Class 12 Sanskrit Notes Chapter 9 (काय वा साधयय दह वा पातययम्) – Bhaswati Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम आपकी संस्कृत पाठ्यपुस्तक 'भास्वती' (द्वितीयो भागः) के नवम पाठ 'कार्यं वा साधयेयं देहं वा पातयेयम्' का विस्तृत अध्ययन करेंगे, जो आपकी आगामी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पाठ न केवल साहित्यिक दृष्टि से अपितु नैतिक एवं दार्शनिक विचारों की दृष्टि से भी विशेष स्थान रखता है।
पाठ 9: कार्यं वा साधयेयं देहं वा पातयेयम्
1. पाठ का शीर्षक और उसका अर्थ:
- शीर्षक: 'कार्यं वा साधयेयं देहं वा पातयेयम्'
- अर्थ: "मैं या तो कार्य को सिद्ध करूँगा अथवा अपने शरीर का त्याग कर दूँगा।"
- महत्व: यह उक्ति दृढ़ संकल्प, अटूट निश्चय और लक्ष्य प्राप्ति के प्रति पूर्ण समर्पण को दर्शाती है। यह किसी भी महान कार्य को सिद्ध करने वाले व्यक्ति की प्रतिज्ञा होती है। यद्यपि यह उक्ति महाभारत में भीष्म पितामह द्वारा कही गई है, तथापि प्रस्तुत पाठ में यह राम के उस अदम्य धैर्य और कर्तव्यनिष्ठा को परिलक्षित करती है जिसके कारण वे सीता के वियोग में भी अपने राजधर्म का पालन करते हैं, भले ही उन्हें कितना भी कष्ट क्यों न हो।
2. पाठ का स्रोत और लेखक:
- स्रोत: यह पाठ महाकवि भवभूति (Bhavabhuti) द्वारा रचित प्रसिद्ध संस्कृत नाटक 'उत्तररामचरितम्' (Uttararamacharitam) के तृतीय अंक 'छायाङ्क' (Chhayanka) से संकलित है।
- लेखक: महाकवि भवभूति।
- परिचय: भवभूति संस्कृत साहित्य के एक महान नाटककार हैं। वे करुण रस के प्रयोग के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। 'उत्तररामचरितम्' में उन्होंने राम के उत्तर जीवन और सीता के परित्याग के बाद की घटनाओं का वर्णन किया है।
3. पाठ की पृष्ठभूमि (उत्तररामचरितम् का तृतीय अंक - छायाङ्क):
- कथावस्तु: 'उत्तररामचरितम्' नाटक राम के राज्याभिषेक के बाद सीता के परित्याग और उसके बाद की घटनाओं पर आधारित है।
- तृतीय अंक (छायाङ्क): यह अंक नाटक का हृदय माना जाता है। इसमें राम, लक्ष्मण और आत्रेयी (एक तापसी) दण्डकारण्य में उन स्थानों का भ्रमण करते हैं जहाँ राम ने सीता के साथ अपने वनवास का समय बिताया था।
- सीता की अदृश्य उपस्थिति: इस अंक की विशेषता यह है कि सीता यहाँ अदृश्य रूप में (छाया के रूप में), तमसा नदी की देवी के साथ उपस्थित होती हैं। वे राम के दुःख को देखती हैं और उनकी पीड़ा को महसूस करती हैं। सीता का स्पर्श राम को मूर्च्छा से बचाता है और उन्हें सांत्वना देता है, यद्यपि राम उन्हें देख नहीं पाते।
- राम की मनोदशा: राम सीता के वियोग में अत्यंत दुःखी और व्याकुल हैं। वे उन पुरानी स्मृतियों को याद करके विलाप करते हैं जो उन्होंने सीता के साथ दण्डकारण्य में बिताई थीं। उनका हृदय करुणा और शोक से भरा हुआ है।
4. प्रमुख पात्र:
- राम (Rama): मुख्य नायक, सीता के वियोग में अत्यंत दुःखी, कर्तव्यनिष्ठ।
- सीता (Sita): अदृश्य रूप में उपस्थित, राम के दुःख को महसूस करती हैं, अपनी उपस्थिति से राम को सांत्वना देती हैं।
