Class 12 Sociology Notes Chapter 6 (भूमंडलीकरण और सामाजिक परिवर्तन) – Bharat me Samajik Parivartan aur Vikas Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम कक्षा 12 समाजशास्त्र की पुस्तक 'भारत में सामाजिक परिवर्तन और विकास' के अध्याय 6 'भूमंडलीकरण और सामाजिक परिवर्तन' का गहन अध्ययन करेंगे। यह अध्याय सरकारी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह समकालीन भारतीय समाज की एक प्रमुख विशेषता को उजागर करता है।
अध्याय 6: भूमंडलीकरण और सामाजिक परिवर्तन
I. परिचय
भूमंडलीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसने विश्व को एक 'वैश्विक गाँव' में बदल दिया है। यह केवल आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक, सांस्कृतिक और तकनीकी आयामों को भी समाहित करती है। भारत ने 1991 में आर्थिक सुधारों के माध्यम से भूमंडलीकरण को अपनाया, जिसके बाद देश के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिदृश्य में व्यापक परिवर्तन आए।
II. भूमंडलीकरण क्या है?
भूमंडलीकरण एक बहुआयामी प्रक्रिया है जो विश्व के विभिन्न भागों के बीच वस्तुओं, सेवाओं, पूंजी, विचारों और लोगों के प्रवाह को बढ़ाती है, जिससे देशों के बीच परस्पर निर्भरता बढ़ती है।
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ऐतिहासिक संदर्भ:
- यद्यपि भूमंडलीकरण की जड़ें उपनिवेशवाद में देखी जा सकती हैं, आधुनिक भूमंडलीकरण की गति शीत युद्ध की समाप्ति (1990 के दशक की शुरुआत) और सूचना प्रौद्योगिकी के विकास के साथ बढ़ी।
- भारत के संदर्भ में, 1991 के आर्थिक सुधारों (नई आर्थिक नीति) को भूमंडलीकरण की शुरुआत माना जाता है।
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भूमंडलीकरण के मुख्य आयाम:
- आर्थिक भूमंडलीकरण:
- अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में वृद्धि, टैरिफ (आयात शुल्क) में कमी।
- प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और विदेशी संस्थागत निवेश (FII) का बढ़ना।
- बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) का विस्तार।
- अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय बाजारों का एकीकरण।
- विश्व व्यापार संगठन (WTO), अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं की भूमिका में वृद्धि।
- आउटसोर्सिंग (Outsourcing) और ऑफशोरिंग (Offshoring) का प्रचलन।
- राजनीतिक भूमंडलीकरण:
- राष्ट्र-राज्य की संप्रभुता पर प्रभाव – अंतर्राष्ट्रीय संधियाँ, संगठन और कानून राष्ट्रों के निर्णयों को प्रभावित करते हैं।
- अंतर्राष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और नागरिक समाज संगठनों की भूमिका में वृद्धि।
- अंतर्राष्ट्रीय शासन (Global Governance) की अवधारणा का उदय।
- सांस्कृतिक भूमंडलीकरण:
- विचारों, मूल्यों और जीवन शैली का आदान-प्रदान।
- पश्चिमीकरण (Westernization) और मैकडॉनल्डीकरण (McDonaldization) जैसी अवधारणाएँ।
- संकर संस्कृति (Hybrid Culture) का उदय – स्थानीय और वैश्विक संस्कृतियों का मिश्रण।
- स्थानीय संस्कृतियों पर प्रभाव – कुछ का क्षरण, कुछ का पुनरुत्थान।
- तकनीकी भूमंडलीकरण:
- सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) का तीव्र विकास – इंटरनेट, मोबाइल फोन, सोशल मीडिया।
- परिवहन के साधनों में सुधार, जिससे लोगों और वस्तुओं की आवाजाही आसान हुई।
