Class 12 Sanskrit Notes Chapter 12 (Chapter 12) – Shaswati Book

Shaswati
प्रिय विद्यार्थियों,

कक्षा १२ संस्कृत 'शाश्वती' पुस्तक के द्वादश अध्याय 'मृच्छकटिकम् (प्रथमोऽङ्कः)' के विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) आपकी आगामी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी हेतु यहाँ प्रस्तुत हैं। यह अध्याय शूद्रक विरचित प्रसिद्ध प्रकरण 'मृच्छकटिकम्' के प्रथम अंक 'अलङ्कारन्यास' पर आधारित है।


अध्याय १२: मृच्छकटिकम् (प्रथमोऽङ्कः) - विस्तृत नोट्स

१. नाटक का परिचय:

  • नाटक का नाम: मृच्छकटिकम् (मिट्टी की गाड़ी)
  • रचयिता: महाकवि शूद्रक
  • विधा: यह एक 'प्रकरण' नामक रूपक है। प्रकरण में कथावस्तु कवि-कल्पित होती है, नायक धीरशान्त ब्राह्मण या वणिक् होता है और नायिका कुलवधू या गणिका होती है। इसमें समाज के विभिन्न वर्गों का यथार्थवादी चित्रण होता है।
  • अंक संख्या: इसमें दस अंक हैं।
  • मुख्य रस: श्रृंगार रस, वीर रस, करुण रस।
  • भाषा: इसमें संस्कृत और प्राकृत दोनों भाषाओं का प्रयोग हुआ है, जो उस समय के समाज का यथार्थवादी चित्रण प्रस्तुत करता है। उच्च वर्ग के पात्र संस्कृत बोलते हैं, जबकि निम्न वर्ग के पात्र और स्त्रियाँ प्राकृत बोलती हैं।
  • कथावस्तु का सार (संक्षेप में): यह नाटक उज्जैन नगरी के एक दरिद्र किन्तु सदाचारी ब्राह्मण चारुदत्त और एक प्रसिद्ध गणिका वसन्तसेना के प्रेम की कहानी है। इसमें तत्कालीन समाज की राजनीतिक उथल-पुथल, न्याय-अन्याय, दरिद्रता, प्रेम और अंततः सत्य की विजय को दर्शाया गया है।

२. कवि शूद्रक का परिचय:

  • शूद्रक एक रहस्यमय कवि हैं। कुछ विद्वान उन्हें काल्पनिक मानते हैं, जबकि कुछ उन्हें ऐतिहासिक व्यक्ति।
  • 'मृच्छकटिकम्' की प्रस्तावना में स्वयं शूद्रक का परिचय दिया गया है: वे वेदज्ञ, अश्वमेध यज्ञ करने वाले, अनेक कलाओं के ज्ञाता, शिवभक्त, हाथी पर चढ़कर युद्ध करने वाले और सौ वर्षों तक जीवित रहने वाले राजा थे।
  • उनका काल सामान्यतः ईसा पूर्व पहली शताब्दी से ईस्वी चौथी शताब्दी के बीच माना जाता है।

३. प्रस्तुत अंश (प्रथम अंक) का परिचय:

  • अंक का नाम: 'अलङ्कारन्यास' (आभूषणों को धरोहर के रूप में रखना) या 'संवाहक' (वसन्तसेना का चारुदत्त के घर में प्रवेश)।
  • यह अंक चारुदत्त और वसन्तसेना के प्रथम मिलन और उनके भावी प्रेम की नींव रखता है।
  • इसमें चारुदत्त की सज्जनता और वसन्तसेना के उसके प्रति आकर्षण को दर्शाया गया है।

४. प्रथम अंक 'अलङ्कारन्यास' का विस्तृत सारांश:

