Class 12 Sanskrit Notes Chapter 8 (भू- विभागाः) – Bhaswati Book

प्रिय विद्यार्थीगण,
आज हम आपकी 'भास्वती' पुस्तक के अष्टम अध्याय 'भू- विभागाः' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय भूगोल और प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा के अद्भुत संगम को प्रस्तुत करता है, जो न केवल आपकी परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि आपको प्रकृति और पर्यावरण के प्रति गहरी समझ भी प्रदान करेगा। सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए इस अध्याय के प्रत्येक बिंदु को ध्यानपूर्वक समझना आवश्यक है।
अध्याय 8: भू- विभागाः (भूमि के प्रकार)
1. परिचय
यह अध्याय प्राचीन भारतीय ग्रंथों में वर्णित भूमि के विभिन्न प्रकारों और उनकी विशेषताओं का वर्णन करता है। इसमें मुख्य रूप से तीन प्रकार की भूमियों - जाङ्गल, आनूप और साधारण - का विस्तार से विवेचन किया गया है, जो न केवल भौगोलिक विशेषताओं को दर्शाते हैं, बल्कि वहाँ के निवासियों, वनस्पति और जीव-जन्तुओं पर पड़ने वाले प्रभावों को भी स्पष्ट करते हैं। यह वर्गीकरण आयुर्वेद जैसे प्राचीन भारतीय विज्ञानों में भी महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि यह स्वास्थ्य और औषधियों के चयन में सहायक होता है।
2. प्राचीन भारतीय वर्गीकरण का आधार
प्राचीन भारतीय मनीषियों ने भूमि का वर्गीकरण जल की उपलब्धता, वनस्पति के प्रकार, जलवायु और मृदा की प्रकृति के आधार पर किया था। यह वर्गीकरण अत्यंत वैज्ञानिक और व्यावहारिक था, जो विभिन्न क्षेत्रों की विशिष्टताओं को भली-भाँति समझाता है।
3. मुख्य भू-विभाग और उनकी विशेषताएँ
अ) जाङ्गल प्रदेश (शुष्क/मरुस्थलीय प्रदेश)
यह वह भूमि है जहाँ जल की कमी होती है और शुष्कता प्रमुख विशेषता है।
- जल: अत्यंत अल्प मात्रा में उपलब्ध। कुएँ, बावड़ियाँ या वर्षा का जल ही मुख्य स्रोत।
- वनस्पति:
- काँटेदार झाड़ियाँ और वृक्ष अधिक होते हैं।
- वृक्षों की पत्तियाँ छोटी और मोटी होती हैं ताकि जल का वाष्पीकरण कम हो।
- उदाहरण: खदिर (खैर), बब्बूल (बबूल), शमी (खेजड़ी), करीर (करिल) आदि।
- घास भी शुष्क और कठोर होती है।
- जलवायु:
- गर्म और शुष्क।
- तेज हवाएँ चलती हैं।
- दिन में अत्यधिक गर्मी और रात में ठंडी हो सकती है (तापमान में बड़ा अंतर)।
- मृदा: रेतीली, पथरीली, कम उपजाऊ।
- जीव-जन्तु:
- ऐसे पशु जो कम पानी में रह सकते हैं।
- उदाहरण: मृग (हिरण), उष्ट्र (ऊँट), खरगोश, भेड़िये, कुछ प्रकार के सर्प।
- पक्षी भी शुष्क वातावरण के अनुकूल होते हैं।
- मानव स्वभाव पर प्रभाव:
- यहाँ के लोग प्रायः परिश्रमी, सहनशील, दुबले-पतले और फुर्तीले होते हैं।
- इनका आहार भी शुष्क और हल्का होता है।
- वायु और पित्त दोष की अधिकता देखी जा सकती है।
- अन्य विशेषताएँ: कृषि के लिए अनुपयुक्त, पशुपालन (ऊँट, भेड़) मुख्य व्यवसाय।
ब) आनूप प्रदेश (आर्द्र/जलीय/दलदली प्रदेश)
यह वह भूमि है जहाँ जल की प्रचुरता होती है और आर्द्रता प्रमुख विशेषता है।
- जल: अत्यधिक मात्रा में उपलब्ध। नदियाँ, झीलें, तालाब, दलदल, समुद्र तट के किनारे।
- वनस्पति:
- घने, बड़े और हरे-भरे वृक्ष।
