Class 12 Sanskrit Notes Chapter 11 (Chapter 11) – Shaswati Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम कक्षा १२ की शाश्वती पुस्तक के एकादश अध्याय 'प्रजापतेः हृदयम्' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय आपकी आगामी सरकारी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हम यहाँ इस पाठ के सभी मुख्य बिन्दुओं, सारांश और दार्शनिक महत्व को गहराई से समझेंगे, साथ ही परीक्षा उपयोगी बहुविकल्पीय प्रश्न भी देखेंगे।
अध्याय ११: प्रजापतेः हृदयम्
१. पाठ का परिचय एवं स्रोत:
- यह पाठ तैत्तिरीय आरण्यक (प्रपाठक ७, अनुवाक ८) से संकलित है।
- यह भारतीय दर्शन के महत्वपूर्ण उपनिषदीय विचारों को प्रस्तुत करता है।
- पाठ का मुख्य विषय सृष्टि की उत्पत्ति, प्रजापति का तप और 'ओम्' (प्रणव) की महत्ता का वर्णन करना है।
- यह बताता है कि किस प्रकार 'ओम्' समस्त सृष्टि का सार, हृदय और बीज मंत्र है।
२. पाठ का सारांश (सृष्टि-प्रक्रिया का वर्णन):
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प्रजापति का तप: सृष्टि के आदि में प्रजापति ने तपस्या की। तपस्या के फलस्वरूप उन्होंने तीन व्याहृतियों को उत्पन्न किया:
- भूः (पृथ्वी लोक का प्रतीक)
- भुवः (अंतरिक्ष लोक का प्रतीक)
- स्वः (द्युलोक का प्रतीक)
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व्याहृतियों से वेदों की उत्पत्ति: प्रजापति ने पुनः तपस्या की और इन तीनों व्याहृतियों से क्रमशः तीन वेदों को उत्पन्न किया:
- भूः से ऋग्वेद
- भुवः से यजुर्वेद
- स्वः से सामवेद
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वेदों से देवताओं की उत्पत्ति: प्रजापति ने तीसरी बार तपस्या की और इन तीनों वेदों से क्रमशः तीन देवताओं को उत्पन्न किया:
- ऋग्वेद से अग्नि
- यजुर्वेद से वायु
- सामवेद से सूर्य
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देवताओं से लोकों की उत्पत्ति: प्रजापति ने चौथी बार तपस्या की और इन तीनों देवताओं से क्रमशः तीन लोकों को उत्पन्न किया:
- अग्नि से पृथ्वी लोक
- वायु से अंतरिक्ष लोक
- सूर्य से द्युलोक
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सृष्टि के सार की खोज (ओम् की उत्पत्ति):
- उपर्युक्त सृष्टि की रचना करने के बाद, प्रजापति ने सोचा कि यह सब कुछ तो बन गया है, परन्तु इसका कोई सार (essence) नहीं है। यदि यह सार नष्ट हो गया, तो सब कुछ नष्ट हो जाएगा।
- इस विचार के साथ उन्होंने पुनः तपस्या की।
- उन्होंने प्रत्येक वेद से एक-एक अक्षर का सार निकाला:
- ऋग्वेद से 'अ' अक्षर
- यजुर्वेद से 'उ' अक्षर
- सामवेद से 'म्' अक्षर
- इन तीनों अक्षरों 'अ', 'उ', 'म्' को मिलाकर 'ओम्' (प्रणव) की रचना की।
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ओम् का महत्व:
- प्रजापति ने 'ओम्' को अपनी समस्त सृष्टि का सार, हृदय और अमृतत्व का आधार माना।
- यह 'ओम्' ही समस्त वेदों, देवताओं और लोकों का सार है।
- 'ओम्' को प्रजापति का हृदय कहा गया है। यह अविनाशी और अमर है।
