राजनीति में गठबंधन सरकारें एक सामान्य बात हो गईं।
- क्षेत्रीय दलों की भूमिका और महत्व में वृद्धि हुई, क्योंकि वे राष्ट्रीय स्तर पर सरकार बनाने में महत्वपूर्ण साझेदार बन गए।
2. मंडल मुद्दा (Mandal Issue)
- पृष्ठभूमि:
- भारत सरकार ने 1953 में काका कालेलकर की अध्यक्षता में पहला पिछड़ा वर्ग आयोग नियुक्त किया था, जिसने अपनी रिपोर्ट 1955 में प्रस्तुत की।
- जनता पार्टी सरकार ने 1979 में बिंदेश्वरी प्रसाद मंडल (बी.पी. मंडल) की अध्यक्षता में दूसरा पिछड़ा वर्ग आयोग नियुक्त किया, जिसे आमतौर पर मंडल आयोग के नाम से जाना जाता है।
- मंडल आयोग की सिफारिशें (1980):
- आयोग ने अपनी रिपोर्ट 1980 में प्रस्तुत की।
- इसने सिफारिश की कि सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षण संस्थानों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27% आरक्षण दिया जाए।
- आयोग ने पाया कि ओबीसी की आबादी कुल आबादी का लगभग 52% है।
- सिफारिशों का लागू होना:
- अगस्त 1990 में, प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय मोर्चा सरकार ने मंडल आयोग की एक प्रमुख सिफारिश को लागू करने की घोषणा की।
- इस घोषणा से देश भर में भारी विरोध प्रदर्शन हुए, खासकर उत्तरी भारत के शहरों में।
- आरक्षण के समर्थकों और विरोधियों के बीच तीखी बहस छिड़ गई।
- सर्वोच्च न्यायालय का फैसला (इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ, 1992):
- सर्वोच्च न्यायालय ने मंडल आयोग की सिफारिशों को बरकरार रखा, लेकिन 'क्रीमी लेयर' (Creamy Layer) के सिद्धांत को भी लागू किया। इसके तहत, पिछड़े वर्गों के उन सदस्यों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा जो सामाजिक और आर्थिक रूप से संपन्न हैं।
- प्रभाव:
- मंडल मुद्दे ने भारतीय राजनीति में ओबीसी राजनीति को केंद्र में ला दिया।
- कई नए क्षेत्रीय दल उभरे जिन्होंने ओबीसी समुदायों के हितों का प्रतिनिधित्व किया।
- सामाजिक न्याय और आरक्षण की बहस भारतीय राजनीति का एक स्थायी हिस्सा बन गई।
3. नई आर्थिक नीति (New Economic Policy - 1991)
- पृष्ठभूमि:
- 1991 में भारत को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा। विदेशी मुद्रा भंडार लगभग समाप्त हो गया था, और सरकार के पास ऋण चुकाने के लिए पर्याप्त धन नहीं था।
- इस संकट से निपटने के लिए, भारत को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक से ऋण लेना पड़ा।
- सुधारों की शुरुआत:
- प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव और वित्त मंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में 1991 में नई आर्थिक नीति की शुरुआत की गई।
- इस नीति को उदारीकरण (Liberalisation), निजीकरण (Privatisation) और वैश्वीकरण (Globalisation - LPG) के नाम से जाना जाता है।
- प्रमुख बिंदु:
- उदारीकरण: अर्थव्यवस्था पर सरकारी नियंत्रण कम करना, उद्योगों को लाइसेंस राज से मुक्ति दिलाना, व्यापार बाधाएं कम करना।
- निजीकरण: सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों को निजी क्षेत्र को बेचना या उनकी हिस्सेदारी कम करना।
- वैश्वीकरण: भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व अर्थव्यवस्था के साथ एकीकृत करना, विदेशी निवेश को बढ़ावा देना।
- प्रभाव:
- इन नीतियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को गति दी, जिससे आर्थिक वृद्धि दर में वृद्धि हुई।
- विदेशी निवेश बढ़ा और नए रोजगार के अवसर पैदा हुए।
- हालांकि, इन नीतियों की आलोचना भी हुई कि ये असमानता बढ़ाती हैं और गरीबों को हाशिए पर धकेलती हैं।
4. बाबरी मस्जिद विध्वंस और हिंदुत्व (Babri Masjid Demolition and Hindutva)
- अयोध्या विवाद:
- अयोध्या में एक विवादित स्थल पर बाबरी मस्जिद थी, जिसके बारे में हिंदू संगठनों का दावा था कि वह भगवान राम का जन्मस्थान है और वहाँ पहले एक राम मंदिर था।