- ज्ञान और सूचना का त्वरित प्रसार।
- आर्थिक भूमंडलीकरण:
III. भारत में भूमंडलीकरण (1991 के आर्थिक सुधार)
भारत ने 1991 में एक गंभीर भुगतान संतुलन संकट का सामना किया, जिसके कारण विदेशी मुद्रा भंडार लगभग समाप्त हो गया था। इस संकट से उबरने और आर्थिक विकास को गति देने के लिए, भारत सरकार ने नई आर्थिक नीति (New Economic Policy - NEP) लागू की, जिसे अक्सर उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (LPG) मॉडल के रूप में जाना जाता है।
- उदारीकरण (Liberalisation): आर्थिक गतिविधियों पर सरकारी नियंत्रण और प्रतिबंधों में कमी, लाइसेंस राज की समाप्ति।
- निजीकरण (Privatisation): सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में सरकारी हिस्सेदारी बेचना और उन्हें निजी क्षेत्र के लिए खोलना।
- वैश्वीकरण (Globalization): भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व अर्थव्यवस्था के साथ एकीकृत करना, आयात-निर्यात को सुगम बनाना, विदेशी निवेश को आकर्षित करना।
IV. भूमंडलीकरण के प्रभाव (सकारात्मक और नकारात्मक)
भूमंडलीकरण ने भारतीय समाज पर व्यापक और विविध प्रभाव डाले हैं:
A. सकारात्मक प्रभाव:
- आर्थिक विकास: उच्च जीडीपी वृद्धि दर, विदेशी निवेश में वृद्धि।
- रोजगार के अवसर: सूचना प्रौद्योगिकी (IT), व्यापार प्रक्रिया आउटसोर्सिंग (BPO), सेवा क्षेत्र और अन्य उद्योगों में नए रोजगार सृजित हुए।
- उपभोक्तावाद और विकल्प: बाजार में उत्पादों और सेवाओं की विविधता बढ़ी, उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता और कम कीमतों पर वस्तुएँ उपलब्ध हुईं।
- तकनीकी उन्नयन: आधुनिक तकनीकों तक पहुँच बढ़ी, जिससे नवाचार और उत्पादकता में वृद्धि हुई।
- गरीबी में कमी: आर्थिक विकास के कारण एक बड़े वर्ग की आय में वृद्धि हुई, जिससे गरीबी के स्तर में कुछ कमी आई।
- महिलाओं की स्थिति में सुधार: सेवा क्षेत्र में महिलाओं के लिए नए रोजगार के अवसर खुले, जिससे उनकी आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक स्थिति में सुधार हुआ।
- प्रवासी भारतीयों की भूमिका: प्रवासी भारतीयों ने देश में निवेश और ज्ञान हस्तांतरण के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- बुनियादी ढाँचा विकास: विदेशी निवेश ने सड़क, बंदरगाह, हवाई अड्डे जैसे बुनियादी ढाँचे के विकास में योगदान दिया।
B. नकारात्मक प्रभाव / चुनौतियाँ:
- असमानता में वृद्धि:
- आय असमानता: भूमंडलीकरण के लाभ सभी वर्गों तक समान रूप से नहीं पहुँचे, जिससे अमीर और गरीब के बीच खाई बढ़ी।
- क्षेत्रीय असमानता: कुछ क्षेत्र (जैसे शहरी, IT हब) तेजी से विकसित हुए, जबकि अन्य (जैसे ग्रामीण, कृषि प्रधान) पिछड़ गए।
- गैर-औपचारिक क्षेत्र का विस्तार: भूमंडलीकरण ने लचीले श्रम कानूनों को बढ़ावा दिया, जिससे ठेका प्रथा और अनौपचारिक रोजगार में वृद्धि हुई, जहाँ श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा और उचित वेतन का अभाव होता है।
- कृषि पर प्रभाव:
- अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से प्रतिस्पर्धा ने छोटे और सीमांत किसानों पर दबाव बढ़ाया।
- रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से पर्यावरणीय समस्याएँ बढ़ीं।
- कृषि संकट और किसान आत्महत्याएँ एक गंभीर सामाजिक समस्या बन गईं।
- पर्यावरण पर प्रभाव:
- औद्योगीकरण और उपभोक्तावाद के बढ़ने से प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन और प्रदूषण बढ़ा।
- जलवायु परिवर्तन और पारिस्थितिक असंतुलन की समस्याएँ गंभीर हुईं।
- सांस्कृतिक पहचान का क्षरण:
- पश्चिमी जीवन शैली और मूल्यों का प्रभाव बढ़ा, जिससे स्थानीय भाषाओं, परंपराओं और कला रूपों के कमजोर पड़ने की आशंका उत्पन्न हुई।
- उपभोक्तावादी संस्कृति का प्रसार।
- राष्ट्र-राज्य की संप्रभुता पर प्रभाव: अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं और बहुराष्ट्रीय कंपनियों का प्रभाव बढ़ा, जिससे राष्ट्रीय सरकारों की नीति-निर्माण क्षमता प्रभावित हुई।
- श्रम बाजार पर प्रभाव: श्रम कानूनों में ढील और प्रतिस्पर्धा के कारण श्रमिकों के सौदेबाजी की शक्ति कमजोर हुई।
- सामाजिक सुरक्षा का अभाव: कल्याणकारी राज्य की अवधारणा कमजोर पड़ी, और सामाजिक सुरक्षा जाल सिकुड़ गया।
- महिलाओं पर दोहरा बोझ: यद्यपि महिलाओं को रोजगार के अवसर मिले, लेकिन अक्सर उन्हें घर और बाहर दोनों जगह काम करने का दोहरा बोझ उठाना पड़ता है।
V. भूमंडलीकरण और सामाजिक परिवर्तन के विभिन्न आयाम
- जनजातीय समुदाय: भूमंडलीकरण के कारण बड़े पैमाने पर विकास परियोजनाओं (खनन, बाँध) का विस्तार हुआ, जिससे जनजातीय समुदायों का विस्थापन हुआ, उनके पारंपरिक संसाधनों पर नियंत्रण कम हुआ और उनकी पहचान का संकट गहराया।
- ग्रामीण समुदाय: कृषि संकट, पलायन, और शहरीकरण के प्रभाव से ग्रामीण सामाजिक संरचना में बदलाव आया।
- शहरी समुदाय: शहरों में बुनियादी ढाँचे पर दबाव बढ़ा, स्लम (झुग्गी-झोपड़ी) का विकास हुआ, और जीवनशैली में तेजी से बदलाव आए।
- जाति और वर्ग: जातिगत पहचान का महत्व कुछ हद तक कम हुआ (विशेषकर शहरी क्षेत्रों में), लेकिन वर्ग आधारित असमानताएँ बढ़ीं। भूमंडलीकरण ने एक 'नया मध्य वर्ग' भी तैयार किया।
- लिंग: महिलाओं के लिए नए अवसर खुले, लेकिन साथ ही कार्यस्थल पर शोषण और लैंगिक असमानता की चुनौतियाँ भी बनी रहीं।
- संस्कृति: पश्चिमीकरण के साथ-साथ, स्थानीय संस्कृतियों को बचाने और बढ़ावा देने के प्रयास भी हुए। संकर संस्कृति का प्रसार हुआ।
- मीडिया और संचार: सूचना का तीव्र प्रसार हुआ, जिससे जनमत निर्माण और नए पहचान समूहों का उदय हुआ।
VI. भूमंडलीकरण के विरोध में आंदोलन
भूमंडलीकरण के नकारात्मक प्रभावों, विशेषकर बढ़ती असमानता, पर्यावरणीय क्षति और श्रम अधिकारों के हनन के कारण दुनिया भर में भूमंडलीकरण विरोधी आंदोलन उभरे हैं। विश्व सामाजिक मंच (World Social Forum - WSF) एक ऐसा मंच है जहाँ भूमंडलीकरण के विकल्पों पर चर्चा की जाती है। इसका नारा है: "एक और दुनिया संभव है।"
VII. निष्कर्ष
भूमंडलीकरण एक जटिल और द्वंद्वात्मक प्रक्रिया है। इसने भारत को आर्थिक विकास और आधुनिकीकरण के अवसर प्रदान किए हैं, लेकिन साथ ही सामाजिक असमानता, सांस्कृतिक क्षरण और पर्यावरणीय चुनौतियों को भी जन्म दिया है। भारत जैसे विकासशील देश के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वह भूमंडलीकरण के लाभों को अधिकतम करे और इसके नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए समावेशी और सतत विकास नीतियों को अपनाए।
अभ्यास प्रश्न (MCQs)
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भारत में नई आर्थिक नीति (उदारीकरण, निजीकरण, वैश्वीकरण) किस वर्ष लागू की गई थी?