- पत्तियाँ बड़ी और चौड़ी होती हैं।
- उदाहरण: शाल (साल), ताल (ताड़), तमाल, कदम्ब, वेतस (बेंत) आदि।
- जलकुम्भी और अन्य जलीय वनस्पतियाँ प्रचुर मात्रा में।
- जलवायु:
- आर्द्र और उष्ण।
- हवा में नमी अधिक होती है।
- सूर्य का प्रकाश कम पहुँचता है (घने वृक्षों के कारण)।
- मृदा: चिकनी, गाद वाली, दलदली, अत्यधिक उपजाऊ।
- जीव-जन्तु:
- जलीय और अर्ध-जलीय पशु।
- उदाहरण: महिष (भैंस), वराह (सूअर), मत्स्य (मछली), कच्छप (कछुआ), मगरमच्छ, विभिन्न प्रकार के जलीय पक्षी।
- मानव स्वभाव पर प्रभाव:
- यहाँ के लोग प्रायः स्थूल (मोटे), आलसी, कफ प्रकृति वाले होते हैं।
- इनका आहार भारी और तैलीय होता है।
- कफ दोष की अधिकता देखी जा सकती है।
- अन्य विशेषताएँ: मत्स्यपालन, धान की खेती, नौकायन मुख्य व्यवसाय।
स) साधारण प्रदेश (संतुलित/मध्यम प्रदेश)
यह वह भूमि है जहाँ जाङ्गल और आनूप दोनों प्रदेशों की विशेषताएँ संतुलित मात्रा में पाई जाती हैं। इसे आदर्श भूमि माना जाता है।
- जल: पर्याप्त और संतुलित मात्रा में उपलब्ध। नदियाँ, कुएँ, वर्षा का जल सभी सुलभ।
- वनस्पति:
- जाङ्गल और आनूप दोनों प्रकार की वनस्पतियाँ संतुलित रूप में।
- विभिन्न प्रकार के फलदार वृक्ष, अनाज और औषधीय पौधे।
- उदाहरण: आम्र (आम), जम्बू (जामुन), धान्य (अनाज)।
- जलवायु:
- न अधिक गर्म न अधिक ठंडी, न अधिक शुष्क न अधिक आर्द्र।
- संतुलित और सुखद जलवायु।
- मृदा: उपजाऊ, कृषि के लिए सर्वोत्तम।
- जीव-जन्तु:
- विभिन्न प्रकार के पशु और पक्षी।
- उदाहरण: गौ (गाय), अश्व (घोड़ा), अज (बकरी) आदि।
- मानव स्वभाव पर प्रभाव:
- यहाँ के लोग स्वस्थ, बलवान, बुद्धिमान और संतुलित स्वभाव के होते हैं।
- वात, पित्त और कफ तीनों दोष संतुलित रहते हैं।
- कृषि और विभिन्न शिल्पों में कुशल।
- अन्य विशेषताएँ: कृषि, पशुपालन, व्यापार आदि के लिए सर्वोत्तम। सभ्यता और संस्कृति का विकास ऐसे ही क्षेत्रों में अधिक होता है।
4. अन्य महत्वपूर्ण भू-आकृतियाँ (जो पाठ में संदर्भित हो सकती हैं)
- पर्वत (Mountain): ऊँचे स्थान, पथरीली भूमि, ठंडी जलवायु, विशेष वनस्पति (औषधीय पौधे), वन्यजीव (सिंह, व्याघ्र)।
- नदी (River): जल का सतत प्रवाह, उपजाऊ तट, जीवन का आधार, सिंचाई का स्रोत।
- वन (Forest): घने वृक्षों से आच्छादित भूमि, वन्यजीवों का आवास, औषधीय वनस्पतियों का भंडार।
- समुद्र तट (Coastal Area): समुद्र के किनारे की भूमि, नमकीन जल, विशेष प्रकार की वनस्पति (मैंग्रोव), मत्स्यपालन।
5. निष्कर्ष एवं महत्व
'भू- विभागाः' अध्याय हमें प्राचीन भारत के गहन भौगोलिक ज्ञान से परिचित कराता है। यह हमें सिखाता है कि किस प्रकार विभिन्न प्रकार की भूमियाँ वहाँ के जीवन, संस्कृति और यहाँ तक कि मानव स्वभाव को भी प्रभावित करती हैं। सरकारी परीक्षाओं में इस अध्याय से भूमि के प्रकार, उनकी विशेषताएँ, संबंधित वनस्पति, जीव-जन्तु और मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों से संबंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
निर्देश: निम्नलिखित प्रश्नों के सही उत्तर का चयन कीजिए।
-
प्राचीन भारतीय ग्रंथों के अनुसार भूमि के मुख्य कितने विभाग बताए गए हैं?