- यह विवाद कई दशकों से चल रहा था।
- राम जन्मभूमि आंदोलन:
- 1980 के दशक के अंत में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) जैसे हिंदू संगठनों ने राम जन्मभूमि आंदोलन को तेज किया।
- लालकृष्ण आडवाणी ने 1990 में गुजरात के सोमनाथ से अयोध्या तक रथ यात्रा निकाली, जिसने इस आंदोलन को और गति दी।
- 6 दिसंबर 1992 की घटना:
- 6 दिसंबर 1992 को, हजारों कारसेवकों (हिंदू कार्यकर्ताओं) ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया।
- इस घटना से देश भर में सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे, जिनमें हजारों लोग मारे गए।
- उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार को बर्खास्त कर दिया गया और राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया।
- प्रभाव:
- बाबरी मस्जिद विध्वंस ने भारतीय राजनीति में धर्मनिरपेक्षता पर गंभीर बहस छेड़ दी।
- भाजपा की राजनीति को बल मिला, जिसने हिंदुत्व को अपनी विचारधारा का मुख्य आधार बनाया।
- इस घटना ने भारतीय समाज में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को गहरा किया।
5. गठबंधन का युग और बहुदलीय प्रणाली (Era of Coalitions and Multi-Party System)
- 1996 के चुनाव:
- इन चुनावों में किसी भी दल या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला।
- भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, और अटल बिहारी वाजपेयी ने 13 दिनों के लिए सरकार बनाई, लेकिन बहुमत साबित न कर पाने के कारण इस्तीफा दे दिया।
- बाद में, जनता दल के नेतृत्व में संयुक्त मोर्चा (United Front) सरकार बनी, जिसे कांग्रेस ने बाहर से समर्थन दिया।
- स्थिर गठबंधन सरकारों का उदय:
- 1998 में, भाजपा के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA - National Democratic Alliance) का गठन हुआ, जिसने 1998 और 1999 के चुनावों में जीत हासिल की। अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने।
- 2004 में, कांग्रेस के नेतृत्व में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA - United Progressive Alliance) का गठन हुआ, जिसने 2004 और 2009 के चुनावों में जीत हासिल की। मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने।
- क्षेत्रीय दलों की बढ़ती भूमिका:
- गठबंधन की राजनीति के कारण क्षेत्रीय दलों का महत्व बहुत बढ़ गया। वे राष्ट्रीय सरकारों के गठन में निर्णायक भूमिका निभाने लगे।
6. नई सहमतियाँ (New Consensuses)
1989 के बाद भारतीय राजनीति में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर एक प्रकार की सहमति विकसित हुई:
- नई आर्थिक नीति पर सहमति: अधिकांश राजनीतिक दलों ने आर्थिक उदारीकरण की नीतियों को स्वीकार कर लिया, हालांकि उनके कार्यान्वयन के तरीके पर मतभेद हो सकते हैं।
- पिछड़ी जातियों के राजनीतिक और सामाजिक दावों की स्वीकृति: सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने यह स्वीकार कर लिया कि पिछड़ी जातियों को सामाजिक और राजनीतिक रूप से सशक्त करना आवश्यक है।
- प्रांतीय दलों की भूमिका की स्वीकृति: राष्ट्रीय दलों ने क्षेत्रीय दलों के महत्व को स्वीकार किया और उनके साथ मिलकर सरकार बनाने की रणनीति अपनाई।
- गठबंधन की राजनीति की अनिवार्यता: यह स्वीकार कर लिया गया कि गठबंधन की राजनीति भारतीय लोकतंत्र का एक स्थायी हिस्सा है और किसी एक दल के लिए अकेले बहुमत प्राप्त करना मुश्किल है।
7. लोकसभा चुनाव 2004 और उसके बाद (2004 Lok Sabha Elections and After)
- NDA की हार और UPA का उदय:
- 2004 के लोकसभा चुनावों में, भाजपा के नेतृत्व वाला NDA गठबंधन 'इंडिया शाइनिंग' के नारे के बावजूद हार गया।
