Class 12 Sociology Notes Chapter 3 (भारतीय लोकतंत्र की कहानियाँ) – Bharat me Samajik Parivartan aur Vikas Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम कक्षा 12 समाजशास्त्र की पुस्तक 'भारत में सामाजिक परिवर्तन और विकास' के अध्याय 3 'भारतीय लोकतंत्र की कहानियाँ' का विस्तृत अध्ययन करेंगे, जो आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अध्याय में हम भारतीय लोकतंत्र की यात्रा, उसकी स्थापना, चुनौतियाँ और उपलब्धियों को गहराई से समझेंगे।
अध्याय 3: भारतीय लोकतंत्र की कहानियाँ
परिचय:
भारतीय लोकतंत्र विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जिसकी स्थापना एक जटिल और चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया थी। यह अध्याय भारत के लोकतांत्रिक अनुभव को विभिन्न सामाजिक समूहों के दृष्टिकोण से प्रस्तुत करता है, जिसमें दलित, आदिवासी, महिलाएँ और अन्य हाशिए पर पड़े समुदाय शामिल हैं। यह हमें बताता है कि कैसे लोकतंत्र केवल राजनीतिक संस्थाओं का समूह नहीं, बल्कि एक गतिशील प्रक्रिया है जो समाज के विभिन्न वर्गों को सशक्त करती है।
1. लोकतंत्र का अर्थ और भारत में इसकी स्थापना:
- लोकतंत्र की परिभाषा: लोकतंत्र एक ऐसी शासन प्रणाली है जहाँ जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि शासन करते हैं। यह समानता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुत्व के सिद्धांतों पर आधारित है।
- भारत में लोकतंत्र की स्थापना का संदर्भ: भारत ने ब्रिटिश उपनिवेशवाद से मुक्ति के बाद, विभाजन की त्रासदी और गरीबी, निरक्षरता जैसी गंभीर चुनौतियों के बावजूद लोकतांत्रिक शासन प्रणाली को अपनाया। यह एक साहसिक निर्णय था, क्योंकि उस समय कई नव-स्वतंत्र देशों ने तानाशाही या एकदलीय शासन को चुना था।
- संविधान सभा और संविधान निर्माण:
- संविधान सभा का गठन 1946 में हुआ।
- संविधान 26 नवंबर 1949 को बनकर तैयार हुआ और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ।
- प्रमुख सिद्धांत: संविधान ने सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार, धर्मनिरपेक्षता, सामाजिक न्याय, संघीय ढाँचा और मौलिक अधिकारों व कर्तव्यों को सुनिश्चित किया।
2. चुनाव और चुनावी प्रक्रिया: लोकतंत्र की नींव
- सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार: भारत ने स्वतंत्रता के तुरंत बाद ही बिना किसी भेदभाव (जाति, धर्म, लिंग, शिक्षा या संपत्ति) के सभी वयस्क नागरिकों को मतदान का अधिकार दिया। यह उस समय विश्व के कई विकसित देशों के लिए भी एक क्रांतिकारी कदम था।
- भारत निर्वाचन आयोग का गठन: निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित करने के लिए 25 जनवरी 1950 को भारत निर्वाचन आयोग की स्थापना की गई।
- पहले आम चुनाव (1951-52):
- यह विश्व के इतिहास में सबसे बड़ा लोकतांत्रिक प्रयोग था।
- करीब 17.3 करोड़ मतदाता थे, जिनमें से लगभग 85% निरक्षर थे।
- 2,24,000 मतदान केंद्र स्थापित किए गए।
- मतदान प्रतिशत लगभग 45% था।
- इस चुनाव ने भारत में लोकतंत्र की जड़ों को गहरा किया और यह साबित किया कि एक गरीब और निरक्षर देश भी सफलतापूर्वक चुनाव करा सकता है।
3. पंचायती राज व्यवस्था: लोकतंत्र का विकेंद्रीकरण
- पृष्ठभूमि: महात्मा गांधी ग्राम स्वराज के प्रबल समर्थक थे। संविधान के अनुच्छेद 40 में ग्राम पंचायतों के गठन का प्रावधान था (राज्य के नीति निदेशक तत्व)।
- 73वाँ और 74वाँ संविधान संशोधन (1992):
- इन संशोधनों ने पंचायती राज संस्थाओं (ग्रामीण) और नगरपालिकाओं (शहरी) को संवैधानिक दर्जा दिया।
- प्रमुख प्रावधान:
- नियमित चुनाव अनिवार्य।