  • मंगलाचरण एवं कवि परिचय: नाटक का प्रारंभ सूत्रधार और नटी के वार्तालाप से होता है। सूत्रधार शिव की स्तुति करते हुए मंगलाचरण करता है और फिर कवि शूद्रक का परिचय देता है, उनकी विशेषताओं का वर्णन करता है।
  • चारुदत्त की दरिद्रता और सज्जनता: सूत्रधार के जाने के बाद, नाटक का नायक चारुदत्त अपने घर में प्रवेश करता है। वह एक अत्यंत उदार, परोपकारी, विद्वान और सज्जन ब्राह्मण है, जो पहले बहुत धनी था, लेकिन अपनी दानशीलता के कारण अब दरिद्र हो गया है। वह अपनी दरिद्रता से दुःखी है, लेकिन अपने गुणों को नहीं छोड़ता। उसका मित्र और विदूषक मैत्रेय भी उसके साथ है, जो उसकी दरिद्रता पर व्यंग्य करता है और उसे दान-पुण्य न करने की सलाह देता है। मैत्रेय कहता है कि "दारिद्र्यं हि गुणानां नाशयति" (दरिद्रता गुणों का नाश करती है)।
  • वसन्तसेना का आगमन: इसी समय, उज्जैन की प्रसिद्ध और अत्यंत सुंदर गणिका वसन्तसेना अपनी चेटी (दासी) के साथ आती है। वह अपने आभूषणों से सुसज्जित है। वह राजा के साले (शालक) शकार से बचने के लिए भाग रही है, जो उस पर मोहित है और उसका पीछा कर रहा है। शकार एक दुष्ट, अहंकारी और कामुक व्यक्ति है।
  • शकार द्वारा पीछा: शकार अपने विट (एक प्रकार का चापलूस या सहचर) और चेट (सेवक) के साथ वसन्तसेना का पीछा करता है। वह उसे बलपूर्वक प्राप्त करना चाहता है। विट उसे समझाने का प्रयास करता है कि वह ऐसा न करे, लेकिन शकार उसकी बात नहीं मानता।
  • वसन्तसेना का चारुदत्त के घर में प्रवेश: अँधेरे और वर्षा का लाभ उठाकर, वसन्तसेना शकार से बचने के लिए चारुदत्त के घर में घुस जाती है। वह चारुदत्त की सज्जनता और प्रतिष्ठा से परिचित है।
  • आभूषणों का न्यास: चारुदत्त और मैत्रेय जब दीपक जलाने की बात कर रहे होते हैं, तब वसन्तसेना चारुदत्त को देखे बिना ही अपने कीमती आभूषणों को उसके पास धरोहर के रूप में रख देती है। वह जानती है कि चारुदत्त दरिद्र होने पर भी अत्यंत ईमानदार है और उसके आभूषण सुरक्षित रहेंगे। वह चाहती है कि इस बहाने वह चारुदत्त के घर में प्रवेश कर सके और उससे मिल सके।
  • चारुदत्त की प्रतिक्रिया: चारुदत्त को पहले तो संकोच होता है कि वह एक गणिका के आभूषणों को क्यों रखे, लेकिन वसन्तसेना के आग्रह और उसकी ईमानदारी पर विश्वास के कारण वह उन्हें स्वीकार कर लेता है। वह यह भी सोचता है कि ये आभूषण उसके पास सुरक्षित रहेंगे।
  • अंक का अंत: वसन्तसेना आभूषण रखकर चली जाती है। चारुदत्त उन आभूषणों की सुरक्षा को लेकर चिंतित होता है। वह मैत्रेय से कहता है कि वह इन आभूषणों को सावधानी से रखे। इस प्रकार, प्रथम अंक समाप्त होता है, जो नायक और नायिका के भावी प्रेम की भूमिका तैयार करता है।

५. प्रमुख पात्र परिचय (प्रथम अंक के संदर्भ में):

  • चारुदत्त (नायक): उज्जैन का एक दरिद्र किन्तु अत्यंत उदार, सदाचारी, विद्वान और सज्जन ब्राह्मण। वह अपनी दानशीलता के कारण निर्धन हो गया है, फिर भी अपने गुणों को नहीं छोड़ता।
  • वसन्तसेना (नायिका): उज्जैन की एक प्रसिद्ध, सुंदर और धनवान गणिका। वह चारुदत्त के गुणों से प्रभावित है और उससे प्रेम करती है। वह बुद्धिमती और साहसी है।
  • मैत्रेय (विदूषक): चारुदत्त का प्रिय मित्र और विदूषक। वह दरिद्रता से दुःखी है और चारुदत्त को दान-पुण्य न करने की सलाह देता है। वह अपनी हास्य-विनोद भरी बातों से दर्शकों का मनोरंजन करता है।
  • शकार (खलनायक): राजा पालक का साला। वह अत्यंत दुष्ट, अहंकारी, कामुक, मूर्ख और क्रूर व्यक्ति है। वह वसन्तसेना को बलपूर्वक प्राप्त करना चाहता है।
  • विट: शकार का सहचर। वह शकार से अधिक समझदार है और उसे गलत काम करने से रोकने का प्रयास करता है, लेकिन सफल नहीं होता।
  • चेटी: वसन्तसेना की दासी।

