Class 12 Political Science Notes Chapter 9 (भारतीय राजनीति : नए बदलाव) – Samkalin Vishwa Rajniti Book

Samkalin Vishwa Rajniti
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम कक्षा 12 की राजनीति विज्ञान की पुस्तक 'समकालीन विश्व राजनीति' के अध्याय 9 'भारतीय राजनीति : नए बदलाव' पर विस्तृत चर्चा करेंगे। यह अध्याय 1990 के दशक के बाद भारतीय राजनीति में आए महत्वपूर्ण परिवर्तनों को समझने में सहायक है, जो विभिन्न सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।


अध्याय 9: भारतीय राजनीति : नए बदलाव

1990 के दशक के बाद भारतीय राजनीति में कई बड़े बदलाव आए, जिन्होंने देश की राजनीतिक दिशा को हमेशा के लिए बदल दिया। ये बदलाव कांग्रेस प्रणाली के अंत, गठबंधन की राजनीति के उदय, आर्थिक सुधारों, मंडल मुद्दे और अयोध्या विवाद जैसे प्रमुख घटनाक्रमों से चिह्नित थे।

1. कांग्रेस प्रणाली का अंत और गठबंधन का युग

  • कांग्रेस का प्रभुत्व समाप्त: 1989 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी को हार का सामना करना पड़ा और वह बहुमत हासिल नहीं कर पाई। यह 1952 से भारतीय राजनीति पर हावी रही कांग्रेस प्रणाली के अंत का प्रतीक था।
  • गठबंधन की राजनीति का उदय: 1989 के बाद से भारतीय राजनीति में गठबंधन सरकारों का दौर शुरू हुआ। किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने के कारण विभिन्न राजनीतिक दलों को मिलकर सरकारें बनानी पड़ीं।
    • राष्ट्रीय मोर्चा सरकार (1989-90): यह कांग्रेस विरोधी दलों का गठबंधन था, जिसे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और वाम मोर्चे ने बाहर से समर्थन दिया था। वी.पी. सिंह इसके प्रधानमंत्री बने।
    • राजीव गांधी की हत्या (1991): 1991 के चुनावों के दौरान राजीव गांधी की हत्या कर दी गई, जिससे कांग्रेस को सहानुभूति मिली और वह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन फिर भी बहुमत से दूर रही। पी.वी. नरसिम्हा राव के नेतृत्व में कांग्रेस ने अल्पमत सरकार बनाई।
    • संयुक्त मोर्चा सरकारें (1996-98): 1996 के चुनावों में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला। भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी लेकिन सरकार नहीं बना पाई। इसके बाद कांग्रेस के समर्थन से 'संयुक्त मोर्चा' की सरकारें बनीं, जिसमें एच.डी. देवेगौड़ा और इंद्र कुमार गुजराल प्रधानमंत्री बने।
    • राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA): 1998 में भाजपा के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) बना और अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में सरकार बनी। 2004 में कांग्रेस के नेतृत्व में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) बना, जिसने 2004 से 2014 तक शासन किया।

2. मंडल मुद्दा और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का उदय

  • मंडल आयोग का गठन: जनता पार्टी की सरकार ने 1978 में बिंदेश्वरी प्रसाद मंडल की अध्यक्षता में दूसरा पिछड़ा वर्ग आयोग (मंडल आयोग) का गठन किया। आयोग का कार्य सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों की पहचान करना और उनके उत्थान के लिए सिफारिशें देना था।
  • मंडल आयोग की रिपोर्ट (1980): आयोग ने 1980 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए सरकारी नौकरियों में 27% आरक्षण की सिफारिश की गई।
  • सिफारिशों का लागू होना (1990): वी.पी. सिंह के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय मोर्चा सरकार ने 1990 में मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने का निर्णय लिया।
  • देशव्यापी प्रतिक्रिया: इस निर्णय से देश भर में व्यापक विरोध और समर्थन दोनों देखने को मिले। आरक्षण के समर्थक और विरोधी सड़कों पर उतर आए।
  • पिछड़ी जातियों की राजनीति का उदय: मंडल आयोग की सिफारिशों के लागू होने से भारतीय राजनीति में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का राजनीतिक उभार हुआ। कई क्षेत्रीय दल जो OBC जातियों का प्रतिनिधित्व करते थे, मजबूत होकर उभरे।