क) दो
ख) तीन
ग) चार
घ) पाँच -
"काँटेदार वृक्ष, अल्प जल, रेतीली मृदा" - ये विशेषताएँ किस प्रकार के प्रदेश की हैं?
क) आनूप प्रदेश
ख) साधारण प्रदेश
ग) जाङ्गल प्रदेश
घ) पर्वतीय प्रदेश -
आनूप प्रदेश में किस प्रकार के वृक्षों की प्रचुरता होती है?
क) खदिर, बब्बूल
ख) शाल, ताल, तमाल
ग) शमी, करीर
घ) देवदारु, चीड़ -
किस प्रदेश के निवासी प्रायः स्थूल और कफ प्रकृति वाले होते हैं?
क) जाङ्गल प्रदेश
ख) आनूप प्रदेश
ग) साधारण प्रदेश
घ) मरुभूमि प्रदेश -
कृषि के लिए सर्वोत्तम और संतुलित जलवायु वाला प्रदेश कौन सा है?
क) जाङ्गल प्रदेश
ख) आनूप प्रदेश
ग) साधारण प्रदेश
घ) पर्वतीय प्रदेश -
उष्ट्र (ऊँट) और मृग (हिरण) जैसे पशु किस भू-विभाग में अधिक पाए जाते हैं?
क) आनूप प्रदेश
ख) साधारण प्रदेश
ग) जाङ्गल प्रदेश
घ) नदीतट प्रदेश -
"महिष (भैंस) और वराह (सूअर)" किस प्रकार के प्रदेश के विशिष्ट जीव हैं?
क) जाङ्गल
ख) आनूप
ग) साधारण
घ) पर्वतीय -
किस प्रदेश में वायु और पित्त दोष की अधिकता वाले मनुष्य पाए जाते हैं?
क) आनूप
ख) साधारण
ग) जाङ्गल
घ) वन प्रदेश -
वह भूमि जहाँ जाङ्गल और आनूप दोनों की विशेषताएँ संतुलित रूप में मिलती हैं, उसे क्या कहते हैं?
क) मिश्रित प्रदेश
ख) साधारण प्रदेश
ग) मध्य प्रदेश
घ) उभय प्रदेश -
'भू- विभागाः' अध्याय का मुख्य उद्देश्य क्या है?
क) केवल भौगोलिक जानकारी देना
ख) प्राचीन भारतीय भौगोलिक ज्ञान को समझाना
ग) केवल आयुर्वेद का वर्णन करना
घ) वृक्षों के प्रकार बताना
उत्तरमाला:
- ख) तीन
- ग) जाङ्गल प्रदेश
- ख) शाल, ताल, तमाल
- ख) आनूप प्रदेश
- ग) साधारण प्रदेश
- ग) जाङ्गल प्रदेश
- ख) आनूप
- ग) जाङ्गल
- ख) साधारण प्रदेश
- ख) प्राचीन भारतीय भौगोलिक ज्ञान को समझाना
आशा है यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी परीक्षा की तैयारी में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे। अपनी पढ़ाई जारी रखें और किसी भी संदेह के लिए पूछने में संकोच न करें। शुभकामनाएँ!