- लक्ष्मण (Lakshmana): राम के अनुज, उन्हें सांत्वना देने का प्रयास करते हैं।
- तमसा (Tamasa): तमसा नदी की अधिष्ठात्री देवी, सीता की सखी, सीता को अदृश्य रूप में राम के पास लाती हैं।
- मुरला (Murala): मुरला नदी की अधिष्ठात्री देवी, तमसा की सखी, जो सीता और राम की वर्तमान स्थिति का वर्णन करती हैं।
- आत्रेयी (Atreyi): एक तापसी/शिष्या, जो घटनाओं की साक्षी बनती है और टिप्पणी करती है।
5. पाठ का सारांश:
- पाठ का आरंभ मुरला और तमसा के वार्तालाप से होता है। मुरला तमसा को बताती है कि सीता को वाल्मीकि आश्रम में प्रसव पीड़ा हुई और उन्होंने दो पुत्रों (लव-कुश) को जन्म दिया। पृथ्वी में प्रवेश करने से पहले, सीता ने अपने दुःख को कम करने के लिए तमसा के साथ दण्डकारण्य में राम के पास आने का निश्चय किया है।
- राम, लक्ष्मण के साथ दण्डकारण्य में आते हैं, जहाँ उन्होंने सीता के साथ सुखपूर्वक समय बिताया था। वे पंचवटी, जनस्थान, गोदावरी नदी के तट आदि स्थानों को देखकर सीता की स्मृतियों में खो जाते हैं और अत्यंत विलाप करते हैं।
- राम सीता के गुणों का वर्णन करते हैं, उनके प्रेम की गहराई को व्यक्त करते हैं। वे कहते हैं कि सीता का स्पर्श उनके लिए संजीवनी बूटी के समान है।
- अदृश्य सीता राम के दुःख को देखकर स्वयं भी दुःखी होती हैं और उन्हें स्पर्श करती हैं। इस स्पर्श से राम को क्षणिक शांति मिलती है, लेकिन वे सीता को देख न पाने के कारण और अधिक व्याकुल हो जाते हैं।
- राम का विलाप और सीता के प्रति उनका अगाध प्रेम ही इस अंक का मुख्य विषय है। वे अपने कर्तव्य और व्यक्तिगत पीड़ा के द्वंद्व में फंसे हुए हैं।
6. प्रमुख विषय एवं साहित्यिक विशेषताएँ:
- करुण रस की प्रधानता: भवभूति करुण रस के सम्राट माने जाते हैं। इस पूरे अंक में राम का विलाप, सीता का अदृश्य दुःख और वियोग की पीड़ा करुण रस की पराकाष्ठा को दर्शाती है।
- प्रेम की पराकाष्ठा: राम और सीता का प्रेम अलौकिक और अद्वितीय है। सीता के परित्याग के बाद भी राम का प्रेम तनिक भी कम नहीं होता, बल्कि वियोग में और अधिक प्रगाढ़ हो जाता है।
- कर्तव्यनिष्ठा और राजधर्म: राम अपने राजधर्म का पालन करते हुए सीता का परित्याग करते हैं, लेकिन उनका हृदय इस निर्णय से टूट जाता है। यह कर्तव्य और व्यक्तिगत भावना के बीच के संघर्ष को दर्शाता है।
- प्रकृति चित्रण: दण्डकारण्य, गोदावरी नदी, पंचवटी आदि का वर्णन राम की मनोदशा के अनुरूप किया गया है, जो उनके दुःख को और अधिक गहरा करता है।
- अदृश्य पात्र योजना (छाया): सीता का अदृश्य रूप में उपस्थित होना नाटक की एक अनूठी और प्रभावी नाट्य-युक्ति है, जो दर्शकों को राम की पीड़ा से और अधिक जोड़ती है।
- दार्शनिक गहराई: पाठ में प्रेम, दुःख, कर्तव्य और जीवन के अनुभवों पर गहन दार्शनिक विचार प्रस्तुत किए गए हैं।
- महत्वपूर्ण श्लोक/पंक्तियाँ:
- "अद्वैतं सुखदुःखयोरनुगतं सर्वास्ववस्थासु यत्" (जो सुख-दुःख में एक समान रहता है और सभी अवस्थाओं में साथ रहता है, वही सच्चा प्रेम है।)