६. महत्वपूर्ण बिन्दु एवं उद्धरण:

  • शूद्रक की प्रस्तावना में उनका स्वयं का परिचय।
  • प्रकरण की विशेषताएँ: कवि-कल्पित कथा, समाज के विभिन्न वर्गों का चित्रण, संस्कृत और प्राकृत का प्रयोग।
  • चारुदत्त की दरिद्रता के बावजूद उसकी सज्जनता और ईमानदारी।
  • मैत्रेय का कथन: "दारिद्र्यं हि गुणानां नाशयति।" (दरिद्रता गुणों का नाश करती है।)
  • वसन्तसेना का शकार से बचने का प्रयास और चारुदत्त के घर में शरण लेना।
  • वसन्तसेना द्वारा आभूषणों को धरोहर के रूप में रखने का कारण - चारुदत्त की ईमानदारी पर विश्वास और उससे मिलने की इच्छा।
  • नाटक में तत्कालीन समाज की न्याय व्यवस्था, राजनीतिक स्थिति और सामाजिक रीति-रिवाजों का चित्रण।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

यहाँ इस अध्याय से संबंधित १० बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं:

  1. 'मृच्छकटिकम्' के रचयिता कौन हैं?
    अ) कालिदास
    ब) भवभूति
    स) शूद्रक
    द) भास

  2. 'मृच्छकटिकम्' किस प्रकार का रूपक है?
    अ) नाटक
    ब) प्रकरण
    स) प्रहसन
    द) व्यायोग

  3. 'मृच्छकटिकम्' में कुल कितने अंक हैं?
    अ) पाँच
    ब) सात
    स) आठ
    द) दस

  4. प्रस्तुत पाठ 'मृच्छकटिकम्' के किस अंक से लिया गया है?
    अ) द्वितीय अंक
    ब) प्रथम अंक
    स) तृतीय अंक
    द) चतुर्थ अंक

  5. 'मृच्छकटिकम्' का नायक कौन है?
    अ) शकार
    ब) मैत्रेय
    स) चारुदत्त
    द) आर्यक

  6. प्रथम अंक में वसन्तसेना किसके घर में प्रवेश करती है?
    अ) शकार के
    ब) चारुदत्त के
    स) मैत्रेय के
    द) विट के

  7. चारुदत्त का मित्र और विदूषक कौन है?
    अ) संवाहक
    ब) शर्विलक
    स) मैत्रेय
    द) चंदनक

  8. वसन्तसेना अपने आभूषण किसके पास धरोहर के रूप में रखती है?
    अ) मैत्रेय के पास
    ब) शकार के पास
    स) चारुदत्त के पास
    द) अपनी चेटी के पास

  9. "दारिद्र्यं हि गुणानां नाशयति" यह कथन किसका है?
    अ) चारुदत्त का
    ब) मैत्रेय का
    स) वसन्तसेना का
    द) शूद्रक का

  10. शकार कौन है?
    अ) चारुदत्त का मित्र
    ब) वसन्तसेना का प्रेमी
    स) राजा पालक का साला
    द) एक व्यापारी


उत्तरमाला:

  1. स) शूद्रक
  2. ब) प्रकरण
  3. द) दस
  4. ब) प्रथम अंक
  5. स) चारुदत्त
  6. ब) चारुदत्त के
  7. स) मैत्रेय
  8. स) चारुदत्त के पास
  9. ब) मैत्रेय का
  10. स) राजा पालक का साला

आशा है ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी परीक्षा की तैयारी में सहायक सिद्ध होंगे। शुभकामनाएँ!

Read more