- महिलाओं के लिए कम से कम एक-तिहाई सीटों का आरक्षण।
- अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए जनसंख्या के अनुपात में सीटों का आरक्षण।
- राज्य वित्त आयोग का गठन।
- राज्य चुनाव आयोग का गठन।
- महत्व: इसने स्थानीय स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत किया, निर्णय लेने की प्रक्रिया में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाई और हाशिए पर पड़े समुदायों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रदान किया।
4. दलितों और आदिवासियों के लिए आरक्षण: सामाजिक न्याय की दिशा में
- उद्देश्य: भारतीय संविधान ने दलितों (अनुसूचित जाति) और आदिवासियों (अनुसूचित जनजाति) के ऐतिहासिक उत्पीड़न और सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए विशेष प्रावधान किए।
- प्रावधान:
- सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण।
- संसद और राज्य विधानसभाओं में सीटों का आरक्षण।
- यह आरक्षण सकारात्मक भेदभाव (Affirmative Action) का एक रूप है, जिसका उद्देश्य समान अवसर प्रदान करना और सामाजिक असमानता को कम करना है।
- पंचायती राज संस्थाओं में भी आरक्षण लागू है।
5. नागरिक समाज और लोकतंत्र में उसकी भूमिका
- नागरिक समाज: यह व्यक्तियों, संगठनों और आंदोलनों का एक समूह है जो राज्य और बाजार से बाहर काम करता है। इसमें गैर-सरकारी संगठन (NGOs), दबाव समूह, सामाजिक आंदोलन, मीडिया आदि शामिल हैं।
- भूमिका:
- जनता की आवाज को सरकार तक पहुँचाना।
- सरकारी नीतियों पर निगरानी रखना और जवाबदेही तय करना।
- सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों की वकालत करना।
- जन जागरूकता फैलाना और शिक्षा प्रदान करना।
- उदाहरण: चिपको आंदोलन, नर्मदा बचाओ आंदोलन, सूचना का अधिकार (RTI) आंदोलन, महिला आंदोलन, दलित आंदोलन। ये आंदोलन लोकतंत्र को और अधिक समावेशी और प्रतिक्रियाशील बनाने में महत्वपूर्ण रहे हैं।
6. लोकतंत्र के समक्ष चुनौतियाँ:
- निरक्षरता और गरीबी: ये नागरिकों को अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक होने से रोकते हैं।
- सांप्रदायिकता और क्षेत्रवाद: ये राष्ट्रीय एकता को कमजोर करते हैं और सामाजिक सद्भाव को भंग करते हैं।
- जातिवाद: भारतीय समाज में जातिगत भेदभाव अभी भी एक बड़ी चुनौती है, जो सामाजिक न्याय और समानता के मार्ग में बाधा डालता है।
- भ्रष्टाचार: यह शासन की गुणवत्ता को प्रभावित करता है और जनता के विश्वास को कम करता है।
- राजनीति का अपराधीकरण: राजनीति में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की बढ़ती भागीदारी।
- हिंसा और आतंकवाद: ये लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को बाधित करते हैं और भय का माहौल पैदा करते हैं।
- लैंगिक असमानता: महिलाओं की भागीदारी और सशक्तिकरण में अभी भी चुनौतियाँ हैं।
7. लोकतंत्र की उपलब्धियाँ और भविष्य की दिशा:
- उपलब्धियाँ:
- नियमित और स्वतंत्र चुनाव।
- सत्ता का शांतिपूर्ण हस्तांतरण।
- सामाजिक न्याय के लिए संवैधानिक प्रावधान।
- विकेंद्रीकरण के माध्यम से स्थानीय स्वशासन को मजबूत करना।
- नागरिक समाज की सक्रिय भूमिका।
- विभिन्न सामाजिक समूहों को आवाज और प्रतिनिधित्व प्रदान करना।
- भविष्य की दिशा:
- इन चुनौतियों का समाधान करके लोकतंत्र को और अधिक मजबूत, समावेशी और सहभागी बनाना।
- शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक अवसरों तक समान पहुँच सुनिश्चित करना।
- नागरिकों को अधिक सशक्त बनाना और उनकी भागीदारी को प्रोत्साहित करना।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
1. भारतीय संविधान कब लागू हुआ?