a) 1981
b) 1991
c) 2001
d) 1971 -
भूमंडलीकरण का कौन सा आयाम वस्तुओं, सेवाओं, पूंजी और विचारों के अंतर्राष्ट्रीय प्रवाह से संबंधित है?
a) राजनीतिक भूमंडलीकरण
b) सांस्कृतिक भूमंडलीकरण
c) आर्थिक भूमंडलीकरण
d) तकनीकी भूमंडलीकरण -
'मैकडॉनल्डीकरण' की अवधारणा भूमंडलीकरण के किस आयाम से संबंधित है?
a) आर्थिक
b) राजनीतिक
c) सांस्कृतिक
d) तकनीकी -
निम्नलिखित में से कौन-सा भूमंडलीकरण का एक सकारात्मक प्रभाव नहीं है?
a) रोजगार के अवसरों में वृद्धि
b) तकनीकी उन्नयन
c) आय असमानता में वृद्धि
d) उपभोक्ता उत्पादों की विविधता -
विश्व व्यापार संगठन (WTO), अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक जैसी संस्थाएँ भूमंडलीकरण के किस आयाम से जुड़ी हैं?
a) सांस्कृतिक
b) राजनीतिक
c) आर्थिक
d) सामाजिक -
'एक और दुनिया संभव है' (Another World Is Possible) किस मंच का नारा है?
a) विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum)
b) संयुक्त राष्ट्र (United Nations)
c) विश्व सामाजिक मंच (World Social Forum)
d) G-7 शिखर सम्मेलन -
भूमंडलीकरण के कारण भारत में किस क्षेत्र में रोजगार के अवसरों में महत्वपूर्ण वृद्धि देखी गई है?
a) कृषि क्षेत्र
b) विनिर्माण क्षेत्र
c) सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और सेवा क्षेत्र
d) खनन क्षेत्र -
1991 में भारत में आर्थिक सुधारों का मुख्य कारण क्या था?
a) अत्यधिक विदेशी निवेश
b) भुगतान संतुलन संकट और विदेशी मुद्रा भंडार में कमी
c) राजनीतिक अस्थिरता
d) कृषि उत्पादन में वृद्धि -
'संकर संस्कृति' (Hybrid Culture) से क्या तात्पर्य है?
a) केवल पश्चिमी संस्कृति का प्रसार
b) केवल स्थानीय संस्कृति का संरक्षण
c) स्थानीय और वैश्विक संस्कृतियों का मिश्रण
d) किसी भी संस्कृति का अभाव -
भूमंडलीकरण के संदर्भ में 'आउटसोर्सिंग' (Outsourcing) का क्या अर्थ है?
a) स्वदेशी उत्पादों का निर्माण
b) विदेशी कंपनियों द्वारा स्थानीय कंपनियों से सेवाएँ लेना
c) सरकारी कंपनियों का निजीकरण
d) कृषि उत्पादों का निर्यात
उत्तरमाला:
- b) 1991
- c) आर्थिक भूमंडलीकरण
- c) सांस्कृतिक
- c) आय असमानता में वृद्धि
- c) आर्थिक
- c) विश्व सामाजिक मंच (World Social Forum)
- c) सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और सेवा क्षेत्र
- b) भुगतान संतुलन संकट और विदेशी मुद्रा भंडार में कमी
- c) स्थानीय और वैश्विक संस्कृतियों का मिश्रण
- b) विदेशी कंपनियों द्वारा स्थानीय कंपनियों से सेवाएँ लेना
मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और अभ्यास प्रश्न आपको इस अध्याय को समझने और सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होंगे। अपनी पढ़ाई जारी रखें और किसी भी संदेह के लिए पूछने में संकोच न करें।