- "तस्याः स्पर्शो हि बहुशः शरीरं मे संजीवनौषधमिव करोति।" (उसका (सीता का) स्पर्श मेरे शरीर को बार-बार संजीवनी औषधि के समान कर देता है।)
- "एको रसः करुण एव निमित्तभेदात्" (एक ही रस करुण है, जो कारणों के भेद से भिन्न-भिन्न रूपों में प्रकट होता है।) - भवभूति का प्रसिद्ध कथन।
- महत्वपूर्ण श्लोक/पंक्तियाँ:
7. परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण बिंदु:
- पाठ का शीर्षक, उसका अर्थ और महत्व।
- लेखक (भवभूति) और उनके नाटक (उत्तररामचरितम्) का नाम।
- तृतीय अंक का नाम 'छायाङ्क' क्यों पड़ा।
- प्रमुख पात्रों के नाम और उनकी भूमिका।
- करुण रस की प्रधानता और भवभूति का इस रस में योगदान।
- राम-सीता के प्रेम की विशिष्टता।
- पाठ में वर्णित प्रमुख स्थानों के नाम (दण्डकारण्य, पंचवटी, जनस्थान, गोदावरी)।
- सीता की अदृश्य उपस्थिति का नाट्य महत्व।
- महत्वपूर्ण श्लोकों का अर्थ और उनका संदर्भ।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
यहाँ पाठ पर आधारित 10 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं:
1. 'कार्यं वा साधयेयं देहं वा पातयेयम्' यह उक्ति किस भाव को प्रकट करती है?
A) आलस्य
B) दृढ़ संकल्प
C) भय
D) निराशा
उत्तर: B) दृढ़ संकल्प
2. प्रस्तुत पाठ 'कार्यं वा साधयेयं देहं वा पातयेयम्' किस ग्रंथ से संकलित है?
A) रामायणम्
B) महाभारतम्
C) उत्तररामचरितम्
D) अभिज्ञानशाकुन्तलम्
उत्तर: C) उत्तररामचरितम्
3. 'उत्तररामचरितम्' के रचयिता कौन हैं?
A) कालिदास
B) भवभूति
C) व्यास
D) वाल्मीकि
उत्तर: B) भवभूति
4. 'उत्तररामचरितम्' के जिस अंक से यह पाठ लिया गया है, उसका नाम क्या है?
A) प्रथम अंक
B) द्वितीय अंक
C) तृतीय अंक (छायाङ्क)
D) सप्तम अंक
उत्तर: C) तृतीय अंक (छायाङ्क)
5. प्रस्तुत पाठ में सीता किस रूप में राम के समक्ष उपस्थित होती हैं?
A) प्रत्यक्ष रूप में
B) स्वप्न में
C) अदृश्य रूप में (छाया के रूप में)
D) चित्र के रूप में
उत्तर: C) अदृश्य रूप में (छाया के रूप में)
6. राम के विलाप के समय उन्हें सांत्वना देने का प्रयास कौन कर रहा है?
A) सीता
B) लक्ष्मण
C) तमसा
D) मुरला
उत्तर: B) लक्ष्मण
7. "तस्याः स्पर्शो हि बहुशः शरीरं मे संजीवनौषधमिव करोति।" यह कथन किसके स्पर्श के विषय में है?
A) लक्ष्मण के
B) तमसा के
C) सीता के
D) मुरला के
उत्तर: C) सीता के
8. भवभूति किस रस के प्रयोग के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं?
A) शृंगार रस
B) वीर रस
C) करुण रस
D) हास्य रस
उत्तर: C) करुण रस
9. मुरला और तमसा कौन हैं?
A) दो तापसियाँ
B) दो नदियाँ (नदी देवियाँ)
C) दो राक्षसियाँ
D) दो रानियाँ
उत्तर: B) दो नदियाँ (नदी देवियाँ)
10. राम किस वन में सीता के साथ बिताए समय को याद करके विलाप कर रहे हैं?
A) पंचवटी
B) दण्डकारण्य
C) किष्किन्धा
D) अशोक वाटिका
उत्तर: B) दण्डकारण्य (पंचवटी दण्डकारण्य का ही एक भाग है, पर दण्डकारण्य अधिक व्यापक उत्तर है)
मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी परीक्षा की तैयारी में सहायक सिद्ध होंगे। मन लगाकर अध्ययन करें और अपनी शंकाओं को पूछने में संकोच न करें। शुभकामनाएँ!