3. नए आर्थिक सुधार

  • आर्थिक संकट (1991): 1991 में भारत को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा, जिसमें विदेशी मुद्रा भंडार लगभग समाप्त हो गया था।
  • सुधारों की शुरुआत: पी.वी. नरसिम्हा राव के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने तत्कालीन वित्त मंत्री मनमोहन सिंह के साथ मिलकर नए आर्थिक सुधारों की शुरुआत की।
  • उदारीकरण, निजीकरण, वैश्वीकरण (LPG): इन सुधारों को 'उदारीकरण' (Liberalisation), 'निजीकरण' (Privatisation) और 'वैश्वीकरण' (Globalisation) के नाम से जाना जाता है।
    • उदारीकरण: व्यापार और उद्योगों पर सरकारी नियंत्रण कम करना।
    • निजीकरण: सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों को निजी हाथों में बेचना।
    • वैश्वीकरण: भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व अर्थव्यवस्था से जोड़ना।
  • प्रभाव: इन सुधारों ने भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर को बढ़ाया, लेकिन साथ ही समाज में असमानता बढ़ने और कृषि क्षेत्र पर नकारात्मक प्रभावों की चिंताएँ भी पैदा कीं। अधिकांश राजनीतिक दलों ने इन सुधारों को स्वीकार कर लिया।

4. अयोध्या विवाद और हिंदुत्व की राजनीति

  • बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि विवाद: अयोध्या में स्थित बाबरी मस्जिद को लेकर लंबे समय से विवाद था। हिंदू संगठनों का मानना था कि यह भगवान राम का जन्मस्थान है और वहाँ एक प्राचीन मंदिर था जिसे तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी।
  • रथ यात्रा और भाजपा का उभार: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 1980 के दशक के अंत और 1990 के दशक की शुरुआत में राम जन्मभूमि आंदोलन को अपना प्रमुख राजनीतिक एजेंडा बनाया। लालकृष्ण आडवाणी ने 1990 में गुजरात के सोमनाथ से अयोध्या तक 'रथ यात्रा' निकाली, जिसने इस मुद्दे को देशव्यापी बना दिया।
  • 6 दिसंबर 1992: अयोध्या में हजारों 'कारसेवकों' ने बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया।
  • परिणाम: इस घटना के बाद देश के कई हिस्सों में सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी। इसने भारतीय राजनीति में धर्मनिरपेक्षता और सांप्रदायिकता पर गंभीर बहस छेड़ दी।
  • हिंदुत्व की राजनीति: भाजपा ने 'हिंदुत्व' की विचारधारा को बढ़ावा दिया, जिसके अनुसार भारत एक हिंदू राष्ट्र है और सभी नागरिकों को एक साझा संस्कृति का पालन करना चाहिए। इस आंदोलन ने भाजपा को एक मजबूत राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित किया।

5. लोकतांत्रिक राजनीति में सर्व-सहमति के नए मुद्दे

1990 के दशक के बाद भारतीय राजनीति में कई मुद्दों पर राजनीतिक दलों के बीच एक नई सहमति उभर कर सामने आई:

  • आर्थिक नीति पर सहमति: अधिकांश राजनीतिक दल अब नए आर्थिक सुधारों (उदारीकरण, निजीकरण, वैश्वीकरण) के पक्ष में थे, हालांकि उनके कार्यान्वयन के तरीकों पर मतभेद हो सकते थे।
  • पिछड़ी जातियों की स्वीकार्यता: मंडल आयोग के बाद से सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की राजनीतिक और सामाजिक स्वीकार्यता को मान लिया।
  • प्रांतीय दलों की भूमिका में वृद्धि: गठबंधन की राजनीति के कारण क्षेत्रीय दलों का महत्व बहुत बढ़ गया। वे केंद्र सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने लगे।
  • विचारधारा की जगह व्यावहारिक राजनीति: राजनीतिक दल अब केवल अपनी विचारधारा पर अड़े रहने के बजाय 'गठबंधन धर्म' का पालन करने और व्यावहारिक नीतियों को अपनाने लगे।