३. मुख्य बिन्दु एवं दार्शनिक महत्व:
- सृष्टि का क्रमबद्ध विकास: पाठ सृष्टि के एक क्रमबद्ध विकास को दर्शाता है, जहाँ एक तत्व से दूसरा तत्व उत्पन्न होता है।
- तपस्या का महत्व: प्रजापति की बार-बार की गई तपस्या सृष्टि के निर्माण और उसके सार की खोज में तपस्या के महत्व को रेखांकित करती है।
- ओम् (प्रणव) की सर्वोपरिता: 'ओम्' को केवल एक अक्षर या ध्वनि नहीं, बल्कि समस्त ब्रह्मांड का मूल, सार और अविनाशी तत्व बताया गया है। यह ब्रह्म का प्रतीक है।
- मोक्ष का साधन: जो व्यक्ति 'ओम्' का ध्यान करता है, वह ब्रह्मलोक को प्राप्त करता है और अमरत्व को प्राप्त होता है। यह मोक्ष प्राप्ति का एक मार्ग है।
- एकात्मता का संदेश: यह पाठ दर्शाता है कि समस्त सृष्टि, वेद, देवता और लोक एक ही मूल तत्व 'ओम्' से जुड़े हुए हैं।
४. महत्वपूर्ण शब्दार्थ (परीक्षा की दृष्टि से):
- प्रजापतिः: सृष्टि का रचयिता, ब्रह्मा।
- अतप्यत: तपस्या की।
- व्याहृतीः: भूः, भुवः, स्वः - ये तीन महाव्याहृतियाँ।
- एभ्यः: इनसे।
- अक्षराणि: अक्षर।
- सारम्: सार, निचोड़, मुख्य अंश।
- हृदयम्: हृदय, केंद्र।
- अमृतम्: अमर, अविनाशी।
- प्रणवः: ओम्।
- ब्रह्मलोकम्: ब्रह्म का लोक, मोक्ष।
- अमृतत्वम्: अमरता।
५. व्याकरणिक बिन्दु (संक्षेप में):
- इस पाठ में भूतकाल की क्रियाओं (जैसे - अतप्यत, असृजत, अगृह्णात्) का प्रयोग बहुतायत से हुआ है।
- संधि और समास के उदाहरणों पर ध्यान दें (जैसे - 'अथैभ्यः' - अथ + एभ्यः, 'ब्रह्मलोकम्' - ब्रह्म का लोक - षष्ठी तत्पुरुष)।
- कारक और विभक्ति का सही प्रयोग समझना महत्वपूर्ण है।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs):
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'प्रजापतेः हृदयम्' पाठ किस ग्रन्थ से संकलित है?
अ) ऋग्वेद
ब) तैत्तिरीय आरण्यक
स) मुण्डकोपनिषद्
द) भगवद्गीता -
प्रजापति ने तपस्या करके सर्वप्रथम किन्हें उत्पन्न किया?
अ) वेद
ब) देवता
स) व्याहृतियाँ
द) लोक -
प्रजापति ने 'भूः' व्याहृति से किस वेद को उत्पन्न किया?
अ) यजुर्वेद
ब) सामवेद
स) अथर्ववेद
द) ऋग्वेद -
'यजुर्वेद' से प्रजापति ने किस देवता को उत्पन्न किया?
अ) अग्नि
ब) वायु
स) सूर्य
द) इन्द्र -
सामवेद से प्रजापति ने किस अक्षर का सार निकाला?
अ) अ
ब) उ
स) म्
द) ओ -
'अ' अक्षर किस वेद से लिया गया है?
अ) सामवेद
ब) यजुर्वेद
स) ऋग्वेद
द) अथर्ववेद -
प्रजापति ने 'ओम्' को क्या कहा है?
अ) केवल एक ध्वनि
ब) प्रजापति का हृदय
स) एक साधारण मंत्र
द) सृष्टि का अंत -
'प्रणव' शब्द का क्या अर्थ है?
अ) वेद
ब) देवता
स) ओम्
द) लोक -
'अमृतत्वम्' शब्द का क्या अर्थ है?
अ) मृत्यु
ब) अमरता
स) भय
द) जन्म -
'ओम्' का ध्यान करने वाला व्यक्ति क्या प्राप्त करता है?
अ) धन
ब) यश
स) ब्रह्मलोक और अमृतत्व
द) केवल ज्ञान
उत्तरमाला:
- ब
- स
- द
- ब
- स
- स
- ब
- स
- ब
- स
आशा है यह विस्तृत नोट्स और प्रश्नोत्तर आपकी परीक्षा की तैयारी में सहायक सिद्ध होंगे। मन लगाकर अध्ययन करें। शुभकामनाएँ!