a) 26 नवंबर 1949
b) 15 अगस्त 1947
c) 26 जनवरी 1950
d) 1 जनवरी 1950
2. भारत निर्वाचन आयोग की स्थापना कब हुई थी?
a) 26 जनवरी 1950
b) 25 जनवरी 1950
c) 15 अगस्त 1947
d) 26 नवंबर 1949
3. पहले आम चुनाव (1951-52) में भारत में मतदाताओं की अनुमानित संख्या कितनी थी?
a) लगभग 10 करोड़
b) लगभग 17.3 करोड़
c) लगभग 20 करोड़
d) लगभग 5 करोड़
4. पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा किस संविधान संशोधन के तहत मिला?
a) 42वें संशोधन
b) 44वें संशोधन
c) 73वें और 74वें संशोधन
d) 86वें संशोधन
5. 73वें संविधान संशोधन के तहत महिलाओं के लिए पंचायती राज संस्थाओं में कितनी सीटों का आरक्षण अनिवार्य किया गया है?
a) एक-चौथाई
b) एक-तिहाई
c) आधा
d) दो-तिहाई
6. निम्नलिखित में से कौन-सा एक नागरिक समाज आंदोलन का उदाहरण नहीं है?
a) चिपको आंदोलन
b) नर्मदा बचाओ आंदोलन
c) सूचना का अधिकार (RTI) आंदोलन
d) भारत छोड़ो आंदोलन
7. भारतीय लोकतंत्र के समक्ष निम्नलिखित में से कौन-सी एक प्रमुख चुनौती नहीं है?
a) निरक्षरता
b) गरीबी
c) सांप्रदायिकता
d) सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार
8. संविधान के किस अनुच्छेद में ग्राम पंचायतों के गठन का प्रावधान है (राज्य के नीति निदेशक तत्वों के अंतर्गत)?
a) अनुच्छेद 32
b) अनुच्छेद 40
c) अनुच्छेद 51
d) अनुच्छेद 21
9. भारत में पहले आम चुनाव में मतदान प्रतिशत लगभग कितना था?
a) 60%
b) 75%
c) 45%
d) 50%
10. "सकारात्मक भेदभाव" (Affirmative Action) का संबंध किससे है?
a) केवल महिलाओं के लिए आरक्षण
b) दलितों और आदिवासियों के लिए आरक्षण
c) केवल आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण
d) केवल राजनीतिक पदों के लिए आरक्षण
उत्तरमाला:
- c) 26 जनवरी 1950
- b) 25 जनवरी 1950
- b) लगभग 17.3 करोड़
- c) 73वें और 74वें संशोधन
- b) एक-तिहाई
- d) भारत छोड़ो आंदोलन
- d) सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार
- b) अनुच्छेद 40
- c) 45%
- b) दलितों और आदिवासियों के लिए आरक्षण
मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको अध्याय को गहराई से समझने और आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होंगे। अपनी पढ़ाई जारी रखें और किसी भी संदेह के लिए पूछने में संकोच न करें। शुभकामनाएँ!