- कांग्रेस के नेतृत्व में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) ने सरकार बनाई, जिसमें कई क्षेत्रीय दल शामिल थे।
- मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने।
- UPA का एजेंडा:
- UPA सरकार ने गरीबों के लिए नीतियां बनाने, आर्थिक सुधारों को मानवीय चेहरा देने और सामाजिक न्याय पर जोर दिया।
- इसने ग्रामीण रोजगार गारंटी (मनरेगा), शिक्षा का अधिकार, सूचना का अधिकार जैसे महत्वपूर्ण कानून पारित किए।
- नए मुद्दे:
- 2004 के बाद भारतीय राजनीति में विकास और सुशासन के साथ-साथ पर्यावरण, मानवाधिकार, सूचना का अधिकार और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे भी प्रमुखता से उभरे।
निष्कर्ष:
1989 के बाद का काल भारतीय राजनीति में एक बड़े संक्रमण का दौर था, जिसने एक दल के प्रभुत्व को समाप्त कर दिया और बहुदलीय गठबंधन प्रणाली को जन्म दिया। मंडल आयोग, नई आर्थिक नीति और अयोध्या विवाद जैसे मुद्दों ने भारतीय समाज और राजनीति को गहराई से प्रभावित किया, जिससे नई सहमतियाँ उभरीं और भारतीय लोकतंत्र का स्वरूप और अधिक समावेशी व जटिल हो गया।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) - Chapter 8
निर्देश: सही विकल्प का चयन करें।
-
1989 के लोकसभा चुनावों के बाद किस दल के नेतृत्व में राष्ट्रीय मोर्चा सरकार का गठन हुआ?
a) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
b) भारतीय जनता पार्टी
c) जनता दल
d) वाम मोर्चा -
मंडल आयोग का गठन किस वर्ष किया गया था?
a) 1977
b) 1979
c) 1980
d) 1982 -
मंडल आयोग ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए सरकारी नौकरियों में कितने प्रतिशत आरक्षण की सिफारिश की थी?
a) 21%
b) 25%
c) 27%
d) 33% -
भारत में नई आर्थिक नीति (LPG reforms) किस वर्ष लागू की गई थी?
a) 1989
b) 1990
c) 1991
d) 1992 -
नई आर्थिक नीति के समय भारत के प्रधानमंत्री कौन थे?
a) वी.पी. सिंह
b) अटल बिहारी वाजपेयी
c) पी.वी. नरसिम्हा राव
d) मनमोहन सिंह -
अयोध्या में बाबरी मस्जिद का विध्वंस किस तारीख को हुआ था?
a) 6 दिसंबर 1990
b) 6 दिसंबर 1991
c) 6 दिसंबर 1992
d) 6 दिसंबर 1993 -
'क्रीमी लेयर' का सिद्धांत किस आयोग की सिफारिशों से संबंधित है और किस सर्वोच्च न्यायालय के फैसले में इसे लागू किया गया?
a) शाह आयोग, केशवानंद भारती केस
b) मंडल आयोग, इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ केस
c) सरकारिया आयोग, एस.आर. बोम्मई केस
d) कोठारी आयोग, गोलकनाथ केस -
2004 के लोकसभा चुनावों में किस गठबंधन ने जीत हासिल की थी?
a) राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA)
b) संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA)
c) संयुक्त मोर्चा (United Front)
d) राष्ट्रीय मोर्चा (National Front) -
निम्नलिखित में से कौन-सा एक नया मुद्दा 2004 के बाद भारतीय राजनीति में प्रमुखता से उभरा?
a) गुटनिरपेक्षता
b) पर्यावरण और मानवाधिकार
c) भाषावाद
d) रियासतों का एकीकरण -
1989 के बाद भारतीय राजनीति में किस प्रकार की सरकारों का दौर शुरू हुआ?
a) एकदलीय प्रभुत्व वाली सरकारें
b) सैन्य सरकारें
c) गठबंधन सरकारें
d) राष्ट्रपति शासन
उत्तरमाला:
- c) जनता दल
- b) 1979
- c) 27%
- c) 1991
- c) पी.वी. नरसिम्हा राव
- c) 6 दिसंबर 1992
- b) मंडल आयोग, इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ केस
- b) संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA)
- b) पर्यावरण और मानवाधिकार
- c) गठबंधन सरकारें
मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको इस अध्याय को गहराई से समझने और आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक सिद्ध होंगे। अपनी पढ़ाई जारी रखें और किसी भी संदेह के लिए पूछने में संकोच न करें। शुभकामनाएँ!