निष्कर्ष

1990 के दशक के बदलावों ने भारतीय राजनीति को बहुदलीय प्रणाली और गठबंधन की राजनीति की ओर धकेला। इसने सामाजिक न्याय, आर्थिक विकास और धर्मनिरपेक्षता जैसी अवधारणाओं पर नई बहसें छेड़ीं। इन बदलावों ने भारतीय लोकतंत्र को और अधिक समावेशी और जटिल बना दिया, जहाँ विभिन्न सामाजिक समूहों और क्षेत्रीय आकांक्षाओं को प्रतिनिधित्व मिलने लगा।


बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

  1. भारतीय राजनीति में गठबंधन के युग की शुरुआत किस वर्ष के लोकसभा चुनाव से मानी जाती है?
    a) 1984
    b) 1989
    c) 1991
    d) 1996

  2. मंडल आयोग का गठन किस वर्ष किया गया था?
    a) 1977
    b) 1978
    c) 1979
    d) 1980

  3. मंडल आयोग की सिफारिशों को किस प्रधानमंत्री ने लागू किया था?
    a) राजीव गांधी
    b) पी.वी. नरसिम्हा राव
    c) वी.पी. सिंह
    d) अटल बिहारी वाजपेयी

  4. भारत में आर्थिक सुधारों (उदारीकरण, निजीकरण, वैश्वीकरण) की शुरुआत किस वर्ष हुई?
    a) 1989
    b) 1990
    c) 1991
    d) 1992

  5. बाबरी मस्जिद का विध्वंस किस तिथि को हुआ था?
    a) 6 दिसंबर 1991
    b) 6 दिसंबर 1992
    c) 6 जनवरी 1992
    d) 6 जनवरी 1993

  6. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने किस आंदोलन को अपना प्रमुख राजनीतिक एजेंडा बनाया था?
    a) नर्मदा बचाओ आंदोलन
    b) दलित पैंथर आंदोलन
    c) राम जन्मभूमि आंदोलन
    d) चिपको आंदोलन

  7. 'राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन' (NDA) का नेतृत्व कौन सी पार्टी करती है?
    a) कांग्रेस
    b) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)
    c) जनता दल
    d) समाजवादी पार्टी

  8. 1990 के दशक के बाद भारतीय राजनीति में किस वर्ग का राजनीतिक उभार हुआ?
    a) उच्च वर्ग
    b) मध्यम वर्ग
    c) अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)
    d) अल्पसंख्यक वर्ग

  9. 1991 में आर्थिक सुधारों के समय भारत के वित्त मंत्री कौन थे?
    a) पी. चिदंबरम
    b) अरुण जेटली
    c) मनमोहन सिंह
    d) यशवंत सिन्हा

  10. 1989 की राष्ट्रीय मोर्चा सरकार को बाहर से किन दो प्रमुख दलों ने समर्थन दिया था?
    a) कांग्रेस और समाजवादी पार्टी
    b) भाजपा और वाम मोर्चा
    c) बसपा और आरजेडी
    d) डीएमके और एआईएडीएमके

उत्तरमाला:

  1. b) 1989
  2. c) 1979
  3. c) वी.पी. सिंह
  4. c) 1991
  5. b) 6 दिसंबर 1992
  6. c) राम जन्मभूमि आंदोलन
  7. b) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)
  8. c) अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)
  9. c) मनमोहन सिंह
  10. b) भाजपा और वाम मोर्चा

मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपके अध्ययन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक सिद्ध होंगे।

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